सारांश (Overview)
अगर फर्टिलिटी के लिए ओमेगा 3 लेने की सलाह मिलती है, तो आपको पता होना चाहिए कि कौन सा ओमेगा 3 लें और कितना लें। बाजार में कई सप्लीमेंट 1000 mg Omega 3 लिखकर बिकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको 1000 mg EPA और DHA मिल रहा है।
यही फर्क समझना जरूरी है। ओमेगा 3 के तीन रूप होते हैं और फर्टिलिटी में इनकी भूमिका एक जैसी नहीं है। इस आर्टिकल में जानिए EPA और DHA क्यों जरुरी होते हैं, अलसी और अखरोट से क्या मिलता है, आपको कितनी मात्रा ओमेगा 3 चाहिए और सप्लीमेंट खरीदते समय लेबल पर क्या देखें।
ओमेगा 3 इनफर्टिलिटी का इलाज नहीं है। अगर ट्यूब ब्लॉक है, स्पर्म काउंट बहुत कम है या ओव्यूलेशन नहीं हो रहा है, तो कोई सप्लीमेंट इन समस्याओं को ठीक नहीं कर सकता।
ओमेगा 3 का रोल इससे अलग है। यह शरीर में इंफ्लमैशन को संतुलित रखने में मदद करता है और इसी वजह से फर्टिलिटी और प्रेगनेंसी पर इसके संभावित असर को लेकर रिसर्च हुई है। इसमें कंसीव करने की संभावना बढ़ने का संबंध दिखा है, लेकिन इसके लिए अभी ऑब्जर्वेशनल सबूत ही हैं।
प्रेगनेंसी में प्रीटर्म डिलीवरी के मामले में रिजल्ट थोड़े अलग हैं। इस पर बड़े रैंडमाइज्ड ट्रायल हुए हैं और इनमें ओमेगा 3 लेने से प्रीटर्म डिलीवरी का रिस्क कम होने के ज्यादा मजबूत सबूत मिले हैं।
इसलिए ओमेगा 3 को इनफर्टिलिटी के इलाज की जगह डाइट और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के साथ एक सपोर्ट के तौर पर समझें।
ओमेगा 3 सिर्फ एक तरह का फैटी एसिड नहीं है। इसके तीन मुख्य फॉर्म होते हैं, ALA, EPA और DHA। तीनों का शरीर में काम अलग है और फर्टिलिटी के लिहाज से भी इनका महत्व एक जैसा नहीं है।
फॉर्म | कहां से मिलता है | शरीर में क्या करता है |
|---|---|---|
ALA | अलसी, चिया, अखरोट, सरसों का तेल, सोयाबीन | बुनियादी फैटी एसिड, शरीर इसे EPA और DHA में बदलने की कोशिश करता है |
EPA | ऑयली फिश, फिश ऑयल, कुछ एल्गल ऑयल | शरीर में इंफ्लमैशन को संतुलित रखने में मदद करता है |
DHA | ऑयली फिश, फिश ऑयल, एल्गल ऑयल | प्रेगनेंसी में बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास में सीधे काम आता है |
अलसी, चिया और अखरोट में Omega 3 का ALA form होता है। शरीर ALA को EPA और DHA में बदल सकता है, लेकिन यह बदलाव बहुत सीमित होता है और 15% से भी कम रहता है। इसलिए इनसे DHA की जरूरत पूरी नहीं होती।
प्रेगनेंसी में DHA बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास के लिए जरूरी है। शाकाहारी लोगों के लिए इसका सीधा सोर्स एल्गल ऑयल है, जो समुद्री शैवाल से बनाया जाता है। इसके सप्लीमेंट में आमतौर पर 100 से 300 mg DHA होता है।
एक स्टडी में 900 महिलाओं के 2,510 menstrual cycles के दौरान ओमेगा 3 के सेवन और कंसीव करने की संभावना के बीच संबंध देखा गया। उम्र, वजन, पिछली प्रेगनेंसी और दूसरे सप्लीमेंट को ध्यान में रखते हुए, ओमेगा 3 लेने वाली महिलाओं में कंसीव करने की संभावना 1.51 गुना ज्यादा पाई गई।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ओमेगा 3 लेने से प्रेगनेंसी हुई। यह एक ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी थी, जिसमें यह देखा गया था कि कौन ओमेगा 3 ले रहा था और किसकी प्रेगनेंसी हुई। इसमें महिलाओं को ओमेगा 3 देकर उसका असर नहीं जांचा गया था।
इसलिए अभी इतना ही कहा जा सकता है कि ओमेगा 3 लेने वाली महिलाओं में कंसीव करने की संभावना ज्यादा देखी गई। लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि ओमेगा 3 लेने से कंसीव करने की संभावना बढ़ती ही है।
पुरुषों की फर्टिलिटी में भी ओमेगा 3 की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्पर्म की झिल्ली में DHA काफी मात्रा में होता है और झिल्ली का लचीला होना स्पर्म की मोटिलिटी के लिए जरूरी है।
एक स्टडी के अनुसार ज्यादा ओमेगा 3 लेने वाले पुरुषों में सीमेन की मात्रा ज्यादा पायी गयी। इसके अलावा ओमेगा 3 का सेवन बढ़ने के साथ स्पर्म की मोटिलिटी कम होने की समस्या भी कम हो गई।
व्यावहारिक बात यह है कि स्पर्म बनने में करीब तीन महीने लगते हैं। इसलिए डाइट में बदलाव का असर देखने के लिए कम से कम तीन महीने का समय देना चाहिए। दो हफ्ते में दोबारा सीमेन एनालिसिस कराने से सही बदलाव का पता नहीं चलेगा।
बोतल पर लिखा | पीछे पढ़ना क्या है | इसका मतलब |
|---|---|---|
1000 mg Fish Oil | EPA 180 mg, DHA 120 mg | काम की मात्रा 300 mg, यानी नंबर का एक तिहाई |
1000 mg Omega 3 | EPA और DHA अलग-अलग लिखे हैं या नहीं | अलग न लिखे हों तो बोतल छोड़ दीजिए |
Flaxseed Oil | सिर्फ ALA | DHA इसमें नहीं है, चाहे नंबर कितना भी बड़ा हो |
Algal Oil | DHA 100 से 300 mg | शाकाहारियों के लिए यही सीधा DHA है |
इसलिए बोतल खरीदते समय EPA और DHA की मात्रा अलग-अलग देखें। इन्हें जोड़कर ही पता चलेगा कि आपको वास्तव में कितना ओमेगा 3 मिल रहा है।
स्रोत | क्या मिलता है | कितना और कैसे |
|---|---|---|
ऑयली फिश (बांगड़ा, तारली, सुरमई की जगह छोटी मछलियां) | EPA और DHA सीधे | हफ्ते में दो बार, करीब 85 ग्राम प्रति बार |
अलसी, चिया, अखरोट | सिर्फ ALA | रोज एक से दो चम्मच, पीसकर या भिगोकर |
सरसों और सोयाबीन का तेल | ALA | रोज के खाने में पहले से शामिल |
एल्गल ऑयल कैप्सूल | DHA, कुछ में EPA भी | शाकाहारियों के लिए DHA का सीधा रास्ता |
फिश ऑयल कैप्सूल | EPA और DHA | लेबल पर दोनों नंबर देखकर |
Omega 3 लेते समय EPA और DHA पर ध्यान दें, सिर्फ बोतल पर लिखे कुल ओमेगा 3 पर नहीं। अलसी से ALA मिलता है, जबकि DHA के लिए मछली या अल्गल ऑयल सीधे स्रोत हैं।
कंसीव करने की संभावना बेहतर होने का संबंध रिसर्च में दिखा है, लेकिन यह ऑब्जर्वेशनल आंकड़ा है। प्रेगनेंसी में समय से पहले डिलीवरी कम होने के सबूत ज्यादा मजबूत हैं। हालांकि, Omega 3 को फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
अगर लंबे समय से कोशिश के बावजूद प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो सप्लीमेंट बदलने के बजाय जांच कराना ज्यादा जरूरी है।