क्या प्रेग्नेंसी में मेटफ़ॉर्मिन सुरक्षित है? फ़ायदे, जोखिम और असली तस्वीर

Last updated: August 12, 2026

Overview

ये सवाल क्लिनिक में दो बिल्कुल अलग हालात में पूछा जाता है, और यही पहली उलझन है।

एक तरफ़ वो महिला है जिसे PCOS की वजह से मेटफ़ॉर्मिन चल रही थी, अब प्रेग्नेंसी हो गई, और समझ नहीं आ रहा कि दवा जारी रखे या बंद करे।

दूसरी तरफ़ वो महिला है जिसे प्रेग्नेंसी में शुगर बढ़ने (जेस्टेशनल डायबिटीज़) का पता चला, और डॉक्टर ने मेटफ़ॉर्मिन या इंसुलिन की बात की।

ये दोनों एक जैसे सवाल लगते हैं, पर हैं नहीं। जवाब भी अलग है। इसलिए इन्हें अलग-अलग देखना ज़रूरी है, वरना एक हालात की सलाह दूसरे पर लागू करके नुक़सान हो सकता है।

पर पहले एक बुनियादी बात, जो दोनों हालात में काम आती है।

मेटफ़ॉर्मिन के बारे में सबसे अहम तथ्य

मेटफ़ॉर्मिन प्लेसेंटा पार कर जाती है।

यही एक बात इस पूरी बहस की जड़ है। इंसुलिन प्लेसेंटा पार नहीं करती - वो माँ के शरीर में ही काम करती है, बच्चे तक नहीं पहुँचती। मेटफ़ॉर्मिन पहुँचती है, और अध्ययनों में पाया गया है कि बच्चे के ख़ून में इसका स्तर माँ जितना, कभी उससे भी ज़्यादा हो सकता है।

अब इसका मतलब ये नहीं कि ये ख़तरनाक है। अब तक के सबूतों में मेटफ़ॉर्मिन से जन्मजात विकृति (birth defects) या प्रेग्नेंसी लॉस का बढ़ा हुआ ख़तरा नहीं देखा गया है। माँ के लिए ये काफ़ी हद तक सुरक्षित मानी जाती है।

चिंता जिस बात की है वो अलग है - बच्चा गर्भ में इस दवा के संपर्क में रहता है, और उसके लंबे समय के असर पर अभी पूरा डेटा नहीं है। कुछ अध्ययनों में मेटफ़ॉर्मिन के संपर्क में आए बच्चे जन्म के समय थोड़े छोटे रहे, और बचपन में उनमें "कैच-अप" ग्रोथ के संकेत मिले।

तो पूरी तस्वीर ये है - माँ के लिए सुरक्षित, बच्चे के लिए फ़िलहाल कोई साफ़ नुक़सान नहीं दिखा, पर लंबी अवधि का डेटा अधूरा है। इसी अधूरेपन की वजह से अलग-अलग हालात में अलग सलाह दी जाती है।

अब दोनों हालात पर बारी-बारी से।

हालात 1: जेस्टेशनल डायबिटीज़ में मेटफ़ॉर्मिन

पहले साफ़ कर लें - प्रेग्नेंसी में शुगर का पहला इलाज दवा नहीं है। खान-पान और हल्की गतिविधि से शुरुआत होती है, और बहुत सी महिलाओं में इतने से ही शुगर संभल जाती है। दवा तब आती है जब इससे काम न चले।

और जब दवा की बारी आती है, तो अमेरिका में पहली पसंद इंसुलिन है, मेटफ़ॉर्मिन नहीं।

अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन का रुख़ साफ़ है - मेटफ़ॉर्मिन और ग्लाइबुराइड को प्रेग्नेंसी में डायबिटीज़ के लिए पहली-पंक्ति की दवा के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि दोनों प्लेसेंटा पार करती हैं और कई बार शुगर को पूरी तरह क़ाबू में लाने के लिए काफ़ी भी नहीं पड़तीं।

ये आख़िरी बात अहम है। अध्ययनों में जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली एक-चौथाई से ज़्यादा महिलाओं में सिर्फ़ मेटफ़ॉर्मिन काफ़ी नहीं पड़ी, और आगे चलकर इंसुलिन जोड़नी पड़ी। इंसुलिन के पक्ष में सबसे बड़ी बात यही है कि वो प्लेसेंटा पार नहीं करती, और उसके इस्तेमाल का क़रीब सौ साल का अनुभव है।

तो फिर मेटफ़ॉर्मिन दी ही क्यों जाती है?

क्योंकि इंसुलिन के अपने अड़चनें हैं। इंजेक्शन रोज़ लगाने पड़ते हैं, सुइयों का डर होता है, ख़र्च ज़्यादा है, और हर महिला के लिए ये आसान नहीं। ACOG मानती है कि जहाँ इंसुलिन मुमकिन न हो - मरीज़ उसे वहन न कर सके, या सुरक्षित रूप से लगा न सके - वहाँ मेटफ़ॉर्मिन एक वाजिब विकल्प है। भारत जैसे देश में जहाँ ख़र्च और सुई का डर दोनों बड़ी बाधाएँ हैं, ये पहलू मायने रखता है।

और एक ज़रूरी अपवाद, जो कम बताया जाता है - अगर प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर या प्रीक्लेम्पसिया हो, या बच्चे की ग्रोथ कम होने का ख़तरा हो, तो मेटफ़ॉर्मिन से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी स्थिति में ये दवा नुक़सान कर सकती है। इसीलिए ये फ़ैसला हर मरीज़ की पूरी स्थिति देखकर लिया जाता है, किसी एक नियम से नहीं।

