गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) शरीर के अंदर एक ही पोज़ीशन मतलब फ़िक्स पोज़ीशन में नहीं रहता। यह थोड़ा आगे, थोड़ा पीछे या सीधी पोज़ीशन में हो सकता है। जब यूट्रस आगे की दिशा में, मतलब मूत्राशय यानी ब्लैडर (bladder) की तरफ झुका होता है, तो इस स्थिति को anteverted uterus कहा जाता है। यह पूरी तरह शरीर की सामान्य बनावट का हिस्सा है, ठीक वैसे ही है जैसे कुछ लोग बाएँ हाथ से लिखते हैं और कुछ दाएँ से और दोनों तरह से लिखना सामान्य हैं।
इसीलिए आप समझ लें कि एंटीवर्टेड यूट्रस कोई समस्या नहीं है। यह यूट्रस की सबसे कॉमन पोज़ीशन है और ज़्यादातर महिलाओं में यूट्रस एंटीवर्टेड ही होता है। यूट्रस की दिशा का मतलब यह नहीं होता कि उसमें कोई खराबी है या उससे प्रेगनेंसी पर असर पड़ेगा। इससे केवल यूट्रस की नेचुरल पोजीशन पता चलती है।
इस Anteverted uterus meaning in Hindi आर्टिकल में आप समझेंगे कि यूट्रस की अलग-अलग पोजीशन क्या होती हैं, anteverted uterus क्यों नॉर्मल है, और किन बातों पर वास्तव में ध्यान देना जरूरी होता है।
शरीर में यूट्रस पेल्विस (pelvis) यानी कूल्हों के बीच में होता है। यूट्रस के आगे मूत्राशय यानी ब्लैडर (bladder) और पीछे मलाशय यानी रेक्टम (rectum) होता है।
यूट्रस की पोजीशन दो चीज़ों से तय होती है। पहली है वर्शन (version) यानी यूट्रस किस तरफ झुका है और दूसरी है फ़्लेक्सन (flexion) यानी यूट्रस का ऊपरी हिस्सा और सर्विक्स (cervix) के बीच का एंगल कौन सा है।
Anteverted पोजीशन में यूट्रस आगे की तरफ यानी ब्लैडर की तरफ झुका होता है। यह सबसे कॉमन पोजीशन होती है और 75 से 80 प्रतिशत महिलाओं में यूट्रस की यही पोजीशन होती है। रेट्रोवर्टेड (Retroverted) पोजीशन में यूट्रस पीछे की तरफ यानी रेक्टम की तरफ झुका होता है। यह पोजीशन करीब 20 से 25 प्रतिशत महिलाओं में होती है। यूट्रस की रेट्रोवर्टेड पोजीशन भी नॉर्मल होती है।
कुछ महिलाओं में यूट्रस बिलकुल सीधा खड़ा रहता है, जिसका मतलब है कि यह न आगे की ओर झुका होता है न पीछे की ओर। यूट्रस की इस पोजीशन को मिड पोजीशन (midposition) कहते हैं। यूट्रस की मिड पोजीशन कम देखने को मिलती है।
आपकी रिपोर्ट में एंटेफ्लेक्स्ड (anteflexed) और रेट्रोफ्लेक्स्ड (retroflexed) भी लिखा हो सकता है। एंटेफ्लेक्स्ड का मतलब है कि यूट्रस का ऊपरी हिस्सा यानी फंडस (fundus) आगे की तरफ मुड़ा है। एंटीवर्टेड यूट्रस में यह अक्सर होता है और ज़्यादातर रिपोर्ट में दोनों शब्द "anteverted anteflexed" साथ में लिखे मिलते हैं। यह भी पूरी तरह नॉर्मल है।
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Anteverted uterus के बारे में कई गलतफहमियाँ फैली हुई हैं जो महिलाओं में बेवजह चिंता पैदा करती हैं। आइए इन्हें एक-एक करके सुलझाते हैं।
