डिलीवरी के बाद कीगल एक्सरसाइज़: वो बात जो ज़्यादातर महिलाओं को कोई नहीं बताता (Kegel Exercises Explained in Hindi)

Last updated: August 07, 2026

Overview

क्लिनिक में ये शिकायत बार-बार सुनने को मिलती है - "मैं तो सालों से कीगल कर रही हूँ, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।"

और जाँच करने पर अक्सर वजह एक ही निकलती है। वो एक्सरसाइज़ हो ही नहीं रही थी। जो मांसपेशी सिकोड़नी थी, वो सिकुड़ ही नहीं रही थी - पेट, जाँघ या कूल्हे की मांसपेशियाँ ज़ोर लगा रही थीं।

ये कोई छोटी बात नहीं है। StatPearls (NIH) में दर्ज एक अध्ययन के मुताबिक़ क़रीब 30 प्रतिशत महिलाएँ पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों को सही तरीक़े से सिकोड़ ही नहीं पातीं।

यानी हर तीन में से एक महिला जो मेहनत कर रही है, उसका नतीजा नहीं मिल रहा - सिर्फ़ तकनीक की वजह से।

तो ये लेख "कीगल कैसे करें" से ज़्यादा इस बारे में है कि कीगल सही हो रही है या नहीं, ये कैसे पहचानें।

पहले ये समझिए कि पेल्विक फ़्लोर है क्या

इसे एक झूले की तरह सोचिए।

आपके पेल्विस की हड्डियों के बीच मांसपेशियों की एक चादर तनी होती है - आगे से पीछे तक, झूले की तरह। इसी झूले पर ब्लैडर, गर्भाशय और आँतों का निचला हिस्सा टिका होता है।

झूला कसा हुआ हो तो सब कुछ अपनी जगह रहता है। रस्सियाँ ढीली पड़ जाएँ तो चीज़ें नीचे की ओर खिसकने लगती हैं, और ज़ोर पड़ने पर - खाँसी, छींक, हँसी, वज़न उठाना - कंट्रोल छूटने लगता है।

कीगल एक्सरसाइज़ इसी झूले की रस्सियाँ कसने का काम करती हैं। इन्हें मेडिकल भाषा में पेल्विक फ़्लोर मसल ट्रेनिंग (PFMT) कहा जाता है।

किन्हें इनकी ज़रूरत पड़ती है

  • खाँसने, छींकने, हँसने या दौड़ने पर पेशाब की कुछ बूँदें निकल जाना
  • अचानक बहुत तेज़ पेशाब का दबाव, जिसे रोकना मुश्किल हो
  • डिलीवरी के बाद नीचे की तरफ़ भारीपन या कुछ खिसकने जैसा एहसास
  • गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद, बचाव के तौर पर
  • उम्र बढ़ने के साथ, ख़ासकर मेनोपॉज़ के आसपास

एक और फ़ायदा जिसका ज़िक्र कम होता है - NIDDK के मुताबिक़ अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि पेल्विक फ़्लोर मसल ट्रेनिंग यौन क्रिया को भी बेहतर कर सकती है। ये बात भारत में शायद ही कोई खुलकर बताता है, जबकि बहुत सी महिलाओं के लिए यही सबसे बड़ी चिंता होती है।

सही मांसपेशी कैसे पहचानें

NIDDK कुछ आसान तरीक़े बताता है :

तरीक़ा 1 - कल्पना कीजिए कि आपको गैस रोकनी है। जो मांसपेशियाँ आप इसके लिए सिकोड़ेंगी, वही सही मांसपेशियाँ हैं। अगर योनि या मलद्वार के हिस्से में ऊपर की ओर खिंचाव जैसा महसूस हो, तो आप सही जगह पर हैं।

तरीक़ा 2 - योनि में उंगली डालकर ऐसे सिकोड़िए जैसे पेशाब रोक रही हों। अगर उंगली पर कसाव महसूस हो, तो मांसपेशी सही है।

अब वो बात जो सबसे ज़रूरी है - महसूस होना चाहिए कि कुछ ऊपर की ओर उठ रहा है, नीचे की ओर धकेला नहीं जा रहा। बहुत सी महिलाएँ अनजाने में ज़ोर लगाकर नीचे धकेलती हैं, जो बिल्कुल उल्टा असर करता है।

