आजकल महिलाओं में हार्मोनल समस्याएँ बढ़ती ही जा रही हैं, और अक्सर लोग PCOD व PCOS एक ही समझ लेते हैं। जबकि सच तो यह है कि इनके बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। Polycystic Ovarian Disease (PCOD) और Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली वाली आम बीमारियां हैं। हालाँकि, इनके लक्षण आपस में मिलते हैं और दोनों ही ओवरी (अंडाशय) के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं,लेकिन फिर भी दोनों एक समान नहीं हैं। PCOD और PCOS में अंतर के साथ-साथ, उनके लक्षण, कारण और इलाज के विकल्पों को समझना महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सही समय पर सही कदम उठा सकें।
इस ब्लॉग में आप PCOD vs PCOS को विस्तार से समझेंगे, जिनमें इनकी पहचान/जांच(diagnosis), लक्षण और उपचार के विकल्प शामिल हैं। चाहे आपको इनके कुछ लक्षण दिख रहे हों या फिर आप सिर्फ अपनी जानकारी के लिए पढ़ना चाहती हों, यह गाइड आपकी बेहतर सेहत की दिशा में मदद करेगी।
PCOD और PCOS दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं और हार्मोनल असंतुलन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके बारे में लोगों के मन में गलतफहमियाँ होना आम है। लेकिनये दोनों एक दूसरे से काफी अलग हैं,खासकर तब जब बात इनके होने के कारण, परिणामों, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता(फर्टिलिटी) पर पड़ने वाले लंबे समय के प्रभावों की हों। जिन महिलाओं को PCOS होता है,उनमें पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस असंतुलन के कारण पीरियड्स मिस हो जाते हैं या अनियमित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण करने में मुश्किल होती है।
PCOD और PCOS दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं और हार्मोनल असंतुलन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके बारे में लोगों के मन में गलतफहमियाँ होना आम है। लेकिनये दोनों एक दूसरे से काफी अलग हैं,खासकर तब जब बात इनके होने के कारण, परिणामों, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता(फर्टिलिटी) पर पड़ने वाले लंबे समय के प्रभावों की हों। जिन महिलाओं को PCOS होता है,उनमें पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस असंतुलन के कारण पीरियड्स मिस हो जाते हैं या अनियमित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण करने में मुश्किल होती है।
PCOD (Polycystic Ovarian Disease) एक ऐसी स्थिति है जिसमें ओवरी बहुत अधिक संख्या में अपरिपक़्व (आधे पके हुए) या आंशिक रूप से पके हुए अंडे बनाती है। यही अंडे बाद में छोटे-छोटे ओवेरियन सिस्ट में बदल जाते हैं। इससे ओवरी का आकार बढ़ जाता है और पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसका असर महिला प्रजनन तंत्र पर पड़ता है, जिससे PCOD के लक्षण पैदा होते हैं जैसे कि पीरियड्स का अनियमित होना, बांझपन (इनफर्टिलिटी), बाल झड़ना, और वजन बढ़ना।
PCOD के बारे में कुछ अहम बातें:
PCOD के पीछे अक्सर खराब डाइट, एक्सरसाइज़ की कमी और तनाव जैसे लाइफस्टाइल कारण जुड़े होते हैं।
PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) एक मेटाबॉलिक स्थिति है, जो महिलाओं को उनके प्रजनन उम्र में हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। इसमें महिलाओं के पीरियड्स मिस हो सकते हैं और ओव्यूलेशन भी अक्सर अनियमित हो जाता है, जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है।
PCOS के बारे में कुछ अहम बातें:
नीचे दी गई टेबल से PCOD और PCOS के बीच फर्क आसानी से समझा जा सकता है:
| विशेषता | PCOD | PCOS |
|---|---|---|
| फुल फॉर्म | Polycystic Ovarian Disease | Polycystic Ovary Syndrome |
| गंभीरता | आमतौर पर कम गंभीर; लाइफस्टाइल बदलाव से बेहतर मैनेज हो सकता है | ज्यादा जटिल; लंबे समय तक मेडिकल मैनेजमेंट की जरूरत पड़ पड़ती है |
| अंडा रिलीज़ (ओव्यूलेशन) | अंडा अनियमित रूप से रिलीज़ होता है, लेकिन ओव्यूलेशन होता रहता है | ओव्यूलेशन अक्सर नहीं होता, जिससे नेचुरल कंसीव करने के चांस कम हो जाते हैं |
| फर्टिलिटी पर असर | कई मामलों में फर्टिलिटी पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता | हार्मोनल और मेटाबॉलिक कारणों से बांझपन की समस्या हो सकती है |
| हार्मोनल असंतुलन | हार्मोनल इम्बैलेंस मामूली होता है और इसे संभाला जा सकता है। | ज्यादा स्पष्ट, खासकर एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बढ़ने के साथ |
| वजन बढ़ना | कम होता है या हल्का होता है | ज्यादा आम, खासकर पेट के आसपास |
| साथ जुड़ी समस्याएँ | आमतौर पर गंभीर हेल्थ रिस्क से कम जुड़ा होता है | डायबिटीज, हृदय रोग और इंसुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम बढ़ सकता है |
