Overview
इस ब्लॉग में प्रेग्नेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन कम होने यानी एनीमिया के कारण, लक्षण और इससे जुड़े जोखिमों को आसान भाषा में समझाया गया है। इसमें आयरन, विटामिन C, फ़ोलिक एसिड और B12 की भूमिका, आयरन वाली चीज़ों को सही तरीके से लेने के उपाय, आयरन सप्लीमेंट्स और IV आयरन की जरूरत कब पड़ सकती है, इसकी जानकारी दी गई है। साथ ही, आयरन की गोलियों से होने वाले साइड इफ़ेक्ट्स और डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए, यह भी बताया गया है।
प्रेग्नेंसी में "हीमोग्लोबिन कम है" सुनना भारत में इतना आम है कि इसे कई बार हल्के में ले लिया जाता है। और यही सबसे बड़ी ग़लती है।
आँकड़े देखिए - भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के मुताबिक़ देश में लगभग 52% गर्भवती महिलाएँ एनीमिया (खून की कमी) से जूझती हैं, और गाँवों में ये और ज़्यादा है। यानी हर दूसरी गर्भवती महिला।
तो ये कोई मामूली बात नहीं। पर अच्छी ख़बर ये है कि ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह साफ़ है और इलाज भी।
एक बात शुरू में ही साफ़ कर दें, क्योंकि "हीमोग्लोबिन कैसे बढ़ाएँ" खोजने वाले ज़्यादातर लोग सिर्फ़ खाने के उपाय ढूँढते हैं - प्रेग्नेंसी के एनीमिया में सिर्फ़ खाने से काम अक्सर नहीं चलता। क्यों नहीं, ये आगे समझेंगे। पहले बुनियाद।
हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) आपके खून की लाल कोशिकाओं में मौजूद वो प्रोटीन है जो शरीर भर में ऑक्सीजन पहुँचाता है। इसे बनाने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है - आयरन (iron)।
जब हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, तो शरीर को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिलती। इसीलिए एनीमिया में थकान, कमज़ोरी, चक्कर और साँस फूलना जैसे लक्षण आते हैं।
अब प्रेग्नेंसी में ये ख़ास तौर पर क्यों होता है? इसकी एक स्वाभाविक वजह है। प्रेग्नेंसी में आपके शरीर को अब दो लोगों के लिए खून बनाना है - अपने लिए और बच्चे के लिए। इस बढ़ी हुई ज़रूरत को अकेले खाने से पूरा करना मुश्किल होता है, ख़ासकर जब पहले से ही शरीर में आयरन का भंडार कम हो।
और भारत में तो बहुत सी महिलाएँ प्रेग्नेंसी से पहले ही हल्के एनीमिया के साथ चल रही होती हैं, इसलिए प्रेग्नेंसी में ये और गहरा जाता है।
यहाँ एक बात जान लेना ज़रूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के मुताबिक़ प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन 11 g/dL से कम होने पर उसे एनीमिया माना जाता है।
गंभीरता के हिसाब से इसे तीन हिस्सों में बाँटा जाता है - हल्का (10 से 10.9), मध्यम (7 से 9.9), और गंभीर (7 से कम)।
पर यहाँ मैं आपको अपनी रिपोर्ट का नंबर इंटरनेट से मिलाकर ख़ुद फ़ैसला करने से रोकूँगा। ये सिर्फ़ मोटा संदर्भ है। आपकी रिपोर्ट का असली मतलब आपकी तिमाही, आपके लक्षण और बाक़ी जाँचों के साथ आपके डॉक्टर ही ठीक से बता सकते हैं। कम नंबर देखकर घबराने से पहले उनसे बात कीजिए।
ये हिस्सा ध्यान से पढ़िए, क्योंकि यहीं ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं।
प्रेग्नेंसी का एनीमिया सिर्फ़ थकान की बात नहीं है। इलाज न होने पर इसे कई गंभीर जटिलताओं से जोड़ा गया है - समय से पहले प्रसव, बच्चे का कम वज़न, प्रीक्लेम्पसिया, और डिलीवरी के बाद ज़्यादा खून बहने (postpartum hemorrhage) का जोखिम।
यही वजह है कि इसे "बाद में देख लेंगे" वाली सोच से नहीं टालना चाहिए। हीमोग्लोबिन बढ़ाना सिर्फ़ आपकी कमज़ोरी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित डिलीवरी और स्वस्थ बच्चे के लिए भी ज़रूरी है।
खाना पहला और बुनियादी हिस्सा है। ये अकेले काफ़ी न भी हो, तो भी बहुत ज़रूरी है।
आयरन वाली चीज़ें - हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (पालक, मेथी), दालें और बीन्स, चुकंदर, गुड़, खजूर, और (जो खाते हों उनके लिए) मछली और मीट।
