उम्र IVF सक्सेस का सबसे बड़ा फ़ैक्टर है। 35 साल से कम उम्र में पहली साइकल का सक्सेस रेट 50 से 60% तक हो सकता है, जबकि 40 के बाद यह 10 से 15% तक गिर जाता है। इसलिए अगर डॉक्टर ने IVF की सलाह दी है तो बहुत ज़्यादा इंतज़ार न करें।
इसका मतलब यह नहीं कि 40 के बाद IVF काम नहीं करता। डोनर एग्स, PGT (प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग), और बेहतर प्रोटोकॉल से उम्र ज़्यादा होने पर भी रिजल्ट सुधारे जा सकते हैं। लेकिन जितनी जल्दी शुरू करेंगे, तो सफलता का चांस उतना ही ज्यादा होगा।
BMI 19 से 25 के बीच होना IVF सक्सेस के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। ज़्यादा वज़न से ओवेरियन रिस्पॉन्स कम हो सकता है, एग क्वालिटी गिर सकती है, और OHSS का रिस्क बढ़ जाता है। कम वज़न से हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है और पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।
अगर वज़न ज़्यादा है तो IVF से 2 से 3 महीने पहले से हल्की एक्सरसाइज और संतुलित डाइट लेना शुरू करें। सिर्फ 5 से 10% वज़न कम करने से भी IVF रिजल्ट में फ़र्क आ जाता है। लेकिन क्रैश डाइट या बहुत हार्ड वर्कआउट से बचें, क्योंकि इनसे शरीर पर एक्स्ट्रा स्ट्रेस पड़ता है जो फ़र्टिलिटी के लिए अच्छा नहीं।
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अपने खाने में प्रोटीन, आयरन, फ़ोलेट, ओमेगा-3 और ज़िंक जैसे न्यूट्रिएंट्स शामिल करें। दालें, हरी सब्ज़ियाँ, फल, ड्राई फ्रूट्स, पनीर, दही और अंडे ऐसे विकल्प हैं जो शरीर को सही सपोर्ट देते हैं और एग क्वालिटी पर पॉज़िटिव असर डालते हैं।
इसके साथ यह भी समझना ज़रूरी है कि क्या नहीं खाना है। तला-भुना, मैदे की चीज़ें, ज़्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड इंसुलिन लेवल बढ़ाते हैं, जिससे ओवरी का काम प्रभावित हो सकता है। इसलिए इन्हें जितना हो सके कम रखें।
रिसर्च में यह भी देखा गया है कि मेडिटेरेनियन डाइट (Mediterranean diet) यानी सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज जैसे दलिया, क्विनोआ और हेल्दी फैट्स वाली डाइट से IVF का रिज़ल्ट बढ़िया हो जाता है।
दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं, क्योंकि सही हाइड्रेशन ब्लड सर्कुलेशन और एंडोमेट्रियम दोनों को सपोर्ट करता है। ओवेरियन स्टिमुलेशन के समय आपका हाइड्रेशन अच्छा होना चाहिए।
IVF में सप्लीमेंट्स ऑप्शनल नहीं होते, बल्कि ट्रीटमेंट का हिस्सा होते हैं। आपको रोज फ़ॉलिक एसिड (folic acid) की 400 से 800 माइक्रोग्राम डोज़ लेना ज़रूरी होता है, क्योंकि यह एग क्वालिटी और शुरुआती प्रेगनेंसी दोनों को सपोर्ट करता है।
विटामिन D का लेवल चेक करवाएँ, क्योंकि इसकी कमी से IVF का रिज़ल्ट प्रभावित होता है। अगर आपकी उम्र 35 साल या उससे ज्यादा है तो CoQ10 एग क्वालिटी सुधारने में मदद करता है। पुरुषों में ज़िंक, सेलेनियम और विटामिन E स्पर्म हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।
लेकिन याद रहे कि कोई भी सप्लीमेंट अपने आप शुरू न करें। हर केस अलग होता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाइयाँ लें।
IVF success tips in hindi में अगली टिप है स्ट्रेस मैनेजमेंट। डॉक्टरों के अनुसार ज़्यादा स्ट्रेस बॉडी में कोर्टिसोल (cortisol) हॉर्मोन बढ़ाता है जो यूट्रस में ब्लड फ़्लो और हॉर्मोनल बैलेंस दोनों पर नेगेटिव असर डाल सकता है।
इसे कंट्रोल करने के लिए रोज़ 10–15 मिनट मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग करें। पार्टनर से खुलकर बात करें और अगर सोशल मीडिया आपको परेशान करता है तो उससे थोड़ा ब्रेक लें। ज़रूरत हो तो काउंसलिंग भी मदद करती है।
सबसे ज़रूरी बात, खुद को दोष न दें। IVF की सफलता या असफलता कई फैक्टर्स पर निर्भर कराती है, हर चीज़ आपके कंट्रोल में नहीं होती, इसीलिए रिलैक्स रहें।
IVF में नींद सिर्फ आराम नहीं, रिकवरी का हिस्सा है। रोज़ 7–8 घंटे की नींद लें, क्योंकि इसी समय शरीर हॉर्मोनों के बैलेंस को रीसेट करता है। सोने का समय फिक्स करें, सोने से पहले स्क्रीन कम करें और कमरा शांत व आरामदायक रखें। अच्छी नींद से शरीर दवाइयों का बेहतर रिस्पॉन्स देता है।
एक्सरसाइज़ हल्की लेकिन नियमित होनी चाहिए। वॉक, योग या हल्की स्ट्रेचिंग ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं और स्ट्रेस कम करते हैं। लेकिन बहुत हैवी वर्कआउट, खासकर स्टिमुलेशन और एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद, शरीर पर उल्टा दबाव डाल सकता है, इसलिए उससे बचना बेहतर है।
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कुछ आदतें IVF सक्सेस को सीधे तौर हानि पहुँचाती हैं. इन्हें जितनी जल्दी हो छोड़ दें।
डॉक्टर जो भी दवाइयाँ या इंजेक्शन्स दें, उन्हें बिल्कुल समय पर लें। ट्रिगर इंजेक्शन, जो एग रिट्रीवल से 34–36 घंटे पहले दिया जाता है, उसमें थोड़ी सी देरी भी रिज़ल्ट को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए फोन में रिमाइंडर सेट करें और शेड्यूल लिखकर सामने रखें। अगर कोई डोज़ छूट जाए, तो खुद से बदलाव न करें और तुरंत डॉक्टर से बात करें।
किसी भी दवाई को अपने मन से बंद करना या डोज़ बदलना सही नहीं है, भले ही हल्के साइड इफ़ेक्ट महसूस हों।
IVF success tips in hindi का सार यह है कि इन 8 टिप्स को IVF से 2 से 3 महीने पहले से फ़ॉलो करना शुरू करें। टाइमिंग सही रखें, वज़न कंट्रोल करें, डाइट सुधारें, सप्लीमेंट्स लें, स्ट्रेस मैनेज करें, अच्छी नींद लें, बुरी आदतें छोड़ें, दवाइयों का शेड्यूल बिल्कुल फ़ॉलो करें, और डॉक्टर से खुलकर बात करें।
IVF में गारंटी कोई नहीं दे सकता, लेकिन अपनी तरफ़ से पूरी तैयारी करने वाले कपल्स के रिजल्ट हमेशा बेहतर आते हैं।