कीगल एक्सरसाइज़ में तीन ग़लतियाँ जो सबसे ज़्यादा होती हैं

ग़लती 1: पेशाब रोक-रोककर एक्सरसाइज़ करना

ये सलाह हर जगह मिलती है, और यही सबसे ख़तरनाक है।

NIDDK साफ़ कहता है कि पेशाब बीच में रोककर मांसपेशी पहचानना शुरू में एक बार ठीक है, लेकिन नियमित रूप से पेशाब करते वक़्त कीगल नहीं करनी चाहिए - ब्लैडर पूरा ख़ाली न होने से  यूरिन इन्फ़ेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है ।

अगर आप अब तक यही करती आई हैं, तो आज से बंद कर दीजिए। मांसपेशी एक बार पहचान ली, बस उतना काफ़ी है।

ग़लती 2: ग़लत मांसपेशी पर ज़ोर लगाना

ये सिर्फ़ बेअसर नहीं, नुक़सानदेह भी हो सकता है।

NIDDK के आधार पर तैयार मरीज़-सामग्री में साफ़ लिखा है कि शुरुआत में ज़्यादातर लोग पेट या जाँघ की मांसपेशियाँ सिकोड़ते हैं और पेल्विक फ़्लोर को भूल जाते हैं - और इससे पेल्विक फ़्लोर की स्थिति और लीकेज दोनों बिगड़ सकते हैं।

पहचानने का आसान तरीक़ा: कीगल करते वक़्त पेट पर हाथ रखिए। अगर पेट सख़्त हो रहा है, नितंब उठ रहे हैं, जाँघें कस रही हैं, या आप साँस रोक रही हैं - तो ग़लत मांसपेशी काम कर रही है।

सही कीगल बाहर से लगभग अदृश्य होती है। बगल में बैठा व्यक्ति बता नहीं पाएगा कि आप कुछ कर रही हैं।

ग़लती 3: सिर्फ़ कसना, छोड़ना नहीं

पेल्विक फ़्लोर की ट्रेनिंग सिर्फ़ ताक़त बढ़ाने की नहीं है। NICE की परिभाषा में इसमें ताक़त, सहनशक्ति, शक्ति और शिथिलता (relaxation) - सब शामिल हैं।

कुछ महिलाओं की पेल्विक फ़्लोर पहले से ही ज़रूरत से ज़्यादा तनी हुई होती है। ऐसे में और कसना दर्द और तकलीफ़ बढ़ाता है। इसीलिए हर सिकुड़न के बाद पूरी तरह ढीला छोड़ना उतना ही ज़रूरी है जितना कसना।

सही तरीक़ा और कितनी बार

NICE की गाइडलाइन में साफ़ निर्देश है - कम से कम 8 सिकुड़न, दिन में 3 बार।

तरीक़ा:

  1. ब्लैडर ख़ाली करके बैठ जाइए या लेट जाइए (शुरुआत में लेटकर करना आसान रहता है)
  2. पेल्विक फ़्लोर को ऊपर की ओर खींचिए - जैसे कुछ अंदर और ऊपर उठा रही हों
  3. कुछ सेकंड रोकिए, साँस सामान्य चलने दीजिए
  4. उतने ही समय के लिए पूरी तरह ढीला छोड़िए
  5. यही 8 बार दोहराइए, दिन में तीन बार

शुरुआत में अगर 3-4 सेकंड ही रुक पा रहा है, तो वही ठीक है। थकान महसूस होना अच्छा संकेत है - इसका मतलब सही मांसपेशी काम कर रही है। अगर पहले ही दिन बहुत देर तक आराम से रोक पा रही हैं, तो संभवतः ग़लत मांसपेशी सिकुड़ रही है।

प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद

यहाँ एक बहुत काम की जानकारी है जो ज़्यादातर हिंदी सामग्री में नहीं मिलती।

Cochrane की 2020 की समीक्षा, जिसमें 21 देशों के 46 ट्रायल और 10,832 प्रतिभागी शामिल थे, ये बताती है कि जिन गर्भवती महिलाओं को अभी लीकेज की समस्या नहीं है, उनके प्रेग्नेंसी के आख़िरी दौर में लीकेज शुरू होने का जोखिम पहले से पेल्विक फ़्लोर ट्रेनिंग करने पर काफ़ी कम हो जाता है।

