D&C (DNC) क्या होता है? प्रक्रिया, रिकवरी और जोखिम

Last updated: August 28, 2026

सारांश (Overview)

D&C का नाम अक्सर तब सुनने में आता है जब मिसकैरेज के बाद डॉक्टर कहते हैं कि गर्भाशय को साफ करना पड़ेगा। इसी से डर बैठ जाता है कि यह कोई बड़ी सर्जरी है और आगे मां बनने में दिक्कत आएगी। सबसे पहले यह समझ लें कि यह एक छोटी प्रक्रिया है, जिसमें कोई चीरा नहीं लगता और ज्यादातर महिलाएं उसी दिन घर लौट जाती हैं। dnc kya hota hai को ठीक से समझने के लिए एक और बात जान लेना जरूरी है। आजकल ज्यादातर जगहों पर पुराने तरीके यानी तेज धार वाले औजार से खुरचने के बजाय सक्शन से टिश्यू निकाला जाता है, और यही तरीका सुरक्षित माना जाता है। आगे हम जानेंगे कि यह प्रक्रिया क्यों की जाती है, इसमें होता क्या है, रिकवरी में कितना समय लगता है, इसके क्या जोखिम हैं, और अगली प्रेग्नेंसी पर क्या असर पड़ता है।

D&C (DNC) क्या होता है?

D&C का मतलब है डाइलेशन एंड क्यूरेटेज। डाइलेशन यानी सर्विक्स को हल्का खोलना और क्यूरेटेज यानी गर्भाशय के अंदर से टिश्यू निकालना। बोलचाल में इसे DNC या सफाई कह दिया जाता है।

एक जरूरी अपडेट यह है कि WHO अब तेज धार वाले औजार से खुरचने वाली पुरानी विधि की जगह वैक्यूम एस्पिरेशन यानी सक्शन से टिश्यू निकालने की सलाह देता है, क्योंकि इसमें जटिलताएं कम होती हैं। नाम आज भी D&C ही चलता है, लेकिन तरीका बदल चुका है।

D&C प्रक्रिया क्यों की जाती है?

मिसकैरेज के बाद

मिसकैरेज के बाद अगर गर्भाशय यानी यूट्रस अपने आप पूरी तरह खाली न हो, तो टिश्यू निकालने की जरूरत पड़ती है। ACOG के अनुसार इसके तीन विकल्प हैं, इंतजार करना, दवा से टिश्यू बाहर निकालने की कोशिश करना, या सर्जिकल तरीके से टिश्यू निकलवाना। सर्जिकल तरीके को ही D&C कहते हैं,  जिसकी सफलता दर 99 प्रतिशत के करीब होती है।

असामान्य या ज्यादा ब्लीडिंग की जांच के लिए

पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, बीच में स्पॉटिंग, या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होने पर गर्भाशय की परत का सैंपल लेकर जांच की जाती है। इससे हाइपरप्लासिया, पॉलिप या कैंसर जैसी वजहों का पता चलता है।

गर्भाशय में बचे टिश्यू को निकालने के लिए

कई बार डिलीवरी के बाद प्लेसेंटा का हिस्सा अंदर रह जाता है, जिससे ब्लीडिंग रुकती नहीं या इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे में भी यह प्रक्रिया की जाती है।

D&C प्रक्रिया कैसे की जाती है?

प्रक्रिया से पहले की तैयारी

पहले अल्ट्रासाउंड और खून की जांच होती है और कुछ घंटे खाली पेट रहने को कहा जाता है। ACOG के अनुसार इंफेक्शन से बचाव के लिए पहले डॉक्सीसाइक्लिन की एक खुराक दी जाती है, और ब्लड ग्रुप Rh नेगेटिव हो तो Rh इम्यूनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन जरूरी होता है।

सर्विक्स को खोलने की प्रक्रिया

सर्विक्स को धीरे-धीरे खोलने के लिए दवा दी जाती है या पतले डाइलेटर इस्तेमाल होते हैं। यह हल्की बेहोशी या लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है, इसलिए प्रोसेस के समय दर्द महसूस नहीं होता।

गर्भाशय से टिश्यू निकालना

अब एक पतली नली अंदर डालकर सक्शन से टिश्यू बाहर निकाला जाता है। इसमें आमतौर पर 10 से 15 मिनट लगते हैं और कोई टांका नहीं लगता। जरूरत हो तो टिश्यू जांच के लिए भेजा जाता है।

प्रक्रिया के बाद निगरानी

कुछ घंटे रिकवरी रूम में ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर देखा जाता है, और ज्यादातर महिलाएं उसी दिन घर चली जाती हैं। लौटते समय किसी को साथ रखें, क्योंकि एनेस्थीसिया का असर कुछ घंटे रहता है।

D&C के बाद रिकवरी कैसे होती है?

ब्लीडिंग और ऐंठन

पहले कुछ दिन पीरियड्स जैसी या उससे हल्की ब्लीडिंग होती है, जो एक से दो हफ्ते में बंद हो जाती है। पेट के निचले हिस्से में ऐंठन भी सामान्य है, जिसके लिए दर्द की दवा दी जाती है।

आराम और रोजमर्रा की गतिविधियां

एक से दो दिन आराम काफी है, उसके बाद हल्का काम शुरू किया जा सकता है। भारी वजन उठाना कुछ दिन टालें। लंबे बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती।

पीरियड्स कब वापस आते हैं?

आमतौर पर अगला पीरियड चार से छह हफ्ते में आ जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पीरियड आने से पहले ही ओव्यूलेशन हो सकता है, यानी पहले महीने में भी प्रेग्नेंसी संभव है।

सेक्स और प्रेगनेंसी कब प्लान कर सकते हैं?

