IVF में एग और एम्ब्रियो फ्रीज कैसे करते हैं? (Vitrification in Hindi)

Last updated: September 24, 2026

सारांश (Overview)

एग या एम्ब्रीओ को फ्रीज करने की बात हो, तो यह सोचना स्वाभाविक है कि बाद में इन्हें निकालने पर क्या होगा। क्या ये वैसे ही मिलेंगे जैसे अभी हैं? क्या फ्रीज करने के दौरान इन्हें कोई नुकसान हो सकता है? इसलिए एग और एम्ब्रियो को किस तरीके से फ्रीज किया जाता है, यह समझना जरूरी है।

आज एग और एम्ब्रियो को फ्रीज करने के लिए Vitrification यानी विट्रीफिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें इन्हें बहुत तेजी से फ्रीज किया जाता है, ताकि अंदर बर्फ के क्रिस्टल न बनें और सेल को नुकसान होने की संभावना कम रहे।

आगे समझते हैं कि विट्रीफिकेशन में एग और एम्ब्रीओ को कैसे फ्रीज किया जाता है, यह पुरानी स्लो फ्रीजिंग से कैसे अलग है और फ्रीज करने के बाद प्रेगनेंसी की संभावना कितनी होती है।

विट्रीफिकेशन क्या है और IVF में इसका उपयोग क्यों किया जाता है?

Vitrification यानी विट्रीफिकेशन एग और एम्ब्रीओ को बहुत तेजी से फ्रीज करने की तकनीक है। इन्हें कुछ ही सेकंड में करीब माइनस 196°C तक ठंडा किया जाता है, ताकि अंदर बर्फ के क्रिस्टल न बनें और सेल को नुकसान होने का खतरा कम रहे।

IVF में एग और एम्ब्रियो को फ्रीज करने की जरूरत अलग-अलग सिचुएशन में पड़ सकती है:

  • एक साइकिल में बचे हुए एम्ब्रीओ को आगे की कोशिश के लिए फ्रीज करके रखा जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा पूरी IVF साइकिल न करनी पड़े।
  • अगर किसी वजह से उसी साइकिल में एम्ब्रीओ ट्रांसफर न करना हो, तो एम्ब्रीओ को फ्रीज करके बाद में ट्रांसफर किया जा सकता है।
  • आगे के लिए फर्टिलिटी को सेफ रखने के लिए एग भी फ्रीज किए जा सकते हैं।

विट्रीफिकेशन कोई अलग इलाज नहीं है, बल्कि IVF प्रोसेस का ही एक हिस्सा है।

Vitrification कैसे काम करता है?

विट्रीफिकेशन में एग या एम्ब्रीओ को पहले एक खास क्रायोप्रोटेक्टेंट घोल में रखा जाता है और फिर बहुत तेजी से लिक्विड नाइट्रोजन में फ्रीज किया जाता है। इतनी तेजी से ठंडा करने का उद्देश्य यही है कि सेल के अंदर बर्फ के क्रिस्टल न बनें।

ऐसा करना जरूरी है क्योंकि सेल के अंदर काफी मात्रा में पानी होता है। अगर पानी धीरे-धीरे जमता है, तो बर्फ के क्रिस्टल बन सकते हैं और सेल की संरचना यानी सेल्युलर स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

विट्रीफिकेशन में इसे दो तरीकों से रोका जाता है:

क्रायोप्रोटेक्टेंट: यह सेल के अंदर और बाहर के पानी को इस तरह बदलता है कि बर्फ के क्रिस्टल बनने की संभावना कम हो जाती है।

बहुत तेजी से फ्रीज करना: एग या एम्ब्रीओ को इतनी तेजी से ठंडा किया जाता है कि पानी से बर्फ के क्रिस्टल बनने का समय ही नहीं मिलता।        

हालांकि, क्रायोप्रोटेक्टेंट की मात्रा बहुत ज्यादा हो या एग या एम्ब्रीओ को इसमें जरूरत से ज्यादा देर रखा जाए, तो इससे सेल को नुकसान हो सकता है। इसलिए इसे कितनी मात्रा में और कितनी देर इस्तेमाल करना है, यह भी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि विट्रीफिकेशन में लैब की तकनीक और अनुभव बहुत ज़रूरी होते हैं।

IVF में Egg Vitrification कैसे किया जाता है?

