Septate Uterus क्या है? जानें इसके लक्षण, प्रेगनेंसी पर असर और इलाज

Last updated: September 17, 2026

सारांश (Overview)

कई महिलाओं में बार बार मिसकैरेज की वजह गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) के अंदर बनी एक पतली दीवार होती है, जिसे सेप्टम (septum) कहते हैं। इसी बनावट को सेप्टेट यूट्रस (septate uterus) कहते हैं।

सेप्टेट यूट्रस कोई बीमारी नहीं है, न ही यह किसी लापरवाही या पुरानी गलती का नतीजा है। यह जन्म से मौजूद रहती है और ज्यादातर महिलाओं को इसका पता तब तक चलता ही नहीं, जब तक प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत सामने न आए।

इस आर्टिकल में आगे आप समझेंगी कि सेप्टम बनता कैसे है, प्रेगनेंसी पर इसका असर कितना होता है, सही जांच कौन सी मानी जाती है, और किन महिलाओं में सर्जरी से सचमुच फायदा होता है।

Septate uterus होता क्या है?

फीमेल चाइल्ड का यूट्रस बनना माँ के पेट में ही शुरू हो जाता है। सातवें से आठवें हफ्ते के आसपास दो नलियां आपस में जुड़कर यूट्रस का आकार बनाती हैं। इन नलियों के जुड़ने से दोनों के बीच में एक पतली दीवार बन जाती है, जिसे बीसवें हफ्ते तक अपने आप घुल जाना चाहिए।

जब यह दीवार पूरी तरह नहीं घुलती, वही बची हुई परत यूट्रस के अंदर रह जाती है। इसे सेप्टम और इस तरह बने यूट्रस को septate uterus कहते हैं। 

समझने वाली बात यह है कि बाहर से यूट्रस बिल्कुल सामान्य दिखता है। उसका आकार, साइज़ और बाहरी सतह नॉर्मल रहती है। बदलाव सिर्फ़ अंदर की खाली जगह में होता है, जो एक पूरी कैविटी की जगह बीच से बंटी हुई होती है।

सेप्टम दो तरह का हो सकता है। पार्शियल सेप्टम ऊपर से शुरू होकर बीच तक आता है और नीचे की जगह खुली रहती है। कंप्लीट सेप्टम ऊपर से नीचे सर्विक्स (cervix) तक चला जाता है, और कुछ महिलाओं में यह वजाइना तक भी दिखता है।

यूट्रस की जन्म से पायी जाने वाली बनावटों में यह सबसे कॉमन है। सभी जन्मजात यूटेराइन बनावटों में करीब 55% हिस्सा इसी का है, और लगभग डेढ़ प्रतिशत महिलाओं में यह मौजूद रहता है।

 

सेप्टम बनने की वजह क्या होती है?

इसकी वजह ग्रोथ के दौरान की एक अधूरी प्रक्रिया है, न कि कोई ऐसी चीज़ जो बाद में हुई हो। सेप्टम किसी दवा, पुराने अबॉर्शन, और खानपान या लाइफस्टाइल से नहीं बनता। जिन महिलाओं सेप्टेट यूट्रस पाया जाता है, उनके मन में सबसे पहले यही ख़्याल आता है कि कहीं उनकी किसी गलती से तो ऐसा नहीं हुआ। लेकिन यह सच नहीं है। 

परिवार में किसी महिला का यूट्रस ऐसी बनावट का रहा हो तो संभावना थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन इसका कोई निश्चित पैटर्न नहीं मिलता।

एक और बात जानने लायक है। यूट्रस की जन्मजात बनावटों के साथ कभी कभी किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट की बनावट में भी अंतर मिलता है। लेकिन जब सिर्फ़ सेप्टम हो और कोई दूसरा लक्षण न हो, तो किडनी की अलग जांच की ज़रूरत नहीं पड़ती।

Septate uterus के लक्षण साफ़ क्यों नहीं दिखते?

ज़्यादातर महिलाओं में सेप्टेट यूट्रस का कोई लक्षण होता ही नहीं है। उनके पीरियड्स समय पर आते हैं, फ्लो सामान्य रहता है, और शारीरिक संबंध बनाने में भी कोई तकलीफ़ नहीं होती।

कुछ महिलाओं को पीरियड्स में ज़्यादा दर्द या ज़्यादा ब्लीडिंग होती है, लेकिन ये लक्षण इतने आम हैं कि इनसे सीधे सेप्टम का शक नहीं जाता।

इसलिए यह ज़्यादातर तीन हालात में पकड़ में आता है। या तो बार-बार मिसकैरेज के बाद जांच में, या प्रेगनेंसी न ठहरने पर की जाने वाली फर्टिलिटी जांच में, या फिर किसी और वजह से हुए अल्ट्रासाउंड में संयोग से।

प्रेगनेंसी पर Septate uterus का असर कैसे पड़ता है?

