प्रेगनेंसी में अचानक ब्लीडिंग दिखे तो घबराहट होना स्वाभाविक है। हर ब्लीडिंग खतरनाक नहीं होती। कुछ स्थितियों में हल्की स्पॉटिंग बिल्कुल सामान्य होती है, जबकि कुछ मामलों में डॉक्टर से पास तुरंत जाना होता है। सबसे जरूरी है सही समय पर सही क़दम उठाना। ब्लीडिंग रोकने का तरीक़ा इस पर निर्भर करता है कि ब्लीडिंग का कारण क्या है, कितनी मात्रा में है, और प्रेगनेंसी का कौन-सा सप्ताह यानी वीक चल रहा है। इस आर्टिकल में पढ़ेंगे कि pregnancy bleeding दिखते ही तुरंत क्या करें, घर पर कंट्रोल के उपाय, डॉक्टर कौन-सी दवाइयाँ देते हैं, खानपान से कैसे मदद मिलती है, IVF प्रेगनेंसी में ख़ास सावधानियाँ, और कौन-सी ग़लतियाँ ब्लीडिंग बढ़ा सकती हैं। आगे समझते हैं, How to stop pregnancy bleeding in Hindi, जिससे आप आसानी से ऐसी सिचुएशन में निर्णय ले पायें।
बहुत सी महिलाएँ ब्लीडिंग और स्पॉटिंग दोनों को एक जैसा मान लेती हैं, लेकिन इनमें बहुत बड़ा अंतर होता है। स्पॉटिंग में बहुत कम खून आता है यानी केवल कुछ बूँदें या हल्के दाग ही दिखाई देते हैं। इसमें पैड लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
जबकि ब्लीडिंग में खून की मात्रा ज़्यादा होती है, पैड लगाना पड़ता है और कभी-कभी थक्के यानी क्लॉट्स (clots) भी आते हैं।
पहले ट्राइमेस्टर (first trimester) में लगभग 15 से 25 प्रतिशत महिलाओं को स्पॉटिंग होती है, जो ज़्यादातर सामान्य होती है। लेकिन अगर स्पॉटिंग बढ़कर ब्लीडिंग हो जाए, दर्द हो या थक्के आएँ, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
प्रेगनेंसी ब्लीडिंग रोकने का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आखिर ब्लीडिंग हो क्यों रही है। इसलिए रोकने के उपाय जानने से पहले कारण जानना ज़रूरी है।
अगर आपको pregnancy bleeding दिखे तो बिना घबराए ये क़दम तुरंत उठाएँ।
जो भी काम कर रही हैं छोड़ दें और लेट जायें। बाईं करवट लेटना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की तरफ ब्लड फ़्लो बेहतर होता है। इससे साथ ही पैरों के नीचे तकिया रखें।
ब्लीडिंग की मात्रा, कलर, और क्लॉट्स को ट्रैक करने के लिए पैड लगाएँ। टैम्पोन बिल्कुल इस्तेमाल न करें।
भले ही ब्लीडिंग हल्की हो, अपने डॉक्टर या फ़र्टिलिटी स्पेशलिस्ट को तुरंत बताएँ। वो तय करेंगे कि अल्ट्रासाउंड या जाँच ज़रूरी है या नहीं।
प्रेगनेंसी ब्लीडिंग कब शुरू हुई, उसका कलर ब्राउन, पिंक, या लाल है, कितने पैड बदले, ब्लीडिंग के साथ क्लॉट्स आए या नहीं, दर्द कहाँ और कैसा है सब इंफॉर्मेशन लिख लें। यह डॉक्टर के लिए उपयोगी जानकारी है।
डॉक्टर से बात करने के बाद अगर अस्पताल जाने की ज़रूरत नहीं है तो ये उपाय ब्लीडिंग कंट्रोल और रोकने में मदद करते हैं।
भारी सामान उठाना, सीढ़ियाँ चढ़ना, और ज़्यादा चलना-फिरना बंद करें। कई बार 2 से 3 हफ़्ते तक सख़्त बेड रेस्ट की जरुरत होती है। ब्लीडिंग रुकने के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्टिव हों।
ब्लीडिंग के दौरान और रुकने के बाद कम से कम 2 से 3 हफ़्ते तक संबंध न बनाएँ। सर्विक्स पर दबाव पड़ने से ब्लीडिंग दोबारा शुरू हो सकती है।
दिन में 8 से 10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी, छाछ, और ताज़ा फलों का जूस भी फ़ायदेमंद है।
चिंता और घबराहट शरीर में कोर्टिसोल (cortisol) बढ़ाती है जो ब्लीडिंग बढ़ा सकता है। गहरी साँसें लें, हल्का संगीत सुनें, और परिवार का सहयोग लें।
