एस्थेनोज़ोस्पर्मिया क्या है? स्पर्म मोटिलिटी कम होने के कारण और इलाज

Last updated: June 26, 2026

Overview

कई बार सीमेन एनालिसिस रिपोर्ट में स्पर्म काउंट नॉर्मल आता है, लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी नहीं ठहरती। ऐसी स्थिति में समस्या स्पर्म की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गति यानी मोटिलिटी (Motility) हो सकती है। क्योंकि फर्टिलाइजेशन के लिए स्पर्म का सिर्फ मौजूद होना काफी नहीं है, उसे अंडे तक पहुँचने की पूरी यात्रा भी करनी होती है।

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (Asthenozoospermia) वह कंडीशन है जिसमें स्पर्म की मोटिलिटी सामान्य से कम होती है। यानी स्पर्म आगे की दिशा में सही तरीके से नहीं बढ़ पाते। 

NIH StatPearls के अनुसार, मोटिलिटी की दिक्कत के पीछे माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, जेनेटिक म्यूटेशन, या लाइफस्टाइल कारण हो सकते हैं। इलाज कारण पर निर्भर करता है, लेकिन गंभीर मामलों में ICSI से संतान होना पूरी तरह संभव है।

स्पर्म मोटिलिटी कैसे काम करती है?

स्पर्म की पूँछ यानी फ्लैजेलम (Flagellum) उसे आगे बढ़ने में मदद करती है। इस गति के लिए ऊर्जा ATP से मिलती है, जो स्पर्म के मिडपीस में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) बनाते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया जितने हेल्दी और एक्टिव होंगे, स्पर्म की मोटिलिटी उतनी बेहतर होगी।

स्पर्म बनते समय पूरी तरह मैच्योर नहीं होते। एपिडिडाइमिस (Epididymis) में लगभग 2 से 3 वीक के दौरान वे तैरने की क्षमता हासिल करते हैं। इसी दौरान स्पर्म की बाहरी संरचना और कार्यक्षमता में बदलाव आते हैं, जिससे वे एग तक पहुँचने के लिए तैयार हो पाते हैं।

अगर माइटोकॉन्ड्रिया, स्पर्म की पूँछ या एपिडिडाइमिस के कार्य में कोई गड़बड़ी हो, तो स्पर्म की गति प्रभावित हो सकती है और एस्थेनोज़ूस्पर्मिया की समस्या पैदा हो सकती है।

मोटिलिटी के प्रकार: WHO स्टैंडर्ड

कैटेगरीWHO मानकमतलबप्रभाव
PR (Progressive)32% से ज़्यादासीधे तेज़ तैरते हैंफर्टिलाइज़ेशन के लिए सबसे ज़रूरी
NP (Non-Progressive)कोई तय मानक नहींहिलते हैं, आगे नहीं बढ़तेफर्टिलाइज़ेशन में कम योगदान
IM (Immotile)60% से कम होने चाहिएबिल्कुल नहीं हिलतेनेचुरल प्रेगनेंसी में अनुपयोगी
TM (Total Motility)कम से कम 40%PR + NP मिलाकरकुल गतिशीलता का माप

 

प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (PR) वह है जो फर्टिलाइज़ेशन के लिए सबसे ज़रूरी है। इम्मोटाइल स्पर्म की ज्यादा संख्या कभी-कभी नेक्रोज़ूस्पर्मिया (necrozoospermia) यानी मृत स्पर्म का संकेत भी हो सकती है। ICSI में एम्ब्रियोलॉजिस्ट HOS टेस्ट से जीवित लेकिन गतिहीन स्पर्म की पहचान करते हैं।

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया के कारण

माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस

स्पर्म की मोटिलिटी पूरी तरह माइटोकॉन्ड्रिया की ऊर्जा पर निर्भर है। जब ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ती है तो ROS यानी रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (reactive oxygen species) माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुँचाती हैं। इससे ATP उत्पादन कम होता है और स्पर्म की गति धीमी पड़ जाती है।

ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस के कारण हैं: स्मोकिंग, मोटापा, वैरिकोसील, इंफेक्शन, और पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ। ये सब ROS बढ़ाते हैं जो स्पर्म मेम्ब्रेन और माइटोकॉन्ड्रिया दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं। एंटीऑक्सिडेंट सप्लीमेंट इसीलिए मोटिलिटी सुधारने में मदद करते हैं।

स्ट्रक्चरल कारण: प्राइमरी सिलियरी डिस्केनेसिया

प्राइमरी सिलियरी डिस्केनेसिया (primary ciliary dyskinesia) एक दुर्लभ जेनेटिक स्थिति है जिसमें डाइनेइन प्रोटीन की संरचना असामान्य होती है। इसमें स्पर्म की पूँछ हिल नहीं पाती। यह स्थिति पूरी तरह इम्मोटाइल स्पर्मेटोज़ोआ (immotile spermatozoa) का कारण बन सकती है। ICSIF में जीवित लेकिन गतिहीन स्पर्म से भी फर्टिलाइज़ेशन संभव है।

वैरिकोसील

वैरिकोसील एस्थेनोज़ोस्पर्मिया का एक प्रमुख कारण है। टेस्टिकल में बढ़े हुए तापमान और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस दोनों मिलकर माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन को कम करते हैं। वैरिकोसेलेक्टमी के बाद मोटिलिटी में सुधार देखा जाता है।

इंफेक्शन

एपिडिडाइमिस या प्रोस्टेट का इंफेक्शन स्पर्म की परिपक्वता पर सीधा असर करता है। बैक्टीरिया ऐसे एंज़ाइम छोड़ते हैं जो स्पर्म मेम्ब्रेन को नुकसान पहुँचाते हैं और मोटिलिटी कम करते हैं। इनफेक्शन ठीक होने पर कई मामलों में मोटिलिटी सुधर जाती है।

लाइफस्टाइल कारण

  • स्मोकिंग स्पर्म माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुँचाती है और मोटिलिटी कम कर सकती है।
  • स्मोकिंग छोड़ने के लगभग 3 महीने बाद सीमेन एनालिसिस में सुधार दिख सकता है।
  • मोटापा स्क्रोटल तापमान बढ़ाता है और हॉर्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है।
  • लंबे समय तक तनाव रहने पर कोर्टिसोल बढ़ता है, जो टेस्टोस्टेरोन को दबा सकता है।
  • अधिक शराब का सेवन स्पर्म की गुणवत्ता और मोटिलिटी दोनों को प्रभावित कर सकता है।
  • पेस्टिसाइड, हेवी मेटल और अन्य पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ स्पर्म को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  • गोद में लैपटॉप रखकर काम करना टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ा सकता है।
  • गर्म पानी के टब, सौना और ऊँचे तापमान वाले वातावरण में लंबे समय तक रहना स्पर्म प्रोडक्शन और मोटिलिटी दोनों को प्रभावित कर सकता है।

जाँच और डायग्नोसिस

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया की पुष्टि सबसे पहले सीमेन एनालिसिस (Semen Analysis) से की जाती है। इस टेस्ट में प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (PR), नॉन-प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (NP), इम्मोटाइल स्पर्म (IM) और टोटल मोटिलिटी (TM) को मापा जाता है। सही रिपोर्ट के लिए आमतौर पर 2 से 5 दिन के एब्स्टिनेंस के बाद सैंपल दिया जाता है।

अगर मोटिलिटी कम मिलती है, तो डॉक्टर कारण पता लगाने के लिए कुछ अतिरिक्त जाँचों की सलाह दे सकते हैं। कंप्यूटर असिस्टेड स्पर्म एनालिसिस (CASA) स्पर्म की गति और मूवमेंट का अधिक सटीक मूल्यांकन करता है। अगर बार-बार IVF फेल हो रहा हो या एम्ब्रीओ क्वालिटी खराब आ रही हो, तो स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन टेस्ट करवाया जा सकता है। वहीं अगर स्पर्म आपस में चिपकते दिखाई दें, तो एंटीस्पर्म एंटीबॉडी (Antisperm Antibody) टेस्ट की आवश्यकता पड़ सकती है।