यानी ये इलाज से ज़्यादा बचाव की चीज़ है।

इसी समीक्षा में ये भी दर्ज है कि डिलीवरी के बाद पहले तीन महीनों में क़रीब एक तिहाई महिलाओं को पेशाब लीक होने की समस्या होती है। इतनी आम बात, और फिर भी शर्म की वजह से ज़्यादातर महिलाएँ इसका ज़िक्र तक नहीं करतीं।

अगर आप प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं या अभी प्रेग्नेंट हैं - तो ये एक्सरसाइज़ अभी से शुरू करने की बात अपने डॉक्टर से कीजिए। डिलीवरी के बाद शुरू करने से बेहतर है पहले से तैयार रहना।

कितने दिन में फ़र्क़ दिखेगा

यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है - हफ़्ते-दो हफ़्ते में कुछ नहीं होगा।

NICE की सिफ़ारिश है कि स्ट्रेस या मिक्स्ड यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस के लिए कम से कम 3 महीने का सुपरवाइज़्ड प्रोग्राम पहले इलाज के तौर पर दिया जाना चाहिए।

जैसे जिम में पहले हफ़्ते से मांसपेशी नहीं बनती, वैसे ही ये भी समय माँगती है। तीन महीने न्यूनतम हैं, और फ़ायदा मिलने पर एक्सरसाइज़ जारी रखनी होती है - छोड़ते ही असर धीरे-धीरे लौट जाता है।

सबसे बड़ी बात: अकेले मत कीजिए

ये इस पूरे लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

NICE ने अपने गुणवत्ता मानक में एक बात बहुत साफ़ लिखी है - महिलाओं को अक्सर सिर्फ़ एक पर्चा थमा दिया जाता है और कोई अतिरिक्त सहायता नहीं मिलती। नतीजा ये होता है कि विशेषज्ञ के पास पहुँचने वाली कई महिलाएँ सालों से ग़लत तरीक़े से ये एक्सरसाइज़ करती आ रही होती हैं, बिना किसी सुधार के।

इसी वजह से NICE सुपरवाइज़्ड प्रोग्राम की सलाह देता है, जिसमें प्रशिक्षित फ़िज़ियोथेरेपिस्ट पहले ये जाँचते हैं कि आप सही ढंग से सिकोड़ और ढीला छोड़ पा रही हैं या नहीं, और फिर आपकी क्षमता के हिसाब से प्रोग्राम बनाते हैं।

NIDDK भी यही कहता है - अगर यक़ीन न हो कि सही हो रहा है, तो पेल्विक फ़्लोर फ़िज़िकल थेरेपिस्ट के पास भेजने के लिए अपने डॉक्टर से कहिए।

भारत में अब बड़े शहरों में पेल्विक फ़्लोर फ़िज़ियोथेरेपी उपलब्ध है। दो-तीन सेशन में भी सही तकनीक पकड़ में आ जाती है, और उसके बाद घर पर करना आसान हो जाता है।

कब शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए

NIDDK स्पष्ट रूप से कहता है कि कुछ स्थितियों में ये एक्सरसाइज़ ठीक विकल्प नहीं होतीं, इसलिए शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

ख़ास तौर पर तब पूछिए जब:

आख़िरी बिंदु ख़ास तौर पर ज़रूरी है - इसे टालिए मत। जितनी जल्दी जाँच होगी, इलाज उतना आसान रहेगा।

Frequently Asked Questions

क्या ये लेटकर ही करनी होती है?

दिन में कितनी बार से ज़्यादा नुक़सान होगा?

क्या बाज़ार में मिलने वाले कीगल बॉल या डिवाइस ज़रूरी हैं?

डिलीवरी के कितने दिन बाद शुरू कर सकते हैं?

सिज़ेरियन हुआ है, तब भी ज़रूरत है?

एक्सरसाइज़ करते वक़्त दर्द हो तो?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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