PCOD vs PCOS: मुख्य अंतर, लक्षण और उपचार

Last updated: January 06, 2026

Overview

आजकल महिलाओं में हार्मोनल समस्याएँ बढ़ती ही जा रही हैं, और अक्सर लोग PCOD व PCOS एक ही समझ लेते हैं। जबकि सच तो यह है कि इनके बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। Polycystic Ovarian Disease (PCOD) और Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली वाली आम बीमारियां हैं। हालाँकि, इनके लक्षण आपस में मिलते हैं और दोनों ही ओवरी (अंडाशय) के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं,लेकिन फिर भी दोनों एक समान नहीं हैं। PCOD और PCOS में अंतर के साथ-साथ, उनके लक्षण, कारण और इलाज के विकल्पों को समझना महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सही समय पर सही कदम उठा सकें।

इस ब्लॉग में आप PCOD vs PCOS को विस्तार से समझेंगे, जिनमें इनकी पहचान/जांच(diagnosis), लक्षण और उपचार के विकल्प शामिल हैं। चाहे आपको इनके कुछ लक्षण दिख रहे हों या फिर आप सिर्फ अपनी जानकारी के लिए पढ़ना चाहती हों, यह गाइड आपकी बेहतर सेहत की दिशा में मदद करेगी।

भूमिका

PCOD और PCOS दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं और हार्मोनल असंतुलन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके बारे में लोगों के मन में गलतफहमियाँ होना आम है। लेकिनये दोनों एक दूसरे से काफी अलग हैं,खासकर तब जब बात इनके होने के कारण, परिणामों, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता(फर्टिलिटी) पर पड़ने वाले लंबे समय के प्रभावों की हों। जिन महिलाओं को PCOS होता है,उनमें पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस असंतुलन के कारण पीरियड्स मिस हो जाते हैं या अनियमित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण करने में मुश्किल होती है।

PCOD और PCOS दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं और हार्मोनल असंतुलन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके बारे में लोगों के मन में गलतफहमियाँ होना आम है। लेकिनये दोनों एक दूसरे से काफी अलग हैं,खासकर तब जब बात इनके होने के कारण, परिणामों, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता(फर्टिलिटी) पर पड़ने वाले लंबे समय के प्रभावों की हों। जिन महिलाओं को PCOS होता है,उनमें पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस असंतुलन के कारण पीरियड्स मिस हो जाते हैं या अनियमित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण करने में मुश्किल होती है।

PCOD क्या है?

PCOD (Polycystic Ovarian Disease) एक ऐसी स्थिति है जिसमें ओवरी बहुत अधिक संख्या में अपरिपक़्व (आधे पके हुए) या आंशिक रूप से पके हुए अंडे बनाती है। यही अंडे बाद में छोटे-छोटे ओवेरियन सिस्ट में बदल जाते हैं। इससे ओवरी का आकार बढ़ जाता है और पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसका असर महिला प्रजनन तंत्र पर पड़ता है, जिससे PCOD के लक्षण पैदा होते हैं जैसे कि पीरियड्स का अनियमित होना, बांझपन (इनफर्टिलिटी), बाल झड़ना, और वजन बढ़ना।

PCOD के बारे में कुछ अहम बातें:

  • PCOD, PCOS की तुलना में ज्यादा आम है।
  • PCOD को आमतौर पर कम गंभीर और मैनेज करना आसान माना जाता है।
  • PCOD में कई महिलाओं का ओव्यूलेशन सामान्य रहता है और लाइफस्टाइल सुधारने पर नेचुरली प्रेग्नेंसी संभव हो सकती है।

PCOD के पीछे अक्सर खराब डाइट, एक्सरसाइज़ की कमी और तनाव जैसे लाइफस्टाइल कारण जुड़े होते हैं।

PCOS क्या है?

PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) एक मेटाबॉलिक स्थिति है, जो महिलाओं को उनके प्रजनन उम्र में हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। इसमें महिलाओं के पीरियड्स मिस हो सकते हैं और ओव्यूलेशन भी अक्सर अनियमित हो जाता है, जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है।

PCOS के बारे में कुछ अहम बातें:

  • PCOS एक ज्यादा जटिल और लंबे समय तक चलने वाली (क्रॉनिक) स्थिति है।
  • इसमें अक्सर ओव्यूलेशन नहीं होता या बहुत अनियमित होता है।
  • PCOS में गर्भधारण से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं और टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, एंडोमेट्रियल कैंसर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
  • इसके लक्षण PCOD की तुलना में ज्यादा गंभीर होते हैं और आमतौर पर इन्हें ठीक रखने के लिए लंबे समय तक देखभाल और मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है।

PCOD और PCOS में मुख्य अंतर

नीचे दी गई टेबल से PCOD और PCOS के बीच फर्क आसानी से समझा जा सकता है:

विशेषता PCOD PCOS
फुल फॉर्म Polycystic Ovarian Disease Polycystic Ovary Syndrome
गंभीरता आमतौर पर कम गंभीर; लाइफस्टाइल बदलाव से बेहतर मैनेज हो सकता है ज्यादा जटिल; लंबे समय तक मेडिकल मैनेजमेंट की जरूरत पड़ पड़ती है
अंडा रिलीज़ (ओव्यूलेशन) अंडा अनियमित रूप से रिलीज़ होता है, लेकिन ओव्यूलेशन होता रहता है ओव्यूलेशन अक्सर नहीं होता, जिससे नेचुरल कंसीव करने के चांस कम हो जाते हैं
फर्टिलिटी पर असर कई मामलों में फर्टिलिटी पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता हार्मोनल और मेटाबॉलिक कारणों से बांझपन की समस्या हो सकती है
हार्मोनल असंतुलन हार्मोनल इम्बैलेंस मामूली होता है और इसे संभाला जा सकता है। ज्यादा स्पष्ट, खासकर एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बढ़ने के साथ
वजन बढ़ना कम होता है या हल्का होता है ज्यादा आम, खासकर पेट के आसपास
साथ जुड़ी समस्याएँ आमतौर पर गंभीर हेल्थ रिस्क से कम जुड़ा होता है डायबिटीज, हृदय रोग और इंसुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम बढ़ सकता है

अधिक जानकारी: PCOS के प्रकार (Types of PCOS)

PCOD और PCOS के सामान्य लक्षण

PCOD और PCOS के संकेत पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके। दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनका असर किसी में हल्का होता है और किसी में ज्यादा गंभीर। नीचे दिए गए लक्षण आपको PCOD और PCOS के फर्क को समझने में मदद करेंगे।

PCOD के लक्षण

  • अनियमित पीरियड्स: पीरियड्स देर से आना या समय तय न रहना।
  • हलके मुहांसे या ऑयली स्किन: हल्के हार्मोनल बदलाव की वजह से।
  • वजन में उतार-चढ़ाव: वजन कभी बढ़ता है तोकभी घटता है, पर आमतौर पर मैनेज हो जाता है।
  • ओवरी में सिस्ट: अल्ट्रासाउंड में कई अधपके फॉलिकल्स/छोटे सिस्ट दिख सकते हैं।

PCOS के लक्षण

  • पीरियड्स का बहुत अनियमित होना या छूट जाना: अक्सर ओव्यूलेशन न होने से जुड़ा होता है।
  • चेहरे/शरीर पर ज्यादा बाल (Hirsutism): एंड्रोजन बढ़ने की वजह से।
  • ज्यादा/बार-बार होने वाले मुहांसे: ये बार-बार आते हैं और इन्हें कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है।
  • बाल पतले होना या झड़ना: खासकर सिर के आगे या क्राउन एरिया में।
  • वजन बढ़ना: खासकर पेट के आसपास।
  • गर्भधारण में दिक्कत: PCOS में यह एक आम चिंता होती है और इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

अगर लक्षण शुरुआती स्तर पर पकड़ में आ जाएं, तो डॉक्टर आपकी स्थिति के हिसाब से सही मैनेजमेंट प्लान बना सकते हैं। PCOD या PCOS के लिए सही इलाज तय करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

