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September
2020

पीसीओएस के प्रकार और इनमें से किससे प्रभावित हैं आप ?

पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), महिलाओं के प्रजनन काल में एक काॅमन विकार या हार्मोनल विकार कहा जा सकता है। पीसीओएस की स्थिति में अधिकांश महिलाओं के अंडाशय में थैलियों से भरे कई छोटे सिस्ट विकसित हो जाते हैं। पीसीओएस में महिलाएं अपनी माहवारी (या तो अनियमित या लंबे समय तक) में असामान्यता, एंड्रोजन के स्तर में वृद्धि, मुँहासे और अनचाहे बालों की अधिक वृद्धि का अनुभव कर सकती हैं। पीसीओएस महिला निःसंतानता का एक मुख्य कारण है क्योंकि यह ओव्युलेशन को रोकता है। पीसीओएस बीमारी में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में समय से पहले प्रसव, गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटिज), उच्च रक्तचाप और गर्भपात की संभावना अधिक होती है। यदि प्रारंभिक चरण में डायग्नोस और इसका निदान किया जाए तो दीर्घकालिक समस्या जैसे हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह को रोका जा सकता है।

पीसीओएस से प्रभावित आधी महिलाओं में 40 की आयु से पहले टाइप 2 डायबिटिज की दीर्घकालिक जटिलताओं का विकास हो सकता है।

इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की चीफ आईवीएफ और इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. प्रियंका ने बताया कि पीसीओएस के कारण 10 में से 1 महिला संतान पैदा करने की उम्र में निःसंतानता की समस्या से प्रभावित हो सकती है।

पीसीओएस के लक्षण

आमतौर पर पीसीओएस के लक्षण महिला की पहली माहवारी के दौरान विकसित होते हैं और यदि यह बाद में विकसित होते है, तो निम्नलिखित लक्षणों से समझें कि डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए।

1. पीरियड्स में अनियमितता

अनियमित, लंबे समय तक या असामान्य मासिक धर्म चक्र पीसीओएस के सबसे आम लक्षणों में से एक है। यदि एक वर्ष में 9 से कम पीरियड, सामान्य से अधिक रक्तस्त्राव या 35 दिनों से अधिक की साइकिल है तो यह एक डॉक्टर से कन्सल्ट करने का समय है।

2. पॉलीसिस्टिक ओवरी

इस स्थिति में अंडाशय बड़े हो सकते हैं और परिणामस्वरूप अंडाशय उचित रूप से कार्य करने में विफल हो जाते हैं।

3. एंड्रोजन में वृद्धि

एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) के स्तर में वृद्धि के कारण शरीर और चेहरे पर अनचाहे बाल और गंभीर मुँहासे हो सकते हैं।

अन्य लक्षण- तनाव का उच्च स्तर, उच्च रक्तचाप, नींद की बीमारी, निःसंतानता, त्वचा की एलर्जी, मुँहासे, रूसी, पेल्विक दर्द, डिप्रेशन और कम कामेच्छा है।

पीसीओएस के कारण

पीसीओएस के उपयुक्त कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन कारणों को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स निम्न हो सकते हैं –

1. आनुवांशिक

कुछ शोधों के अनुसार पीसीओएस का एक कारण आनुवंशिकता हो सकता है क्योंकि कुछ जीन हैं जो पीसीओएस से लिंक हो सकते हैं।

2. अतिरिक्त इन्सुलिन

इंसुलिन एक हार्मोन है जो पेनक्रियाज द्वारा निर्मित होता है। यह शरीर का प्राथमिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। जब शरीर इंसुलिन के कार्यों के लिए प्रतिरोधी हो जाता है, तो ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है इसके कारण शरीर द्वारा अधिक इंसुलिन का उत्पादन हो सकता है। अतिरिक्त इंसुलिन एंड्रोजन के उत्पादन को बढ़ा सकता है जो ओव्युलेशन में कठिनाइयों का कारण बन सकता है।

जोखिम

जिन महिलाओं की माँ या बहन में पीसीओएस की समस्या है उनमें पीसीओएस होने का खतरा अन्य की तुलना में अधिक होता है। पीसीओएस से संबंधित अन्य स्वास्थ्य जोखिम और जटिलताएं – गर्भपात या समय से पहले प्रसव, निःसंतानता, एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय की लाईनिंग में कैंसर), टाइप 2 डायबिटिज़, डिप्रेशन, भोजन संबंधी विकार, चिंता, गर्भाशय से असामान्य रक्तस्त्राव, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में असामान्यताएं (इससे हृदय रोगों के जोखिम बढ़ जाते हैं), हाई ब्लड शुगर, स्टीटोहेपेटाइटिस और हार्ट अटैक हैं।

पीसीओएस या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिन्ड्रोम के प्रकार