हालात 2: PCOS की मेटफ़ॉर्मिन, और प्रेग्नेंसी हो गई

ये बिल्कुल अलग सवाल है, और यहाँ हाल में सोच बदली है - इसलिए ध्यान से।

बरसों से आम सलाह यही रही है कि प्रेग्नेंसी कन्फ़र्म होते ही मेटफ़ॉर्मिन बंद कर दो। बहुत सी महिलाओं को आज भी यही कहा जाता है।

पर हाल के सबूत इस पर सवाल उठाते हैं।

2025 में 12 ट्रायल और 1,708 महिलाओं पर हुए एक बड़े विश्लेषण में पाया गया कि PCOS वाली महिलाओं में मेटफ़ॉर्मिन को पहली तिमाही तक जारी रखना - प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आते ही बंद कर देने के मुक़ाबले - मिसकैरेज का जोखिम कम कर सकता है और सफल जन्म की संभावना बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं का एक दिलचस्प तर्क ये था कि अचानक दवा बंद करने से एक "रिबाउंड" असर हो सकता है, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध लौट आता है और यही आगे चलकर नुक़सान करता है।

पर यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है, और यही इस हिस्से की सबसे अहम बात है - ये सबूत अभी पक्के नहीं हैं। इन्हीं शोधकर्ताओं ने साफ़ लिखा है कि और मज़बूत अध्ययनों की ज़रूरत है, और इसी सवाल पर एक बड़ा ट्रायल (LOCI) अभी चल रहा है जिसके नतीजे आने बाक़ी हैं।

तो व्यावहारिक निष्कर्ष क्या निकला?

ये फ़ैसला - जारी रखें या बंद करें - पूरी तरह आपके डॉक्टर का है। अलग-अलग डॉक्टर, अलग-अलग गाइडलाइन के आधार पर, अलग राय रख सकते हैं, और दोनों वाजिब हो सकती हैं। जो बात नई है वो ये कि "पॉज़िटिव टेस्ट आते ही तुरंत बंद कर दो" वाला पुराना नियम अब उतना पक्का नहीं रहा।

इसलिए अगर आपको PCOS है और मेटफ़ॉर्मिन चल रही है, तो प्रेग्नेंसी पता चलते ही ख़ुद से बंद मत कीजिए। डॉक्टर से पूछिए - "क्या मुझे इसे पहली तिमाही तक जारी रखना चाहिए?" ये सवाल अब पूरी तरह वाजिब है।

जो बात दोनों हालात में एक जैसी है

चाहे वजह डायबिटीज़ हो या PCOS, एक चीज़ हमेशा सच है - मेटफ़ॉर्मिन ख़ुद से शुरू, बंद या कम-ज़्यादा मत कीजिए।

ये सुनने में मामूली लगता है, पर सबसे बड़ी ग़लती यही होती है। कोई सहेली बता देती है, कोई इंटरनेट पर पढ़ लेती है, और महिला ख़ुद फ़ैसला कर लेती है। प्रेग्नेंसी में ये ख़तरनाक है - दोनों तरफ़। बिना ज़रूरत लेना भी, और ज़रूरत के बावजूद बंद कर देना भी।

एक और बात जो अक्सर छूट जाती है - मेटफ़ॉर्मिन लंबे समय तक लेने से शरीर में विटामिन B12 की कमी हो सकती है। प्रेग्नेंसी में B12 वैसे भी अहम है, इसलिए अगर आप ये दवा ले रही हैं तो डॉक्टर से पूछिए कि B12 की जाँच या सप्लीमेंट की ज़रूरत है या नहीं।

प्रेग्नेंसी में शुगर को नज़रअंदाज़ करना - सबसे बड़ा जोखिम

पूरी बहस दवा के जोखिम पर टिकी रहती है, और इसी में एक बात दब जाती है।

अनियंत्रित शुगर, दवा से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है।

प्रेग्नेंसी में शुगर बढ़ी रहे और उसका इलाज न हो, तो इससे बच्चे का वज़न बहुत ज़्यादा हो सकता है (जिससे डिलीवरी मुश्किल होती है), समय से पहले जन्म, और माँ में हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ता है। शुगर का सही इलाज इन सबको कम करता है।

तो सवाल कभी "दवा लूँ या न लूँ" नहीं होना चाहिए। सवाल ये है कि "मेरे लिए सबसे सही इलाज क्या है" - और वो इंसुलिन भी हो सकता है, मेटफ़ॉर्मिन भी, या सिर्फ़ खान-पान भी। ये आपकी स्थिति देखकर डॉक्टर तय करेंगे।

Frequently Asked Questions

क्या मेटफ़ॉर्मिन से बच्चे में कोई जन्मजात विकृति होती है?

PCOS की दवा है, प्रेग्नेंसी हो गई - तुरंत बंद कर दूँ?

इंसुलिन और मेटफ़ॉर्मिन में क्या बेहतर है?

क्या मेटफ़ॉर्मिन लेने से जेस्टेशनल डायबिटीज़ पूरी तरह संभल जाएगी?

दवा से मिचली या पेट ख़राब हो रहा है, बंद कर दूँ?

डिलीवरी के बाद ये दवा जारी रहेगी?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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