पुरुष निःसंतानता यानी मेल इनफर्टिलिटी (male infertility) की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। पुरुष सामान्य जीवन जीते हैं, यौन जीवन सामान्य रहता है, और बाहर से कुछ अलग नहीं दिखता। फिर भी सीमेन एनालिसिस (semen analysis) में स्पर्म काउंट, मोटिलिटी, या मॉर्फोलॉजी में दिक्कत हो सकती है।
हालाँकि कुछ मामलों में शरीर संकेत ज़रूर देता है। टेस्टिकल में दर्द या भारीपन वैरिकोसील का इशारा हो सकता है। स्तन में सूजन यानी गाइनेकोमेस्टिया (gynecomastia) हॉर्मोनल असंतुलन बता सकती है। इरेक्शन या इजैकुलेशन में दिक्कत हॉर्मोनल या तंत्रिका तंत्र की समस्या हो सकती है।
NIH StatPearls के अनुसार, पुरुष बांझपन के लक्षण इसलिए भी पकड़ना मुश्किल हैं क्योंकि स्पर्म से जुड़ी समस्याएँ यौन क्षमता को सीधे प्रभावित नहीं करतीं। एक पुरुष पूरी तरह यौन सक्षम हो सकता है, लेकिन उसकी स्पर्म बहुत कम या बिल्कुल न हो।
इसीलिए एक साल की कोशिश के बाद प्रेगनेंसी न हो तो सबसे पहला कदम सीमेन एनालिसिस है। यह एक आसान और सस्ती जाँच है जो male infertility के बारे में बहुत कुछ बता देती है।
पुरुष निःसंतानता यानी मेल इनफर्टिलिटी (male infertility symptoms) के अधिकांश मामलों में कोई लक्षण यानी सिम्पटम्स (symptoms) नहीं आते। पुरुष को कोई दर्द, कोई असुविधा, और कोई बाहरी बदलाव दिखाई नहीं देता। यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। शरीर पूरी तरह स्वस्थ लग सकता है, लेकिन सीमेन में स्पर्म की गुणवत्ता या संख्या ठीक न हो।
इसे साइलेंट इनफर्टिलिटी कहते हैं। यह उन कपल्स में सामने आती है जो एक साल या उससे ज़्यादा समय से बच्चे की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही। कई बार जाँच सिर्फ महिला की होती रहती है और पुरुष की जाँच के बारे में सोचा नहीं जाता। यह इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की गलत एप्रोच है। इसमें महिला और पुरुष दोनों की जाँच एक साथ होनी चाहिए।
NIH StatPearls के अनुसार, इनफर्टिलिटी के मामलों में पुरुष की भूमिका करीब 50% तक होती है। इसलिए सीमेन एनालिसिस प्रेगनेंसी की कोशिश शुरू करने के शुरुआती चरण में ही करवा लेनी चाहिए, खासकर अगर पार्टनर की उम्र 30 साल से ऊपर हो।
टेस्टिकल में दर्द, भारीपन या खिंचाव वैरिकोसील (Varicocele) का संकेत हो सकता है। यह परेशानी लंबे समय तक खड़े रहने या दिन के अंत में बढ़ सकती है।
सामान्य से छोटे टेस्टिकल्स टेस्टिकुलर फेलियर (Testicular Failure) का संकेत हो सकते हैं, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित हो सकता है।
टेस्टिकल में अचानक तेज़ दर्द और सूजन टेस्टिकुलर टॉर्शन (Testicular Torsion) का संकेत हो सकता है। यह मेडिकल इमरजेंसी है और तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।
टेस्टिकल में गाँठ या असामान्य उभार संक्रमण, सिस्ट या किसी अन्य टेस्टिकुलर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जाँच करवा लेनी चाहिए।
पुरुषों में स्तन के टिशू का बढ़ना या सूजन गाइनेकोमेस्टिया (Gynecomastia) का संकेत हो सकता है। यह एस्ट्रोजन बढ़ने, टेस्टोस्टेरोन घटने, मोटापे, यकृत की बीमारी या कुछ दवाइयों के कारण हो सकता है।
लगातार थकान, कम ऊर्जा, कामेच्छा में कमी और मांसपेशियों की कमजोरी लो टेस्टोस्टेरोन (Low Testosterone) के संकेत हो सकते हैं। अगर ये लक्षण फर्टिलिटी की समस्या के साथ हों, तो हॉर्मोन जाँच करवानी चाहिए।
शरीर या चेहरे के बाल सामान्य से कम होना हॉर्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। यह अक्सर टेस्टोस्टेरोन की कमी से जुड़ा होता है।
आवाज़ में बदलाव, लंबे अंग, कम शरीर के बाल और छोटे टेस्टिकल्स एक साथ दिखें, तो यह क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) जैसी जेनेटिक समस्या का संकेत हो सकता है।
सेक्स ड्राइव में कमी या इरेक्शन की समस्या लो टेस्टोस्टेरोन (Low Testosterone) का लक्षण हो सकता है। हालांकि इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile Dysfunction) और मेल इनफर्टिलिटी, दो अलग समस्याएँ हैं। कुछ पुरुषों में दोनों साथ दिखाई दे सकते हैं, खासकर हाइपोगोनाडिज़्म (Hypogonadism) जैसी स्थितियों में।
रेट्रोग्रेड इजैकुलेशन (Retrograde Ejaculation) में सीमेन बाहर आने की बजाय मूत्राशय में चला जाता है, जबकि एनइजैकुलेशन (Anejaculation) में इजैकुलेशन बिल्कुल नहीं होता। इसके पीछे मधुमेह, नसों की समस्या, सर्जरी या कुछ दवाइयाँ जिम्मेदार हो सकती हैं।
इज़ैकुलेशन के दौरान दर्द प्रोस्टेट (Prostate) या सेमिनल वेसिकल (Seminal Vesicle) में सूजन या संक्रमण का संकेत हो सकता है। समय पर इलाज न होने पर यह सीमेन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
हाइपोस्पेडिया (Hypospadias) में मूत्रमार्ग का मुँह लिंग के सिरे की बजाय नीचे की तरफ होता है। गंभीर मामलों में इससे स्पर्म की सही जगह तक पहुँचना प्रभावित हो सकता है।
क्रिप्टोर्किडिज़्म (Cryptorchidism) यानी जन्म से टेस्टिकल का स्क्रोटम में न उतरना भविष्य में स्पर्म प्रोडक्शन को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब इसका इलाज देर से किया जाए।
मोटापा पुरुष फर्टिलिटी का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। बढ़ी हुई चर्बी से एस्ट्रोजन और स्क्रोटल तापमान दोनों बढ़ सकते हैं, जिससे स्पर्म काउंट और मोटिलिटी प्रभावित हो सकती है।
सीमेन एनालिसिस पुरुष फर्टिलिटी की पहली और सबसे विश्वसनीय जाँच है। इसमें काउंट, मोटिलिटी, मॉर्फोलॉजी, वॉल्यूम, pH, और सफेद रक्त कोशिकाएँ सब एक साथ देखी जाती हैं। यह जाँच 2 से 5 दिन के एब्स्टिनेंस के बाद होती है।
एक बार की रिपोर्ट पर निर्णय न लें। बुखार, तनाव, या बीमारी से काउंट अस्थायी रूप से कम हो सकता है। 3 से 4 हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट करवाएँ। दो रिपोर्ट के बाद ही सही तस्वीर आती है।
अगर नियमित और अनप्रोटेक्टेड संबंध बनाने के बावजूद 12 महीने तक प्रेगनेंसी न ठहरे, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। हालांकि कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनमें इतना इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं होती।
टेस्टिकल में दर्द, भारीपन या सूजन, गाइनेकोमेस्टिया (Gynecomastia), इजैकुलेशन की समस्या, या पहले से किसी टेस्टिकल सर्जरी या चोट का इतिहास हो, तो जल्द जाँच करवानी चाहिए।
अगर महिला पार्टनर की उम्र 35 वर्ष से अधिक है, तो 6 महीने की कोशिश के बाद ही डॉक्टर से मिलना बेहतर रहता है। बढ़ती उम्र के साथ अंडों (Eggs) की संख्या और गुणवत्ता दोनों घटने लगती हैं, इसलिए समय पर जाँच और इलाज फर्टिलिटी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पुरुष निःसंतानता के लक्षण यानी मेल इनफर्टिलिटी सिम्पटम्स (male infertility symptoms) हमेशा स्पष्ट दिखाई नहीं देते। कुछ पुरुषों में टेस्टिकल से जुड़ी समस्याएँ, हॉर्मोनल बदलाव, इजैकुलेशन की दिक्कतें या शारीरिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जबकि कई पुरुषों में कोई लक्षण नहीं होते और समस्या का पता केवल जाँच के दौरान चलता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर फर्टिलिटी का अंदाज़ा लगाना सही नहीं है।
अगर लंबे समय से प्रेगनेंसी नहीं ठहर रही है या ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण मौजूद हैं, तो जाँच करवाने में देरी न करें।
सीमेन एनालिसिस पुरुष फर्टिलिटी की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती जाँच है, जो समस्या की दिशा समझने में मदद करती है। सही समय पर पहचान और इलाज से मेल इनफर्टिलिटी के अधिकांश कारणों का सफलतापूर्वक मैनेजमेंट किया जा सकता है।