IVF और ICSI में क्या अंतर है? (Difference between IVF and ICSI in hindi)

Last updated: May 14, 2026

साराँश (Overview)

जब डॉक्टर IVF की बात करते हैं तो अक्सर ICSI का नाम भी साथ में आता है। बहुत से कपल्स सोचते हैं कि ये दो अलग-अलग ट्रीटमेंट हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। ICSI दरअसल IVF का ही एक हिस्सा है, बस इसमें एग और स्पर्म को मिलाने का तरीका अलग होता है। Difference between ivf and icsi in hindi आर्टिकल में आइए समझते हैं कि ये दोनों काम कैसे करते हैं और किसके लिए कौन सा तरीका बेहतर है।

IVF और ICSI में बेसिक अंतर क्या है?

IVF और ICSI दोनों में ज़्यादातर स्टेप्स एक जैसे ही होते हैं। दोनों में पहले दवाइयों से ओवरी को स्टिमुलेट किया जाता है, फिर एग निकाले जाते हैं और बाद में एम्ब्रीओ को यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है।

असली अंतर सिर्फ एग और स्पर्म को मिलाने के तरीके में होता है ।

IVF में एग के साथ बहुत सारे स्पर्म एक साथ रख दिए जाते हैं। फिर इनमें से कोई एक स्पर्म खुद एग के अंदर चला जाता है, जैसे शरीर में नैचुरल तरीके से होता है।

ICSI में डॉक्टर एक-एक करके सबसे अच्छा स्पर्म चुनते हैं और उसे सीधे एग के अंदर डालते हैं। ICSI में स्पर्म को खुद अंदर जाने की ज़रूरत नहीं होती।

इसे भी पढ़ें: आईवीएफ (IVF) क्या है और यह कैसे काम करता है?

IVF में एग और स्पर्म कैसे मिलते हैं?

नॉर्मल IVF में एग और स्पर्म को शरीर के बाहर, लैब में मिलाया जाता है। एग निकालने के बाद उन्हें एक खास डिश में रखा जाता है, जिसे पेट्री डिश कहते हैं। उसी डिश में तैयार किए हुए लगभग 50,000 से 1,00,000 स्पर्म भी डाल दिए जाते हैं।

अब यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझिए, IVF में डॉक्टर स्पर्म को एग के अंदर नहीं डालते। स्पर्म को खुद एग तक पहुँचना होता है। जो स्पर्म सबसे स्ट्रॉन्ग और तेज़ होता है, वही एग की बाहरी परत को पार करके अंदर जाता है और फर्टिलाइजेशन होता है।

यह प्रक्रिया शरीर में होने वाले नैचुरल फर्टिलाइजेशन जैसी ही होती है, बस फर्क इतना है कि यह लैब में हो रही होती है।

यह तरीका तब अच्छा काम करता है जब स्पर्म की संख्या और उसकी मूवमेंट यानी स्पर्म क्वांटिटी और मोटिलिटी (motility) दोनों ठीक हों। इसलिए अगर सीमेन एनालिसिस नॉर्मल आता है, तो डॉक्टर पहले यही तरीका चुनते हैं।

एग और स्पर्म को साथ रखने के लगभग 16 से 18 घंटे बाद लैब में देखा जाता है कि कितने एग्स में फर्टिलाइजेशन हुआ। आम तौर पर 60 से 70% एग्स में यह सक्सेसफुल होता है।

अगर किसी साइकल में एक भी एग में फर्टिलाइजेशन नहीं होता, तो इसे टोटल फर्टिलाइजेशन फेलियर (Total Fertilization Failure) कहा जाता है। ऐसी सिचुएशन में अगली बार ICSI की सलाह दी जाती है।

ICSI में IVF से अलग क्या होता है?

ICSI यानी इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन (intracytoplasmic sperm injection) में फर्टिलाइजेशन का तरीका बदल जाता है। यहाँ स्पर्म को एग के साथ छोड़कर इंतज़ार नहीं किया जाता, बल्कि माइक्रोस्कोप के नीचे एक बहुत बारीक सुई से एक चुना हुआ स्पर्म सीधे एग के अंदर डाला जाता है। यह पूरा काम एम्ब्रियोलॉजिस्ट (embryologist) करता है।

ICSI तब ज़रूरी होता है जब स्पर्म की संख्या बहुत कम हो, उनकी मूवमेंट कम हो या उनकी शेप नॉर्मल न हो। ऐसे मामलों में स्पर्म अपने आप एग के अंदर नहीं जा पाते, इसलिए ICSI से यह स्टेप पूरा किया जाता है।

कुछ पुरुषों में सीमेन में स्पर्म मिलते ही नहीं हैं और उन्हें सर्जरी से निकालना पड़ता है। ऐसे केस में ICSI ही एकमात्र तरीका होता है जिससे फर्टिलाइजेशन कराया जा सके। कभी-कभी एग की बाहरी परत मोटी होती है, जिससे स्पर्म अंदर नहीं जा पाता। ऐसे में भी ICSI मदद करता है, क्योंकि स्पर्म को सीधे एग के अंदर डाला जाता है।

आम तौर पर ICSI में फर्टिलाइजेशन रेट 70 से 80 प्रतिशत तक देखा जाता है, लेकिन असली सफलता आगे एम्ब्रीओ की क्वालिटी और यूट्रस की स्थिति पर निर्भर करती है।

किसके लिए कौन सा तरीका सही है?

