हर महीने कुछ दिन ऐसे होते हैं जब प्रेगनेंसी के चांस सबसे ज़्यादा होते हैं। इन्हें फर्टाइल विंडो (Fertile Window) कहते हैं। ऐसा नहीं होता कि कभी भी संबंध बनाने से गर्भ ठहर सकता है। आपके मासिक धर्म चक्र यानी मेंस्ट्रुअल साइकिल (menstrual cycle ) का सिर्फ़ 5 से 6 दिन का समय होता है जब एग और स्पर्म का मिलना संभव होता है। बहुत सी महिलाएँ सोचती हैं कि पीरियड के 14वें दिन ही ओवुलेशन होता है। लेकिन यह बात हर महिला पर लागू नहीं होती। अगर आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल छोटी हो या लंबी है तो फर्टाइल विंडो भी बदल जाती है।
इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि fertile window meaning in hindi, साइकिल के किस समय या विंडो खुलती है, इस समय बॉडी कौन से सिग्नल देती है, और फर्टाइल विंडो को ट्रैक कैसे करते हैं।
हर महीने ओवरी से एक एग रिलीज़ होता है। इस प्रॉसेस को ओवुलेशन (Ovulation) कहते हैं। यह एग सिर्फ़ 12 से 24 घंटे तक ज़िंदा रहता है। अगर इस दौरान स्पर्म नहीं मिला, तो यह एग खत्म हो जाता है।
लेकिन स्पर्म की बात अलग है। स्पर्म महिला की बॉडी में 3 से 5 दिन तक ज़िंदा रह सकता है। मतलब ओवुलेशन से 5 दिन पहले भी अगर स्पर्म बॉडी में पहुँच जाए, तो प्रेगनेंसी हो सकती है।
इसी टाइम पीरियड, ओवुलेशन का दिन और उससे पहले के 5 दिन, को फर्टाइल विंडो कहते हैं । यह लगभग 6 दिन की होती है।
ऐसा नहीं होता कि फर्टाइल विंडो के सारे दिन बराबर फर्टाइल होते हैं। ओवुलेशन के दिन और उससे एक दिन पहले, यह दो दिन सबसे ज़्यादा फर्टाइल होते हैं, जिस दौरान शारीरिक संबंध बनाने यानी इंटरकोर्स करने से प्रेग्नेंट होने का सबसे ज्यादा चांस होता है।
चलिए 28 दिन की मेंस्ट्रुअल साइकिल को उदाहरण के तौर पर मानकर फर्टाइल विंडो को समझते हैं।
साइकिल का पहला दिन वो होता है जब ब्लीडिंग स्टार्ट हो। इन दिनों में यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग बाहर आती है। इस दौरान प्रेगनेंसी के चांस बहुत कम होते हैं।
पीरियड खत्म होने के बाद बॉडी नया एग बनाने लगती है। इस दौरान एस्ट्रोजन (Estrogen) हॉर्मोन का लेवल बढ़ने लगता है। यूट्रस की लाइनिंग दोबारा मोटी होने लगती है। सर्विकल म्यूकस (Cervical Mucus) भी बदलने लगता है। पहले यह गाढ़ा और स्टिकी होता है, फिर धीरे-धीरे पतला होने लगता है।
अगर साइकिल 28 दिन से छोटी है, तो ओवुलेशन जल्दी हो सकता है। ऐसे में 8वें या 9वें दिन से ही फर्टाइल विंडो ओपन हो सकती है।
28 दिन की साइकिल में ओवुलेशन आमतौर पर 14वें दिन के आसपास होता है। मतलब 9वें से 14वें दिन तक फर्टाइल विंडो ओपन रहती है।
ओवुलेशन से ठीक पहले बॉडी में एलएच सर्ज (LH Surge) होता है यानी ल्यूटीनाइज़िंग हॉर्मोन (LH) का लेवल अचानक बढ़ता है। इसके 24 से 36 घंटे बाद ओवरी से एग रिलीज़ होता है। ओवुलेशन किट (Ovulation Kit) इसी LH को डिटेक्ट करती है।
ओवुलेशन के दिन और उससे एक दिन पहले, इन दो दिनों में, कंसीव करने के चांस सबसे ज़्यादा होते हैं।
एग रिलीज़ होने के बाद अगर फर्टिलाइज़ेशन (Fertilization) नहीं हुआ, तो एग 24 घंटे में खत्म हो जाता है। इसके बाद प्रोजेस्टेरॉन (Progesterone) हॉर्मोन बढ़ने लगता है। अब तक यूट्रस की लाइनिंग बनी रहती है, लेकिन अगर प्रेगनेंसी नहीं हुई तो यह टूटना शुरू हो जाती है। और फिर पीरियड आ जाता है। इसके बाद नई मेंस्ट्रुअल साइकिल स्टार्ट हो जाती है ।
फर्टाइल विंडो को बताने के लिए आपका शरीर कुछ सिग्नल देता है। अगर आप इन्हें पहचानना सीख गयीं तो बड़ी आसानी से अपनी फर्टाइल विंडो को खुद से ट्रैक कर सकती हैं।
फर्टाइल विंडो को पहचानने के कई तरीके हैं। अगर आप एक से ज़्यादा तरीके एक साथ इस्तेमाल करें तो रिज़ल्ट ज़्यादा सटीक आता है।
