एंडोमेट्रियल बायोप्सी की जरुरत कब पड़ती है? (Endometrial biopsy in hindi)

Last updated: June 22, 2026

Overview

एंडोमेट्रियल बायोप्सी (endometrial biopsy) एक प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) की अंदरूनी परत से टिशू का एक छोटा सैंपल लिया जाता है। यह सैंपल लैब में माइक्रोस्कोप से चेक किया जाता है। Endometrial biopsy समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में यह टेस्ट काफ़ी कॉमन है। इस आर्टिकल में जानेंगे कि एंडोमेट्रियल बायोप्सी क्यों करवाई जाती है, इस प्रोसीजर में क्या होता है, कितना दर्द होता है, और रिज़ल्ट का मतलब क्या निकलता है।

एंडोमेट्रियल बायोप्सी क्या होती है?

गर्भाशय के अंदर एक परत होती है जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहते हैं। यही वो जगह है जहाँ एम्ब्रियो इम्प्लांट होता है और प्रेगनेंसी शुरू होती है। एंडोमेट्रियल बायोप्सी में इसी परत से एक बहुत छोटा टुकड़ा निकाला जाता है और फिर उसकी जाँच की जाती है।

ध्यान रहे एंडोमेट्रियल बायोप्सी है, सर्जरी नहीं, इसीलिए इसमें कोई कट नहीं लगता और मरीज़ को बेहोश करने की भी ज़रूरत नहीं होती। इस प्रोसीजर में एक पतली ट्यूब जैसी कैनुला (cannula) योनि मतलब वेजाइना से होकर यूट्रस में डाली जाती है और हल्के सक्शन से एंडोमेट्रियम टिशू का सैंपल लिया जाता है। इस पूरे प्रोसीजर में 5 से 10 मिनट का समय लगता है।

बायोप्सी किन कारणों से करवाई जाती है?

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से पहले

IVF से पहले डॉक्टर यह जानना चाहते हैं कि एंडोमेट्रियम एम्ब्रियो के इम्प्लांटेशन (implantation) के लिए तैयार है या नहीं। एंडोमेट्रियल बायोप्सी से पता चलता है कि यूट्रस की लाइनिंग में कोई इंफेक्शन, सूजन, या असामान्य यानि एब्नॉर्मल सेल्स तो नहीं हैं।

जेनिटल TB की जाँच

भारत में एंडोमेट्रियल बायोप्सी करने का एक बहुत ज़रूरी कारण जेनिटल ट्यूबरक्लोसिस यानी TB की जाँच करना है। टीबी बैक्टीरिया यूट्रस की लाइनिंग को नुकसान पहुँचा सकता है जिससे एम्ब्रियो इम्प्लांट नहीं हो पाता। बायोप्सी के सैंपल पर TB-PCR टेस्ट किया जाता है जिससे बहुत ठोस जानकारी मिलती है।

बार-बार IVF फेल होने पर

अगर एम्ब्रियो अच्छे हों लेकिन बार-बार IVF फेल हो रहा हो, तो डॉक्टर एंडोमेट्रियल बायोप्सी करवाते हैं। इससे पता चलता है कि यूट्रस की लाइनिंग में कोई ऐसी दिक्कत तो नहीं जिसकी वजह से इम्प्लांटेशन न हो पा रहा हो। ERA टेस्ट (endometrial receptivity analysis) भी बायोप्सी से ही किया जाता है जिससे एम्ब्रियो ट्रांसफर का सबसे सही समय पता चलता है।

असामान्य ब्लीडिंग की जाँच के लिए

पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग, बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, या मेनोपॉज़ (menopause) के बाद ब्लीडिंग होने पर भी बायोप्सी करवाई जाती है। इससे पता चलता है कि एंडोमेट्रियम में कोई असामान्य सेल ग्रोथ तो नहीं है।

बायोप्सी से पहले क्या तैयारी करनी होती है?