एग फ्रीज करने की प्रक्रिया में पहले सही एग चुने जाते हैं, फिर उन्हें क्रायोप्रोटेक्टेंट की मदद से फ्रीज किया जाता है और जरूरत पड़ने पर बाद में वार्म करके इस्तेमाल किया जाता है।

मैच्योर एग चुनना

एग रिट्रीवल के बाद लैब में उन्हीं एग को फ्रीज करने के लिए चुना जाता है जो MII यानी मेटाफेज़ II (Metaphase II) स्टेज पर हों। अधूरे या मैच्योर न हुए एग को फ्रीज नहीं किया जाता।

एग को फ्रीज करना

चुने गए एग को क्रायोप्रोटेक्टेंट के अलग-अलग घोल में रखा जाता है, ताकि उनमें मौजूद पानी को नियंत्रित तरीके से कम किया जा सके। इसके बाद एग को एक पतले कैरियर पर रखकर सीधे लिक्विड नाइट्रोजन में फ्रीज कर दिया जाता है।

एग को वार्म करना

बाद में एग का इस्तेमाल करना हो, तो उसे वार्म किया जाता है और क्रायोप्रोटेक्टेंट को धीरे-धीरे हटाया जाता है। इसके बाद बचे हुए एग को ICSI से फर्टिलाइज किया जाता है।

एग को फ्रीज करना तकनीकी रूप से मुश्किल होता है, क्योंकि एग इंसानी शरीर का सबसे बड़ा सेल है और इसमें पानी की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। इसलिए फ्रीज करने और वार्म करने, दोनों प्रक्रियाओं में सावधानी जरूरी होती है।

फ्रीज किए गए एग में सामान्य IVF की बजाय ICSI का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि फ्रीजिंग के बाद एग की बाहरी परत सख्त हो सकती 

IVF में Embryo Vitrification कैसे किया जाता है?

एम्ब्रीओ को आमतौर पर तीसरे या पांचवें दिन फ्रीज किया जाता है। इसे क्रायोप्रोटेक्टेंट के घोल में रखने के बाद कुछ ही सेकंड में लिक्विड नाइट्रोजन में फ्रीज कर दिया जाता है। पांचवें दिन तक एम्ब्रीओ के अंदर फ्लूइड से भरी एक जगह बन जाती है। फ्रीज करने से पहले इस जगह को छोटा किया जाता है, ताकि उसमें मौजूद फ्लूइड कम हो जाए और बर्फ के क्रिस्टल बनने का रिस्क कम रहे। 

एम्ब्रीओ को फ्रीज करना

एम्ब्रीओ को फ्रीज करना एग के मुकाबले कुछ आसान होता है, क्योंकि एम्ब्रीओ कई सेल से बना होता है। अगर वार्मिंग के दौरान कुछ सेल खराब भी हो जाएं, तो बाकी सेल से वह आगे बढ़ सकता है। एग में यह गुंजाइश नहीं होती।

एम्ब्रीओ को वार्म करना

बाद में एम्ब्रीओ का इस्तेमाल करना हो, तो उसे वार्म किया जाता है। अगर ब्लास्टोसिस्ट वार्मिंग के बाद ठीक तरह से रिकवर कर रहा है, तो कुछ घंटों में उसके अंदर की फ्लूइड से भरी जगह फिर से भरने लगती है और ब्लास्टोसिस्ट दोबारा फैलने लगता है। इसे ब्लास्टोसिस्ट री-एक्सपैंशन कहते हैं। यह बताता है कि एम्ब्रीओ वार्मिंग के प्रोसेस से अच्छी तरह रिकवर कर रहा है।

इसके बाद एम्ब्रीओ को उस साइकिल में या बाद की साइकिल में ट्रांसफर किया जा सकता है, जब गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम तैयार हो।

Vitrification और Slow Freezing में क्या अंतर है?

स्लो फ्रीजिंग में तापमान को मशीन की मदद से धीरे-धीरे कई घंटों में कम किया जाता है, इसलिए बर्फ के क्रिस्टल बनने का समय मिल जाता है। विट्रीफिकेशन में एग या एम्ब्रीओ को कुछ ही सेकंड में फ्रीज किया जाता है, जिससे बर्फ के क्रिस्टल बनने का मौका नहीं मिलता। दोनों तकनीक में आखिर में तापमान करीब माइनस 196°C तक पहुंचाया जाता है। 

 

स्लो फ्रीजिंग

विट्रीफिकेशन

ठंडा होने में लगने वाला समय

कई घंटे

सेकंडों में

अंदर क्या बनता है

बर्फ के क्रिस्टल बन सकते हैं

कांच जैसी ठोस अवस्था बनती है

क्रायोप्रोटेक्टेंट

कम मात्रा में

बहुत गाढ़ा और ज्यादा मात्रा में

आज की स्थिति

इस्तेमाल लगभग बंद 

IVF लैब में मुख्य तकनीक

2017 में हुए एक रिसर्च रिव्यू में 7 ट्रायल और 3,615 एम्ब्रीओ का डाटा देखा गया। इसमें विट्रीफिकेशन से फ्रीज किए गए एम्ब्रीओ में वार्मिंग के बाद सर्वाइव करने की संभावना स्लो फ्रीजिंग की तुलना में ज्यादा थी (RR 1.59, 95% CI 1.30–1.93), क्लीवेज स्टेज एम्ब्रीओ में लाइव बर्थ का परिणाम भी विट्रीफिकेशन के पक्ष में था (RR 2.28), इसी आधार पर एम्ब्रीओ फ्रीजिंग के लिए विट्रीफिकेशन को अपनाने की सलाह दी गयी।

Vitrification के फायदे क्या हैं?

विट्रीफिकेशन का फायदा यह है कि फ्रीज करने के बाद ज्यादा एग और एम्ब्रीओ सही कंडीशन में वापस मिलते हैं।  ASRM की 2021 गाइडलाइन के मुताबिक विट्रीफिकेशन से फ्रीज किए एग वार्मिंग के बाद करीब 85% सुरक्षित रहते हैं और उनमें से करीब 79% फर्टिलाइज होते हैं, जबकि पुरानी स्लो कूलिंग में ये करीब 65% सुरक्षित रहते थे और 74% फर्टिलाइज होते थे।

इसके अलावा:

  • दोबारा स्टिमुलेशन से बच सकते हैं: बचे हुए एम्ब्रीओ अगली कोशिश के लिए फ्रीज किए जा सकते हैं।
  • अपनी मर्जी से एम्ब्रीओ ट्रांसफर का समय चुन सकते हैं: एम्ब्रीओ को बाद की साइकिल में ट्रांसफर किया जा सकता है।
  • फर्टिलिटी सुरक्षित रखने का विकल्प: एग या एम्ब्रीओ आगे के लिए फ्रीज किए जा सकते हैं।
  • लंबे समय तक सुरक्षित रखना: माइनस 196°C पर एग और एम्ब्रियो में होने वाली प्रक्रियाएं रुक जाती हैं।

Vitrification की सीमाएं और संभावित जोखिम क्या हैं?

विट्रीफिकेशन में एग और एम्ब्रीओ को नुकसान होने का रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं होता। करीब 85% एग वार्मिंग के बाद बचते हैं, यानी करीब 15% एग इस प्रक्रिया में आगे इस्तेमाल नहीं हो पाते। दूसरी लिमिटेशन यह है कि पूरा प्रोसेस लैब की तकनीक पर काफी निर्भर करता है। क्रायोप्रोटेक्टेंट की सही मात्रा से लेकर कुछ सेकंड में फ्रीज करने तक, हर स्टेप सही तरीके से करना जरूरी है।

 एक और बात जानना जरूरी है। 85% एग्स के बचने का मतलब यह नहीं है कि 85% महिलाओं को प्रेगनेंसी होगी या बच्चा होगा। एग के वार्म होने के बाद भी कई स्टेप बाकी होते हैं। 

  • बचने की दर: वार्मिंग के बाद कितने एग सही हालत में मिले।
  • फर्टिलाइजेशन की दर: इनमें से कितने एग स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होकर एम्ब्रियो बने।
  • लाइव बर्थ की दर: बने हुए एम्ब्रीओ में से कितने प्रेगनेंसी के बाद बच्चे के जन्म तक पहुंचे।

ASRM के अनुसार अपनी मर्जी से एग फ्रीज कराने वाली महिलाओं में लाइव बर्थ की संभावना बताने के लिए अभी पर्याप्त डाटा नहीं है। इसलिए अगर कोई क्लिनिक आपको कोई प्रतिशत बताता है, तो यह जरूर पूछें कि वह प्रतिशत किस उम्र की महिलाओं और किस तरह के केसेस से आया है। 

Vitrification के बाद प्रेगनेंसी की संभावना कितनी होती है?

यह उम्र पर सबसे ज्यादा निर्भर करती है। ASRM की गाइडलाइन के मुताबिक, एक लाइव बर्थ की करीब 70% संभावना के लिए: 

एग फ्रीज कराने की उम्र

करीब कितने मैच्योर एग चाहिए

30 से 34 साल

14

35 से 37 साल

15

38 से 40 साल

26

38 साल के बाद जरूरी एग की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसलिए सिर्फ एग फ्रीज कराना ही मायने नहीं रखता, कितने मैच्योर एग फ्रीज हुए, यह भी उतना ही जरूरी है।

फ्रोजन एम्ब्रीओ ट्रांसफर में भी फ्रीजिंग से लाइव बर्थ अपने आप बढ़ती हुई नहीं दिखी। 15 रैंडमाइज्ड ट्रायल की कॉक्रेन रिव्यु में 8 स्टडीज के डाटा के आधार पर फ्रोजन और फ्रेश एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बीच लाइव बर्थ में कोई खास अंतर नहीं मिला। हालांकि, एम्ब्रीओ फ्रीज करने की वजह से OHSS का रिस्क करीब 3% से घटकर 1% रह गया।

किन लोगों के लिए Egg या Embryo Vitrification उपयोगी है?

विट्रीफिकेशन उन लोगों के लिए उपयोगी है जो आज के एग या एम्ब्रीओ को आगे के लिए बचाकर रखना चाहते हैं। एग फ्रीज करना है या एम्ब्रीओ, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अभी साथी उपलब्ध है या नहीं और मेडिकल व कानूनी स्थिति क्या है।

एग विट्रीफिकेशन  उपयोगी है

  • कैंसर का इलाज शुरू होने वाला हो: इलाज से पहले फर्टिलिटी सुरक्षित रखने के लिए।
  • अभी पार्टनर न हो: आगे के लिए एग फ्रीज करके रखने के लिए।
  • ओवरी पर असर पड़ने का खतरा हो: किसी बीमारी या उसके इलाज से फर्टिलिटी प्रभावित होने की आशंका हो।

एम्ब्रीओ विट्रीफिकेशन उपयोगी है

  • IVF में बचे एम्ब्रीओ के लिए: अगली कोशिश में दोबारा स्टिमुलेशन से बचने के लिए।
  • ताजा ट्रांसफर टालना हो: जैसे OHSS का रिस्क हो या गर्भाशय की परत ट्रांसफर के लिए तैयार न हो।
  • जेनेटिक जांच करनी हो: जांच की रिपोर्ट आने तक एम्ब्रीओ फ्रीज रखे जाते हैं।

अगर IVF में सिर्फ एक एग मिलने की उम्मीद हो, तो फ्रीज करने के लिए एग भी सिर्फ एक ही मिलेगा। ऐसे केसेस में बहुत से एग जमा करके रखने का ऑप्शन सीमित रहता है। 

भारत में फ्रीज किए गए एग और एम्ब्रियो कब तक रखे जा सकते हैं?

