PMOS (PCOS) क्या है? जानें लक्षण, कारण और इलाज

Last updated: September 02, 2026

सारांश (Overview)

अगर आपको PMOS नाम सुनकर लग रहा है कि यह PCOS से अलग कोई नई बीमारी है, तो पहले यह कन्फ्यूज़न दूर कर लेते हैं। मेडिकल तौर पर PCOD और PCOS दो अलग बीमारियां नहीं हैं। PCOD इसी कंडीशन के लिए इस्तेमाल होने वाला पुराना नाम है। मेडिकल कम्युनिटी ने अब इसे PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome)  नाम दिया है। इसमें हॉर्मोन्स में गड़बड़ी की वजह से पीरियड्स और ओव्यूलेशन अनियमित हो सकते हैं और प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत आ सकती है। लेकिन सही जांच और इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है। आगे जानेंगे इसके लक्षण, कारण, जांच और इलाज। 

PMOS क्या है?

PMOS को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि PCOS और PCOD दो अलग बीमारियां नहीं हैं। मेडिकल कम्युनिटी अब सिर्फ ओवरी में होने वाले बदलावों के बजाय हॉर्मोन्स और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी ध्यान देती है, इसलिए इस कंडीशन को PMOS के नाम से समझाने की जरूरत महसूस हुई।

इसमें हॉर्मोन्स में गड़बड़ी की वजह से ओवरी हर महीने नियमित रूप से एग रिलीज नहीं कर पाती। एंड्रोजन यानी पुरुष हॉर्मोन का असर बढ़ सकता है और इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता कम हो सकती है।

नाम में सिस्ट सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। ये असल में छोटे फॉलिकल होते हैं, जो बढ़ना शुरू करते हैं लेकिन पूरी तरह मैच्योर होकर एग रिलीज नहीं कर पाते।

PMOS के लक्षण क्या हैं?

PMOS में हर महिला को एक जैसे लक्षण हों, ऐसा जरूरी नहीं है। किसी में पीरियड्स की दिक्कत ज्यादा होती है, तो किसी में चेहरे के बाल, मुंहासे या कंसीव करने में परेशानी सामने आती है। 

पीरियड्स से जुड़े लक्षण

पीरियड्स समय पर न आना, कई महीनों तक मिस होना या कभी जल्दी-कभी देर से आना इसका सबसे आम लक्षण है। लंबे समय तक पीरियड्स न आने के बाद ब्लीडिंग हो तो वह सामान्य से ज्यादा भी हो सकती है। 

त्वचा और बालों में बदलाव

एंड्रोजन का असर बढ़ने पर चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल, मुंहासे और सिर के बाल पतले हो सकते हैं। गर्दन या बगल की त्वचा का काला पड़ना इंसुलिन से जुड़ी गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है। 

वजन और शरीर में बदलाव

पेट के आसपास वजन बढ़ना PMOS में देखा जा सकता है, लेकिन इसे सिर्फ वजन से जोड़ना सही नहीं है। सामान्य वजन या दुबली महिलाओं में भी PMOS हो सकता है। 

कंसीव करने में दिक्कत

जब ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता, तो हर महीने एग रिलीज नहीं हो पाता। इसी वजह से कंसीव करने में समय लग सकता है और कई महिलाओं को पहली बार PMOS के बारे में इसी दौरान पता चलता है। 

PMOS होने के क्या कारण हैं?

PMOS की कोई एक वजह नहीं होती। इसमें जेनेटिक्स की भूमिका हो सकती है, इसलिए परिवार में मां या बहन को यह समस्या रही हो, तो इसकी संभावना बढ़ सकती है।

दूसरी बड़ी वजह इंसुलिन रेजिस्टेंस है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता और खून में इंसुलिन बढ़ने लगता है। ज्यादा इंसुलिन ओवरी में एंड्रोजन बढ़ा सकता है, जिससे फॉलिकल ठीक से मैच्योर नहीं हो पाता। मोटापा इस पूरी प्रक्रिया को बढ़ा सकता है, लेकिन यह अकेली वजह नहीं है।

PMOS की जांच कैसे की जाती है?

लक्षण और हिस्ट्री

सबसे पहले पीरियड्स का पैटर्न, त्वचा और बालों में बदलाव और परिवार की हिस्ट्री देखी जाती है। 2023 की इंटरनेशनल गाइडलाइन के मुताबिक पीरियड्स अनियमित हों और एंड्रोजन बढ़ने के लक्षण भी हों, तो डायग्नोसिस के लिए अल्ट्रासाउंड या AMH की जरूरत नहीं होती।

ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट में टेस्टोस्टेरोन देखा जाता है। साथ में थायरॉइड, प्रोलैक्टिन और 17-OH प्रोजेस्टेरोन की जांच की जाती है, ताकि इसी तरह के लक्षण देने वाली दूसरी कंडीशन को अलग किया जा सके। जरूरत के हिसाब से ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की भी जांच की जाती है। 

अल्ट्रासाउंड या AMH

अल्ट्रासाउंड में एक ओवरी में 2 से 9 mm के 20 या ज्यादा फॉलिकल दिखें या ओवरी का आकार 10 mL से ज्यादा हो, तो इसे डायग्नोसिस में शामिल किया जाता है। 

2023 की गाइडलाइन में बड़ी उम्र की महिलाओं में अल्ट्रासाउंड के विकल्प के तौर पर AMH को भी शामिल किया गया है। 

 

डायग्नोसिस के आधार

क्या देखा जाता है

एंड्रोजन का बढ़ा असर

अनचाहे बाल, मुंहासे या ब्लड टेस्ट में बढ़ा टेस्टोस्टेरोन

ओव्यूलेशन की गड़बड़ी

अनियमित या पीरियड्स का बिलकुल न आना

ओवरी की बनावट

अल्ट्रासाउंड में ज्यादा फॉलिकल या वयस्क महिलाओं में AMH 

वयस्क महिलाओं में डायग्नोसिस

ऊपर दिए गए तीन में से कोई दो मौजूद हों 

किशोरियों में डायग्नोसिस

ओव्यूलेशन की गड़बड़ी और एंड्रोजन का बढ़ा असर, दोनों जरूरी 

 

किशोरियों में अल्ट्रासाउंड और AMH की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इस उम्र में ये लक्षण बहुत कॉमन होते हैं।

PMOS का इलाज कैसे किया जाता है?