एंडोमेट्रियल बायोप्सी आमतौर पर पीरियड साइकल के 21वें दिन से 26वें दिन के बीच करवाई जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस समय एंडोमेट्रियम सबसे मोटी होती है, जिससे सैंपल लेने में आसानी रहती है।

डॉक्टर प्रोसीजर से आधा घंटा पहले पेनकिलर लेने की सलाह देते हैं ताकि दर्द कम हो। कुछ डॉक्टर प्रोसीजर से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट भी करवाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रेगनेंसी नहीं है।

अगर ब्लड थिनर दवाइयाँ ले रही हैं तो डॉक्टर को ज़रूर बताएँ। कभी-कभी प्रोसीजर से पहले ये दवाइयाँ कुछ दिन के लिए रोकनी पड़ सकती हैं।

प्रोसीजर के दौरान क्या होता है?

प्रोसीजर OPD में ही होता है, अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं। सबसे पहले डॉक्टर स्पेक्यूलम (speculum) से वेजाइना को थोड़ा खोलते हैं ताकि गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स (cervix) दिख सके।

इसके बाद एक पतली कैनुला सर्विक्स से होकर यूट्रस में डाली जाती है। इस कैनुला को पिपेल कैथेटर (Pipelle catheter) कहते हैं जो बहुत पतली और फ्लेक्सिबल होती है। कैनुला के अंदर हल्का सक्शन बनता है जिससे एंडोमेट्रियम का एक छोटा सैंपल अंदर आ जाता है।

सैंपल लेने में 30 से 60 सेकंड लगते हैं। इसके बाद कैनुला निकाल ली जाती है और सैंपल को एक कंटेनर में रखकर लैब भेजा जाता है।

बायोप्सी में दर्द कितना होता है?

यह सवाल एंडोमेट्रियल बायोप्सी में सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। सच यह है कि कुछ महिलाओं को दर्द होता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि इसे सहन न किया जा सके। ज़्यादातर महिलाएँ एंडोमेट्रियल बायोप्सी में होने वाले दर्द को पीरियड के दौरान होने वाले क्रैम्प जैसा बताती हैं।

सैंपल लेने के दौरान कैनुला जब सर्विक्स से गुज़रती है तब एक तेज़ चुभन जैसा महसूस हो सकता है। इस दौरान कुछ सेकंड के लिए एक ऐंठन जैसी महसूस हो सकती है।

प्रोसीजर के बाद 1 से 2 दिन तक हल्के क्रैम्प और स्पॉटिंग हो सकती है। आप डॉक्टर की सलाह से पेनकिलर ले सकती हैं, जो आपको क्रैम्पिंग में आराम मिल जाए।

बायोप्सी के बाद क्या ध्यान रखें?

  • प्रोसीजर के बाद 24 से 48 घंटे आराम करना अच्छा रहता है। 
  • 2 से 3 दिन तक शारीरिक संबंध न बनाएँ। 
  • हैवी एक्सरसाइज़ या भारी सामान उठाने से बचें। 
  • टैम्पोन का इस्तेमाल न करके, सिर्फ पैड का इस्तेमाल करें।
  • अगर तेज़ दर्द, बुखार, या ज़्यादा ब्लीडिंग हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें क्योंकि ये लक्षण इंफेक्शन के हो सकते हैं।

एंडोमेट्रियल बायोप्सी का रिज़ल्ट आमतौर पर 5 से 7 दिन में आ जाता है। TB-PCR रिपोर्ट में कभी-कभी 10 से 15 दिन लग सकते हैं।

Endometrial biopsy रिज़ल्ट कैसे समझें?

नॉर्मल रिज़ल्ट

अगर एंडोमेट्रियम की हिस्टोपैथोलॉजी (histopathology) रिपोर्ट में "secretory phase endometrium" लिखा है तो इसका मतलब है कि यूट्रस की लाइनिंग नॉर्मल है और प्रेगनेंसी के लिए तैयार है।

क्रोनिक एंडोमेट्राइटिस

अगर रिपोर्ट में "chronic endometritis" आता है, तो इसका मतलब है कि एंडोमेट्रियम में लंबे समय से हल्की सूजन है। यह एंटीबायोटिक्स से ठीक हो जाती है। यह कंडीशन बार-बार IVF फेल होने और मिसकैरेज की एक छिपी वजह होती है।

TB पॉज़िटिव

अगर TB-PCR पॉज़िटिव आता है तो 6 से 9 महीने की ATT यानी एंटी-ट्यूबरक्यूलर ट्रीटमेंट (anti-tubercular treatment) दी जाती है। TB का पूरा इलाज होने के बाद ही IVF या कोई भी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है।

हाइपरप्लेसिया

अगर रिपोर्ट में "endometrial hyperplasia" आता है, तो एंडोमेट्रियम सामान्य से ज़्यादा मोटी हो गई है। इसका इलाज हॉर्मोनल दवाइयों से किया जाता है और फॉलोअप बायोप्सी से कंफर्म किया जाता है कि लाइनिंग नॉर्मल हुई या नहीं।



रिपोर्ट में क्या आया?

