पुरुषों में बांझपन के संकेत: लक्षण, कारण और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

Last updated: January 06, 2026

Overview

बांझपन सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या नहीं है। कई अध्ययनों के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले लगभग आधे बांझपन मामलों में पुरुषों की भूमिका होती है। यह बांझपन उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी पुरुष की कोई स्वास्थ्य समस्या उसकी महिला साथी के गर्भधारण की संभावना को कम कर देती है। समस्या यह है कि पुरुषों में बांझपन के संकेत अक्सर स्पष्ट नहीं होते और तब तक नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जब तक दंपती को गर्भधारण में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता|

पुरुषों में बांझपन के लक्षणों को समय रहते पहचानना, पुरुषों में बांझपन के कारणों को समझना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना, गर्भधारण की संभावना को बेहतर बनाने में मदद करता है। नीचे पुरुषों में बांझपन के संकेतों और उनसे जुड़े संभावित कारणों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।

भूमिका

दुनियाभर में करीब 15% दंपत्ति बांझपन से प्रभावित हैं, जिनमें लगभग आधे मामलों में कारण पुरुषों से जुड़ा होता है। लेकिन ज्यादातर पुरुषों को अपनी प्रजनन समस्या का पता तब चलता है, जब वे बच्चा प्लान करना शुरू करते हैं। पुरुष बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए इसके कारणों और जोखिमों को समझना ज़रूरी है, ताकि समय रहते मदद और इलाज लिया जा सके।

इस लेख में हम पुरुषों में बांझपन के मुख्य संकेत, आम कारण और डॉक्टर से मिलने का सही समय जानेंगे। शुरुआती पहचान से पुरुष समय रहते जांच और इलाज कर गर्भधारण की संभावना बढ़ा सकते हैं।

पुरुषों में बांझपन क्या होता है?

  • पुरुष बांझपन वह स्थिति है, जब किसी पुरुष की पार्टनर 12 महीने तक नियमित और बिना सुरक्षा के संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण न कर पाए, तो इसे पुरुषों में बांझपन माना जाता है। इसके सबसे आम कारण होते हैं, शुक्राणुओं की संख्या कम होना, शुक्राणुओं की गति (मोटिलिटी) कम होना, शुक्राणुओं का आकार असामान्य होना, या प्रजनन तंत्र (रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट) में किसी तरह की रुकावट या संरचनात्मक समस्या होना।
  • पुरुषों में आमतौर पर ऐसे साफ़-साफ़ लक्षण नजर नहीं आते, जो तुरंत किसी प्रजनन समस्या की ओर इशारा करें। शुरुआत में संकेत हल्के या दिखाई ही नहीं देते। कई बार शुक्राणु कमजोर हो जाते हैं, लेकिन सामान्य सेहत या यौन क्षमता में कोई फर्क नहीं पड़ता। सबसे आम संकेत है कि कई महीनों कोशिश के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा।
  • शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति या आकार में गड़बड़ी केवल तब पता चलती है, जब वीर्य (सीमन) की जांच माइक्रोस्कोप के नीचे की जाती है। क्योंकि हर बार इन समस्याओं के साथ दिखाई देने वाले बाहरी लक्षण नहीं होते, इसलिए अगर एक साल तक कोशिश के बाद भी गर्भधारण न हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही इलाज से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

पुरुषों में बांझपन के आम संकेत

पुरुषों में बांझपन के लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और देर से दिखाई देते हैं। नियमित, असुरक्षित संबंधों के बावजूद गर्भ न ठहरना इसका सबसे साफ संकेत है। कुछ शारीरिक या यौन स्वास्थ्य से जुड़े बदलाव भी इसके शुरुआती इशारे हो सकते हैं:

1. यौन स्वास्थ्य से जुड़े संकेत

प्रजनन क्षमता और यौन स्वास्थ्य आपस में जुड़े होते हैं। पुरुषों में सेक्स से जुड़ी समस्याएं कई बार कम टेस्टोस्टेरोन, कमजोर शुक्राणु स्वास्थ्य या मधुमेह जैसी अंदरूनी वजहों से हो सकती हैं।

  • इरेक्शन में दिक्कत ( इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन )- संभोग के दौरान पर्याप्त इरेक्शन न बन पाना या इरेक्शन बनाए न रख पाना, गर्भधारण की कोशिशों को मुश्किल बना सकता है और यह हार्मोन या खून के प्रवाह में गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।
  • कामेच्छा में कमी - सेक्स में रुचि कम हो जाना भी एक आम संकेत है। कई बार यह हार्मोन असंतुलन, तनाव या मानसिक दबाव से जुड़ा होता है, जो आगे चलकर प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
  • स्खलन से जुड़ी समस्याएँ- वीर्य की मात्रा बहुत कम होना, समय से पहले स्खलन , बहुत देर से स्खलन या स्खलन का न होना, ये सब स्थितियाँ शुक्राणुओं के अंडाणु तक पहुंचने में बाधा डाल सकती हैं।

2. शारीरिक रूप से दिखने वाले संकेत

कई बार शरीर में दिखने वाले कुछ बदलाव भी प्रजनन क्षमता पर असर का संकेत होते हैं।

  • अंडकोष में दर्द, सूजन या गांठ- अंडकोष में लगातार दर्द, सूजन या कोई गांठ महसूस होना, वैरिकोसील (नसों का फूलना), इंफ़ेक्शन या अन्य समस्या की ओर इशारा कर सकता है, जो शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
  • चेहरे या शरीर के बालों में कमी, मांसपेशियों का कम होना- यदि दाढ़ी-मूंछ या शरीर के बालों में कमी आने लगे, या मांसपेशियाँ कमज़ोर/पतली लगने लगें, तो यह हार्मोन असंतुलन का संकेत हो सकता है, जो शुक्राणु निर्माण पर असर डालता है।
  • पुरुषों में स्तन का बढ़ना (गाइनेकोमैस्टिया)- पुरुषों में स्तनों का फूलना या बढ़ना अक्सर हार्मोन गड़बड़ी से जुड़ा होता है और यह भी प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है।

3.पुरुषों में बांझपन के मेडिकल और शारीरिक संकेत

कुछ स्थितियाँ सीधे, सीधे शुक्राणु के बनने या उनके रास्ते से निकलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

  • अंडकोष से जुड़ी समस्या: बहुत छोटे, सख्त या पूरी तरह नीचे न उतरे अंडकोष शुक्राणुओं की संख्या कम कर सकते हैं और बांझपन का कारण बन सकते हैं।
  • पुराने या गंभीर इंफेक्शन: यौवन के बाद हुई कण्ठमाला (मम्प्स) या यौन रोग जैसे इंफेक्शन प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं और शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • लंबे समय तक गर्भ न ठहरना- अगर एक साल तक नियमित प्रयास के बावजूद साथी को गर्भ नहीं ठहरता, तो यह अक्सर पुरुष बांझपन का सबसे आम और कई बार एकमात्र संकेत होता है। ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर वीर्य की जाँच (सीमन एनालिसिस) करके शुक्राणुओं की संख्या, गति और आकार की जांच करते हैं।

कई लोग नहीं जानते कि पुरुष बांझपन आम समस्या है और अक्सर इसका इलाज संभव होता है। अगर कोई लक्षण दिखें, तो देर न करें, फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर जांच से कारण पता चलता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।

पुरुषों में बांझपन के कारण

पुरुषों में बांझपन कई तरह के शारीरिक, हार्मोनल और जीवनशैली से जुड़े कारणों की वजह से हो सकता है। सही इलाज करने के लिए ये समझना जरूरी है कि समस्या की जड़ कहाँ है।

  • शुक्राणुओं की संख्या कम होना (ओलिगोस्पर्मिया)- जब वीर्य में मौजूद शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम होती है, तो उसे ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है। यह पुरुष बांझपन के सबसे आम कारणों में से एक है, क्योंकि कम संख्या में शुक्राणु होने पर अंडाणु तक पहुँचने और उसे निषेचित करने की संभावना घट जाती है।
  • शुक्राणुओं की गति कम होना (अस्थेनोज़ोस्पर्मिया)- कई बार शुक्राणु मौजूद तो होते हैं, लेकिन उनकी तैरने या आगे बढ़ने की क्षमता कम होती है। इसे शुक्राणु की कम मोटिलिटी कहा जाता है। ऐसे शुक्राणु अंडाणु तक सही समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
  • शुक्राणुओं का असामान्य आकार (टेराटोज़ोस्पर्मिया)- जब ज्यादातर शुक्राणुओं का आकार असामान्य हो, जैसे सिर का सही आकार न होना, बीच के हिस्से में कमी होना या पूंछ में दोष होना, तो इसे टेराटोज़ोस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसे विकृत आकार वाले शुक्राणुओं के लिए अंडाणु की बाहरी परत को भेदकर उसे निषेचित करना मुश्किल हो जाता है।
  • हार्मोनल असंतुलन- शुक्राणु बनने पर केवल अंडकोष ही नहीं, बल्कि दिमाग और शरीर की अन्य हार्मोन ग्रंथियों का भी असर होता है। हार्मोन में गड़बड़ी होने पर टेस्टोस्टेरोन और शुक्राणुओं की संख्या व गुणवत्ता कम हो सकती है, जिससे बांझपन की समस्या हो सकती है।

