Crown Rump Length (CRL) क्या है? चार्ट और नॉर्मल रेंज

Last updated: September 21, 2026

सारांश (Overview)

प्रेगनेंसी के शुरुआती अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में CRL के आगे एक नंबर और उसके साथ हफ्ते और दिन लिखे हो सकते हैं। कई बार यह उम्र LMP से निकली आपकी गिनती से अलग होती है, जिससे समझ नहीं आता कि सही तारीख कौन सी है।

Crown Rump Length यानी CRL बच्चे के सिर से कमर तक की लंबाई होती है। शुरुआती प्रेगनेंसी में इसी नाप से गर्भ की उम्र सबसे सटीक तरीके से निकाली जाती है। 13 हफ्ते 6 दिन तक इसकी सटीकता आमतौर पर 5 से 7 दिन के भीतर रहती है।

आगे जानेंगे कि CRL चार्ट से हफ्ते कैसे निकालें, अलग-अलग हफ्तों में CRL कितना होता है, धड़कन कब दिखती है और LMP से तारीख अलग हो तो क्या होता है।

CRL का मतलब क्या होता है?

CRL यानी Crown Rump Length, बच्चे के सिर के ऊपरी सिरे से कमर के निचले सिरे तक की लंबाई होती है। इसे नापते समय हाथ-पैर और योक सैक को शामिल नहीं किया जाता।

शुरुआती प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ तेजी से होती है, इसलिए इस समय CRL से प्रेगनेंसी की उम्र का अच्छा अंदाजा मिलता है। बाद में बच्चों की ग्रोथ में स्वाभाविक अंतर आने लगता है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र और ग्रोथ देखने के लिए दूसरे नाप इस्तेमाल किए जाते हैं। 

CRL सही आए, इसके लिए अल्ट्रासाउंड में बच्चे की पोजीशन और इमेज का साइज भी मायने रखते है। 

  • पोजीशन: बच्चा सीधा लेटा दिखना चाहिए, न मुड़ा हुआ न तना हुआ।
  • साइज: स्क्रीन पर उसकी इमेज काफी बड़ी होनी चाहिए।
  • दोहराव: नाप तीन बार लेकर औसत निकाला जाता है।

इसी वजह से एक ही दिन में दो अलग जगह किए गए स्कैन में एक या दो मिलीमीटर का फर्क आ सकता है, जो नॉर्मल होता है।

रिपोर्ट पढ़ते समय यूनिट जरूर देखनी चाहिए क्योंकि कुछ रिपोर्ट में CRL मिलीमीटर में लिखा होता है और कुछ में सेंटीमीटर में।

CRL चार्ट से हफ्ते कैसे निकालें?

यह सबसे काम की बात है, इसलिए चार्ट सबसे पहले। अपनी रिपोर्ट का नंबर बाएं कॉलम में ढूंढिए।

CRL (मिलीमीटर)

प्रेगनेंसी की उम्र

5 मिमी

6 हफ्ते 0 दिन

8 मिमी

6 हफ्ते 5 दिन

10 मिमी

7 हफ्ते 1 दिन

15 मिमी

7 हफ्ते 6 दिन

20 मिमी

8 हफ्ते 4 दिन

23 मिमी

9 हफ्ते 0 दिन

30 मिमी

9 हफ्ते 6 दिन

32 मिमी

10 हफ्ते 0 दिन

40 मिमी

10 हफ्ते 6 दिन

45 मिमी

11 हफ्ते 2 दिन

54 मिमी

12 हफ्ते 0 दिन

60 मिमी

12 हफ्ते 3 दिन

67 मिमी

13 हफ्ते 0 दिन

75 मिमी

13 हफ्ते 4 दिन

84 मिमी

14 हफ्ते 1 दिन

 

ये डाटा उन्हीं डेटिंग टेबल से लिया गया जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होती हैं। अगर आपकी रिपोर्ट का CRL चार्ट में दिए गए किसी नंबर से बिल्कुल मेल नहीं खाता, तो आसपास की वैल्यू देखकर प्रेगनेंसी की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है।

1-2 मिलीमीटर का अंतर आमतौर पर उम्र में सिर्फ कुछ दिनों का फर्क दिखाता है। इसलिए चार्ट की वैल्यू से थोड़ा आगे-पीछे CRL आने पर इसे अपने आप में चिंता की बात नहीं माना जाता।

प्रेगनेंसी में CRL कितना होना चाहिए?

CRL का कोई एक फिक्स नंबर नहीं होता जिसे हर प्रेगनेंसी में नॉर्मल माना जाए। यह नंबर प्रेगनेंसी की उम्र के साथ बदलता है। इसलिए CRL को हमेशा उस समय की प्रेगनेंसी की उम्र के हिसाब से देखा जाता है।

इसे नीचे दिए उदहारण से समझते हैं। 

  • करीब 12 हफ्ते: CRL लगभग 54 मिलीमीटर
  • करीब 13 हफ्ते: CRL लगभग 67 मिलीमीटर

कुछ मिलीमीटर का फर्क सामान्य हो सकता है। अगर CRL का नंबर आपकी LMP से निकली प्रेगनेंसी की उम्र से छोटा या बड़ा है, तो इसका मतलब हमेशा ग्रोथ की समस्या नहीं होता। अगर ओव्यूलेशन आपकी गिनती से बाद में या जल्दी हुआ हो, तो स्कैन में प्रेगनेंसी की उम्र कुछ दिन अलग आ सकती है।

लेकिन IVF जैसी कंडीशन में, जहां प्रेगनेंसी की तारीख पहले से कन्फर्म होती है, अगर CRL का नंबर का उस डेट से मैच नहीं करे तो डॉक्टर ज्यादा सावधान होते हैं।

CRL कब से कब तक मापा जाता है?

CRL प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में देखा जाता है। आमतौर पर सातवें हफ्ते से चौदहवें हफ्ते की शुरुआत तक इससे प्रेगनेंसी की उम्र का अंदाजा लगाया जाता है। इस समय CRL से निकली प्रेगनेंसी की उम्र आमतौर पर 5 से 7 दिन के अंतर तक सही हो सकती है।

14 हफ्ते के आसपास CRL करीब 84 मिलीमीटर तक पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे की पोजीशन और शरीर का आकार बदलने लगता है, इसलिए सिर से कमर तक की सीधी लंबाई लेना उतना आसान नहीं रहता। इसके बाद प्रेगनेंसी की उम्र और बच्चे की ग्रोथ देखने के लिए BPD, HC, AC और FL जैसे दूसरे तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।

अगर सातवें हफ्ते से पहले स्कैन कराया जाए, तो बच्चा बहुत छोटा होने के कारण CRL रिपोर्ट में नहीं आता। ऐसे में डॉक्टर पहले सैक और योक सैक देखते हैं, और उसके बाद एम्ब्रीओ दिखाई दे रहा है या नहीं, यह देखते हैं।

CRL कितना होने पर हार्टबीट दिखती है?

CRL करीब 7 मिलीमीटर होने पर आमतौर पर हार्टबीट दिखने लगती है। लेकिन अगर CRL इससे कम है और हार्टबीट नहीं दिख रही, तो सिर्फ इस आधार पर यह नहीं कहा जाता कि प्रेगनेंसी में कोई समस्या है। हो सकता है कि प्रेगनेंसी अभी उस स्टेज तक न पहुंची हो।

अगर CRL 7 मिलीमीटर या उससे ज्यादा है और फिर भी हार्टबीट नहीं दिखती, तो इसे प्रेगनेंसी के आगे न बढ़ने का पक्का लक्षण माना जाता है।

वहीं, CRL 7 मिलीमीटर से कम है और हार्टबीट नहीं दिख रही, तो डॉक्टर आमतौर पर 7 से 10 दिन बाद दोबारा TVS कराने की सलाह देते हैं। अगर पिछले स्कैन में सिर्फ सैक दिखा था और एम्ब्रीओ नहीं दिखा, तो दोबारा स्कैन के लिए कम से कम दो हफ्ते का अंतर रखा जा सकता है।

इसलिए शुरुआती स्कैन में हार्टबीट न दिखने पर कुछ दिन बाद दोबारा स्कैन करना जरूरी हो सकता है। इससे जल्दबाजी में गलत निष्कर्ष निकालने से बचा जा सकता है।

CRL और LMP की तारीख मेल न खाए तो क्या होता है?

LMP से निकली प्रेगनेंसी की उम्र और CRL के आधार पर स्कैन में निकली उम्र कुछ दिन अलग हो सकती है। अगर यह फर्क आता है तो जरुरी नहीं कोई चिंता करने वाली बात है। लेकिन यह अंतर लिमिट से ज्यादा हो, तभी डॉक्टर स्कैन के हिसाब से प्रेगनेंसी की तारीख बदलने पर विचार करते हैं।  ACOG की गाइडलाइन में यह लिमिट साफ तरीके से दी गयी है।

स्कैन के समय प्रेगनेंसी की उम्र

तारीख कब बदली जाती है

8 हफ्ते 6 दिन तक

फर्क 5 दिन से ज्यादा हो तो

9 हफ्ते से 13 हफ्ते 6 दिन

फर्क 7 दिन से ज्यादा हो तो

14 से 15 हफ्ते 6 दिन

फर्क 7 दिन से ज्यादा हो तो

16 से 21 हफ्ते 6 दिन

फर्क 10 दिन से ज्यादा हो तो

22 से 27 हफ्ते 6 दिन

फर्क 14 दिन से ज्यादा हो तो

28 हफ्ते के बाद

फर्क 21 दिन से ज्यादा हो तो

इसका मतलब है कि शुरुआती प्रेगनेंसी में CRL और LMP की तारीख में फर्क कम होने पर तुरंत तारीख नहीं बदली जाती। शुरुआती स्कैन से निकली प्रेगनेंसी की उम्र, बाद के स्कैन में निकली उम्र की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती है।

प्रेगनेंसी की सही तारीख तय होना जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की जांचों का समय और डिलीवरी की संभावित तारीख तय होती है।

IVF से हुई प्रेगनेंसी में स्थिति अलग होती है। इसमें एम्ब्रीओ ट्रांसफर की तारीख और एम्ब्रीओ की उम्र पहले से पता होती है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र पहले से तय रहती है। ऐसे में CRL के आधार पर तारीख बदलने के बजाय यह देखा जाता है कि बच्चे की ग्रोथ, तय उम्र के हिसाब से हो रही है या नहीं।

CRL कम या ज्यादा होने का क्या मतलब है?

CRL का छोटा या बड़ा होना हमेशा किसी समस्या का संकेत नहीं होता। कई बार ओव्यूलेशन आपकी गिनती से पहले या बाद में हुआ होता है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र कुछ दिन अलग आ सकती है।

अगर तारीख पहले से पक्की है और CRL लगातार कम आ रहा है, तो डॉक्टर इसे नजर में रखते हैं। लगातार छोटा CRL बच्चे का वजन कम रहने और समय से पहले डिलीवरी के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

ऐसे में डॉक्टर तारीख दोबारा देखते हैं और जरूरत होने पर 1 से 2 हफ्ते बाद स्कैन कराकर ग्रोथ देखते हैं।

CRL के बाद NT स्कैन कब किया जाता है?

NT स्कैन फर्स्ट ट्राइमेस्टर में बच्चे की गर्दन के पीछे जमा तरल की मोटाई देखने के लिए किया जाता है। यह जांच 11 से 13 हफ्ते 6 दिन के बीच की जाती है और उस समय CRL 45 से 84 मिलीमीटर के बीच होना चाहिए।

अगर NT की मोटाई ज्यादा मिलती है, तो डॉक्टर आगे की जांचों की सलाह दे सकते हैं। NT स्कैन अपने आप किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि आगे जांच की जरूरत है या नहीं।

CRL रिपोर्ट पढ़ते समय क्या देखें?

  • CRL का नंबर और उसके आगे लिखे हफ्ते: यही आपकी प्रेगनेंसी की उम्र है।
  • हार्टबीट के बारे में क्या लिखा है: कई रिपोर्ट में इसे अलग लाइन में लिखा जाता है।
  • EDD (expected delivery date) यानी डिलीवरी की संभावित तारीख: पता करें कि EDD, LMP वाली तारीख से कितनी अलग है।

दोनों तारीखों में फर्क है, तो अपने डॉक्टर से सीधे पूछ लीजिए कि आगे कौन सी तारीख चलेगी।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • शुरुआती प्रेगनेंसी में CRL से बच्चे की उम्र का सबसे भरोसेमंद अंदाजा लगाया जाता है।
  • CRL आमतौर पर 7 से 14 हफ्ते के बीच देखा जाता है।
  • CRL का कोई एक तय नॉर्मल नंबर नहीं होता, क्योंकि इसका नंबर प्रेगनेंसी की उम्र के साथ बदलता है।
  • CRL करीब 7 मिलीमीटर होने पर आमतौर पर हार्टबीट दिखाई देने लगती है।
  • CRL और LMP से निकली तारीख में कुछ दिनों का फर्क होना सामान्य हो सकता है।
  • NT स्कैन 11 हफ्ते से 13 हफ्ते 6 दिन के बीच किया जाता है और इस दौरान CRL 45 से 84 मिलीमीटर के बीच होना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

शुरुआती प्रेगनेंसी में CRL की मदद से यह समझने में आसानी होती है कि प्रेगनेंसी कितने हफ्तों की है और आगे की जांचें कब होनी चाहिए। इसलिए रिपोर्ट में CRL के साथ लिखे हफ्तों और LMP से निकली तारीख में थोड़ा फर्क दिखे, तो उसे तुरंत समस्या न मानें।

डॉक्टर CRL के साथ स्कैन में बच्चे की ग्रोथ और हार्टबीट भी देखते हैं। जरूरत होने पर कुछ दिन बाद दोबारा स्कैन किया जाता है, ताकि स्थिति को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला न लेना पड़े।

 

CRL के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अल्ट्रासाउंड में CRL का क्या अर्थ है?

प्रेगनेंसी में CRL कितना होना चाहिए?

CRL से गर्भावस्था की उम्र कैसे पता चलती है?

7 हफ्ते में CRL कितना होता है?

3 महीने की प्रेगनेंसी में CRL कितना होना चाहिए?

CRL कब तक अल्ट्रासाउंड में मापा जाता है?

CRL कम होने का क्या मतलब होता है?

क्या CRL से बच्चे की ग्रोथ का पता चलता है?

CRL कितना होने पर धड़कन दिखनी चाहिए?

CRL और GA में क्या फर्क है?

रिपोर्ट में CRL सेंटीमीटर में लिखा हो तो क्या करें?

क्या IVF प्रेगनेंसी में CRL से तारीख बदली जाती है?

क्या LMP और स्कैन की तारीख अलग होना चिंता की बात है?

गर्भावस्था में बच्चे की ग्रोथ न होने के क्या कारण हैं?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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