सारांश (Overview)
IUI या एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद डॉक्टर टेस्ट की तारीख बता देते हैं, लेकिन तब तक के ये दो हफ्ते बहुत लंबे लग सकते हैं। पेट में कुछ महसूस हो तो उम्मीद बढ़ती है, कुछ महसूस न हो तो चिंता होने लगती है। जबकि इन लक्षणों से प्रेगनेंसी का पता नहीं चलता।
यह आर्टिकल उन सवालों के जवाब हैं जो इस दौर में सबसे ज्यादा सताते हैं। दिन गिने कैसे जाते हैं, जो महसूस हो रहा है उसका क्या मतलब है, क्या टेंशन लेने से साइकिल बिगड़ जाती है, बेड रेस्ट से फायदा होता है या नहीं, और पति या पार्टनर की इस दौर में क्या भूमिका होती है।
2WW यानी two week wait, ओव्यूलेशन, IUI या एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट तक का इंतजार है। इसे 2WW इसलिए कहा जाता है क्योंकि आमतौर पर यह करीब दो हफ्ते का समय होता है।
आपकी स्थिति | गिनती किस दिन से | कितने दिन का इंतजार |
|---|---|---|
नेचुरल कोशिश | ओव्यूलेशन वाले दिन से (DPO) | करीब 14 दिन |
IUI | प्रोसीजर वाले दिन से | करीब 14 दिन |
डे-3 एम्ब्रीओ ट्रांसफर | ट्रांसफर वाले दिन से (DPT) | करीब 11 से 12 दिन |
डे-5 एम्ब्रीओ ट्रांसफर | ट्रांसफर वाले दिन से (DPT) | करीब 9 से 10 दिन |
डे-5 ट्रांसफर में एम्ब्रीओ पहले ही दो दिन आगे बढ़ चुका होता है, इसलिए टेस्ट तक का इंतजार थोड़ा कम होता है। इसलिए किसी दूसरी महिला के DPO या DPT से अपने दिन मिलाने की जरूरत नहीं है।
आपके लिए टेस्ट की सही तारीख वही है जो आपके डॉक्टर ने बताई है।
अगर 2WW आपको ट्रीटमेंट का सबसे मुश्किल हिस्सा लग रहा है, तो यह सिर्फ आपका एहसास नहीं है। ESHRE की गाइडलाइन के मुताबिक IVF या ICSI के दौरान एग रिट्रीवल, एम्ब्रीओ ट्रांसफर और प्रेगनेंसी टेस्ट के पहले का इंतजार ऐसी स्टेज होती हैं, जब आपको भावनात्मक तनाव ज्यादा महसूस हो सकता है।
इसकी वजह भी समझ में आती है। बाकी ट्रीटमेंट में कुछ न कुछ करना होता है, इंजेक्शन, स्कैन या डॉक्टर की अपॉइंटमेंट। 2WW में बस इंतजार करना होता है। ऐसे में बार-बार लक्षणों पर ध्यान जाना और उनका मतलब निकालना स्वाभाविक है।
इसलिए यह इंतजार भारी लग रहा है, तो इसे अपनी कमजोरी न समझें। यह इस दौर में होना वाली एक आम प्रतिक्रिया है।
इन चौदह दिनों में शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर आपको महसूस नहीं होते।
यही वजह है कि 2WW में महसूस होने वाले लक्षणों से यह पता लगाना मुश्किल होता है कि प्रेगनेंसी हुई है या नहीं।
2WW में शरीर में कुछ बदलाव महसूस होना आम है, लेकिन हर बदलाव का मतलब प्रेगनेंसी नहीं होता। इसे ऐसे समझें:
आपको क्या महसूस हो रहा है | इसका क्या मतलब समझें |
प्रेगनेंसी जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं | इससे प्रेगनेंसी की पुष्टि नहीं होती। प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट से भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। |
कुछ भी महसूस नहीं हो रहा | इसे ख़राब साइन न मानें। सक्सेसफुल साइकिल में भी इन दिनों कोई खास लक्षण नहीं होना कॉमन है। |
आज लक्षण हैं, कल नहीं हैं | इससे भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस दौरान लक्षण बदलते रह सकते हैं। |