और सबसे ज़रूरी नुस्खा - आयरन के साथ विटामिन C। ये अकेली सबसे काम की बात है जो ज़्यादातर लोग नहीं जानते। विटामिन C शरीर में आयरन को सोखने की क्षमता काफ़ी बढ़ा देता है, और आयरन के साथ मिलकर हीमोग्लोबिन को बेहतर ढंग से बढ़ाता है।
व्यावहारिक तौर पर इसका मतलब - आयरन वाली चीज़ के साथ नींबू, संतरा, आँवला या टमाटर लीजिए। जैसे दाल-पालक पर नींबू निचोड़ लेना, या आयरन की गोली संतरे के रस के साथ लेना।
एक ताज़ा अध्ययन में तो पौधों से मिलने वाले आयरन को विटामिन C के साथ देने पर हीमोग्लोबिन में साफ़ सुधार देखा गया, और पेट की दिक़्क़त भी कम रही।
क्या चीज़ आयरन सोखने में रुकावट डालती है? चाय और कॉफ़ी आयरन के अवशोषण को कम करते हैं। इसलिए आयरन वाली चीज़ या गोली के ठीक साथ चाय-कॉफ़ी न लें - बीच में कुछ अंतर रखें।
अब वो बात जो शुरू में कही थी।
प्रेग्नेंसी में आयरन की ज़रूरत इतनी बढ़ जाती है कि ज़्यादातर सामान्य भारतीय खाने से अकेले उसे पूरा करना बहुत मुश्किल है। इसीलिए दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियाँ (सप्लीमेंट) दी जाती हैं।
और इसका असर साफ़ है। शोध में पाया गया कि रोज़ आयरन लेने से प्रेग्नेंसी के आख़िर तक एनीमिया के मामलों में 73% तक की कमी आई। एक अध्ययन में मध्यम एनीमिया वाली महिलाओं का हीमोग्लोबिन रोज़ आयरन-फ़ोलिक एसिड लेने से 9.36 से बढ़कर 12 g/dL तक पहुँच गया।
इसीलिए भारत में सरकारी कार्यक्रमों के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ़्त आयरन-फ़ोलिक एसिड की गोलियाँ दी जाती हैं। इन्हें नियमित लेना बहुत ज़रूरी है - इन्हें "बस विटामिन है" समझकर छोड़ना नहीं चाहिए।
एनीमिया की वजह हमेशा सिर्फ़ आयरन नहीं होती। फ़ोलिक एसिड और विटामिन B12 की कमी भी एनीमिया का कारण बन सकती है।
इसीलिए प्रेग्नेंसी में आयरन के साथ फ़ोलिक एसिड दिया जाता है। FIGO की गाइडलाइन के मुताबिक़ 12 हफ़्ते के बाद आयरन के साथ रोज़ 400 माइक्रोग्राम फ़ोलिक एसिड पूरी प्रेग्नेंसी लेने की सलाह है।
पर कुछ महिलाओं को ज़्यादा डोज़ चाहिए। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ हेमेटोलॉजी के मुताबिक़ 5 mg वाली ज़्यादा डोज़ उन्हें दी जाती है जिनकी पिछली प्रेग्नेंसी न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट से प्रभावित रही हो, जिन्हें डायबिटीज़ हो, या जो मिर्गी की कुछ दवाएँ ले रही हों।
पर ध्यान दें - कौन सा सप्लीमेंट, कितनी मात्रा में, ये डॉक्टर आपकी रिपोर्ट देखकर तय करते हैं। ये ख़ुद से तय करने की चीज़ नहीं। इसीलिए इस लेख में आयरन की गोली की मात्रा जान-बूझकर नहीं दी जा रही।
एक ख़ास बात भारत के लिए - FIGO कहती है कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में, जहाँ पोषण की कमी आम है, अकेले आयरन-फ़ोलिक एसिड के बजाय कई सूक्ष्म पोषक तत्व वाले सप्लीमेंट (multiple micronutrients) पर विचार करना बेहतर हो सकता है।
कभी-कभी मुँह से ली गई आयरन की गोलियाँ काफ़ी नहीं पड़तीं - या तो एनीमिया ज़्यादा हो, या गोलियों से पेट इतना ख़राब हो कि महिला उन्हें ले न पाए, या समय कम बचा हो।
ऐसे मामलों में डॉक्टर नस के ज़रिए (IV) आयरन देने का विकल्प चुन सकते हैं, जो तेज़ी से असर करता है। ये अस्पताल/क्लिनिक में डॉक्टर की निगरानी में दिया जाता है। कब इसकी ज़रूरत है, ये पूरी तरह डॉक्टर का फ़ैसला है।
बात इतनी है कि अगर गोलियों से आराम न मिल रहा हो, तो हार मानने या चुप रहने की ज़रूरत नहीं - रास्ते और भी हैं। डॉक्टर से खुलकर बात कीजिए।
ये बहुत आम शिकायत है, और इसी वजह से कई महिलाएँ गोली छोड़ देती हैं। मतली, कब्ज़, या पेट में जलन हो सकती है।
पर गोली छोड़ने के बजाय डॉक्टर से बात कीजिए - अक्सर लेने का समय बदलने (जैसे खाने के साथ), मात्रा एडजस्ट करने, या दूसरे रूप की आयरन देने से आराम मिल जाता है। गोली ख़ुद से बंद मत कीजिए, क्योंकि एनीमिया का इलाज बीच में रुकना नुक़सानदेह है।
बहुत ज़्यादा थकान को "प्रेग्नेंसी में तो होती ही है" मानकर टालना ठीक नहीं - कई बार इसके पीछे एनीमिया होता है, जिसका इलाज आसान है।