क्यों होते हैं और किन बातों से जोखिम बढ़ता है

PCOD के कारण

  • हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में बदलाव आने से अंडे नियमित रूप से रिलीज़ नहीं हो पाते।
  • खराब खान-पान और जीवनशैली: प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाने से और फिजिकल एक्टिविटी में कमी होने के कारण ओवरी के कामकाज करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • जेनेटिक कारण: परिवार में किसी को PCOD रहा हो, तो जोखिम बढ़ सकता है।

PCOS के कारण

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं, तो शरीर में इंसुलिन और एंड्रोजन का उत्पादन बहुत बढ़ जाता है।
  • एंड्रोजन का बढ़ना: पुरुष हार्मोन बढ़ने से ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है और मुंहासे/अनचाहे बाल बढ़ सकते हैं।
  • जेनेटिक्स और मोटापा: आनुवंशिक कारण और अतिरिक्त बॉडी फैट हार्मोनल और मेटाबॉलिक असंतुलन को बढ़ा सकते हैं।

अगर PCOD या PCOS का पता समय पर चल जाए, तो डॉक्टर लक्षणों को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। सही इलाज और आगे की योजना तय करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

PCOD और PCOS की जांच कब और कैसे कराएं

PCOD या PCOS का असर शरीर के कई हिस्सों पर दिख सकता है, इसलिए इसकी पहचान आमतौर पर ब्लड टेस्ट और इमेजिंग (अल्ट्रासाउंड) के जरिए की जाती है। जांच के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ आपसे कुछ जरूरी सवाल पूछ सकते हैं, जैसे पीरियड्स का अनियमित होना, चेहरे/छाती/पीठ पर पुरुषों जैसे बाल बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे, या सिर के बालों का पतला होना।

डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, मौजूदा खान-पान की आदतें, आप क्या दवाएं (प्रिस्क्रिप्शन/ओटीसी) ले रही हैं, और कौन से सप्लीमेंट्स/विटामिन्स ले रही हैं, ये सब भी जानना चाहेंगे।

PCOD/PCOS की पुष्टि के लिए डॉक्टर आमतौर पर इन बातों को ध्यान में रखते हैं:

  • मेडिकल हिस्ट्री: पीरियड्स की अनियमितता, वजन में बदलाव, मुंहासे, और बालों की अधिक वृद्धि जैसी समस्याओं का रिव्यू।
  • फिजिकल एग्ज़ामिनेशन: BMI चेक करना और स्किन/हेयर कंडीशन देखना।
  • ब्लड टेस्ट: हार्मोन लेवल (टेस्टोस्टेरोन, LH, FSH) और इंसुलिन आदि की मात्रा मापने के लिए किया जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड स्कैन: ओवरी में सिस्ट हैं या नहीं और ओवरी का आकार कैसा है, यह देखने के लिए।
  • पेल्विक एग्ज़ाम: जरूरत पड़ने पर अन्य कारणों को ख़ारिज करने के लिए।

सही समय पर बीमारी की पहचान (Diagnosis) बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महिला को PCOD या PCOS का समय पर इलाज मिल पाता है, जिससे भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

अधिक जानकारी: PCOS/PCOD Do’s and Don’ts

PCOD और PCOS का सही इलाज और कंट्रोल करने के उपाय

जीवनशैली में बदलाव

दोनों ही स्थितियों से बचने और उन्हें ठीक करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है।

  • संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज: रोज़ की एक्टिविटी हार्मोन बैलेंस करने और ओव्यूलेशन सपोर्ट करने में मदद करती है।
  • वजन नियंत्रण: शरीर के वजन का सिर्फ 5–10% कम होना भी लक्षण घटा सकता है और पीरियड्स साइकिल को बेहतर कर सकता है।
  • तनाव कम करना: योग, मेडिटेशन और स्ट्रेस-मैनेजमेंट तकनीकें कोर्टिसोल घटाकर हार्मोनल बैलेंस में मदद कर सकती हैं।

स्वस्थ जीवनशैली की आदतें इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और हार्मोनों को संतुलित करने में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं।

मेडिकल ट्रीटमेंट

इलाज के तरीके लक्षणों, गर्भधारण की इच्छा और समस्या की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं:

