सारांश (Overview)
प्रेगनेंसी के शुरुआती अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में CRL के आगे एक नंबर और उसके साथ हफ्ते और दिन लिखे हो सकते हैं। कई बार यह उम्र LMP से निकली आपकी गिनती से अलग होती है, जिससे समझ नहीं आता कि सही तारीख कौन सी है।
Crown Rump Length यानी CRL बच्चे के सिर से कमर तक की लंबाई होती है। शुरुआती प्रेगनेंसी में इसी नाप से गर्भ की उम्र सबसे सटीक तरीके से निकाली जाती है। 13 हफ्ते 6 दिन तक इसकी सटीकता आमतौर पर 5 से 7 दिन के भीतर रहती है।
आगे जानेंगे कि CRL चार्ट से हफ्ते कैसे निकालें, अलग-अलग हफ्तों में CRL कितना होता है, धड़कन कब दिखती है और LMP से तारीख अलग हो तो क्या होता है।
CRL यानी Crown Rump Length, बच्चे के सिर के ऊपरी सिरे से कमर के निचले सिरे तक की लंबाई होती है। इसे नापते समय हाथ-पैर और योक सैक को शामिल नहीं किया जाता।
शुरुआती प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ तेजी से होती है, इसलिए इस समय CRL से प्रेगनेंसी की उम्र का अच्छा अंदाजा मिलता है। बाद में बच्चों की ग्रोथ में स्वाभाविक अंतर आने लगता है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र और ग्रोथ देखने के लिए दूसरे नाप इस्तेमाल किए जाते हैं।
CRL सही आए, इसके लिए अल्ट्रासाउंड में बच्चे की पोजीशन और इमेज का साइज भी मायने रखते है।
इसी वजह से एक ही दिन में दो अलग जगह किए गए स्कैन में एक या दो मिलीमीटर का फर्क आ सकता है, जो नॉर्मल होता है।
रिपोर्ट पढ़ते समय यूनिट जरूर देखनी चाहिए क्योंकि कुछ रिपोर्ट में CRL मिलीमीटर में लिखा होता है और कुछ में सेंटीमीटर में।
यह सबसे काम की बात है, इसलिए चार्ट सबसे पहले। अपनी रिपोर्ट का नंबर बाएं कॉलम में ढूंढिए।
CRL (मिलीमीटर) | प्रेगनेंसी की उम्र |
|---|---|
5 मिमी | 6 हफ्ते 0 दिन |
8 मिमी | 6 हफ्ते 5 दिन |
10 मिमी | 7 हफ्ते 1 दिन |
15 मिमी | 7 हफ्ते 6 दिन |
20 मिमी | 8 हफ्ते 4 दिन |
23 मिमी | 9 हफ्ते 0 दिन |
30 मिमी | 9 हफ्ते 6 दिन |
32 मिमी | 10 हफ्ते 0 दिन |
40 मिमी | 10 हफ्ते 6 दिन |
45 मिमी | 11 हफ्ते 2 दिन |
54 मिमी | 12 हफ्ते 0 दिन |
60 मिमी | 12 हफ्ते 3 दिन |
67 मिमी | 13 हफ्ते 0 दिन |
75 मिमी | 13 हफ्ते 4 दिन |
84 मिमी | 14 हफ्ते 1 दिन |
ये डाटा उन्हीं डेटिंग टेबल से लिया गया जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होती हैं। अगर आपकी रिपोर्ट का CRL चार्ट में दिए गए किसी नंबर से बिल्कुल मेल नहीं खाता, तो आसपास की वैल्यू देखकर प्रेगनेंसी की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है।
1-2 मिलीमीटर का अंतर आमतौर पर उम्र में सिर्फ कुछ दिनों का फर्क दिखाता है। इसलिए चार्ट की वैल्यू से थोड़ा आगे-पीछे CRL आने पर इसे अपने आप में चिंता की बात नहीं माना जाता।
CRL का कोई एक फिक्स नंबर नहीं होता जिसे हर प्रेगनेंसी में नॉर्मल माना जाए। यह नंबर प्रेगनेंसी की उम्र के साथ बदलता है। इसलिए CRL को हमेशा उस समय की प्रेगनेंसी की उम्र के हिसाब से देखा जाता है।
इसे नीचे दिए उदहारण से समझते हैं।
कुछ मिलीमीटर का फर्क सामान्य हो सकता है। अगर CRL का नंबर आपकी LMP से निकली प्रेगनेंसी की उम्र से छोटा या बड़ा है, तो इसका मतलब हमेशा ग्रोथ की समस्या नहीं होता। अगर ओव्यूलेशन आपकी गिनती से बाद में या जल्दी हुआ हो, तो स्कैन में प्रेगनेंसी की उम्र कुछ दिन अलग आ सकती है।
लेकिन IVF जैसी कंडीशन में, जहां प्रेगनेंसी की तारीख पहले से कन्फर्म होती है, अगर CRL का नंबर का उस डेट से मैच नहीं करे तो डॉक्टर ज्यादा सावधान होते हैं।
CRL प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में देखा जाता है। आमतौर पर सातवें हफ्ते से चौदहवें हफ्ते की शुरुआत तक इससे प्रेगनेंसी की उम्र का अंदाजा लगाया जाता है। इस समय CRL से निकली प्रेगनेंसी की उम्र आमतौर पर 5 से 7 दिन के अंतर तक सही हो सकती है।
14 हफ्ते के आसपास CRL करीब 84 मिलीमीटर तक पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे की पोजीशन और शरीर का आकार बदलने लगता है, इसलिए सिर से कमर तक की सीधी लंबाई लेना उतना आसान नहीं रहता। इसके बाद प्रेगनेंसी की उम्र और बच्चे की ग्रोथ देखने के लिए BPD, HC, AC और FL जैसे दूसरे तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।
अगर सातवें हफ्ते से पहले स्कैन कराया जाए, तो बच्चा बहुत छोटा होने के कारण CRL रिपोर्ट में नहीं आता। ऐसे में डॉक्टर पहले सैक और योक सैक देखते हैं, और उसके बाद एम्ब्रीओ दिखाई दे रहा है या नहीं, यह देखते हैं।
CRL करीब 7 मिलीमीटर होने पर आमतौर पर हार्टबीट दिखने लगती है। लेकिन अगर CRL इससे कम है और हार्टबीट नहीं दिख रही, तो सिर्फ इस आधार पर यह नहीं कहा जाता कि प्रेगनेंसी में कोई समस्या है। हो सकता है कि प्रेगनेंसी अभी उस स्टेज तक न पहुंची हो।
अगर CRL 7 मिलीमीटर या उससे ज्यादा है और फिर भी हार्टबीट नहीं दिखती, तो इसे प्रेगनेंसी के आगे न बढ़ने का पक्का लक्षण माना जाता है।
वहीं, CRL 7 मिलीमीटर से कम है और हार्टबीट नहीं दिख रही, तो डॉक्टर आमतौर पर 7 से 10 दिन बाद दोबारा TVS कराने की सलाह देते हैं। अगर पिछले स्कैन में सिर्फ सैक दिखा था और एम्ब्रीओ नहीं दिखा, तो दोबारा स्कैन के लिए कम से कम दो हफ्ते का अंतर रखा जा सकता है।
इसलिए शुरुआती स्कैन में हार्टबीट न दिखने पर कुछ दिन बाद दोबारा स्कैन करना जरूरी हो सकता है। इससे जल्दबाजी में गलत निष्कर्ष निकालने से बचा जा सकता है।
LMP से निकली प्रेगनेंसी की उम्र और CRL के आधार पर स्कैन में निकली उम्र कुछ दिन अलग हो सकती है। अगर यह फर्क आता है तो जरुरी नहीं कोई चिंता करने वाली बात है। लेकिन यह अंतर लिमिट से ज्यादा हो, तभी डॉक्टर स्कैन के हिसाब से प्रेगनेंसी की तारीख बदलने पर विचार करते हैं। ACOG की गाइडलाइन में यह लिमिट साफ तरीके से दी गयी है।
स्कैन के समय प्रेगनेंसी की उम्र | तारीख कब बदली जाती है |
|---|---|
8 हफ्ते 6 दिन तक | फर्क 5 दिन से ज्यादा हो तो |
9 हफ्ते से 13 हफ्ते 6 दिन | फर्क 7 दिन से ज्यादा हो तो |
14 से 15 हफ्ते 6 दिन | फर्क 7 दिन से ज्यादा हो तो |
16 से 21 हफ्ते 6 दिन | फर्क 10 दिन से ज्यादा हो तो |
22 से 27 हफ्ते 6 दिन | फर्क 14 दिन से ज्यादा हो तो |
28 हफ्ते के बाद | फर्क 21 दिन से ज्यादा हो तो |
इसका मतलब है कि शुरुआती प्रेगनेंसी में CRL और LMP की तारीख में फर्क कम होने पर तुरंत तारीख नहीं बदली जाती। शुरुआती स्कैन से निकली प्रेगनेंसी की उम्र, बाद के स्कैन में निकली उम्र की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती है।
प्रेगनेंसी की सही तारीख तय होना जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की जांचों का समय और डिलीवरी की संभावित तारीख तय होती है।
IVF से हुई प्रेगनेंसी में स्थिति अलग होती है। इसमें एम्ब्रीओ ट्रांसफर की तारीख और एम्ब्रीओ की उम्र पहले से पता होती है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र पहले से तय रहती है। ऐसे में CRL के आधार पर तारीख बदलने के बजाय यह देखा जाता है कि बच्चे की ग्रोथ, तय उम्र के हिसाब से हो रही है या नहीं।
CRL का छोटा या बड़ा होना हमेशा किसी समस्या का संकेत नहीं होता। कई बार ओव्यूलेशन आपकी गिनती से पहले या बाद में हुआ होता है, इसलिए प्रेगनेंसी की उम्र कुछ दिन अलग आ सकती है।
अगर तारीख पहले से पक्की है और CRL लगातार कम आ रहा है, तो डॉक्टर इसे नजर में रखते हैं। लगातार छोटा CRL बच्चे का वजन कम रहने और समय से पहले डिलीवरी के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
ऐसे में डॉक्टर तारीख दोबारा देखते हैं और जरूरत होने पर 1 से 2 हफ्ते बाद स्कैन कराकर ग्रोथ देखते हैं।
NT स्कैन फर्स्ट ट्राइमेस्टर में बच्चे की गर्दन के पीछे जमा तरल की मोटाई देखने के लिए किया जाता है। यह जांच 11 से 13 हफ्ते 6 दिन के बीच की जाती है और उस समय CRL 45 से 84 मिलीमीटर के बीच होना चाहिए।
अगर NT की मोटाई ज्यादा मिलती है, तो डॉक्टर आगे की जांचों की सलाह दे सकते हैं। NT स्कैन अपने आप किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि आगे जांच की जरूरत है या नहीं।
दोनों तारीखों में फर्क है, तो अपने डॉक्टर से सीधे पूछ लीजिए कि आगे कौन सी तारीख चलेगी।
शुरुआती प्रेगनेंसी में CRL की मदद से यह समझने में आसानी होती है कि प्रेगनेंसी कितने हफ्तों की है और आगे की जांचें कब होनी चाहिए। इसलिए रिपोर्ट में CRL के साथ लिखे हफ्तों और LMP से निकली तारीख में थोड़ा फर्क दिखे, तो उसे तुरंत समस्या न मानें।
डॉक्टर CRL के साथ स्कैन में बच्चे की ग्रोथ और हार्टबीट भी देखते हैं। जरूरत होने पर कुछ दिन बाद दोबारा स्कैन किया जाता है, ताकि स्थिति को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला न लेना पड़े।