आप अपनी पिछले 6 महीने की साइकिल नोट कर लें। सबसे छोटी साइकिल में से 18 घटाएँ, यह फर्टाइल विंडो का पहला दिन है। सबसे लंबी साइकिल में से 11 घटाएँ, यह लास्ट दिन है।
मान लीजिए छोटी साइकिल 26 दिन और लंबी 30 दिन की है। तो फर्टाइल विंडो दिन आठवें (26-18) दिन उन्नीसवें (30-11) दिन तक होगी। यह अकेला तरीका बहुत सटीक नहीं है, लेकिन इससे अंदाज़ा लग जाता है।
यह यूरिन टेस्ट है जो LH Surge को डिटेक्ट करता है। अगर यह पॉज़िटिव आए तो 24 से 36 घंटे में ओवुलेशन होगा। साइकिल के 10वें दिन से रोज़ टेस्ट करें जब तक पॉज़िटिव न आ जाए।
हर सुबह बिस्तर से उठने से पहले टेम्परेचर नापें। ओवुलेशन के बाद टेम्परेचर थोड़ा बढ़ता है और पीरियड तक बढ़ा रहता है। 2 से 3 महीने का चार्ट बनाएँ तो पैटर्न क्लियर दिखने लगेगा।
BBT पर बढ़ा हुआ टेम्परेचर ओवुलेशन के कारण दिखाई देता है, इसका मतलब है कि ओवुलेशन हो चुका है। इसीलिए BBT ट्रैकिंग और ओवुलेशन किट साथ में इस्तेमाल करें।
रोज़ म्यूकस पर ध्यान दें। टॉयलेट पेपर, अंडरवियर या सीधे अपनी अँगुलियों से योनि मतलब वजाइना (Vegina) को छूकर आप म्यूकस चेक कर सकती हैं। अगर यह क्लियर, पतला और स्लिपरी है तो ओवुलेशन करीब है। जब गाढ़ा या ड्राई हो तो इसका मतलब है कि अभी फर्टाइल विंडो बंद है।
कई ऐप्स पीरियड की डेट के बेसिस पर फर्टाइल दिनों का अंदाज़ा लगाते हैं। लेकिन इन पर पूरा भरोसा न करें। ये सिर्फ़ एस्टीमेट देते हैं। बॉडी के सिग्नल्स भी साथ में चेक करें।
अगर साइकिल हर महीने अलग-अलग दिनों की आती है, तो कैलेंडर मेथड काम नहीं करेगा। ऐसे में बॉडी के सिग्नल्स पर ज़्यादा फोकस करें।
अगर किसी महीने फर्टाइल विंडो में संबंध नहीं हो पायें, तो परेशान होने की जरुरत नहीं है। अगले महीने फिर चांस आएगा।
नेचुरल तरीके से प्रेगनेंसी होने में 6 महीने से 1 साल लग सकता है। हर महीने कंसीव करने के चांस लगभग 15 से 25 परसेंट होते हैं। इसलिए एक-दो महीने में रिज़ल्ट न मिले तो यह नॉर्मल है।
लेकिन 35 साल से कम उम्र में 1 साल और 35 से ज़्यादा उम्र में 6 महीने ट्राई करने के बाद भी प्रेगनेंसी न हो, तो डॉक्टर से मिलें।
IVF में फर्टिलाइज़ेशन लैब में होता है, बॉडी के अंदर नहीं, इसलिए नेचुरल फर्टाइल विंडो ट्रैक ाकरने की ज़रूरत नहीं होती।
लेकिन एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) की टाइमिंग बहुत क्रिटिकल होती है। डॉक्टर हॉर्मोन इंजेक्शन देकर ओवरी में कई फॉलिकल्स बनाते हैं। फिर ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है। इसके 34 से 36 घंटे बाद एग रिट्रीव किया जाता है।
एम्ब्रीओ ट्रांसफर (Embryo Transfer) के बाद इम्प्लांटेशन विंडो (Implantation Window) का भी ध्यान रखा जाता है। यूट्रस की लाइनिंग सही से तैयार होनी चाहिए। कभी-कभी डॉक्टर ERA Test करते हैं ताकि पता चले कि यूट्रस एम्ब्रीओ के लिए कब तैयार है।
IUI में फर्टाइल विंडो जानना और भी ज़रूरी है। IUI में स्पर्म सीधे यूट्रस में डाला जाता है. जो ओवुलेशन के ठीक आसपास करना होता है।
फर्टाइल विंडो हर महीने आती है। यह ओवुलेशन के दिन और उससे 5 दिन पहले का टाइम पीरियड है। इसे पहचानने के लिए बॉडी के सिग्नल पहचानना सबसे भरोसेमंद तरीका है। सर्विकल म्यूकस ओवुलेशन किट और और BBT तीनों तरीके इस्तेमाल करना सही रहता है।
ओवुलेशन "14वें दिन होता है" यह रूल सबके लिए सही नहीं है। अपनी साइकिल को समझें, बॉडी के सिग्नल्स पर ध्यान दें।
कई महीनों से कोशिश कर रही हैं और प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो फ़र्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें। अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन टेस्ट से वजह पता लग जाती है। ज़रूरत पड़े तो IVF या IUI जैसे ऑप्शन मौजूद हैं।