सारांश (Overview)
Watery Semen यानी पतला सीमेन देखकर कई पुरुष मान लेते हैं कि उनका स्पर्म काउंट कम है। लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। सीमेन का गाढ़ापन हर बार बदल सकता है, और बार-बार इजैक्युलेशन के बाद यह पतला दिखना आम है।
आगे जानिए Watery Semen के कारण क्या हैं, यह कब नॉर्मल है, फर्टिलिटी पर इसका क्या असर पड़ता है और इसकी जांच कैसे होती है।
वाटरी सीमेन यानी ऐसा सीमेन, जो नॉर्मल से ज्यादा पतला और पानी जैसा दिखे। नॉर्मल सीमेन, इजैक्युलेशन के समय गाढ़ा और चिपचिपा होता है, और कुछ मिनटों में अपने आप पतला हो जाता है। इसलिए सीमेन का पतला दिखना हमेशा किसी समस्या की तरफ इशारा नहीं होता।
Cleveland Clinic के अनुसार सीमेन का 65% से 75% हिस्सा सेमिनल वेसिकल्स से और 25% से 30% हिस्सा प्रोस्टेट से आता है, जबकि स्पर्म सिर्फ 1% से 5% होते हैं। यानी सीमेन का ज्यादातर हिस्सा फ्लूइड (fluid) होता है, स्पर्म नहीं। इसी वजह से सिर्फ देखकर स्पर्म काउंट का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
इजैक्युलेशन के बाद सीमेन आमतौर पर 15 से 30 मिनट में गाढ़े से पतला हो जाता है। इसे लिक्विफैक्शन (Liquefaction) कहते हैं।
पतला सीमेन होने की सबसे कॉमन वजह कम समय में बार-बार इजैक्युलेशन होना है। लेकिन कुछ केसेस में इसका कारण कम स्पर्म काउंट, इंफेक्शन, हॉर्मोन में बदलाव या लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर सीमेन एनालिसिस की सलाह दे सकते हैं।
कम समय में बार-बार इजेक्युलेशन होने से सीमेन की मात्रा कम हो जाती है और यह पतला दिख सकता है। 13 स्टडीज और 2,315 पुरुषों के एक रिव्यू में, दो दिन से कम के गैप पर सीमेन की मात्रा और हर मिलीलीटर में स्पर्म कम मिले। लेकिन आगे की ओर तैरने वाले स्पर्म का प्रतिशत बेहतर था। यानी इस वजह से सीमेन का पतला दिखना आमतौर पर चिंता की बात नहीं है।
स्पर्म काउंट कम हो, तो सीमेन पतला दिख सकता है। लेकिन उल्टा भी सच है, स्पर्म काउंट कम होने पर भी सीमेन देखने में नॉर्मल लग सकता है। Cleveland Clinic के अनुसार कम स्पर्म काउंट के ज्यादातर मामलों में कोई साफ लक्षण नहीं दिखता। इसलिए यह अंतर जांच से ही पता चलता है।
यूरिन इन्फेक्शन या STI और हार्मोन का असंतुलन स्पर्म काउंट को कम कर सकते हैं। कुछ पुरुषों में सीमेन बाहर आने के बजाय ब्लैडर में चला जाता है, जिसे रेट्रोग्रेड इजैक्युलेशन (Retrograde Ejaculation) कहते हैं। इसमें सीमेन बहुत कम या बिल्कुल नहीं निकलता है और बाद में पेशाब धुंधला दिख सकता है। डायबिटीज, कुछ दवाएं और प्रोस्टेट की सर्जरी इसकी वजहें हो सकती हैं।
स्मोकिंग, ज्यादा शराब, मोटापा, ड्रग्स और टेस्टिस को ज्यादा गर्मी मिलना स्पर्म काउंट पर असर डाल सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट भी स्पर्म बनना कम कर सकते हैं। डाइट का सीमेन के पतलेपन पर सीधा असर साबित नहीं है, लेकिन संतुलित खाना और सही वजन स्पर्म हेल्थ के लिए जरूरी है।
ज्यादातर मामलों में पतला सीमेन नॉर्मल होता है, खासकर अगर यह कभी-कभी हो या बार-बार इजैक्युलेशन के बाद दिखे। सीमेन का गाढ़ापन हर बार एक जैसा नहीं रहता। यह इस पर भी निर्भर करता है कि पिछले इजेक्युलेशन के बाद कितना समय बीता है।