  • पीरियड्स को नियमित करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां: ये गोलियां मासिक धर्म की अनियमितता को नियंत्रित करती हैं और अनचाहे बालों व मुहांसों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • एंटी-एंड्रोजन दवाएं: ये दवाएं पुरुष हार्मोन के स्तर को कम करती हैं, जिससे चेहरे के अनचाहे बालों और बालों के पतले होने की समस्या में सुधार होता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए मेटफॉर्मिन: PCOS के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को सुधारती हैं और ओव्यूलेशन को दोबारा शुरू करने में मदद कर सकती हैं।
  • प्रेगनेंसी की योजना के लिए फर्टिलिटी उपचार: दवाएं या 'असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव तकनीक' उन महिलाओं की मदद कर सकती हैं जो PCOD या PCOS के साथ गर्भवती होना चाहती हैं।
  • ओवेरियन ड्रिलिंग या लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया: यह सलाह बहुत कम दी जाती है, केवल उन गंभीर PCOS मामलों में जहाँ दवाएं काम नहीं करतीं।

चाहे PCOD या PCOS का इलाज हो, यह हर महिला की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होना चाहिए।

अधिक जानकारी: PCOD Pregnancy - Getting Pregnant with PCOD

निष्कर्ष

PCOD और PCOS के बीच फर्क समझना आपके प्रजनन स्वास्थ्य और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से मैनेज करने की पहली सीढ़ी है। दोनों में मुख्य अंतर उनकी गंभीरता, रिस्क फैक्टर्स और लंबे समय के स्वास्थ्य जोखिमों में होता है। अच्छी बात यह है कि सही जांच, जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टरी सलाह की मदद से PCOD और PCOS दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है, खासकर यदि समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या PCOD, PCOS में बदल सकता है?

 

नहीं, ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं और इनमें से एक की वजह से दूसरी नहीं होती है।

PCOD या PCOS में कौन ज्यादा गंभीर है?

 

चूंकि PCOS किसी व्यक्ति के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को प्रभावित करता है और कुछ बीमारियों के होने के खतरे को बढ़ा देता है, इसलिए यह आमतौर पर कहीं अधिक गंभीर होता है।

अगर मुझे PCOD या PCOS है तो क्या मैं प्रेग्नेंट हो सकती हूँ?

 

हाँ, डॉक्टरी मदद और सही इलाज के साथ कई महिलाएँ गर्भधारण कर सकती हैं।

PCOD का डायग्नोसिस कैसे होता है?

 

ये लंबी चलने वाली समस्याएं हैं, जिन्हें जीवनशैली (लाइफस्टाइल) में बदलाव और डॉक्टरी मदद से मैनेज किया जा सकता है।

क्या PCOD और PCOS हमेशा के लिए रहते हैं?

 

ये स्थितियाँ लंबे समय तक रह सकती हैं, लेकिन सही मैनेजमेंट से लक्षण काफी हद तक कंट्रोल में आ सकते हैं।

PCOS के लक्षण कैसे कंट्रोल करें?

 

PCOS डाइट, व्यायाम, दवाइयों और तनाव के सही प्रबंधन (stress management) के साथ, PCOS के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

वजन घटाने के लिए PCOD डाइट चार्ट क्या होना चाहिए?

 

एक आदर्श PCOD डाइट कम जीआई (low-GI) वाले खाद्य पदार्थों, लीन प्रोटीन, सब्जियों, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स (स्वस्थ वसा) का एक मिश्रण होती है।

PCOS का सबसे अच्छा इलाज क्या है?

 

यह आहार में बदलाव, दवाओं और प्रजनन उपचारों (यदि आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं) का एक संयोजन है।

PCOS का डायग्नोसिस कैसे होता है?

 

रोटरडैम क्राइटेरिया (Rotterdam criteria) के अनुसार: यहाँ दिए गए तीन लक्षणों में से कम से कम दो का होना जरूरी है - अनियमित पीरियड्स, शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) की अधिकता, या ओवरी में सिस्ट (गांठें) होना।

टाइप 4 PCOS क्या होता है?

 

यह PCOS का एक ऐसा प्रकार है जिसमें महिलाओं का वजन ज्यादा नहीं होता (यानी वे दुबली-पतली होती हैं), लेकिन उनके शरीर में हार्मोनल असंतुलन रहता है और उनके पीरियड्स अनियमित होते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Private Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer