सारांश (Overview)
Yellow Discharge यानी पीला डिस्चार्ज हमेशा इन्फेक्शन का साइन नहीं होता। नॉर्मल डिस्चार्ज भी कपड़े पर सूखकर पीला दिख सकता है, और पीरियड से पहले हार्मोन की वजह से गाढ़ा होकर पीलापन ले सकता है। लेकिन साथ में बदबू, खुजली या जलन भी हो, तो यह इन्फेक्शन हो सकता है।
आगे जानिए Yellow Discharge कब नॉर्मल है, कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए और इसका इलाज कैसे होता है।
पीरियड्स से पहले Yellow यानी पीला डिस्चार्ज ज्यादातर नॉर्मल होता है। इस समय डिस्चार्ज गाढ़ा हो जाता है और सूखने पर पीला दिखता है। लेकिन अगर पीलापन गहरा हो और साथ में बदबू या खुजली हो, तो इसकी वजह इन्फेक्शन हो सकती है।
पीला डिस्चार्ज दो तरह का होता है:
यह वेजाइना (vagiina) से निकलने वाला ऐसा डिस्चार्ज है, जो हल्का या गहरा पीला दिखता है। डिस्चार्ज, वेजाइना को साफ और नम रखने का शरीर का अपना तरीका है। इसका रंग, गाढ़ापन और मात्रा पूरे महीने बदलती रहती है।
Nemours KidsHealth के अनुसार नॉर्मल डिस्चार्ज साफ या सफेद होता है, लेकिन अंडरवियर पर सूखने के बाद पीला दिख सकता है। इसलिए कपड़े पर हल्का पीला निशान अपने आप में इन्फेक्शन का साइन नहीं होता।
ओव्यूलेशन के बाद शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ता है। इससे डिस्चार्ज गाढ़ा और कम हो जाता है, और सूखने पर पीला दिखता है। पीरियड शुरू होने से ठीक पहले इसमें थोड़ा खून मिल जाए, तो रंग पीला-भूरा यानी पीलापन लिए ब्राउन (yellowish brown) भी हो सकता है।
Cleveland Clinic के अनुसार ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन बढ़ने से सर्वाइकल म्यूकस सूखने लगता है।
नॉर्मल और इन्फेक्शन वाले पीलेपन का अंतर समय से समझा जा सकता है। मेंस्ट्रुअल साइकिल की वजह से होने वाला पीलापन हर महीने लगभग उन्हीं दिनों में होता है और पीरियड के साथ खत्म हो जाता है। इंफेक्शन वाला पीलापन बना रहता है।
प्रेगनेंसी में डिस्चार्ज बढ़ना नॉर्मल है, लेकिन यह आमतौर पर पतला, साफ या दूधिया सफेद होता है। NHS के अनुसार प्रेगनेंसी में डिस्चार्ज पीला या हरा हो, बदबू आए या खुजली हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इसकी वजह यह है कि कुछ इन्फेक्शन की वजह से प्रेगनेंसी पर असर पड़ सकता है। CDC के अनुसार लक्षण वाले बैक्टीरियल वेजिनोसिस का संबंध प्रीटर्म डिलीवरी से पाया गया है।
कोई भी दवाई खुद से न लें। CDC के अनुसार प्रेगनेंसी में यीस्ट इन्फेक्शन के लिए फ्लूकोनाजोल 150 mg की गोली नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इसका संबंध मिसकैरेज और जन्मजात विकृतियों से हो सकता है।
प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में पानी जैसा पतला रिसाव पानी की थैली का पानी भी हो सकता है। अगर ऐसा लगे, और खासकर पानी बदबूदार या रंगीन हो, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।
नॉर्मल पीले डिस्चार्ज के साथ कोई और लक्षण नहीं होते। इन्फेक्शन होने पर बदबू, खुजली, जलन, पेशाब में दर्द, संबंध बनाते समय दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द या पीरियड के बीच ब्लीडिंग हो सकती है।
NHS के अनुसार डिस्चार्ज के साथ दिखने वाले लक्षणों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वजह क्या हो सकती है:
लक्षण | संभावित वजह |
|---|---|
हल्का पीलापन, और कुछ नहीं | नॉर्मल बदलाव |
पीला, हरा या झागदार डिस्चार्ज | ट्राइकोमोनिएसिस |
मछली जैसी गंध | बैक्टीरियल वेजिनोसिस |
गाढ़ा, सफेद, पनीर जैसा डिस्चार्ज | यीस्ट इन्फेक्शन |
पेट के निचले हिस्से में दर्द या बीच में ब्लीडिंग | क्लैमाइडिया या गोनोरिया |
जब पीलापन हल्का हो और साथ में बदबू, खुजली, जलन या दर्द न हो, तब इसे नॉर्मल माना जाता है। ऐसा पीलापन अक्सर कपड़े पर सूखने से दिखता है, या साइकिल के कुछ दिनों में आकर अपने आप चला जाता है।
लेकिन प्रेगनेंसी में पीले डिस्चार्ज को नॉर्मल मानकर नहीं छोड़ना चाहिए।
Yellow Discharge के साथ बदबू, खुजली, जलन या दर्द हो, या डिस्चार्ज का रंग, गंध और मात्रा अचानक बदल जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। NHS भी इन बदलावों पर जांच कराने की सलाह देता है।
इसकी डायग्नोसिस डिस्चार्ज के सैंपल से की जाती है। डॉक्टर सैंपल का pH देखते हैं और माइक्रोस्कोप से जांच करते हैं। अगर ट्राइकोमोनिएसिस, क्लैमाइडिया या गोनोरिया का शक हो, तो NAAT नाम का टेस्ट किया जाता है, जो ज्यादा भरोसेमंद है।
CDC के अनुसार माइक्रोस्कोप की जांच में ट्राइकोमोनिएसिस और यीस्ट इन्फेक्शन के करीब आधे मामले पकड़ में नहीं आते। यानी पहली जांच में कुछ न मिले और लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से NAAT टेस्ट के बारे में पूछें।
जांच से पहले खुद से कोई क्रीम या दवा शुरू न करें, इससे रिपोर्ट पर असर पड़ सकता है।
नॉर्मल पीलेपन में किसी दवा की जरूरत नहीं होती। इन्फेक्शन में डॉक्टर एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवा देते हैं। ये दवाएं जांच के बाद और डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
लक्षण ठीक होते ही दवा बंद न करें, पूरा कोर्स लें।
बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि वेजाइना के नेचुरल बैलेंस को न बिगाड़ें और यौन संक्रमण यानी STI सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (Sexually Transmitted Infection) से बचें।
येलो डिस्चार्ज होना प्रेगनेंसी कन्फर्म होने का साइन नहीं है। पीरियड से पहले और शुरुआती प्रेगनेंसी, दोनों में प्रोजेस्टेरोन की वजह से डिस्चार्ज का कलर बदलता है, इसलिए सिर्फ डिस्चार्ज के रंग से यह पता नहीं लगाया जा सकता कि प्रेगनेंसी हुई है या नहीं। पीरियड मिस होने के पहले दिन से प्रेगनेंसी टेस्ट किया जा सकता है।
सिर्फ येलो डिस्चार्ज होने से फर्टिलिटी पर असर नहीं पड़ता। लेकिन अगर इसकी वजह क्लैमाइडिया या गोनोरिया जैसी STI है और उसका इलाज न किया जाए, तो इससे PID हो सकता है। PID फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा सकता है और आगे चलकर फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचा सकता है।
CDC के अनुसार जिन महिलाओं को कभी PID हुआ है, उनमें से हर 8 में से 1 को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आती है। इसलिए प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो पहले इसका पूरा इलाज करा लें।
ज्यादातर केसेस में हल्का येलो डिस्चार्ज शरीर के नॉर्मल बदलाव का हिस्सा होता है। लेकिन बदबू, खुजली, जलन या दर्द साथ हो, या पीलापन लगातार बना रहे, तो जांच जरूरी है।
अगर आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं, तो इस लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से खुलकर बात करें।