IVF फेल होने के 7 कारण (IVF failure reasons in hindi)

Last updated: May 15, 2026

साराँश (Overview)

जब IVF फेल होता है तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि ऐसा क्यों हुआ। यह सवाल बिल्कुल नेचुरल है और इसका जवाब जानना ज़रूरी भी है। IVF failure reasons in hindi में यह समझना इसलिए अहम है क्योंकि सही वजह पता चले तो अगली साइकल को बेहतर प्लान किया जा सकता है। इस आर्टिकल में हम एक-एक करके उन सभी कारणों को समझेंगे जिनकी वजह से IVF फेल हो सकता है।

IVF फेल होने का मतलब क्या होता है?

IVF में कई स्टेप्स होते हैं और किसी भी स्टेप पर प्रॉब्लम आ सकती है। कभी एग्स ठीक से डेवलप नहीं होते, कभी एम्ब्रीओ (embryo) बन तो जाता है लेकिन गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) में टिक नहीं पाता, और कभी एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव आ जाता है। इनमें से कोई भी सिचुएशन हो, तो उसे IVF का फेल होना कहा जाता है।

नंबर्स की बात करें तो पहली IVF साइकल में सक्सेस रेट करीब 35 से 40% होता है। इसका मतलब यह है कि 10 में से 6 कपल्स को पहली बार में सक्सेस नहीं मिलती।

लेकिन यह इसका मतलब नहीं कि आगे कोशिश बेकार है। ज़्यादातर केसों में वजह पता लगाकर दूसरी या तीसरी साइकल में रिजल्ट बढ़ जाता है।

एम्ब्रीओ की क्वालिटी से जुड़ी वजहें

IVF फेल होने की सबसे कॉमन वजह एम्ब्रीओ की क्वालिटी होती है। लैब में जब एग और स्पर्म मिलकर एम्ब्रीओ बनाते हैं, तो बाहर से एम्ब्रीओ ठीक दिख सकता है लेकिन अंदर उसके क्रोमोसोम्स (chromosomes) में गड़बड़ी हो सकती है। इसे एन्यूप्लॉइडी (aneuploidy) कहते हैं।

ऐसे एम्ब्रीओ या तो यूट्रस की लाइनिंग से चिपक ही नहीं पाते, या चिपकने के बाद कुछ दिनों में ग्रोथ रुक जाती है। 35 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में यह प्रॉब्लम ज़्यादा दिखती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ एग्स में क्रोमोज़ोम एरर्स बढ़ जाती हैं।

अगर बार-बार IVF फेल हो रहा है तो डॉक्टर PGT यानी प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट से ट्रांसफर से पहले ही पता चल जाता है कि कौन सा एम्ब्रीओ जेनेटिकली हेल्दी है।

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यूट्रस की तैयारी में कमी

एम्ब्रीओ की क्वालिटी अच्छी होने के बावजूद अगर यूट्रस तैयार नहीं है तो एम्ब्रीओ टिक नहीं पाएगा। यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) की मोटाई आमतौर पर 7 से 14 मिलीमीटर होनी चाहिए। अगर यह लाइनिंग पतली है या इसमें ब्लड फ़्लो कम है तो एम्ब्रीओ को जुड़ने की जगह नहीं मिलती।

कुछ और दिक्कतें भी यूट्रस में हो सकती हैं जैसे फ़ाइब्रॉइड (fibroid), पॉलिप (polyp), या यूट्रस के अंदर एडहीज़न (adhesion) यानी चिपकन। ये सब इम्प्लांटेशन में रुकावट डालते हैं।

इसके अलावा इम्प्लांटेशन विंडो (implantation window) का सही टाइम पर न होना भी एक वजह है। हर महिला की बॉडी में यह विंडो अलग टाइम पर ओपन होती है। ERA टेस्ट (एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी एनालिसिस) से पता लगाया जा सकता है कि किसी महिला के लिए इम्प्लांटेशन का सही टाइम कब है।

एग और स्पर्म की हेल्थ

IVF की सक्सेस सीधे तौर पर एग्स और स्पर्म की हेल्थ पर डिपेंड करती है। अगर ओवेरियन स्टिमुलेशन (ovarian stimulation) के बाद कम एग्स मिलें या एग्स मैच्योर न हों तो एम्ब्रीओ बनने के चांस कम हो जाते हैं।

स्पर्म की तरफ़ से भी प्रॉब्लम हो सकती है। स्पर्म काउंट कम होना, उनकी मोटिलिटी (motility) कमज़ोर होना, या उनके DNA में डैमेज (DNA fragmentation) होना, ये सब एम्ब्रीओ की हेल्थ पर इफ़ेक्ट डालते हैं। कई बार नॉर्मल सीमेन एनालिसिस (semen analysis) में सब ठीक दिखता है लेकिन DNA फ्रेगमेंटेशन टेस्ट में दिक्कत सामने आती है।

पुरुषों में लंबे समय तक बुख़ार रहना, वैरिकोसील (varicocele), या कुछ दवाइयों का इस्तेमाल भी स्पर्म क्वालिटी ख़राब कर सकता है।

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उम्र का कितना इफ़ेक्ट पड़ता है?