ब्लीडिंग पूरी तरह बंद होने तक, यानी करीब दो हफ्ते, शारीरिक संबंध न बनाने की सलाह दी जाती है ताकि इंफेक्शन का खतरा न रहे। 

D&C के बाद किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?

  • ब्लीडिंग के दौरान पैड इस्तेमाल करें, टैम्पॉन नहीं।
  • इस दौरान डूशिंग यानी अंदर से सफाई बिल्कुल न करें।
  • टब बाथ, स्विमिंग पूल और तालाब से कुछ दिन दूर रहें, शॉवर लेना ठीक है।
  • डॉक्टर की दी हुई दवा का कोर्स बीच में न छोड़ें।
  • फॉलोअप विजिट पर जरूर जाएं, ताकि पुष्टि हो सके कि गर्भाशय पूरी तरह खाली है।

 

D&C के संभावित रिस्क और कॉम्पलेक्सिटी

D&C में सीरियस कॉम्प्लेक्शन कम ही होती हैं, लेकिन इनके बारे में जानना जरूरी है।

इन्फेक्शन 

गर्भाशय में इंफेक्शन हो सकता है, जिसके लक्षण बुखार, बदबूदार डिस्चार्ज और पेट दर्द हैं। ACOG के अनुसार इंफेक्शन की दर कुल मिलाकर 1 से 2 प्रतिशत रहती है।

ज्यादा ब्लीडिंग

कुछ मामलों में ब्लीडिंग सामान्य से ज्यादा हो जाती है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने या खून चढ़ाने की जरूरत 1 प्रतिशत से कम मामलों में पड़ती है।

गर्भाशय या सर्विक्स को चोट

औजार डालते समय गर्भाशय की दीवार में छेद या सर्विक्स को चोट लगना संभव है, हालांकि यह बहुत कम होता है। अनुभवी हाथों में और सक्शन विधि से यह जोखिम और घटता है।

एशरमैन सिंड्रोम

इसमें गर्भाशय के अंदर चिपकाव बन जाता है, जिससे पीरियड्स बहुत हल्के हो सकते हैं या कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है। यही वजह है कि खुरचने वाली विधि से बचा जाता है, क्योंकि उससे परत को नुकसान पहुंच सकता है। सर्जिकल तरीके के बाद ऐसा चिपकाव कम ही देखा जाता है।

D&C के बाद डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  • एक घंटे में पैड पूरा भीग जाए, या खून के बड़े थक्के निकलें।
  • बुखार या ठंड लगे।
  • डिस्चार्ज से बदबू आए।
  • पेट में तेज दर्द हो जो दवा से भी कम न हो।
  • दो हफ्ते बाद भी ब्लीडिंग बंद न हो, या छह हफ्ते बाद भी पीरियड न आए।

इनमें से कुछ भी हो तो इंतजार न करें, क्योंकि समय पर पकड़ में आने वाली जटिलताएं आसानी से ठीक हो जाती हैं।

D&C के बाद प्रेग्नेंसी पर क्या असर पड़ता है?

ज्यादातर महिलाओं की फर्टिलिटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता और अगली प्रेग्नेंसी सामान्य रूप से हो जाती है। दिक्कत तभी आती है जब एशरमैन सिंड्रोम जैसी जटिलता बन जाए, जो कम ही होता है।

रही बात इंतजार की, तो लंबे समय तक WHO की सलाह छह महीने रुकने की रही है, लेकिन नए अध्ययन अलग तस्वीर दिखाते हैं। नॉर्वे में करीब 49,000 प्रेग्नेंसी पर हुए अध्ययन में मिसकैरेज के तीन महीने के भीतर कंसीव करने से जटिलताओं का खतरा नहीं बढ़ा। इसलिए कब कोशिश शुरू करनी है, यह डॉक्टर के साथ तय करें और मानसिक तैयारी को भी उतनी ही अहमियत दें।

निष्कर्ष (Conclusion)

D&C यानी DNC एक छोटी प्रक्रिया है जिसमें सर्विक्स को हल्का खोलकर गर्भाशय से टिश्यू निकाला जाता है। यह मिसकैरेज के बाद बचे टिश्यू, असामान्य ब्लीडिंग की जांच, या डिलीवरी के बाद रह गए हिस्से के लिए की जाती है। आज इसमें ज्यादातर सक्शन इस्तेमाल होता है, जो पुरानी खुरचने वाली विधि से ज्यादा सुरक्षित है। पूरी प्रक्रिया 10 से 15 मिनट की होती है। इसके बाद एक से दो हफ्ते हल्की ब्लीडिंग रहती है और पीरियड चार से छह हफ्ते में लौट आता है। इंफेक्शन और ज्यादा ब्लीडिंग जैसे जोखिम मौजूद तो हैं, पर कम ही होते हैं। फर्टिलिटी पर आमतौर पर असर नहीं पड़ता, इसलिए अगली प्रेग्नेंसी की चिंता के बजाय रिकवरी और फॉलोअप पर ध्यान दें।

D&C के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. D&C के बाद कितने दिन तक ब्लीडिंग हो सकती है?

2. क्या D&C के बाद पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं?

3. D&C के बाद गर्भाशय को सामान्य होने में कितना समय लगता है?

4. क्या D&C के बाद दोबारा मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है?

5. क्या D&C के बाद संक्रमण हो सकता है?

6. क्या हर मिसकैरेज के बाद D&C करवाना जरूरी होता है?

7. D&C के बाद कब एक्सरसाइज या सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं?

8. D&C के बाद भविष्य में प्रेग्नेंसी की संभावना कैसी रहती है?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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