भारत में एग और एम्ब्रीओ की स्टोरेज अवधि कानून (Limitation Law) के अंतर्गत आती है। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 की धारा 28(2) के अनुसार, डोनर के गैमीट या एम्ब्रीओ को 10 साल से ज्यादा स्टोर नहीं किया जा सकता। इसके बाद इन्हें नष्ट किया जा सकता है या कमीशनिंग दंपति या व्यक्ति की सहमति से रजिस्टर्ड रिसर्च संस्था को रिसर्च के लिए दिया जा सकता है।

इसलिए फ्रीजिंग का फैसला लेते समय सिर्फ आज की जरूरत न देखें। आगे कितने समय तक एग या एम्ब्रीओ की जरूरत पड़ सकती है और स्टोरेज का खर्च कितना होगा, यह भी पहले समझ लेना चाहिए।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • विट्रीफिकेशन में एग या एम्ब्रीओ को कुछ ही सेकंड में माइनस 196°C तक फ्रीज किया जाता है, ताकि बर्फ के क्रिस्टल न बनें।
  • वार्मिंग के बाद करीब 85% एग बचते हैं और इनमें से करीब 79% फर्टिलाइज होते हैं। ये लाइव बर्थ के आंकड़े नहीं हैं।
  • एक लाइव बर्थ की करीब 70% संभावना के लिए 30–34 साल की उम्र में करीब 14 और 38–40 साल में करीब 26 मैच्योर एग चाहिए।
  • भारत में डोनर के गैमीट या एम्ब्रीओ को 10 साल से ज्यादा स्टोर नहीं किया जा सकता। यह कानूनी सीमा है, एग या एम्ब्रीओ के जैविक रूप से खराब होने की समय-सीमा नहीं।

निष्कर्ष (Conclusion)

विट्रीफिकेशन ने एग और एम्ब्रियो को फ्रीज करके बाद में इस्तेमाल करना काफी आसान और भरोसेमंद बनाया है। इसमें एग या एम्ब्रीओ को कुछ ही सेकंड में फ्रीज किया जाता है, जिससे बर्फ के क्रिस्टल से होने वाला नुकसान कम होता है।

लेकिन एग की वार्मिंग के बाद बच जाना, फर्टिलाइज होना और आखिर में लाइव बर्थ होना तीन अलग बातें हैं। इसलिए सिर्फ 85% एग बचने का आंकड़ा देखकर अपनी प्रेगनेंसी की संभावना नहीं समझी जा सकती। उम्र और फ्रीज किए गए मैच्योर एग की संख्या भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

एग या एम्ब्रीओ फ्रीज कराने से पहले क्लिनिक से उसकी वार्मिंग के बाद बचने की दर और आपकी उम्र में कितने मैच्योर एग फ्रीज करना उचित माना जाता है, यह जरूर पूछें।

Vitrification पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Vitrification क्या है और IVF में इसका उपयोग क्यों किया जाता है?

अंडे को फ्रीज कैसे करते हैं?

Egg Vitrification और Embryo Vitrification में क्या अंतर है?

Vitrification के बाद Embryo को कैसे Thaw किया जाता है?

क्या Vitrification से IVF की सफलता की संभावना बढ़ती है?

कैसे पता चलेगा कि फर्टिलाइजेशन हुआ है?

आईवीएफ में दो भ्रूण स्थानांतरण की सफलता की दर क्या है?

एग फ्रीजिंग में कितना खर्चा आता है?

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