PMOS में हर महिला का इलाज एक जैसा नहीं होता। अगर परेशानी पीरियड्स की है, तो इलाज का फोकस पीरियड्स को रेगुलर करने पर रहता है। वहीं, कंसीव करने में दिक्कत हो तो इलाज का उद्देश्य ओव्यूलेशन करवाना होता है। 

लाइफस्टाइल में बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव इलाज का सबसे जरूरी स्टेप है। इसका फायदा सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसुलिन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी इसका असर पड़ता है। वजन कम न होने पर भी हेल्दी लाइफस्टाइल फायदेमंद रहती है

पीरियड्स और हार्मोन के लिए दवाएं

पीरियड्स को नियमित करने और अनचाहे बाल या मुंहासे कम करने के लिए हार्मोनल गोलियां दी जा सकती हैं। इंसुलिन और मेटाबॉलिक समस्या के लिए मेटफॉर्मिन दी जाती है, लेकिन प्रेगनेंसी में इसे रूटीन तौर पर नहीं देते।

प्रेगनेंसी प्लान करने के लिए

अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो सबसे पहले ओव्यूलेशन करवाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार दवाएं या अन्य उपचार सुझा सकते हैं। अगर इनसे फायदा न हो, तो IVF अगला ऑप्शन हो सकता है। 

 

आपकी मुख्य परेशानी

इलाज की दिशा

अनियमित पीरियड्स

जीवनशैली और हार्मोनल दवाएं

बाल और मुंहासे

हार्मोनल दवाएं, जरूरत पर अन्य इलाज

इंसुलिन और वजन

जीवनशैली और मेटफॉर्मिन

कंसीव करने में दिक्कत

कंडीशन के अनुसार दवाइयां और ट्रीटमेंट, फिर आगे के विकल्प

PMOS और प्रेग्नेंसी का क्या संबंध है?

PMOS में कंसीव करने में दिक्कत की सबसे बड़ी वजह ओव्यूलेशन का रेगुलर न होना है। यानी हर महीने एग रिलीज नहीं हो पाता। इसलिए इलाज में सबसे पहले ओव्यूलेशन को रेगुलर करने की कोशिश की जाती है। ओव्यूलेशन होने लगे तो ज्यादातर महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

एक और बात समझना जरूरी है। PMOS में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ कॉम्प्लिकेशन्स का रिस्क बढ़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि प्रेगनेंसी में कोई परेशानी होगी, लेकिन इस दौरान ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की थोड़ी ज्यादा सावधानी से निगरानी करनी पड़ती है।

PMOS में डाइट और लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

  • खाने में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट बढ़ाएं और मैदा व ज्यादा चीनी वाली चीजें कम रखें।
  • हफ्ते में 150 से 300 मिनट तेज वॉक जैसी मॉडरेट एक्सरसाइज का लक्ष्य रखें।
  • किसी एक खास डाइट या एक्सरसाइज को सबसे बेहतर नहीं माना गया है, इसलिए वही चुनें जिसे आप लंबे समय तक जारी रख सकें।
  • रोज 7 से 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें, क्योंकि नींद की कमी इंसुलिन पर असर डाल सकती है।
  • ऐसी बहुत सख्त डाइट न लें जिसे कुछ दिनों बाद छोड़ना पड़े।
  • तनाव और मूड को भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि PMOS के साथ एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी परेशानियां आम देखी जाती हैं

PMOS में डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

  • पीरियड्स तीन महीने से ज्यादा न आएं या लगातार बहुत अनियमित रहें।
  • चेहरे और शरीर पर बाल तेजी से बढ़ें, मुंहासे ज्यादा हों या सिर के बाल पतले होने लगें।
  • गर्दन या बगल की त्वचा काली पड़ने लगे।
  • एक साल की कोशिश के बाद भी प्रेगनेंसी न ठहरे, और उम्र 35 साल से ज्यादा हो तो छह महीने बाद ही डॉक्टर से सलाह लें।
  • मन लगातार उदास रहे या खाने को लेकर तनाव बढ़ता जाए।

निष्कर्ष (conclusion)

PMOS कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि PCOS का ही बदला हुआ नाम है, जिसे PCOD भी कहते हैं।PMOS में हॉर्मोन्स में गड़बड़ी की वजह से पीरियड्स और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकते हैं और कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है। 

डायग्नोसिस के बाद इलाज आपकी परेशानी के हिसाब से तय होता है। लाइफस्टाइल में बदलाव से शुरुआत होती है और प्रेगनेंसी प्लान करने पर लेट्रोजोल पहली पसंद रहती है। सही इलाज से इसे अच्छी तरह मैनेज किया जा सकता है। 

PMOS के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या PMOS पूरी तरह ठीक हो सकता है?

क्या PMOS से प्रेगनेंसी में परेशानी हो सकती है?

क्या PMOS और PCOD एक ही हैं?

क्या PMOS में वजन कम करना जरूरी है?

क्या PMOS में पीरियड्स नियमित हो सकते हैं?

क्या PMOS का इलाज बिना दवा के संभव है?

क्या PMOS उम्र के साथ ठीक हो सकता है?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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