लेकिन अगर सीमेन लगातार पतला रहे और साथ में ये बातें हों, तो जांच करानी चाहिए:
पतले सीमेन का प्रेग्नेंसी पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी वजह क्या है। अगर स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और स्पर्म की बनावट यानी मॉर्फोलॉजी नॉर्मल है, तो सिर्फ सीमेन के पतले दिखने से प्रेगनेंसी की संभावना पर असर नहीं पड़ता।
असली सवाल सीमेन का गाढ़ापन नहीं, बल्कि उसमें मौजूद स्पर्म हैं। WHO 2021 के अनुसार सीमेन एनालिसिस में ये वैल्यू नॉर्मल की निचली सीमा मानी जाती हैं:
जांच | नॉर्मल की निचली सीमा |
|---|---|
सीमेन की मात्रा | 1.4 मिलीलीटर |
स्पर्म काउंट | हर मिलीलीटर में 1.6 करोड़ |
आगे तैरने वाले स्पर्म (Progressive Motility) | 30% |
नॉर्मल बनावट वाले स्पर्म (Normal Forms) | 4% |
यहां यह समझना जरूरी है कि ये वैल्यू उन पुरुषों के डाटा से ली गई हैं, जिनकी पार्टनर एक साल के अंदर प्रेग्नेंट हुईं। इससे कम होने का मतलब यह नहीं कि प्रेगनेंसी नहीं हो सकती। Cleveland Clinic के अनुसार कम स्पर्म काउंट में भी नेचुरल प्रेगनेंसी संभव है।
पतले सीमेन और स्पर्म मोटिलिटी का भी सीधा संबंध नहीं है। बार-बार इजैक्युलेशन वाले रिव्यू में सीमेन की मात्रा कम थी, लेकिन प्रोग्रेसिव मोटिलिटी वाले स्पर्म का प्रतिशत बढ़िया था। यानी सीमेन का पतला होना कमजोर स्पर्म का एविडेंस नहीं है।
पतले सीमेन की डायग्नोसिस के लिए सीमेन एनालिसिस की जाती है। इसमें सीमेन की मात्रा, स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और स्पर्म मॉर्फोलॉजी देखी जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या अल्ट्रासाउंड भी करा सकते हैं।
टेस्ट से पहले दो से सात दिन तक इजैक्युलेशन से बचने की सलाह दी जाती है। सैंपल 30 मिनट के अंदर लैब पहुंचना चाहिए। एक रिपोर्ट से पूरी जानकारी नहीं मिलती, इसलिए डॉक्टर कुछ दिन या हफ्तों बाद दोबारा टेस्ट करा सकते हैं।
पहले यह पता किया जाता है कि वाटरी सीमेन की वजह क्या है। अगर सीमेन एनालिसिस नॉर्मल है, तो किसी इलाज की जरूरत नहीं होती। अगर कोई समस्या मिलती है, तो डॉक्टर उसी के हिसाब से इलाज तय करते हैं।
अगर स्पर्म काउंट कम ही रहे, तो IUI, IVF या ICSI से प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ाई जा सकती है। बाजार में मिलने वाली "सीमेन गाढ़ा करने" की दवाएं या सप्लीमेंट खुद से न लें।
स्पर्म क्वालिटी को अच्छा रखने के लिए सबसे जरुरी है हेल्दी लाइफस्टाइल। स्मोकिंग और शराब से दूरी, सही वजन और टेस्टिस को ज्यादा गर्मी से बचाना, ये सबसे असरदार कदम हैं।
प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहे हैं, तो सीमेन गाढ़ा करने के लिए लंबा गैप रखने की जरूरत नहीं है। रिसर्च में कम गैप पर स्पर्म क्वालिटी ज्यादा अच्छी पाई गई है।
पतला सीमेन अपने आप में बीमारी नहीं है। ज्यादातर मामलों में यह बार-बार इजैक्युलेशन या नॉर्मल बदलाव की वजह से होता है। फर्टिलिटी के लिए सीमेन का दिखना नहीं, बल्कि उसमें मौजूद स्पर्म मायने रखते हैं।
अगर आप प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहे हैं और चिंता है, तो अंदाजा लगाने के बजाय सीमेन एनालिसिस कराएं और रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर से बात करें।