लक्षणों के आधार पर बार-बार अंदाजा लगा रही हैं | इससे प्रेगनेंसी का सही पता नहीं चलेगा। टेस्ट की तय तारीख तक इंतजार करना ही सही तरीका है। |
इसलिए 2WW में लक्षण होना या न होना, दोनों से प्रेगनेंसी का पता नहीं चलता। लेकिन तेज दर्द, भारी ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा पेट फूलना, सांस लेने में दिक्कत या पेशाब कम होना जैसे लक्षण हों, तो तुरंत क्लिनिक से संपर्क करें।
2WW में टेंशन लेने से साइकिल फेल हो जाती है, ऐसा मानने का कोई पक्का सबूत नहीं है। इसलिए अगर इस दौरान आप परेशान हैं, रो रही हैं या बार-बार चिंता हो रही है, तो खुद को इसके लिए दोष न दें।
BMJ में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही 3,583 महिलाओं की 14 स्टडीज को देखा गया। इसमें ट्रीटमेंट से पहले का भावनात्मक तनाव प्रेगनेंसी के नतीजे से जुड़ा नहीं पाया गया।
इसलिए तनाव कम करने की कोशिश जरूर करें, लेकिन सिर्फ इसलिए खुद को दोष न दें कि आप ज्यादा परेशान थीं। आपकी चिंता से साइकिल खराब नहीं होती।
नहीं, एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद पूरे दिन बिस्तर पर पड़े रहने की जरूरत नहीं है। रिसर्च में बेड रेस्ट से प्रेगनेंसी के नतीजे बेहतर होने का फायदा नहीं मिला है।
इसका मतलब यह भी नहीं कि आपको जानबूझकर ज्यादा मेहनत करनी है। सामान्य रूप से चलना-फिरना और रोज के हल्के काम करना ठीक है। एम्ब्रीओ चलने या खड़े होने से बाहर नहीं निकल जाता।
अगर आपके डॉक्टर ने कुछ समय आराम करने को कहा है, तो उनकी सलाह मानें। लेकिन अपनी तरफ से कई दिनों तक पूरा बेड रेस्ट करने की जरूरत नहीं है।
इसलिए डॉक्टर ने जिस दिन टेस्ट करने को कहा है, उसी दिन करें। जल्दी-जल्दी टेस्ट करने से जवाब जल्दी नहीं मिलता, सिर्फ उलझन बढ़ सकती है।
2WW सिर्फ महिला के लिए ही तनाव भरा नहीं होता। इस दौरान पति या पार्टनर भी परेशान हो सकते हैं, लेकिन कई बार अपनी चिंता खुलकर नहीं बताते हैं। इससे दोनों को लग सकता है कि दूसरा उनकी परेशानी नहीं समझ रहा है।
इसलिए इस दौरान सबसे जरूरी है कि एक-दूसरे से खुलकर बात करें और एक-दूसरे को सुनें। हर बात का हल निकालना जरूरी नहीं है। कभी-कभी सिर्फ साथ रहना और यह पूछना कि “आज कैसा लग रहा है?” भी काफी होता है।
अगर किसी बात को लेकर चिंता है, तो उसे मन में रखने के बजाय डॉक्टर से पूछें। ESHRE की गाइडलाइन भी दोनों पार्टनर को ट्रीटमेंट में शामिल रखने और अपनी चिंताएं खुलकर बताने की सलाह देती है।
2WW मुश्किल इसलिए लगता है क्योंकि इस दौरान आपको बस इंतजार करना होता है। इस समय लक्षणों से प्रेगनेंसी का अंदाजा लगाने की कोशिश न करें, क्योंकि प्रोजेस्टेरोन की वजह से भी वही लक्षण हो सकते हैं।
टेंशन होने से साइकिल फेल नहीं होती और ट्रांसफर के बाद पूरे समय बेड रेस्ट करने की जरूरत भी नहीं है। डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लें, सामान्य दिनचर्या रखें और टेस्ट के लिए दी गई तारीख तक इंतजार करें।
और इस इंतजार में अपने पार्टनर को भी साथ रखें। आप दोनों के लिए यह समय आसान बनाने में खुलकर बात करना मदद कर सकता है।