ब्लास्टोसिस्ट: अर्थ, भूमिका और IVF में महत्व

Last updated: December 02, 2025

Overview

IVF बार-बार फेल हो रहा है? जानिए कैसे 'ब्लास्टोसिस्ट' तकनीक बढ़ा सकती है आपके माता-पिता बनने के चांस। IVF की जर्नी में हर दिन एक नई उम्मीद और एक नए स्टेप से जुड़ा होता है। एग और स्पर्म के मिलने से हुए फर्टिलाइजेशन के बाद लैब में बना हुआ छोटा-सा एम्ब्रीओ आगे बढ़ते-बढ़ते एक महत्वपूर्ण स्टेज पर पहुँचता है जिसे ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) कहा जाता है। यह स्टेज IVF की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ब्लास्टोसिस्ट बताता है कि एम्ब्रीओ कितना स्वस्थ है और गर्भाशय यूट्रस में जाकर इम्प्लांटेशन की उसकी क्षमता कितनी है। इस आर्टिकल में हम बहुत ही आसान भाषा में Blastocyst meaning in Hindi समझेंगे, साथ ही जानेंगे कि आईवीएफ की सफलता में यह गेम-चेंजर क्यों है।

ब्लास्टोसिस्ट क्या है? (What is a Blastocyst in Hindi?)

जब लैब में एग और स्पर्म मिलते हैं, तो भ्रूण यानी एम्ब्रीओ बनने की शुरुआत होती है। शुरुआत के 2-3 दिन तो यह सिर्फ कोशिकाओं यानी सेल्स (Cells) का एक साधारण सा गोला या गुच्छा होता है। लेकिन 5वें या 6वें दिन तक यह बड़ा होकर एक बहुत ताकतवर और खास आकार ले लेता है। इसी '5 दिन के तैयार एम्ब्रीओ' को डॉक्टर 'ब्लास्टोसिस्ट' कहते हैं।

इसको आसान भाषा में समझें तो ब्लास्टोसिस्ट तीन मुख्य हिस्सों से बना होता है:

  • आंतरिक हिस्सा (Inner Cell Mass): सेल्स का यह अंदर वाला हिस्सा ही आगे चलकर शिशु बनता है।
  • बाहरी परत (Trophectoderm): यह बाहर वाली परत है जो आगे चलकर 'नाल' या प्लेसेंटा (Placenta) बनती है और भ्रूण को मां के पेट यानी यूट्रस(बच्चेदानी) से चिपकाने में मदद करती है।
  • ब्लास्टोसील (Blastocoel): यह भ्रूण के अंदर पानी जैसी थैली मतलब फ्लूइड कैविटी (Fluid cavity) होती है।

ब्लास्टोसिस्ट और निःसंतानता का संबंध (Blastocyst and Infertility)

कई बार कपल्स पूछते हैं कि "सब कुछ ठीक था, फिर भी प्रेगनेंसी क्यों नहीं ठहरी?" यहां ब्लास्टोसिस्ट प्रेगनेंसी नहीं ठहरने के पीछे की वजहें सामने लाने का काम करता है।

  • प्राकृतिक फ़िल्टर (Natural Selection): हर भ्रूण में इतनी ताकत नहीं होती कि वह 5वें दिन तक जिंदा रह सके। जो भ्रूण अंदर से कमजोर होते हैं, वे तीसरे दिन के बाद ही दम तोड़ देते हैं या बढ़ना बंद कर देते हैं। ब्लास्टोसिस्ट तक ले जाने का फायदा यह है कि कमजोर वाले अपने आप रेस से बाहर हो जाते हैं और 5वें दिन हमें सिर्फ वही भ्रूण मिलता है जो सबसे हेल्दी है।
  • स्पर्म और एग क्वालिटी का सच: अगर भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट बनने से पहले ही दम तोड़ दे, तो यह इशारा करता है कि या तो अंडे की क्वालिटी कमजोर थी या फिर स्पर्म में डीएनए की समस्या (Sperm DNA Fragmentation) है।
  • इलाज की सही दिशा: डॉक्टर को यह समझने में आसानी होती है कि अगली बार कामयाबी के लिए इलाज में क्या बदलाव करना होगा।

ब्लास्टोसिस्ट IVF में क्यों महत्वपूर्ण है? (Importance of Blastocyst in IVF)

पुराने समय में डॉक्टर डे-3 (Day-3) वाले भ्रूण को ही यूट्रस में डाल देते थे, लेकिन अब ब्लास्टोसिस्ट in IVF (डे-5 ट्रांसफर) को 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है। आखिर क्यों?

  • शरीर के साथ सही तालमेल (Physiological Timing): कुदरती रूप से यानि नेचुरली, भ्रूण फैलोपियन ट्यूब से होते हुए 5वें दिन ही यूट्रस में पहुंचता है। ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर बिल्कुल इसी नेचुरल टाइम की नकल करता है, जिससे गर्भाशय उसे आसानी से अपना लेता है।
  • चिपकने की ज्यादा ताकत: तीसरे दिन वाले भ्रूण के मुकाबले, ब्लास्टोसिस्ट (5 दिन वाला) ज्यादा तैयार होता है। इसकी बाहरी परत इतनी विकसित हो चुकी होती है कि यह बच्चेदानी की दीवार से फटाफट और मजबूती से चिपक (Implantation) जाता है। इसीलिए इससे प्रेगनेंसी रुकने की उम्मीद बहुत बढ़ जाती है।
  • जुड़वा बच्चों का जोखिम कम: क्योंकि ब्लास्टोसिस्ट से कामयाबी मिलने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं, डॉक्टर एक बार में एक ही भ्रूण (Single Embryo Transfer) डालने की सलाह देते हैं, जिससे जुड़वा या तीन बच्चों की रिस्की प्रेगनेंसी से बचा जा सकता है।

ब्लास्टोसिस्ट कब बनता है और कैसे पहचाना जाता है? (Blastocyst Formation & Identification)

ब्लास्टोसिस्ट, एग और स्पर्म के मिलने के 5 या 6 दिन बाद तैयार होता है। लैब में एक्सपर्ट्स जिन्हें एम्ब्रियोलॉजिस्ट कहते हैं, माइक्रोस्कोप से इसकी बारीकी से जांच करते हैं कि यह कितना अच्छा और मजबूत बना है। डॉक्टर इसे 'ग्रेड' देते हैं। इसे गार्डनर ग्रेडिंग (Gardner Grading) कहते हैं, जिसमें तीन चीजें देखी जाती हैं:

  • भ्रूण का आकार कितना बड़ा हुआ है (Expansion)।
  • बच्चा बनाने वाली कोशिकाएं (ICM) कितनी घनी हैं।
  • नाल बनाने वाली कोशिकाएं (TE) कितनी जुड़ी हुई हैं।

उदाहरण के लिए, 4AA या 5AB ग्रेड के ब्लास्टोसिस्ट को सबसे बेहतरीन माना जाता है।

ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर के फायदे और सफलता दर (Benefits & Success Rate of Blastocyst Transfer)

  • कामयाबी की उम्मीद ज्यादा: 3 दिन वाले भ्रूण के मुकाबले, ब्लास्टोसिस्ट (5 दिन वाले भ्रूण) से बच्चा ठहरने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं।
  • गर्भपात यानि मिसकैरेज (Miscarriage) का कम खतरा: अक्सर शुरुआती मिसकैरेज भ्रूण की जेनेटिक खराबी से होता है। जो भ्रूण लैब में 5 दिन तक सर्वाइव कर गया, उसके जेनेटिक रूप से स्वस्थ होने की संभावना ज्यादा होती है, इसलिए मिसकैरेज का खतरा कम हो जाता है।
  • जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) संभव: अगर किसी कपल को खानदानी बीमारी है, तो भ्रूण की बायोप्सी केवल ब्लास्टोसिस्ट स्टेज पर ही सुरक्षित रूप से की जा सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

IVF का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन साइंस ने अब इसे बहुत पक्का कर दिया है। ब्लास्टोसिस्ट केवल कोशिकाओं का समूह नहीं, बल्कि यह एक 'सर्वाइवर' (Survivor) है जो तमाम मुश्किलों को पार करके यहां तक पहुंचा है। अगर आपका भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट तक पहुंच गया है, तो समझिये आपने आधी जंग जीत ली है। सही डॉक्टर और धैर्य के साथ, यह नन्ही सी शुरुआत जल्द ही आपके घर में बच्चे की किलकारी बनकर गूंज सकती है।

ब्लास्टोसिस्ट और निःसंतानता से जुड़े आम सवाल

क्या हर IVF साइकिल में ब्लास्टोसिस्ट (5 दिन का भ्रूण) बन जाता है?

 

नहीं। औसतन, फर्टिलाइज हुए अंडों में से केवल 40% से 50% ही 5वें दिन तक ब्लास्टोसिस्ट बन पाते हैं। यह पूरी तरह अंडों और स्पर्म की क्वालिटी पर निर्भर करता है।

ब्लास्टोसिस्ट से निःसंतानता का पता कैसे चलता है?

 

अगर भ्रूण 3 दिन के बाद बढ़ना बंद कर दे, तो समझ आता है कि उसमें आगे बढ़ने की अंदरूनी ताकत नहीं थी यानी उसका अपना सिस्टम चालू नहीं हुआ। यह साफ इशारा करता है कि या तो स्पर्म कमजोर था या एग की क्वालिटी ठीक नहीं थी।

इससे सफलता (Success Rate) मिलने के कितने चांस हैं?

 

35 साल से कम उम्र की महिलाओं में ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर की सक्सेस रेट 50-60% तक हो सकती है, यह 3 दिन वाले भ्रूण के मुकाबले काफी बेहतर रिजल्ट देता है।

ब्लास्टोसिस्ट कल्चर क्या है?

 

लैब का वह तरीका है जिसमें नन्हे भ्रूण को बिल्कुल 'मां के पेट जैसा' माहौल (वही तापमान और खाना-पीना) दिया जाता है। उसे एक खास मशीन (इनक्यूबेटर) में 5 से 6 दिन तक पाल-पोसकर बड़ा किया जाता है।

ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर के बाद क्या उम्मीद करें?

 

ट्रांसफर के बाद, ब्लास्टोसिस्ट को गर्भाशय में चिपकने (Implantation) में 24 से 48 घंटे लगते हैं। रिजल्ट जानने के लिए आपको लगभग 10-12 दिन बाद ब्लड टेस्ट कराना होता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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