सेप्टेट यूट्रस में प्रेगनेंसी पर असर सेप्टम की बनावट की वजह से पड़ता है। यह मसल जैसी नहीं, बल्कि रेशेदार टिश्यू होती है। इसमें खून की सप्लाई कम रहती है और इसके ऊपर बनने वाली एंडोमेट्रियम (endometrium) की परत भी पतली और कमज़ोर होती है।

अब अगर एम्ब्रियो (embryo) यूट्रस की सामान्य दीवार पर जाकर इम्प्लांट होता है, तो उसे पर्याप्त खून और पोषण मिलता है। लेकिन अगर वह सेप्टम पर जाकर इम्प्लांट हो जाए, तो वहाँ न पर्याप्त खून पहुँचता है और न ही वहाँ मज़बूत एंडोमेट्रियम की परत होती है। यही वजह है कि सेप्टेट यूट्रस वाली प्रेगनेंसी शुरुआती हफ्तों में ही समाप्त हो सकती है।

डाटा में भी यह फर्क साफ़ दिखाई देता है। सामान्य यूट्रस में पहली तिमाही में मिसकैरेज की दर करीब 12% रहती है, जबकि septate uterus में यही दर बढ़कर लगभग 42% तक पहुँच सकती है।

इसका दूसरा असर प्रेगनेंसी के आगे के समय में दिखाई देता है। यूट्रस के अंदर जगह कम होने की वजह से बच्चे की पोजीशन उल्टी रह सकती है और समय से पहले डिलीवरी यानी प्रीटर्म लेबर (preterm labor) का रिस्क करीब 6 से 16% तक देखा जाता है।

लेकिन यहाँ एक बात समझना जरूरी है। यह हर महिला के साथ नहीं होता। बहुत सी महिलाएं इसी बनावट के साथ पूरी प्रेगनेंसी बिना किसी बड़ी परेशानी के निकाल लेती हैं और उन्हें कभी पता भी नहीं चलता कि उनके यूट्रस में सेप्टम मौजूद है।

Septate uterus और bicornuate uterus में क्या अंतर है

सेप्टेट यूट्रस में यूट्रस की बाहरी सतह पूरी तरह सामान्य होती है, सिर्फ उसके अंदर एक दीवार बनी होती है। बाइकॉर्नुएट (bicornuate) यूट्रस में यूट्रस बाहर से भी ऊपर की तरफ दबा हुआ या दिल के आकार जैसा दिखता है, यानी बनावट का अंतर बाहर तक दिखाई देता है।

 

अंतर

Septate uterus

Bicornuate uterus

बनावट

बाहर से यूटरस सामान्य, बस अंदर सेप्टम बना होता है।        

यूटरस बाहर से भी दिल के आकार जैसा दिखता है।

इलाज

सेप्टम को हिस्टेरोस्कोपी से हटाया जा सकता है।

आमतौर पर ऐसी सर्जरी नहीं की जाती।

पहचान

2D अल्ट्रासाउंड और HSG में इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।

बाहरी बनावट न दिखने पर इसे Septate uterus समझा जा सकता है।

क्या हर septate uterus में ऑपरेशन जरूरी होती है?

अगर बार-बार मिसकैरेज हो चुके हैं, तो सेप्टम हटाने का विकल्प सामने रखा जाता है, क्योंकि ऐसे मामलों में मिसकैरेज कम होते देखे गए हैं। अगर प्रेगनेंसी नहीं ठहर रही और सेप्टम मिला है, तो सर्जरी से फायदा हो भी सकता है और नहीं भी। इसलिए फैसला डॉक्टर और मरीज़ मिलकर लेते हैं। और अगर अभी तक प्रेगनेंसी की कोशिश ही नहीं की गई है, या सेप्टम किसी दूसरी जांच में संयोग से मिला है, तो सिर्फ़ बचाव के लिए सर्जरी कराने का कोई ठोस आधार नहीं है।

इसमें छोटा सा ऑपरेशन होता है, लेकिन इसमें रिस्क हो सकता है। इसलिए इसका फैसला सिर्फ आपकी रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि आपकी पूरी हिस्ट्री देखकर लिया जाना चाहिए।

सेप्टम का ऑपरेशन और उसके बाद कब कोशिश करें?

