PCOS महिलाओं में पाई जाने वाली एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जो खास तौर पर प्रजनन आयु की कई महिलाओं को प्रभावित करती है। इसके सटीक कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं, लेकिन रिसर्च के अनुसार इंसुलिन रेज़िस्टेंस, हार्मोन का खाने-पीने की गलत आदतें, वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और परिवार में PCOS की समस्या ये सभी कारण मिलकर जोखिम को और बढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि इन वजहों से अंडाशय का सामान्य कामकाज बिगड़ जाता है, जिससे PCOS के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।बहुत सी महिलाओं के मन में इस समय कई सवाल आते हैं जैसे PCOS क्यों होता है? क्या इससे प्रेग्नेंसी में समस्या आती है? क्या मास्टरबेशन से PCOS होता है? (इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।) आगे हम सरल शब्दों में जानेंगे कि PCOS किन कारणों से बढ़ता है और इससे जुड़ी आम गलतफहमियों को समझेंगे।
PCOS महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे आम हार्मोनल समस्या है। इसमें ओवरीज़ ज़रूरत से ज़्यादा एंड्रोजन (मेल हार्मोन) बनाती हैं, जिससे शरीर के हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाता है। इसी कारण पीरियड्स देर से आना, पीरियड्स मिस होना, ओव्यूलेशन में दिक्कत, चेहरे पर अनचाहे बाल, एक्ने और हेयर फॉल जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
बहुत सी महिलाओं के मन में इस समय कई सवाल आते हैं जैसे PCOS क्यों होता है? क्या इससे प्रेग्नेंसी में समस्या आती है? क्या मास्टरबेशन से PCOS होता है? (इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।) आगे हम सरल शब्दों में जानेंगे कि PCOS किन कारणों से बढ़ता है और इससे जुड़ी आम गलतफहमियों को समझेंगे।
ध्यान रखने वाली बात है कि PCOS एक ही कारण से नहीं होता, बल्कि कई हार्मोनल, जेनेटिक और लाइफ स्टाइल फैक्टर्स मिलकर इस स्थिति को जन्म देते हैं।
हार्मोनल असंतुलन PCOS के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। सामान्य रूप से पीरियड्स और ओव्यूलेशन को LH (Luteinizing Hormone) और FSH (Follicle Stimulating Hormone) मिलकर नियंत्रित करते हैं, लेकिन PCOS में इन दोनों हार्मोनों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण अंडा सही से विकसित नहीं हो पाता, ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। ब्लड टेस्ट में LH और एंड्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर इसी हार्मोनल गड़बड़ी की पुष्टि करता है।
इंसुलिन रेज़िस्टेंस PCOS का सबसे आम कारण माना जाता है। इसमें शरीर इंसुलिन को सही तरह से उपयोग नहीं कर पाता, जिसके कारण खून में इंसुलिन का स्तर बढ़ने लगता है। ज्यादा इंसुलिन ओवरीज़ को और अधिक एंड्रोजन बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे हार्मोनल गड़बड़ी बढ़ जाती है।
इसका असर वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने के रूप में दिखता है और आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज़ का जोखिम भी बढ़ जाता है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो अंडोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) की प्रक्रिया बाधित हो सकती है, जिसके कारण मासिक चक्र गड़बड़ा जाता है और गर्भधारण में कठिनाई आने की संभावना बढ़ जाती है।
महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन यानी मेल हार्मोन स्वाभाविक रूप से थोड़ी मात्रा में बनता है, लेकिन PCOS में इसकी मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा हो जाती है। इससे ओव्यूलेशन पर सीधा असर पड़ता है और अंडा बाहर नहीं आ पाता। इसी कारण चेहरे और शरीर पर मोटे बाल उगने लगते हैं, मुंहासे बढ़ जाते हैं और बाल झड़ने लगते हैं। यह हार्मोनल बदलाव प्रेग्नेंसी में दिक्कत का कारण भी बन सकता है, इसलिए PCOS में इन्फर्टिलिटी का जोखिम ज्यादा होता है।