इसका मतलब

क्या करना पड़ सकता है? 

Secretory Phase Endometrium

एंडोमेट्रियम सामान्य है

निश्चिन्त रहें,कोई समस्या नहीं

Chronic Endometritis

एंडोमेट्रियम में सूजन

इलाज की जरुरत पड़ सकती है 

TB-PCR Positive

एंडोमेट्रियम में TB के लक्षण

पहले TB का इलाज किया जाता है

Endometrial Hyperplasia

एंडोमेट्रियम सामान्य से अधिक मोटी है 

आगे की जाँच और इलाज की जरूरत हो सकती है

निष्कर्ष (Conclusion)

एंडोमेट्रियल बायोप्सी एक छोटा सा और सेफ प्रोसीजर है जिससे डॉक्टर यूट्रस की लाइनिंग के बारे में बहुत ज़रूरी जानकारी इकट्ठी करते हैं। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से पहले TB, इंफेक्शन, और एंडोमेट्रियम की हेल्थ चेक करना बहुत ज़रूरी है। अगर डॉक्टर ने बायोप्सी की सलाह दी है, तो इसे टालें नहीं क्योंकि सही डायग्नोसिस मिलने से ट्रीटमेंट का रिज़ल्ट काफी बेहतर हो सकता है।

एंडोमेट्रियल बायोप्सी के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Endometrial biopsy FAQs)

क्या एंडोमेट्रियल बायोप्सी से प्रेगनेंसी के चांस बढ़ते हैं?

 

बायोप्सी के दौरान एंडोमेट्रियम में जो हल्की स्क्रैचिंग होती है, वो इम्प्लांटेशन रेट बढ़ा सकती है। इसे एंडोमेट्रियल स्क्रैचिंग (endometrial scratching) कहते हैं। हालांकि ऐसा हर केस में हो यह जरूरी नहीं है।

बायोप्सी कितनी बार करवानी पड़ सकती है?

 

आमतौर पर एक बार ही काफ़ी होती है। लेकिन अगर पहली बायोप्सी में इंफेक्शन या TB आया हो और इलाज हो चुका हो, तो दोबारा बायोप्सी करवाकर कन्फर्म किया जाता है कि इंफेक्शन ठीक हुआ या नहीं।

क्या बायोप्सी के बाद उसी महीने IVF हो सकता है?

 

आमतौर पर डॉक्टर बायोप्सी के बाद कम से कम एक पीरियड साइकल का इंतज़ार करते हैं ताकि एंडोमेट्रियम पूरी तरह रिकवर हो जाए। अगर TB-PCR का रिज़ल्ट आना बाकी है तो IVF तब तक होल्ड पर रहता है।

ERA टेस्ट और नॉर्मल बायोप्सी में क्या फर्क है?

 

ERA (endometrial receptivity analysis) एक एडवांस टेस्ट है जिससे एम्ब्रियो ट्रांसफर के लिए सबसे सही विंडो पता चलती है। नॉर्मल बायोप्सी से एंडोमेट्रियम लाइनिंग की हेल्थ चेक की जाती है। दोनों टेस्ट से अलग अलग जानकारी मिलती है।

क्या बायोप्सी से यूट्रस को कोई नुकसान होता है?

 

नहीं, एंडोमेट्रियम हर महीने पीरियड्स के दौरान ख़ुद ही झड़ती है और दोबारा बनती है। बायोप्सी में जितना टिशू लिया जाता है वो बहुत कम होता है और अगले साइकल में एंडोमेट्रियम पूरी तरह वापस बन जाती है।

क्या बायोप्सी से पहले कोई खास डाइट फॉलो करनी होती है?

 

नहीं, कोई खास डाइट ज़रूरी नहीं है। बस डॉक्टर से पूछ लें कि कोई दवाई बंद करनी है या नहीं। प्रोसीजर से कुछ घंटे पहले हल्का खाना खा सकती हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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