समय पर डॉक्टर या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेने से सही कारण पता चल सकता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।

पुरुष बांझपन के मुख्य कारण :

  • वैरिकोसील: अंडकोष की नसों के फूलने से तापमान और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता घट सकती है।
  • मेडिकल और आनुवांशिक कारण: मधुमेह, थायरॉयड, सिस्टिक फाइब्रोसिस या जेनेटिक समस्याएँ शुक्राणु बनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
  • जीवनशैली के कारण: धूम्रपान, शराब, नशे की दवाएँ, स्टेरॉइड, मोटापा, तनाव, कम नींद और ज़्यादा गर्मी का संपर्क शुक्राणु स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

सार यह है कि पुरुष बांझपन अक्सर एक ही कारण से नहीं, बल्कि कई कारणों के मेल से पैदा होता है। इसलिए अगर गर्भधारण में देरी हो रही हो, तो अनुमान लगाने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराना ज़्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें

पुरुषों में बांझपन के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसका पता देर से चलता है। आमतौर पर लंबे समय तक गर्भधारण न होने पर ही समस्या सामने आती है। समय पर जांच और इलाज से सही उपचार की संभावना बढ़ जाती है। पुरुषों को इन स्थितियों में डॉक्टर या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लेनी चाहिए:

  • 12 महीने तक नियमित, असुरक्षित यौन संबंध के बाद भी गर्भ न ठहरना- यह प्रजनन क्षमता में कमी का सबसे आम और महत्वपूर्ण संकेत है।
  • अंडकोष में चोट या ऑपरेशन का इतिहास- पहले कभी अंडकोष (टेस्टिस) पर चोट, या उस हिस्से की सर्जरी हुई हो, तो इससे शुक्राणु बनने या उनके काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
  • साथी के बार-बार गर्भपात होना- अगर पत्नी या साथी के साथ कई बार गर्भपात हो चुका हो, तो कभी-कभी इसके पीछे आनुवांशिक कारण या शुक्राणुओं की गुणवत्ता से जुड़ी बड़ी समस्या हो सकती है।
  • इरेक्शन में दिक्कत या स्खलन से जुड़ी समस्या- इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन (इरेक्शन न बनना या बनाए न रख पाना), बहुत कम वीर्य निकलना, समय से पहले या बहुत देर से स्खलन होना, ये सब स्थितियाँ गर्भधारण में बाधा डाल सकती हैं।
  • अंडकोष में गांठ, सूजन या लगातार दर्द- अगर अंडकोष में कोई गांठ महसूस हो, आकार बदला हुआ लगे या लगातार दर्द/भारीपन महसूस हो, तो यह अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जो प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है।
  • लंबे समय से चल रही बीमारियां- मधुमेह (डायबिटीज़), गठिया (आर्थराइटिस) जैसी पुरानी बीमारियां कई बार प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं। ऐसे में नियमित जांच और सलाह जरूरी है।
  • हार्मोन से जुड़ी समस्याएं- जैसे हाइपोथायरॉइडिज़्म, बहुत कम टेस्टोस्टेरोन स्तर या अन्य हार्मोनल गड़बड़ी, ये सब शुक्राणुओं की संख्या और यौन स्वास्थ्य दोनों पर असर डालती हैं, इसलिए इन स्थितियों में प्रजनन क्षमता की जांच कराना समझदारी है।

अगर आपको या आपके साथी को गर्भधारण में दिक्कत हो रही है, या ऊपर बताए गए कोई भी संकेत दिख रहे हैं, तो देर करने के बजाय किसी योग्य डॉक्टर या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर जांच कराना सबसे सही कदम है।

पुरुष बांझपन की जांच कैसे की जाती है?

पुरुषों में बांझपन के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं या दिखाई ही नहीं देते, इसलिए सही कारण जानने के लिए जांच जरूरी होती है। फर्टिलिटी विशेषज्ञ कुछ खास टेस्ट से समस्या की पहचान करते हैं। आइए एक-एक करके मुख्य जाँचों को समझते हैं:

1. वीर्य की जांच

यह पुरुष बांझपन की सबसे पहली और सबसे अहम जांच होती है। इसमें लैब में वीर्य का सैंपल लेकर तीन बातें देखी जाती हैं:

  • शुक्राणुओं की संख्या (स्पर्म काउंट)
  • शुक्राणुओं की गति (मोटिलिटी कितनी अच्छी तरह तैर रहे हैं)
  • शुक्राणुओं का आकार और बनावट (मॉर्फोलॉजी)

अगर शुक्राणुओं की संख्या कम हो, उनकी गति कमज़ोर हो या आकार ज़्यादातर ग़लत हो, तो यह पुरुष बांझपन के आम कारणों में आता है।

2. DFI (DNA Fragmentation Index)

DFI यह मापता है कि शुक्राणुओं के DNA में कितना नुकसान या टूट-फूट (डैमेज) है, जो अक्सर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से होता है। कई बार वीर्य परीक्षण की रिपोर्ट सामान्य दिखती है, लेकिन DFI बढ़ा हुआ होता है। DFI बढ़ा होने पर गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है बार-बार। इन हार्मोनों में गड़बड़ी होने पर अंडकोष में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पुरुष बांझपन के कई मामलों में हार्मोन असंतुलन बड़ी भूमिका निभाता है।

3. हार्मोन की जांच

खून की जांच के जरिए फ़ॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH), ल्युटिनाइज़िंग हार्मोन (LH) और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर देखे जाते हैं। इन हार्मोनों में गड़बड़ी होने पर शुक्राणु बनने की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ता है और यही पुरुषों में बांझपन के मुख्य कारणों में से एक हो सकता है।

4. अंडकोष का अल्ट्रासाउंड

यह जांच अंडकोष और स्क्रोटम (अंडकोष की थैली) का अल्ट्रासाउंड होती है। इससे अंदर की संरचना से जुड़ी समस्याएं, रुकावटें या वैरिकोसील (अंडकोष की नसों का फूलना) जैसी स्थितियाँ पता चलती हैं, जो शुक्राणुओं की गुणवत्ता और उनके बनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

5. आनुवांशिक जांच

कुछ मामलों में प्रजनन क्षमता की समस्या आनुवांशिक होती है। जेनेटिक टेस्टिंग के ज़रिए क्रोमोसोम से जुड़ी गड़बड़ियां या क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम जैसी स्थितियाँ पहचानी जा सकती हैं, जिनसे पुरुष फैक्टर इंफर्टिलिटी का कारण स्पष्ट होता है और सही निदान किया जा सकता है।

6. संक्रमण और STI की जांच

कुछ संक्रमण प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुँचा सकते हैं या शुक्राणुओं के रास्ते में रुकावट बना सकते हैं। समय पर स्क्रीनिंग से ऐसे STIs और अन्य इंफेक्शन पहचाने जा सकते हैं, जिनका इलाज संभव है और जिनसे प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है।

क्या पुरुष बांझपन का इलाज संभव है?

ज्यादातर मामलों में पुरुष बांझपन का इलाज संभव होता है और यह उसके कारण पर निर्भर करता है। इसके लक्षण कभी हल्के तो कभी साफ़ दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सबसे ज़रूरी है समय पर सही मेडिकल जांच कराना, ताकि समस्या को गंभीर होने से पहले पहचाना जा सके।

डॉक्टर आमतौर पर पुरुष बांझपन के कारणों में ये बातें देखते हैं-

  • हार्मोन के स्तर कम या असंतुलित हैं या नहीं
  • प्रजनन तंत्र (रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट) में कोई संरचनात्मक समस्या या रुकावट तो नहीं
  • कोई संक्रमण (इंफेक्शन) तो नहीं
  • शुक्राणु बनने या उनके काम करने में गड़बड़ी तो नहीं (जैसा कि वीर्य जांच में दिख सकता है)

जब सही कारण पता चल जाता है, तो उसी के अनुसार इलाज किया जाता है, कहीं शुक्राणुओं की सेहत सुधारने पर, कहीं शारीरिक समस्या ठीक करने पर ध्यान दिया जाता है। ज़रूरत पड़ने पर आधुनिक प्रजनन तकनीकों की भी मदद ली जाती है। जैसे:

  • जीवनशैली में बदलाव- बेहतर और संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना, धूम्रपान छोड़ना और शराब कम या बंद करना, इन सब से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है।
  • दवाइयाँ या हार्मोन थेरेपी- कई बार पुरुषों को हार्मोन संतुलित करने या अन्य समस्याएं ठीक करने के लिए दवाइयां या हार्मोन थेरेपी दी जाती है, जिससे शुक्राणु बनने की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है।
  • सर्जरी- कुछ मामलों में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है, जैसे वैरिकोसील (अंडकोष की नसों का फूलना) की सर्जरी करना या शुक्राणु के रास्ते में आई रुकावट को हटाना, ताकि प्राकृतिक रूप से प्रजनन क्षमता वापस आ सके।
  • सहायक प्रजनन तकनीक- IVF (In Vitro Fertilisation) या ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) जैसी तकनीकें उन स्थितियों में मदद करती हैं, जहाँ शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता में गंभीर समस्या हो। ये तरीक़े कई बार बहुत कम या कमजोर शुक्राणुओं के बावजूद भी गर्भधारण की संभावना बना सकते हैं।

सही समय पर जांच, उचित इलाज और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ, ज्यादातर पुरुष जो बांझपन से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए पिता बनने की अच्छी संभावना बनी रहती है।

निष्कर्ष

पुरुषों में बांझपन के संकेत अक्सर नजर नहीं आते या फिर इतने हल्के होते हैं कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसलिए जरूरी है कि पुरुष समय रहते इस बारे में जागरूक रहें। अगर शुरुआती लक्षणों को समझकर सही समय पर जांच करवा ली जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है। अगर आप, आपके पार्टनर या परिवार में किसी को भी फ़र्टिलिटी से जुड़ी परेशानी है, तो इंतजार न करें। जल्द से जल्द किसी फ़र्टिलिटी विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Indira IVF में हमारे विशेषज्ञ उन्नत तकनीक और पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान के जरिए पुरुष बांझपन का समाधान करते हैं, ताकि पैरंटहुड का सपना पूरा हो सके।

Common Questions Asked

पुरुष बांझपन का सबसे आम संकेत क्या है?

 

एक साल तक नियमित, असुरक्षित संबंध के बावजूद पार्टनर का गर्भधारण न कर पाना।

क्या बिना किसी लक्षण के भी पुरुष बांझपन हो सकता है?

 

हाँ। कई बार कोई खास शारीरिक या यौन लक्षण नहीं दिखते, और समस्या सिर्फ़ जांच (वीर्य जांच आदि) में पता चलती है।

क्या कम शुक्राणु संख्या होने से हमेशा बांझपन होता है?

 

ज़रूरी नहीं। कम स्पर्म काउंट में गर्भ ठहरना मुश्किल हो सकता है, लेकिन नामुमकिन नहीं; बस संभावना काफी घट जाती है।

क्या इरेक्टाइल डिसफंक्शन का मतलब हमेशा बांझपन होता है?

 

नहीं। इरेक्शन की समस्या और फर्टिलिटी अलग-अलग चीज़ें हैं, लेकिन लगातार ED रहने पर दोनों की जांच कराना समझदारी है।

क्या जीवनशैली में सुधार से पुरुष बांझपन ठीक हो सकता है?

 

कई मामलों में हाँ। धूम्रपान छोड़ना, शराब कम करना, वजन नियंत्रित रखना, अच्छी डाइट और नियमित व्यायाम से स्पर्म क्वालिटी में सुधार आ सकता है।

किस उम्र के बाद पुरुषों की फ़र्टिलिटी कम होने लगती है?

 

आमतौर पर 40 के बाद शुक्राणुओं की संख्या व क्वालिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है, लेकिन यह व्यक्ति–व्यक्ति पर निर्भर करता है।

बांझपन का शक हो तो पुरुषों को कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए?

 

आमतौर पर वीर्य जांच (Semen Analysis), हार्मोन टेस्ट (जैसे टेस्टोस्टेरोन, FSH, LH) किए जाते हैं और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड, DFI या जेनेटिक टेस्ट की सलाह देते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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