IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद सबसे जरुरी स्टेप होता है इम्प्लांटेशन, यानी एम्ब्रीओ का यूटरस की दीवार से चिपकना। लेकिन कई बार ऐसा पाया गया है कि एम्ब्रीओ के बाहर की परत यानी प्रोटेक्टिव लेयर इतनी सख्त होती है कि एम्ब्रीओ समय पर बाहर नहीं निकल पाता, और यहीं पर दिक्कत शुरू होती है।
लेज़र हैचिंग इसी समस्या को समझने और हल करने से जुड़ी टेक्नोलॉजी है। laser hatching in IVF in hindi आर्टिकल में समझेंगे कि क्या हर केस में इसकी ज़रूरत पड़ती है? और क्या लेज़र हटचिंग से सच में IVF सक्सेस रेट बढ़ जाता है?
हर एग और एम्ब्रीओ के चारों तरफ़ एक पतली परत यानी प्रोटेक्टिव लेयर होती है जिसे ज़ोना पेलुसिडा (zona pellucida) कहते हैं। शुरुआत में यही लेयर एम्ब्रीओ को सुरक्षित रखती है, लेकिन इम्प्लांटेशन के लिए एम्ब्रीओ को इस परत से बाहर निकलना होता है।
नैचुरल प्रेगनेंसी में जब एम्ब्रीओ ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) स्टेज तक पहुँचता है तो यह लेयर धीरे धीरे पतली होकर टूट जाती है। एम्ब्रीओ इस लेयर से बाहर आता है और यूट्रस की दीवार से जुड़ जाता है। इस पूरे प्रोसेस को हैचिंग कहते हैं।
समस्या तब आती है जब यह लेयर ज्यादा मोटी, सख्त, या अनियमित यानी कहीं मोटी कहीं पतली हो जाए। ऐसा महिला की बढ़ती उम्र, एम्ब्रीओ फ्रीज़िंग या लैब में ग्रोथ के दौरान हो सकता है।
ऐसी कंडीशन में एम्ब्रीओ इस लेयर को तोड़ कर बाहर नहीं निकल पाता, और इम्प्लांटेशन रुक जाता है, जिससे प्रेगनेंसी नहीं ठहरती।
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जब डॉक्टर को लगता है कि एम्ब्रीओ खुद से बाहर नहीं निकल पाएगा, तब लेज़र हैचिंग की जाती है। यह प्रोसेस एम्ब्रीओ ट्रांसफर से ठीक पहले किया जाता है, ताकि एम्ब्रीओ यूट्रस में पहुँचने के बाद आसानी से इम्प्लांट हो सके।
इसमें एम्ब्रियोलॉजिस्ट माइक्रोस्कोप की सहायता से एक बहुत बारीक लेज़र बीम का इस्तेमाल करता है। लेज़र से ज़ोना पेलुसिडा की बाहरी परत में एक छोटा सा छेड़ बना दिया जाता है। इससे एम्ब्रीओ को बाहर आने के लिए रास्ता मिल जाता है।
यह पूरा काम कुछ सेकंड में हो जाता है और बहुत ही बारीकी से किया जाता है। लेज़र इतनी सटीक होती है कि सिर्फ बाहरी परत पर असर डालती है, और एम्ब्रीओ की अंदर की सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
पहले यह काम केमिकल या मैकेनिकल तरीके से किया जाता था, लेकिन अब लेज़र सबसे सटीक और सुरक्षित तरीका माना जाता है, इसलिए ज्यादातर लैब्स में हैचिंग, लेज़र से ही की जाती है।
लेज़र हैचिंग हर IVF ट्रीटमेंट में ज़रूरी नहीं होती। Laser hatching in ivf in hindi में आगे जानिए कि डॉक्टर कौन सी स्पेशल कंडीशन ही में इसकी सलाह देते हैं।
महिला की बढ़ती उम्र के साथ ज़ोना पेलुसिडा मोटी और सख्त हो जाती है। 37 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में लेज़र हैचिंग से इम्प्लांटेशन के चांस बेहतर हो सकते हैं।
अगर दो या उससे ज़्यादा बार अच्छी क्वालिटी के एम्ब्रीओ ट्रांसफर करने के बावजूद प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो डॉक्टर लेज़र हैचिंग की सलाह दे सकते हैं।
जब एम्ब्रीओ को फ्रीज़ करके बाद में दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी बाहरी परत पहले से ज़्यादा सख्त हो सकती है। इससे एम्ब्रीओ के बाहर आने में दिक्कत आ सकती है।
माइक्रोस्कोप में कभी-कभी साफ दिखता है कि एम्ब्रीओ की बाहरी परत यानी प्रोटेक्टिव लेयर सामान्य से ज़्यादा मोटी है। ऐसी कंडीशन में एम्ब्रीओ को बाहर निकलने में मुश्किल हो सकती है।
अगर FSH यानी फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन का लेवल ज़्यादा है, तो यह ओवरी का रिज़र्व कम होने का लक्षण हो सकता है। ऐसे मामलों में एग और एम्ब्रीओ की क्वालिटी के साथ-साथ उनकी बाहरी लेयर पर भी असर पड़ सकता है।
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ऐसा देखा गया है कि कुछ केसों में लेज़र हैचिंग से इम्प्लांटेशन रेट में सुधार हो सकता है, लेकिन हर मरीज में इसका असर अलग होता है।
लेज़र हैचिंग वैसे तो बहुत सुरक्षित प्रोसीजर है, लेकिन कुछ बातें जानना जरूरी है।
लेज़र हैचिंग पूरी तरह लैब में होती है, इसलिए मरीज को इसमें कुछ अलग से करने की ज़रूरत नहीं होती। हैचिंग के बाद एम्ब्रीओ ट्रांसफर के लिए तैयार हो जाता है, और ट्रांसफर की प्रक्रिया वही रहती है जैसी बिना लेज़र हैचिंग वाले केस में होती है।
ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए ज्यादातर 10 से 14 दिन का इंतज़ार किया जाता है। इस दौरान जो भी दवाइयाँ चल रही होती हैं उन्हें जारी रखा जाता है। इसके बाद ब्लड टेस्ट करके बीटा hCG चेक किया जाता है, जिससे प्रेगनेंसी कन्फर्म होती है।
लेज़र हैचिंग के बाद कोई अलग से अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत नहीं होती। वही सामान्य देखभाल रखें जो IVF ट्रांसफर के बाद बताई जाती है। हैवी एक्सरसाइज से बचें, हल्की वॉक कर सकती हैं और स्ट्रेस कम करने की कोशिश करें।
Laser hatching in ivf एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी है जो उन केसों में काम आती है जहाँ एम्ब्रीओ की बाहरी लेयर इम्प्लांटेशन में रुकावट बन रही हो। उम्र ज़्यादा होने पर, बार-बार IVF फ़ेल होने पर, और फ्रोज़न एम्ब्रीओ ट्रांसफर में यह टेक्नोलॉजी खासतौर पर मददगार है।
Laser hatching प्रोसीजर में किसी तरह का कोई रिस्क नहीं होता। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके केस में लेज़र हैचिंग से फ़ायदा होगा या नहीं, उसी के अनुसार कोई निर्णय लें।