टाइट कपड़ों और ऊँची एड़ी की चप्पलों को पहनने से बचें। पेट पर दबाव न आने दें।
पेट पर गर्म पानी की बोतल न रखें। गर्मी ब्लड फ्लो को बढ़ाती है जिससे ब्लीडिंग और बढ़ सकती है।
ब्लीडिंग रुकने के बाद भी डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड ज़रूर कराएँ।
कोई भी दवाई बिना डॉक्टर की सलाह के न लें क्योंकि ब्लीडिंग का कारण जानने के बाद ही डॉक्टर सही दवाई देते हैं।
यह ब्लीडिंग रोकने के लिए कॉमन दवाई है। पहले ट्राइमेस्टर में प्रोजेस्टेरॉन कम हो तो सपोसिटरी ( जिसे योनि मतलब वेजाइना में रखते हैं), इंजेक्शन, या गोलियाँ दी जाती हैं। यह यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग को मज़बूत करता है, क्रैम्पिंग कम करता है, और ब्लीडिंग कंट्रोल होती है। कई स्टडीज़ में प्रोजेस्टेरॉन से मिसकैरेज का ख़तरा कम होना पाया गया है।
कुछ सिचुएशन में प्रेगनेंसी को सहारा देने के लिए hCG इंजेक्शन दिए जाते हैं, ख़ासकर जब hCG लेवल उम्मीद के मुताबिक़ नहीं बढ़ रहा हो।
अगर माँ का ब्लड ग्रुप Rh निगेटिव है और ब्लीडिंग हो रही है तो यह इंजेक्शन दिया जाता है। यह भविष्य की प्रेगनेंसी को सुरक्षित रखता है।
ब्लीडिंग से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। डॉक्टर आयरन की गोलियाँ और फ़ोलिक एसिड ज़रूर देते हैं ताकि ख़ून की कमी न हो।
सही खानपान ब्लीडिंग से हुई पोषक तत्वों की कमी पूरा करता है और शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है।
बहुत-सी महिलाएँ अनजाने में कुछ ऐसे काम कर बैठती हैं जो ब्लीडिंग और बढ़ा देते हैं।
IVF से हुयी प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग थोड़ी ज़्यादा कॉमन होती है। एम्ब्रीओ ट्रांसफ़र (embryo transfer) के बाद सर्विक्स पर बहुत हल्की सी चोट, प्रोजेस्टेरॉन सपोर्ट से स्थानीय जलन, और ओवेरियन स्टिमुलेशन (ovarian stimulation) से ओवरी बड़े होना, इनमें से किसी भी कारण से ब्लीडिंग हो सकती है।
IVF प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के लिए ख़ास बातें ध्यान रखें। प्रोजेस्टेरॉन सपोर्ट नियमित लें और बिना डॉक्टर की सलाह के बंद न करें क्योंकि यह IVF प्रेगनेंसी में सबसे ज़रूरी दवाई है।
एम्ब्रीओ ट्रांसफ़र के बाद पहले 2 हफ़्ते बहुत सावधानी बरतें, कोई भी भारी काम, ट्रैवेल, और तनाव से बचें। अगर सबकोरियोनिक हीमैटोमा (subchorionic hematoma) अल्ट्रासाउंड में दिखे तो घबराएँ नहीं, यह अधिकतर अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन बेड रेस्ट ज़रूरी है।
hCG लेवल और अल्ट्रासाउंड नियमित कराते रहें। अधिकतर IVF प्रेगनेंसी में पहले ट्राइमेस्टर ब्लीडिंग के बाद भी स्वस्थ संतान का जन्म होता है।
इन लक्षणों में से कोई भी दिखे तो बिना देर किए अस्पताल जाएँ।
Pregnancy bleeding रोकने का सबसे ज़रूरी क़दम है, तुरंत डॉक्टर को बताना और उनकी सलाह पर चलना। पूर्ण बेड रेस्ट, शारीरिक संबंध से परहेज़, प्रोजेस्टेरॉन सपोर्ट, सही खानपान, और तनाव से बचाव, ये सब मिलकर ज्यादातर सिचुएशन में ब्लीडिंग कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
ख़ुद से दवाई या घरेलू नुस्ख़े कभी न आज़माएँ। IVF प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग थोड़ी ज़्यादा आम है लेकिन सही देखभाल से स्वस्थ प्रसव हो जाता है। अपने डॉक्टर पर भरोसा रखें और हर ब्लीडिंग की जानकारी उन्हें अवश्य दें।