सच यह है कि यूट्रस की पोजीशन का प्रेगनेंसी से कोई लेना-देना नहीं है। जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है कि एंटीवर्टेड यूट्रस सबसे कॉमन पोजीशन है जो करोड़ों महिलाओं में होती है और वे यूट्रस की इसी पोजीशन के साथ माँ बनती हैं। जब भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) इम्प्लांट होता है तो यूट्रस चाहे आगे झुका हो या पीछे, इम्प्लांटेशन पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
दरअसल यूट्रस की पोजीशन आनुवंशिकता यानी जेनेटिक्स (genetics) और शारीरिक बनावट से तय होती है। जैसे हर इंसान की ऊँचाई अलग होती है, वैसे ही यूट्रस की पोजीशन भी अलग-अलग होती है। यह कोई बीमारी या विकार नहीं है।
यूट्रस की नॉर्मल पोजीशन और पीरियड के दर्द में सीधा संबंध नहीं है। पीरियड का दर्द डिसमेनोरिया (dysmenorrhea) कहलाता है और यह प्रोस्टाग्लैंडिन (prostaglandins) नाम के हॉर्मोन जैसे केमिकल के कारण होता है, यूट्रस की पोजीशन के कारण नहीं। हाँ, अगर एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) या एडिनोमायोसिस (adenomyosis) हो तो पोजीशन बदल सकती है और पीरियड्स के दौरान दर्द भी होता है। लेकिन तब यूट्रस की पोजीशन की वजह से दर्द नहीं होता बल्कि दोनों यूट्रस की बीमारी की वजह से होता है।
किसी भी सामान्य शारीरिक स्थिति को ठीक करने की ज़रूरत नहीं होती। कोई सर्जरी, व्यायाम, या दवाई anteverted uterus के लिए नहीं दी जाती क्योंकि यह कोई समस्या ही नहीं है। इंटरनेट पर कई जगह गलत जानकारी मिलती है कि खास व्यायाम से गर्भाशय की स्थिति ठीक हो सकती है लेकिन आप ऐसी बातों पर भरोसा न करें।
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प्रेगनेंसी में जैसे-जैसे भ्रूण बढ़ता है, यूट्रस ऊपर की तरफ बढ़ता जाता है और उसकी पोजीशन अपने आप बदलती है। डिलीवरी के बाद यूट्रस वापस अपनी जगह आ जाता है, हालाँकि कभी-कभी पोजीशन थोड़ी बदल सकती है।
फाइब्रॉइड्स (fibroids) यानी यूट्रस में बनने वाली गाँठें अगर बड़ी हो जाएँ, तो वे यूट्रस को उसकी सामान्य पोज़िशन से थोड़ा धकेल सकती हैं। इससे यूट्रस की दिशा बदलकर आगे या पीछे हो सकती है।
वहीं एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) में शरीर के अंदर चिपकाव यानी एडहेज़न (adhesions) बनने लगते हैं। ये चिपकाव यूट्रस को पकड़कर पीछे की ओर खींच सकते हैं। इसी वजह से कुछ महिलाओं में यूट्रस पीछे की तरफ झुका हुआ यानी रेट्रोवर्टेड (retroverted uterus) दिखाई देता है।
यहाँ समझने वाली बात यह है कि सिर्फ यूट्रस का पीछे झुका होना समस्या नहीं है, लेकिन अगर यह एंडोमेट्रियोसिस की वजह से हो रहा है, तो असली कारण वही है जिस पर ध्यान देना जरूरी होता है।
पेल्विक सर्जरी के बाद भी शरीर के अंदर चिपकाव यानी एडहेज़न बन सकते हैं, जिसकी वजह से यूट्रस की पोजीशन बदल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ पेल्विक फ्लोर की मसल्स भी धीरे-धीरे कमजोर हो सकती हैं। इसकी वजह से भी यूट्रस की पोज़िशन में हल्का बदलाव आ सकता है।
लेकिन एक बात याद रखें अगर आपकी रिपोर्ट में anteverted uterus लिखा है और आपको कोई लक्षण नहीं हैं, तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
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रिपोर्ट में anteverted या retroverted से ज्यादा कुछ और बातें महत्वपूर्ण होती हैं।
गर्भाशय का आकार सामान्य होना चाहिए। अगर यह ज्यादा बड़ा है, तो यह फाइब्रॉइड्स या एडिनोमायोसिस का लक्षण हो सकता है।
एंडोमेट्रियल थिकनेस (Endometrial thickness) यानी गर्भाशय की अंदरूनी परत की मोटाई भी देखी जाती है। यह पीरियड साइकिल के हिसाब से बदलती है और फर्टिलिटी में इसका रोल होता है।
मायोमेट्रियम (Myometrium) यानी गर्भाशय की मसल्स की परत एकसमान दिखनी चाहिए। अगर इसमें गाँठ या असमानता हो, तो आगे जाँच की जरूरत हो सकती है।
ओवरी की स्थिति, फॉलिकल्स की संख्या और कोई सिस्ट (cyst) है या नहीं, ये बातें फर्टिलिटी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।
आईवीएफ़ ट्रीटमेंट में एम्ब्रीओ ट्रांसफर एक पतली नली के जरिए किया जाता है, जिसे कैथेटर (catheter) कहा जाता है। यह नली सर्विक्स के रास्ते यूट्रस के अंदर तक पहुँचाई जाती है।
इस प्रोसेस में यूट्रस की पोज़िशन जानना डॉक्टर के लिए जरूरी होता है, ताकि वे कैथेटर को सही दिशा में आसानी से ले जा सकें।
अगर यूट्रस आगे की तरफ झुका है यानी एंटीवर्टेड है, तो कैथेटर को हल्का सा आगे की दिशा में ले जाया जाता है। अगर गर्भाशय पीछे की तरफ है यानी रेट्रोवर्टेड है, तो कैथेटर को पीछे की दिशा में मोड़ा जाता है।
यूट्रस की दोनों ही पोजीशन में एम्ब्रीओ ट्रांसफर सामान्य तरीके से हो जाता है और इसमें कोई अलग परेशानी नहीं होती।
समझने वाली बात यह है कि यूट्रस की पोज़िशन सिर्फ ट्रांसफर के तरीके को थोड़ा सा प्रभावित करती है, नतीजे को नहीं। IVF की सफलता ज़्यादातर एम्ब्रीओ की क्वालिटी, एंडोमेट्रियम (endometrium) की मोटाई और हार्मोन के सही बैलेंस पर निर्भर करती है।
Anteverted uterus यूट्रस की एक सामान्य पोज़िशन है। ज़्यादातर महिलाओं में यूट्रस आगे की तरफ झुका हुआ होता है और यह शरीर की प्राकृतिक बनावट का हिस्सा है। इसका मतलब यह नहीं होता कि कोई समस्या है या इससे प्रेगनेंसी पर असर पड़ेगा।
यह समझना जरूरी है कि anteverted uterus किसी बीमारी का लक्षण नहीं है और इसके लिए किसी इलाज की जरूरत नहीं होती।
रिपोर्ट में सिर्फ यूट्रस की डायरेक्शन देखने के बजाय कुछ और बातें ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं, जैसे उसका आकार, अंदर की परत यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) की मोटाई, मुस्कले की बनावट और ओवरी की स्थिति इत्यादि।
IVF ट्रीटमेंट के दौरान भी यूट्रस की यह पोजीशन कोई रुकावट नहीं बनती। डॉक्टर प्रोसेस को यूट्रस की पोजीशन के हिसाब से आसानी से कर लेते हैं।
अगर आपकी रिपोर्ट में anteverted uterus लिखा है और बाकी सब सामान्य है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। सही जानकारी रखें, घबराएँ नहीं और जरूरत होने पर अपने डॉक्टर से बात करके आगे का निर्णय लें।