अधिक जानकारी: PCOS के प्रकार (Types of PCOS)
PCOD और PCOS के संकेत पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके। दोनों ही ओवरी को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनका असर किसी में हल्का होता है और किसी में ज्यादा गंभीर। नीचे दिए गए लक्षण आपको PCOD और PCOS के फर्क को समझने में मदद करेंगे।
अगर लक्षण शुरुआती स्तर पर पकड़ में आ जाएं, तो डॉक्टर आपकी स्थिति के हिसाब से सही मैनेजमेंट प्लान बना सकते हैं। PCOD या PCOS के लिए सही इलाज तय करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
अगर PCOD या PCOS का पता समय पर चल जाए, तो डॉक्टर लक्षणों को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। सही इलाज और आगे की योजना तय करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
PCOD या PCOS का असर शरीर के कई हिस्सों पर दिख सकता है, इसलिए इसकी पहचान आमतौर पर ब्लड टेस्ट और इमेजिंग (अल्ट्रासाउंड) के जरिए की जाती है। जांच के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ आपसे कुछ जरूरी सवाल पूछ सकते हैं, जैसे पीरियड्स का अनियमित होना, चेहरे/छाती/पीठ पर पुरुषों जैसे बाल बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे, या सिर के बालों का पतला होना।
डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, मौजूदा खान-पान की आदतें, आप क्या दवाएं (प्रिस्क्रिप्शन/ओटीसी) ले रही हैं, और कौन से सप्लीमेंट्स/विटामिन्स ले रही हैं, ये सब भी जानना चाहेंगे।
सही समय पर बीमारी की पहचान (Diagnosis) बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महिला को PCOD या PCOS का समय पर इलाज मिल पाता है, जिससे भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
अधिक जानकारी: PCOS/PCOD Do’s and Don’ts
दोनों ही स्थितियों से बचने और उन्हें ठीक करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है।
स्वस्थ जीवनशैली की आदतें इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और हार्मोनों को संतुलित करने में बहुत अहम भूमिका निभाती हैं।
इलाज के तरीके लक्षणों, गर्भधारण की इच्छा और समस्या की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं:
चाहे PCOD या PCOS का इलाज हो, यह हर महिला की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होना चाहिए।
अधिक जानकारी: PCOD Pregnancy - Getting Pregnant with PCOD
PCOD और PCOS के बीच फर्क समझना आपके प्रजनन स्वास्थ्य और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से मैनेज करने की पहली सीढ़ी है। दोनों में मुख्य अंतर उनकी गंभीरता, रिस्क फैक्टर्स और लंबे समय के स्वास्थ्य जोखिमों में होता है। अच्छी बात यह है कि सही जांच, जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टरी सलाह की मदद से PCOD और PCOS दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है, खासकर यदि समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए।
नहीं, ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं और इनमें से एक की वजह से दूसरी नहीं होती है।
चूंकि PCOS किसी व्यक्ति के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को प्रभावित करता है और कुछ बीमारियों के होने के खतरे को बढ़ा देता है, इसलिए यह आमतौर पर कहीं अधिक गंभीर होता है।
हाँ, डॉक्टरी मदद और सही इलाज के साथ कई महिलाएँ गर्भधारण कर सकती हैं।
ये लंबी चलने वाली समस्याएं हैं, जिन्हें जीवनशैली (लाइफस्टाइल) में बदलाव और डॉक्टरी मदद से मैनेज किया जा सकता है।
ये स्थितियाँ लंबे समय तक रह सकती हैं, लेकिन सही मैनेजमेंट से लक्षण काफी हद तक कंट्रोल में आ सकते हैं।
PCOS डाइट, व्यायाम, दवाइयों और तनाव के सही प्रबंधन (stress management) के साथ, PCOS के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
एक आदर्श PCOD डाइट कम जीआई (low-GI) वाले खाद्य पदार्थों, लीन प्रोटीन, सब्जियों, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स (स्वस्थ वसा) का एक मिश्रण होती है।
यह आहार में बदलाव, दवाओं और प्रजनन उपचारों (यदि आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं) का एक संयोजन है।
रोटरडैम क्राइटेरिया (Rotterdam criteria) के अनुसार: यहाँ दिए गए तीन लक्षणों में से कम से कम दो का होना जरूरी है - अनियमित पीरियड्स, शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) की अधिकता, या ओवरी में सिस्ट (गांठें) होना।
यह PCOS का एक ऐसा प्रकार है जिसमें महिलाओं का वजन ज्यादा नहीं होता (यानी वे दुबली-पतली होती हैं), लेकिन उनके शरीर में हार्मोनल असंतुलन रहता है और उनके पीरियड्स अनियमित होते हैं।