उम्र IVF की सक्सेस पर सबसे ज़्यादा इफ़ेक्ट डालने वाला फैक्टर है, खासकर महिलाओं की उम्र। 30 साल से कम उम्र में IVF का सक्सेस रेट 40 से 50% तक हो सकता है, जबकि 40 के बाद यह घटकर 10 से 15% रह जाता है।

इसकी वजह यह है कि उम्र बढ़ने के साथ एग्स का रिज़र्व और उनकी क्वालिटी दोनों कम होती जाती हैं। 35 साल की उम्र के बाद यह गिरावट तेज़ हो जाती है और 40 के बाद एग्स की क्वालिटी और क्वांटिटी काफी तेजी से घटने लगती है।

पुरुषों में भी 40 के बाद स्पर्म क्वालिटी में गिरावट आती है, हालाँकि इसका असर महिलाओं की उम्र जितना नहीं होता।

बॉडी के अंदर की छुपी प्रॉब्लम्स

कुछ कारण ऐसे होते हैं जो शुरू में साफ़ नहीं दिखते, लेकिन बाद में IVF के रिज़ल्ट पर असर डालते हैं। इसलिए इन्हें समझना और पहले से पहचानना ज़रूरी होता है।

हाइड्रोसेल्पिंक्स (hydrosalpinx)

  • जब फैलोपियन ट्यूब में पानी भर जाता है, तो यह पानी धीरे-धीरे यूट्रस में आ सकता है और एम्ब्रीओ के लिए अनुकूल माहौल बिगाड़ देता है।
  • इस फ्लूइड में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो एम्ब्रीओ के जुड़ने यानी इम्प्लांटेशन (Implantation) को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • इसलिए कई मामलों में डॉक्टर IVF से पहले उस ट्यूब को ब्लॉक या हटाने की सलाह देते हैं, ताकि सफलता के चांस बेहतर हों।

ऑटोइम्यून प्रॉब्लम्स (autoimmune problems)

  • कुछ स्थितियों में शरीर की इम्यून सिस्टम ही एम्ब्रीओ को बाहरी चीज़ समझकर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया कर सकता है।
  • जैसे एंटीफ़ॉस्फ़ोलिपिड सिंड्रोम या अनकंट्रोल्ड थायरॉइड, ये दोनों इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकते हैं।

मेटाबॉलिक और हार्मोनल समस्याएँ

  • अगर डायबिटीज़ ठीक से कंट्रोल में नहीं है, तो यूट्रस का एनवायरनमेंट प्रभावित हो सकता है और एम्ब्रीओ इम्प्लांटेशन प्रभावित हो सकता है।
  • PCOS में हार्मोनल असंतुलन की वजह से एग की क्वालिटी और इम्प्लांटेशन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

इन सभी कारणों की वजह से IVF शुरू करने से पहले पूरा और सही चेकअप करना ज़रूरी होता है, ताकि ऐसी छुपी समस्याओं को पहले ही पहचान कर ठीक किया जा सके।

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लाइफ़स्टाइल की गलतियाँ

कुछ आदतें जो नॉर्मल ज़िंदगी में मामूली लगती हैं लेकिन वे IVF के दौरान बड़ा नुकसान कर सकती हैं।

  • स्मोकिंग एग और स्पर्म दोनों की क्वालिटी को नुकसान पहुँचाती है।
  • अल्कोहल हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ता है और एम्ब्रीओ की ग्रोथ पर असर डाल सकता है।
  • ज़्यादा चाय या कॉफ़ी लेना नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि 200 मिलीग्राम से ज़्यादा कैफ़ीन यानी लगभग 2 कप कॉफ़ी इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकता है।
  • बहुत ज़्यादा वज़न या बहुत कम वज़न दोनों ही हार्मोन के बैलेंस को बिगाड़ते हैं और उनके काम को प्रभावित करते हैं।
  • नींद पूरी न लेना और लगातार थकान में रहना शरीर के हार्मोनल सिस्टम पर असर डालता है, जिससे IVF के रिज़ल्ट प्रभावित हो सकते हैं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेना सही नहीं है, क्योंकि कुछ सप्लीमेंट्स दवाइयों के साथ रिएक्ट करके उल्टा असर कर सकते हैं।

स्ट्रेस और मेंटल हेल्थ

IVF एक लंबा और इमोशनल प्रोसेस है। इंजेक्शन्स, दवाइयाँ, बार-बार सोनोग्राफ़ी, और फिर रिजल्ट का इंतज़ार, ये सब मिलकर मन पर भारी बोझ डालते हैं। रिसर्च बताती है कि ज़्यादा स्ट्रेस बॉडी में कोर्टिसोल (cortisol) हॉर्मोन बढ़ाता है, जो यूट्रस में ब्लड फ़्लो कम कर सकता है।

हालाँकि स्ट्रेस अकेला IVF फेल होने की वजह नहीं बनता, लेकिन यह बाकी वजहों को और सीरियस बना सकता है। अगर आप IVF करवा रही हैं तो काउंसलर से बात करना, हल्की वाक करना, और अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत रखना मददगार रहता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

IVF फेल होने की कोई एक वजह नहीं होती, बल्कि यह कई फैक्टर्स के मिले-जुले इफ़ेक्ट से होता है। एम्ब्रीओ की क्वालिटी, यूट्रस की तैयारी, उम्र, एग्स और स्पर्म की हेल्थ, बॉडी के अंदर की छिपी प्रॉब्लम्स, और लाइफ़स्टाइल, ये सब मिलकर डिसाइड करते हैं कि IVF सक्सेसफुल होगा या नहीं। IVF failure reasons in hindi समझकर अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें, अगली साइकल की बेहतर प्लानिंग करें, और हिम्मत न हारें।

IVF failure के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

IVF फेल होने की सबसे बड़ी वजह कौन सी है?

IVF कितनी बार ट्राई करने पर सक्सेसफुल होता है?

क्या उम्र बढ़ने पर IVF का कोई फ़ायदा नहीं रहता?

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद ब्लीडिंग होना क्या IVF फेल होने का साइन है?

क्या स्ट्रेस की वजह से IVF फेल हो सकता है?

PGT टेस्ट कब करवाना चाहिए?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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