सारांश (Overview)
PCOS में सबसे ज्यादा लिखी जाने वाली दवा मेटफॉर्मिन (metformin) है, और पेशेंट्स के सबसे ज़्यादा सवाल भी इसी को लेकर होते हैं। जैसे यह दवा शुगर की है, फिर पीरियड्स के लिए क्यों दी गई। कितने दिन खानी है। पेट खराब हो रहा है तो छोड़ दें या नहीं। प्रेगनेंसी हो गई तो जारी रखें या बंद करें।
PCOS वाली हर महिला को यह दवा नहीं दी जाती, और यह अकेली दवा आपको प्रेगनेंसी के लिए बहुत जल्दी रेडी नहीं करती है। इसका किसे इससे फायदा होता है, यह BMI, शुगर की रिपोर्ट और आपको क्या सही करना है, इस पर निर्भर करता है।
नीचे metformin tablet के यूज़ से जुड़ी हर व्यावहारिक बात है, दवा काम कैसे करती है से लेकर डोज़ कैसे बढ़ाई जाती है, कौन से साइड इफेक्ट सामान्य हैं और किन हालात में यह दवा नहीं दी जाती।
मेटफॉर्मिन एक ऐसी दवा है जो शरीर में इंसुलिन के बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है और खून में शुगर का लेवल कंट्रोल करने में मदद करती है। यह हॉर्मोन की दवा नहीं है।
PCOS में इसका फायदा खासकर तब होता है जब इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो। इंसुलिन का असर बेहतर होने पर इंसुलिन का लेवल कम हो सकता है, जिससे PCOS से जुड़ी कुछ दूसरी समस्याओं में भी सुधार आ सकता है।
मेटफॉर्मिन की आदत नहीं पड़ती और इसे लेने से शरीर इस दवा पर निर्भर नहीं हो जाता। हालांकि, इसे कब और कितनी मात्रा में लेना है, यह डॉक्टर आपकी स्थिति के हिसाब से तय करते हैं।
इसका इस्तेमाल सिर्फ़ डायबिटीज तक सीमित नहीं है। जिन कंडीशन में यह लिखी जाती है, उनमें एक बात कॉमन रहती है, और वह है इंसुलिन का ठीक से काम न करना।
कंडीशन | दवा क्यों दी जाती है |
|---|---|
टाइप 2 डायबिटीज | पहली पसंद की दवा, खून की शुगर को काबू में रखने के लिए |
PCOS के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस | इंसुलिन का असर सुधारकर हॉर्मोन का संतुलन बेहतर करने के लिए |
प्री-डायबिटीज | शुगर बढ़कर डायबिटीज बनने की रफ़्तार धीमी करने के लिए |
PCOS में वजन और मेटाबॉलिक दिक्कतें | जब BMI 25 से ज़्यादा हो, तब शुगर और लिपिड प्रोफाइल सुधारने के लिए |
OHSS का खतरा कम करने के लिए, कुछ प्रोटोकॉल में सहायक दवा के रूप में |
PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से शरीर को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। बढ़ा हुआ इंसुलिन ओवरी में टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ा सकता है और फॉलिकल के मैच्योर होने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
मेटफॉर्मिन सबसे पहले इंसुलिन रेजिस्टेंस को सुधारने का काम करती है। यह शरीर को इंसुलिन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करती है, इसलिए शरीर को ज्यादा इंसुलिन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
इंसुलिन का लेवल कम होने पर ओवरी पर उसका अतिरिक्त असर भी कम हो सकता है। इससे टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम होने और फॉलिकल के मैच्योर होने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से कुछ महिलाओं में पीरियड्स और ओव्यूलेशन भी पहले से बेहतर हो सकते हैं।
इसी वजह से मेटफॉर्मिन का असर एक दो दिन में नहीं दिखता। इंसुलिन के लेवल और उससे जुड़े बदलावों को सुधारने में समय लगता है। पीरियड्स और ओव्यूलेशन में सुधार कब दिखेगा, यह हर महिला में अलग हो सकता है। यह PCOS, इंसुलिन रेजिस्टेंस और दूसरी चीज़ों पर भी निर्भर करता है।
मेटफॉर्मिन शरीर को इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर में सुधार हो सकता है। कुछ महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल और दूसरे लिपिड लेवल पर भी फायदा देखा जाता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और बढ़े हुए टेस्टोस्टेरोन में सुधार होने पर कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन और पीरियड्स का चक्र भी पहले से बेहतर हो सकता है।
PCOS में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा रहता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस को सुधारना इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर उन महिलाओं में जिनमें मेटाबॉलिक समस्या ज्यादा है।
जिन महिलाओं में PCOS की वजह से ओव्यूलेशन नहीं हो रहा है, उनमें मेटफॉर्मिन ओव्यूलेशन में मदद कर सकती है। लेकिन सिर्फ प्रेगनेंसी के लिए यह हर महिला में पहली पसंद की दवा नहीं होती। जरूरत के हिसाब से दूसरी दवाएं ज्यादा असरदार हो सकती हैं।
PCOS वाली महिलाओं में ओवरी के जरूरत से ज्यादा उत्तेजित होने यानी OHSS का खतरा ज्यादा रहता है। कुछ IVF प्रोटोकॉल में मेटफॉर्मिन इस खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे हर महिला को देना जरूरी नहीं होता।
टेस्टोस्टेरोन में सुधार होने पर कुछ महिलाओं को फायदा मिल सकता है, लेकिन मुंहासे या चेहरे के अनचाहे बालों के लिए अकेली मेटफॉर्मिन का असर सीमित रहता है और इसमें कई महीने लग सकते हैं।
मेटफॉर्मिन का फायदा खासकर इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्या वाली महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है। इसलिए दवा की जरूरत और उससे मिलने वाला फायदा BMI, ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और दूसरे लक्षणों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
मेटफॉर्मिन की डोज़ एकदम से बढ़ाने के बजाय धीरे धीरे बढ़ाई जाती है, क्योंकि शुरुआत में दवा से पेट में मितली, गैस या दस्त जैसी परेशानी हो सकती है। कम डोज़ से शुरू करने और धीरे धीरे बढ़ाने से शरीर को दवा के साथ एडजस्ट होने का समय मिलता है।
चरण | सामान्य डोज़ | कब लेनी है |
|---|---|---|
पहला हफ्ता | 500 mg दिन में एक बार | रात के खाने के साथ |
दूसरा हफ्ता | 500 mg दिन में दो बार | नाश्ते और रात के खाने के साथ |
तीसरा हफ्ता के बाद | 1000 से 2000 mg प्रतिदिन | डॉक्टर की सलाह पर बांटकर |
अधिकतम सीमा | बड़ों में 2500 mg, किशोरियों में 2000 mg प्रतिदिन | इससे ऊपर नहीं दी जाती |
मेटफॉर्मिन के साइड इफेक्ट्स में पेट से जुड़ी दिक्कतें सबसे कॉमन हैं। खासकर दवा शुरू करने या डोज़ बढ़ाने पर मितली, दस्त, उल्टी या पेट में मरोड़ हो सकती है। आमतौर पर डोज़ धीरे धीरे बढ़ाने और दवा खाने के साथ लेने पर इन दिक्कतों को कम किया जा सकता है।
साइड इफेक्ट | कितना आम | क्या करें |
|---|---|---|
दस्त, मितली, उल्टी, पेट में मरोड़ | बहुत आम, शुरू के दो से चार हफ्तों में | खाने के साथ लें, डोज़ धीरे बढ़ाएं, SR टैबलेट पर स्विच के बारे में पूछें |
मुंह में धातु जैसा स्वाद | आम | अपने आप ठीक हो जाता है, दवा बंद करने की ज़रूरत नहीं |
भूख कम लगना | आम | खाना छोटे हिस्सों में बांट लें |
विटामिन B12 की कमी | लंबे इस्तेमाल में | साल में एक बार लेवल जांचें, ज़रूरत पड़े तो सप्लीमेंट लें |
लैक्टिक एसिडोसिस | बहुत दुर्लभ, करीब 30 हज़ार में एक | तेज़ थकान, सांस फूलना या मांसपेशियों में असामान्य दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें |
प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद मेटफॉर्मिन जारी रखनी है या नहीं, यह हर महिला की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए इसका फैसला डॉक्टर ही करते हैं।
कुछ महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान मेटफॉर्मिन जारी रखने से प्रीटर्म बर्थ का रिस्क कम देखा गया है। साथ ही, जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने की संभावना भी कम हो सकती है। लेकिन हर महिला को प्रेगनेंसी में यह दवा जारी रखने की जरूरत नहीं होती।
इसलिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही अपनी डॉक्टर को बता दें। वह आपकी कंडीशन देखकर बताएंगी कि मेटफॉर्मिन आगे लेनी है या नहीं। खुद से दवा बंद न करें।
मेटफॉर्मिन इस बात को ध्यान में रख कर दी जाती कि PCOS को सही करने के पीछे आपका लक्ष्य क्या है, इसीलिए PCOS की समस्या झेल रही सभी महिलाओं को इसे लेने की सलाह नहीं दी जाती ।
आपका मुख्य लक्ष्य | पहली पसंद क्या रहती है |
|---|---|
शुगर, वजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस सुधारना | |
अनियमित पीरियड्स और चेहरे के बाल, अभी प्रेगनेंसी की प्लानिंग नहीं | गर्भनिरोधक गोलियां, इस काम में वे मेटफॉर्मिन से बेहतर मानी जाती हैं |
प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं, लेकिन एग नहीं बन रहा | पहले ओव्यूलेशन की दवाएं दी जाती हैं, मेटफॉर्मिन अकेली काम नहीं करती |
क्लोमीफीन से ओव्यूलेशन नहीं हो रहा | क्लोमीफीन के साथ मेटफॉर्मिन जोड़ने से रिजल्ट अच्छे मिलते हैं |
इनोसिटोल सप्लीमेंट लेना है या मेटफॉर्मिन | चेहरे के बाल और पेट की चर्बी के लिए मेटफॉर्मिन को प्राथमिकता दी जाती है |
अगर आपको PCOS में मेटफॉर्मिन दी गई है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि डॉक्टर ने यह दवा आपको किस वजह से दी है। यह हर महिला में एक ही तरह से काम नहीं करती और इसका असर भी तुरंत नहीं दिखता।
शुरुआत में पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन कुछ समय बाद शरीर दवा के साथ एडजस्ट हो जाता है। दवा की डोज़ खुद से न बढ़ाएं और न ही बिना डॉक्टर की सलाह के बंद करें।
अगर आप प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं या आपकी परेशानी सिर्फ़ पीरियड्स, मुहांसे या चेहरे के बालों से जुड़ी है, तो डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए मेटफॉर्मिन सही विकल्प है या कोई दूसरा इलाज बेहतर रहेगा।