सेप्टम हटाने के प्रोसेस को हिस्टेरोस्कोपिक मेट्रोप्लास्टी कहते हैं। इसमें पेट पर कोई चीरा नहीं लगता। एक पतला कैमरा सर्विक्स के रास्ते अंदर डाला जाता है और सेप्टम को काटकर कैविटी को खोल दिया जाता है। यह डे केयर प्रोसीजर है, इसलिए ज़्यादातर महिलाएं उसी दिन घर लौट जाती हैं।

इसमें रिकवरी जल्दी हो जाती है। आमतौर पर एक से दो महीने बाद प्रेगनेंसी की कोशिश या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू किया जा सकता है। कई डॉक्टर इससे पहले एक छोटी दोबारा जांच करते हैं, ताकि यह पक्का हो जाए कि कैविटी ठीक से खुली है और कोई चिपकाव तो नहीं बना है।

Septate uterus और IVF

एक गलतफ़हमी यह है कि IVF कराने से सेप्टम की दिक्कत अपने आप हल हो जाएगी। ऐसा नहीं होता। IVF में एम्ब्रियो उसी यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए उसके वहाँ इम्प्लांट होने और ग्रोथ की जगह वही रहती है जो पहले थी।

इसलिए IVF की प्लानिंग करते समय सेप्टम को अलग से देखा जाता है। अगर पहले ट्रांसफर के बाद एम्ब्रियो बार बार इम्प्लांट नहीं हो पा रहा, या मिसकैरेज हो रहे हैं, तो ट्रांसफर से पहले सेप्टम हटाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अगर सेप्टम बहुत छोटा है और ऐसी कोई हिस्ट्री नहीं है, तो सीधे IVF के लिए जाया जा सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही शुरुआती अल्ट्रासाउंड जरूरी है, ताकि यह देखा जा सके कि एम्ब्रियो कहाँ इम्प्लांट हुआ है।

आगे बच्चे की ग्रोथ पर नज़र रखी जाती है, क्योंकि जगह कम होने पर ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। समय से पहले होने वाले दर्द, दबाव या ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें, इन्हें तुरंत बताना चाहिए। आखिरी हफ्तों में बच्चे की पोजीशन देखकर डिलीवरी का तरीका तय किया जाता है, क्योंकि पोजीशन उल्टी होने पर सिजेरियन की ज़रूरत पड़ सकती है

याद रखने वाली मुख्य बातें

  • Septate uterus जन्म से मौजूद बनावट है, बीमारी नहीं, और इसमें किसी की कोई गलती नहीं होती।
  • ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता, इसलिए यह अक्सर मिसकैरेज या फर्टिलिटी जांच के दौरान पकड़ में आता है।
  • सबसे भरोसेमंद पहली जांच 3D अल्ट्रासाउंड है, क्योंकि यह सेप्टेट और बाइकॉर्नुएट का फर्क साफ़ कर देती है।
  • सर्जरी का फैसला रिपोर्ट से नहीं, आपकी हिस्ट्री से तय होता है। बार-बार मिसकैरेज में विकल्प मज़बूत है, बिना कोशिश किए बचाव के लिए नहीं।
  • सर्जरी के बाद आमतौर पर एक से दो महीने में कोशिश शुरू की जा सकती है। 

 

निष्कर्ष (Conclusion)

Septate uterus का पता चलना डरावना लग सकता है, लेकिन यह ऐसी स्थिति है जिसका कारण साफ़ है और सही जांच के बाद इलाज की जरूरत तय की जा सकती है। अच्छी बात यह है कि कई महिलाएं इस बनावट के साथ बिना किसी दखल के सामान्य प्रेगनेंसी पूरी करती हैं।

अगर रिपोर्ट में सेप्टम मिला है, तो अगला कदम तुरंत सर्जरी कराना नहीं, बल्कि यह समझना है कि आपकी हिस्ट्री में इसकी जरूरत बनती है या नहीं। बार-बार मिसकैरेज हुए हैं तो फैसला अलग हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में इंतज़ार करना भी सही विकल्प हो सकता है। इसलिए अपनी फर्टिलिटी डॉक्टर से बात करके ही अगला कदम तय करें।

Septate uterus के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सेप्टेट यूट्रस क्या होता है?

क्या सेप्टेट यूटेरस में नॉर्मल प्रेगनेंसी हो सकती है?

क्या सेप्टेट यूट्रस से हमेशा इनफर्टिलिटी होती है?

सेप्टेट यूट्रस के लक्षण क्या होते हैं?

सेप्टेट यूट्रस का इलाज क्या है?

क्या सेप्टेट यूट्रस बिना सर्जरी के ठीक हो सकता है?

क्या सेप्टेट यूट्रस दवा या घरेलू उपाय से ठीक हो जाता है?

सेप्टेट यूट्रस की सर्जरी के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी की कोशिश कर सकते हैं?

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