1. इंसुलिन प्रतिरोधी (रेसिस्टेंट) पीसीओएस

यह पीसीओएस का सबसे आम प्रकार है। इस प्रकार का पीसीओएस धूम्रपान, चीनी, प्रदूषण और ट्रांसफेट के कारण होता है। इसमें उच्च स्तर का इंसुलिन ओव्यूलेशन को रोकता है और अंडाशय को टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए ट्रिगर करता है।
यदि आपको डॉक्टर ने डायबिटिक या बोर्डरलाइन बताया है, ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट सामान्य नहीं है, इंसुलिन के स्तर में वृद्धि हुई है और वजन भी अधिक है तो आपको इंसुलिन प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) पीसीओडी हो सकता है।

उपाय- शक्क्र छोड़ो ! शक्कर से दूरी बनाना आपका पहला कदम होना चाहिए। थोड़ी मात्रा में चीनी लाभदायक है लेकिन इसे अधिक मात्रा में लेकर आप इंसुलिन प्रतिरोध में योगदान कर रहे हैं। इंसुलिन रेजिस्टेन्स पीसीओएस को रोकने के लिए आप इनोसिटॉल ले सकते हैं और व्यायाम कर सकते हैं। इस प्रकार के पीसीओएस में सुधार के लिए लगभग छह से नौ महीने की अवधि की आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक धीमी प्रक्रिया है।

2. इनफ्लैमेटरी पीसीओएस

पीसीओएस में सूजन के कारण ओव्यूलेशन रूक जाता है, हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और एण्ड्रोजन का उत्पादन होता है। इनफ्लैमेशन तनाव, पर्यावरण के विषाक्त पदार्थों और ग्लूटन आहार के कारण होता है।
यदि आपको सिरदर्द, संक्रमण या त्वचा की एलर्जी जैसे लक्षण हैं और रक्त परीक्षण में विटामिन-डी की कमी सामने आयी है, ब्लड काउण्ट सामान्य नहीं हैं , थायराइड का स्तर बढ़ गया है तो आपको इनफ्लैमेटरी पीसीओएस हो सकता है।

उपाय- तनाव ना लें ! डेयरी उत्पादों, चीनी या गेहूं जैसे इनफ्लैमेटरी खाद्य पदार्थों का सेवन बंद करें। मैग्नीशियम वाले पदार्थों का सेवन करें इसमें एंटी इनफ्लैमेटरी प्रभाव है। सुधार में करीब नौ महीने लग सकते हैं क्योंकि यह धीमी प्रक्रिया है।

3. हिडन पीसीओएस

यह पीसीओएस का एक सरल रूप है लेकिन एक बार कारण सामने आने पर ठीक होने में तीन-चार महीने लग जाते हैं।

हिडन पीसीओएस के कारण- थायराइड रोग, आयोडीन की कमी (अंडाशय को आयोडीन की आवश्यकता होती है), शाकाहारी भोजन ( अंडाशय को जस्ते की आवश्यकता होती है लेकिन इससे कमी हो जाती है) और कृत्रिम मिठास उत्पाद।

यदि आप पहले से ही पीसीओएस के लिए प्राकृतिक उपचार ले रहे हैं और कुछ लाभ नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से परामर्श करें ।

पीसीओएस का इलाज

पीसीओएस के लिए कोई उपयुक्त इलाज नहीं है लेकिन ऐसे कारकों का उपचार है जो पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षणों को दर्शाते हैं। उपचार विकल्प जिनमें शामिल हैं –

1. मधुमेह की दवाएँ

मधुमेह (डायबिटिज) के लिए दी जाने वाली दवाएँ इसे रोकने में मदद करेंगी । चीनी का स्तर बढ़ जाने से पीसीओएस हो सकता है।

2. फर्टिलिटी दवाएं

निःसंतानता के उपचार में कुछ दवाओं की आवश्यकता होती है जिसमें क्लोमिड और इंजेक्शन दवाओं जैसे एफएसएच (फोलिकल स्टीमुलेटिंग हार्मोन) और एलएच (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) का उपयोग शामिल है। कुछ मामलों मे डॉक्टर्स द्वारा लेट्रोजोल की सलाह दी जाती है।

3. निःसंतानता का उपचार

आईयूआई (इंट्रायूटेराइन इंसिमिनेशन) या आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाईजेशन) जैसे इलाज।

पीसीओएस के लिए सर्जिकल उपचार

लेजर द्वारा लेप्रोस्कोपिक ओवेरियन ड्रिलिंग

इसमें कॉट्री की मदद से ओवरी में ड्रिल किया जाता है जो अत्यधिक एण्ड्रोजन को नियन्त्रित करता है एवं ओव्युलेशन को बढ़ाता है। यह प्रक्रिया पीसीओएस वाली महिलाओं के लिए लाभदायक है।

यह सब पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के प्रकार हैं। अपने पीसीओएस प्रकार के बारे में डॉक्टर से परामर्श करें, इसका उपचार संभव है। पीसीओएस से प्रभावित महिलाएं भी माँ बन सकती हैं।

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