कारण की पहचान के लिए FSH, LH, टेस्टोस्टेरोन और प्रोलैक्टिन जैसे हॉर्मोन टेस्ट भी किए जाते हैं। स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड (Scrotal Ultrasound) से वैरिकोसील की पुष्टि की जा सकती है। अगर मोटिलिटी पूरी तरह शून्य हो, तो प्राइमरी सिलियरी डिस्केनेसिया (Primary Ciliary Dyskinesia) जैसी रेयर जेनेटिक कंडीशन की जाँच भी की जा सकती है।

इलाज और फर्टिलिटी विकल्प

लाइफस्टाइल और एंटीऑक्सिडेंट

स्मोकिंग बंद करना, वज़न कम करना, और गर्मी से बचाव पहला कदम है। कोएन्ज़ाइम Q10, विटामिन E, L-कार्निटीन, और ज़िंक माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन और मोटिलिटी दोनों सुधारते हैं। इन्हें 3 से 6 महीने डॉक्टर की सलाह से लें। 72 दिन के स्पर्म चक्र के बाद सीमेन एनालिसिस में फर्क दिखेगा।

वैरिकोसेलेक्टमी

वैरिकोसील के कारण एस्थेनोज़ूस्पर्मिया हो तो वैरिकोसेलेक्टमी सबसे प्रभावी इलाज है। सर्जरी के 3 से 6 महीने बाद मोटिलिटी में सुधार देखा जाता है।

IUI और IVF-ICSI

हल्की एस्थेनोज़ोस्पर्मिया में IUI से काम चल सकता है अगर वाश के बाद पर्याप्त मोटाइल स्पर्म मिलें। गंभीर एस्थेनोज़ोस्पर्मिया में ICSI सबसे सही विकल्प है। ICSI में स्पर्म का तैरना ज़रूरी नहीं, एम्ब्रियोलॉजिस्ट सबसे अच्छा दिखने वाला स्पर्म चुनकर सीधे अंडे में इंजेक्ट करते हैं।

नेक्रोज़ूस्पर्मिया में जहाँ सभी स्पर्म गतिहीन दिखें, HOS टेस्ट (hypo-osmotic swelling test) से जीवित स्पर्म की पहचान होती है। जीवित लेकिन गतिहीन स्पर्म ICSI के लिए उपयोगी होता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

सीमेन एनालिसिस में मोटिलिटी 40% से कम हो, या प्रोग्रेसिव मोटिलिटी 32% से कम हो, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलें। एक साल की कोशिश के बाद प्रेगनेंसी न हो तब भी। पार्टनर की उम्र 35 से ज़्यादा हो तो 6 महीने में।

निष्कर्ष (Conclusion)

एस्थेनोज़ोस्पर्मिया एक ऐसी कंडीशन है जिसका कारण ढूँढना और उसे ठीक करना दोनों संभव हैं। लाइफस्टाइल बदलाव से लेकर सर्जरी और ICSI तक, हर स्तर के लिए रास्ता है। गति कम हो तब भी पिता बनना संभव है, बस सही दिशा में कदम उठाना ज़रूरी है।

Asthenozoospermia के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया में नेचुरल प्रेगनेंसी हो सकती है?

क्या एंटीऑक्सिडेंट वाकई मोटिलिटी सुधारते हैं?

क्या ICSI में गतिहीन स्पर्म से बच्चा हो सकता है?

OAT सिंड्रोम क्या है?

क्या स्मोकिंग बंद करने से मोटिलिटी सुधरती है?

मोटिलिटी जाँच के लिए सैंपल कैसे दें?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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