PCOS से प्रभावित कई महिलाओं के शरीर में अंदरूनी स्तर पर हल्की-सी सूजन रहती है जिसे लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन कहा जाता है। यह सूजन शरीर में इंसुलिन के असर को कम कर देती है और ओवरीज़ को अधिक एंड्रोजन बनाने के लिए प्रेरित करती है। इस वजह से थकान, स्किन प्रॉब्लम्स और अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं सामने आ सकती हैं।
PCOS का संबंध परिवार के इतिहास से भी जोड़ा गया है। यदि आपकी माँ, बहन या किसी करीबी महिला रिश्तेदार को PCOS, डायबिटीज़ या अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है, तो आपके अंदर भी PCOS होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन यह केवल जेनेटिक्स पर निर्भर नहीं करता, गलत लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारण भी इसे ट्रिगर या बढ़ा सकते हैं।
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मुख्य कारणों के अलावा कुछ और फैक्टर भी हैं जो PCOS सिंप्टोम्स को ट्रिगर कर सकते हैं या इन्हें और बढ़ा सकते हैं।
आजकल किए जा रहे कई वैज्ञानिक शोध यह दिखा रहे हैं कि प्लास्टिक की चीजों, कीटनाशकों और सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में मौजूद कुछ केमिकल्स (EDCs- Endocrine Disrupting Chemicals) शरीर की हार्मोन प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं और PCOS का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
थायरॉयड की गड़बड़ी, चयापचय (Metabolic Syndrome) से जुड़ी समस्याएं या शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन भी PCOS के लक्षणों को और ज़्यादा बढ़ा सकती हैं। ऐसी स्थितियों के कारण PCOS की सही समय पर पहचान करना और उसका इलाज करना, दोनों ही और चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
हाँ, ऐसा बिल्कुल संभव है। कई महिलाओं का वजन सामान्य होता है, उन्हें इंसुलिन रेज़िस्टेंस नहीं होता और न ही परिवार में PCOS का कोई इतिहास होता है, फिर भी उनमें PCOS पाया जा सकता है। ऐसी स्थितियों में अक्सर सिर्फ पीरियड्स का अनियमित होना या हल्का हार्मोनल असंतुलन दिखाई देता है, जबकि आम लक्षण जैसे तेजी से वजन बढ़ना या चेहरे पर घने/मोटे बाल उगना हर PCOS वाली महिला में जरूरी नहीं कि दिखे।
इसी वजह से यह समझना ज़रूरी है कि PCOS कोई एक जैसा रहने वाला रोग नहीं, बल्कि अलग-अलग कारणों और लक्षणों से जुड़ी एक जटिल स्थिति है। इसलिए PCOS का इलाज भी हर महिला के लिए अलग होना चाहिए और डॉक्टर को इलाज की योजना उसकी जरूरत और स्थिति के हिसाब से बनानी चाहिए।
PCOS सिर्फ प्रजनन तंत्र से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि अगर इसे लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो यह पूरे शरीर की सेहत पर असर डाल सकती है। इसलिए PCOS के कारणों को समझना और समय रहते इसे काबू में रखना, महिलाओं की लंबी अवधि की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। अगर PCOS और उससे जुड़ी परेशानियों का इलाज न किया जाए, तो आगे चलकर कई तरह के जोखिम बढ़ सकते हैं:
PCOS वाली महिलाओं में अक्सर वजन बढ़ना, पेट पर चर्बी जमा होना, रक्तचाप बढ़ना, और खून में वसा (कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड) की गड़बड़ी देखी जाती है। यह सब मिलकर आगे चलकर उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक जैसे जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
इसीलिए, PCOS को सिर्फ “पीरियड की प्रॉब्लम” मानकर न टालें। समय पर जांच, डॉक्टर से सलाह, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद से इसे संभालना, आपकी आने वाले सालों की सेहत के लिए बेहद अहम है।
PCOS जितना जल्दी पहचाना जाता है, उतनी जल्दी महिला अपने रोजमर्रा के तौर, तरीके बदलना शुरू कर सकती है, जैसे खानपान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से इलाज लेना। इससे हार्मोन का संतुलन बेहतर करने और प्रजनन से जुड़ी परेशानियों को समय रहते संभालने में मदद मिलती है।
PCOS सिर्फ एक अंग को नहीं, पूरे शरीर के कई हिस्सों और उनके कामकाज को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अक्सर स्त्री रोग विशेषज्ञ, हार्मोन विशेषज्ञ और आहार विशेषज्ञ, इन सबकी मिलकर भूमिका जरूरी हो जाती है। टीम के रूप में किया गया इलाज PCOS से जुड़े खतरों को कम करने और लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मदद करता है।
याद रखें, PCOS को संभालना सिर्फ गर्भधारण या माँ बनने के लिए नहीं है, बल्कि आपकी आने वाले वर्षों की समग्र सेहत की सुरक्षा के लिए भी है।
महिलाओं में बढ़े हुए पुरुष हार्मोन, इंसुलिन का ठीक से काम न करना, हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक प्रवृत्ति और रोजमर्रा की जीवन शैली, ये सब मिलकर PCOS के अलग, अलग कारण बन सकते हैं। यह समस्या प्रजनन स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है। कई मामलों में PCOS के कारण बांझपन की समस्या देखी जाती है और इलाज न होने पर गर्भधारण करना कठिन हो सकता है।
अच्छी बात यह है कि आधुनिक ट्रीटमेंट तरीकों, रोजमर्रा की आदतों में सुधार और भोजन की बेहतर योजना के साथ PCOS में प्रजनन से जुड़ा इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है।
Indira IVF केन्द्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर PCOS से जुड़ी बांझपन की समस्या वाली महिलाओं के लिए उनकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना बनाते हैं और उन्नत प्रजनन तकनीकों की मदद से उन्हें माता, पिता बनने की इच्छा पूरी करने में सहयोग देते हैं।
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हाँ। PCOS में ओवरी ज़्यादा एंड्रोजन बनाती है, जिसकी वजह से चेहरे शरीर पर अनचाहे बाल (hirsutism), मुहांसे और सिर के बाल पतले होना जैसे लक्षण दिखते हैं।
सिर्फ़ तनाव से PCOS हो जाता है, ऐसा साबित नहीं है, लेकिन लंबा स्ट्रेस कोर्टिसोल और इंसुलिन रेज़िस्टेन्स बढ़ाकर हार्मोनल गड़बड़ी और PCOS के लक्षणों को ज़रूर बिगाड़ सकता है।
PCOS में हार्मोनल असंतुलन तो होता ही है, लेकिन इसके साथ इंसुलिन रेज़िस्टेंस, जेनेटिक कारण, वजन और लाइफस्टाइल भी मिलकर असर डालते हैं। यानी PCOS कई कारणों का मिला–जुला परिणाम है, सिर्फ एक हार्मोन की गड़बड़ी से होने वाली बीमारी नहीं है।
हाँ। फैमिली हिस्ट्री हो तो रिस्क बढ़ता है, लेकिन बिना किसी इतिहास के भी कई महिलाओं को PCOS होता है, जिसमें लाइफस्टाइल और आस-पास के माहौल से जुड़े कारणों की भूमिका ज़्यादा रहती है।
PCOS में बढ़ा हुआ टेस्टोस्टेरोन खुद इस सिंड्रोम की एक खास पहचान है। यह आम तौर पर इंसुलिन रेज़िस्टेंस और ओवरी के हार्मोनल बदलाव की वजह से बढ़ता है, ज्यादातर मामलों में यह अपने-आप अकेला कारण नहीं होता।
PCOS का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन वजन कम करने, हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और सही दवाओं से इंसुलिन रेज़िस्टेंस और ओव्यूलेशन में अच्छा सुधार हो सकता है, जिससे लक्षण और भविष्य के जोखिम काफी कम हो जाते हैं।
लो-GI कार्ब्स, फाइबर, पर्याप्त प्रोटीन और कम शुगर/रिफाइंड कार्ब्स वाली डाइट से वजन, ब्लड शुगर और एंड्रोजन लेवल बेहतर रहते हैं। ज्यादा शुगर, जंक फ़ूड और प्रोसेस्ड चीजें PCOS को और बिगाड़ सकती हैं।
दोनों। PCOS में हार्मोनल बदलाव से वज़न, खासकर पेट पर, बढ़ता है; और ज़्यादा वज़न खुद इंसुलिन रेज़िस्टेन्स बढ़ाकर PCOS को और खराब करता है। थोड़ा वज़न कम करने से ही पीरियड्स और ओव्यूलेशन बेहतर हो सकते हैं।
हाँ। PCOS में अनियमित या न होने वाला ओव्यूलेशन गर्भ ठहरने में दिक्कत दे सकता है। लेकिन लाइफस्टाइल सुधार, ओव्यूलेशन इंड्यूस करने वाली दवाओं और जरूरत पर IVF जैसी तकनीकों से कई महिलाएं सफलतापूर्वक प्रेग्नेंट होती हैं।
लंबे समय तक अनियमित या बहुत कम पीरियड्स रहें तो एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरूनी परत) पर असर पड़ कर एंडोमेट्रियल कैंसर का रिस्क थोड़ा बढ़ सकता है, खासकर मोटापा/डायबिटीज के साथ। ओवरी और ब्रेस्ट कैंन्सर के लिए सबूत इतने साफ नहीं हैं।