यह फ़ैसला डॉक्टर स्पर्म की रिपोर्ट और पिछले ट्रीटमेंट के एक्सपीरियंस के आधार पर तय करते हैं।

नॉर्मल IVF तब सजेस्ट किया जाता है जब:

ICSI तब जरूरी होता है जब:

  • स्पर्म काउंट 10 लाख प्रति मिलीलीटर से कम हो
  • मोटिलिटी 30% से कम हो
  • सर्जरी से स्पर्म निकाले गए हों
  • पहले IVF में फर्टिलाइजेशन कम हुआ हो या बिल्कुल न हुआ हो
  • फ्रोज़न एग्स या स्पर्म इस्तेमाल हो रहे हों

कई क्लीनिक में अब ज़्यादातर केसों में ICSI ही किया जाता है, भले ही स्पर्म की रिपोर्ट ठीक हो। इसके पीछे सोच यह है कि ICSI से फर्टिलाइजेशन फेल होने का रिस्क कम हो जाता है।

IVF और ICSI की success rate में अंतर

पेशेंट्स को अक्सर एक ग़लतफ़हमी होती है कि ICSI से सक्सेस रेट बढ़ जाता है लेकिन सच्चाई दरअसल यह है कि ICSI से फर्टिलाइजेशन रेट बढ़ जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेगनेंसी रेट भी ऑटोमेटिक ज़्यादा हो जाएगा।

फर्टिलाइजेशन के बाद एम्ब्रीओ की ग्रोथ, उसकी क्वालिटी, और यूट्रस में जुड़ना, ये सब दोनों तरीकों में एक जैसा ही होता है।

जिन केसों में स्पर्म की दिक्कत होती है, वहाँ ICSI से रिजल्ट बेहतर आते हैं। लेकिन जहाँ स्पर्म ठीक हैं, वहाँ दोनों तरीकों का सक्सेस रेट लगभग बराबर रहता है।

सबसे बड़ा डिसाइडिंग फैक्टर महिला की उम्र और एग की क्वालिटी है, न कि IVF या ICSI यानी फर्टिलाइजेशन का तरीका।

IVF और ICSI के खर्चे में कितना अंतर आता है?

ICSI नॉर्मल IVF से 20 से 30% ज़्यादा महंगा होता है। इसकी वजह यह है कि ICSI में स्पेशल इक्विपमेंट और अनुभवी एम्ब्रियोलॉजिस्ट की ज़रूरत होती है।

भारत में IVF का औसत खर्च 1.5 से 2.5 लाख रुपये पर साइकल आता है, जबकि ICSI को जोड़ देने पर यह 2 से 3.5 लाख हो सकता है। इसमें दवाइयाँ, टेस्ट्स, और दूसरे प्रोसीजर्स अलग से जुड़ सकते हैं।

अपने डॉक्टर से पहले ही पूरे खर्चे का अंदाज़ा ले लें ताकि बाद में कोई सरप्राइज़ न हो। कई बार ICSI ज़रूरी नहीं होता लेकिन फिर भी सजेस्ट किया जाता है, ऐसे में स्पर्म की रिपोर्ट दिखाकर खुलकर पूछें कि क्या सच में इसकी ज़रूरत है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Difference between ivf and icsi in hindi को सीधे शब्दों में समझें तो फ़र्क सिर्फ इतना है कि नॉर्मल IVF में स्पर्म खुद एग में जाता है, और ICSI में एक स्पर्म को चुनकर एग के अंदर डाला जाता है। अगर स्पर्म की रिपोर्ट ठीक है तो नॉर्मल IVF काफ़ी है, और अगर स्पर्म में कोई दिक्कत है तो ICSI ज़रूरी हो जाता है। अपने डॉक्टर से रिपोर्ट्स दिखाकर बात करें और मिलकर डिसाइड करें कि आपके लिए कौन सा तरीका सही रहेगा।

IVF and ICSI के अंतर पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

IVF और ICSI में सबसे बड़ा फ़र्क क्या है?

क्या ICSI में IVF से ज़्यादा दर्द होता है?

क्या हर IVF में ICSI ज़रूरी होता है?

ICSI से पैदा हुआ बच्चा नॉर्मल होता है?

ICSI का खर्चा कितना ज़्यादा होता है?

पहले IVF में फर्टिलाइजेशन नहीं हुआ तो क्या दूसरी बार ICSI काम करेगा?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer