पीरियड्स जल्दी कैसे लाएं? देरी के कारण और सुरक्षित तरीके (Periods Jaldi Kaise Laye)

Last updated: January 16, 2026

Overview

अक्सर महिलाएं अपने पीरियड्स (Periods) की तारीख को लेकर काफी तनाव में रहती हैं, खासकर तब जब वे किसी खास इवेंट, शादी या फिर अपनी प्रेग्नेंसी (Pregnancy) प्लान कर रही हों। जब पीरियड्स समय पर नहीं आते, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि periods jaldi kaise laye? लेकिन क्या आप जानती हैं कि पीरियड्स का मिस होना या देरी से आना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल (Hormonal) बदलावों का एक संकेत है। अगर आप मां बनने की कोशिश कर रही हैं या आईवीएफ (IVF) जैसे ट्रीटमेंट (Treatment) की शुरुआत करने वाली हैं, तो पीरियड्स का सही समय पर आना और भी जरूरी हो जाता है। इस आर्टिकल (Article) में हम बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे कि आखिर पीरियड्स में देरी क्यों होती है, इन्हें जल्दी लाने के सुरक्षित उपाय क्या हैं और डॉक्टर की सलाह कब लेना जरूरी है। हम केवल घरेलू नुस्खों की बात नहीं करेंगे, बल्कि इसके पीछे की मेडिकल (Medical) वजहों और साइंस (Science) को भी गहराई से समझेंगे।

पीरियड्स साइकिल (Cycle) को समझना क्यों जरूरी है?

हर महिला का शरीर अलग होता है और उसका मेंस्ट्रुअल साइकिल भी अलग हो सकती है। आमतौर पर एक हेल्दी (Healthy) साइकिल 21 से 35 दिनों की होती है। अगर आपके पीरियड्स इस समय सीमा के अंदर आ रहे हैं, तो आपकी साइकिल हेल्दी है। लेकिन जब यह साइकिल 35 दिनों से ऊपर निकल जाती है, तो इसे देरी माना जाता है।

अक्सर महिलाएं इंटरनेट पर सर्च करती हैं कि periods jaldi kaise laye, लेकिन उपाय आजमाने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपके शरीर के अंदर क्या चल रहा है। पीरियड्स तब शुरू होते हैं जब गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम (Endometrium) टूटकर शरीर से बाहर निकलती है। यह पूरी प्रक्रिया प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) और एस्ट्रोजन (Estrogen) नाम के हार्मोन्स द्वारा कंट्रोल (Control) की जाती है। अगर इन हार्मोन्स का तालमेल बिगड़ जाए, तो पीरियड्स लेट हो जाते हैं।

पीरियड्स में देरी के पीछे के असल कारण

पीरियड्स जल्दी लाने के तरीके खोजने से पहले हमें यह समझना होगा कि पीरियड्स देर से क्यों आ रहे हैं। इसके कुछ मुख्य कारण यहाँ दिए गए हैं।

  • स्ट्रेस (Stress): जब आप बहुत ज्यादा मानसिक तनाव में होती हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन बढ़ जाता है। यह हार्मोन आपके दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो पीरियड्स को रेगुलेट (Regulate) करता है।
  • पीसीओएस (PCOS - Polycystic Ovary Syndrome): आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह समस्या बहुत आम हो गई है। इसमें ओवरी (Ovary) में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं, जिससे ओव्यूलेशन (Ovulation) समय पर नहीं होता।
  • वजन का अचानक बढ़ना या कम होना: अगर आपका वजन बहुत तेजी से बढ़ा है या घटा है, तो शरीर में फैट सेल्स (Fat Cells) का बैलेंस बिगड़ जाता है, जो सीधे पीरियड्स को प्रभावित करता है।
  • थायराइड (Thyroid): थायराइड ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन्स अगर कम या ज्यादा हो जाएं, तो पीरियड्स अनियमित (Irregular) हो जाते हैं।

पीरियड्स जल्दी लाने के नेचुरल तरीके

अगर आप सोच रही हैं कि बिना किसी दवा के periods jaldi kaise laye, तो अपनी डेली रूटीन में कुछ बदलाव करना सबसे असरदार हो सकता है।

  • हल्की एक्सरसाइज (Exercise): शरीर को एक्टिव रखने से ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) बढ़ता है, जिससे खासकर पेल्विक (Pelvic) एरिया की एक्सरसाइज करने से गर्भाशय की मांसपेशियों को उत्तेजना मिलती है।
  • गर्म सिकाई: पेट के निचले हिस्से पर हॉट वॉटर बैग (Hot Water Bag) से सिकाई करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड फ्लो (Blood Flow) बेहतर होता है। यह एक बहुत ही पुराना और असरदार तरीका है।
  • भरपूर नींद: शरीर को रिकवर (Recover) करने के लिए 7-8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है। नींद पूरी न होने से हार्मोनल इंबैलेंस (Hormonal Imbalance) बढ़ जाता है।

क्या खाने से पीरियड्स जल्दी आते हैं?

खान-पान का हमारे शरीर पर सबसे बड़ा असर पड़ता है। कुछ ऐसी चीजें हैं जो शरीर में गर्मी पैदा करती हैं और पीरियड्स को लाने में मदद कर सकती हैं। 

  • कच्चा पपीता: पपीते में पैपेन (Papain) नाम का एक एंजाइम (Enzyme) होता है जो गर्भाशय में संकुचन पैदा करता है, जिससे पीरियड्स जल्दी आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • अदरक की चाय: अदरक शरीर के मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को तेज करता है। दिन में दो बार अदरक का पानी या चाय पीना फायदेमंद हो सकता है।
  • गुड़ और अजवाइन: गुड़ की तासीर गर्म होती है। अगर इसे अजवाइन के साथ उबालकर पिया जाए, तो यह रुके हुए पीरियड्स को लाने में बहुत मदद करता है।
  • विटामिन C (Vitamin C): संतरा, नींबू और कीवी जैसे फलों का सेवन करने से शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ता है, जो पीरियड्स को जल्दी ट्रिगर (Trigger) कर सकता है।
  • तिल के बीज: तिल में लिगनेन्स होते हैं जो हॉर्मोन लेवल को बैलेंस करते हैं। तिल के बीज या तिल का तेल पीरियड्स रेगुलराइज़ करने में मदद कर सकता है।

आईवीएफ (IVF) और फर्टिलिटी के लिए समय पर पीरियड्स का महत्व

अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं या फर्टिलिटी क्लिनिक (Fertility Clinic) जा रही हैं, तो पीरियड्स का समय पर आना बहुत ही क्रिटिकल होता है। आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) जैसे इलाज की शुरुआत पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन से ही होती है।

  • साइकिल प्लानिंग (Cycle Planning): डॉक्टर आपकी दवाओं का डोज (Dose) पीरियड्स की तारीख के हिसाब से तय करते हैं। अगर पीरियड्स लेट हो जाएं, तो पूरा ट्रीटमेंट शेड्यूल (Schedule) बदल जाता है।
  • एग्स की क्वालिटी: समय पर पीरियड्स आने का मतलब है कि आपके शरीर में ओव्यूलेशन सही हो रहा है, जिससे अच्छी क्वालिटी के एग्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • गर्भाशय की तैयारी: आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर (Embryo Transfer) के लिए गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम का सही मोटाई में होना जरूरी है, जो केवल एक नियमित साइकिल में ही संभव है।

हार्मोनल इंबैलेंस (Hormonal Imbalance) को कैसे पहचानें?

सिर्फ यह जानना काफी नहीं है कि periods jaldi kaise laye, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि क्या आपके शरीर में कोई बड़ी समस्या तो नहीं है। हार्मोनल इंबैलेंस के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं। 

  • अचानक से चेहरे पर मुंहासे (Acne) आना।
  • बालों का बहुत ज्यादा झड़ना।
  • बिना किसी कारण के थकान महसूस होना।
  • मूड स्विंग्स (Mood Swings) और चिड़चिड़ापन।

अगर आपको ये लक्षण दिख रहे हैं, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। डॉक्टर की सलाह लें ताकि सही समय पर इलाज शुरू हो सके। क्लिनिक में डॉक्टर आपका ब्लड टेस्ट (Blood Test) और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) करके असल वजह का पता लगा सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह कब लेना जरूरी है?

हर बार पीरियड्स लेट होने पर घबराना जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहाँ डॉक्टर से मिलना ही सबसे सही विकल्प है।

  • अगर आपके पीरियड्स लगातार 3 महीने से मिस हो रहे हैं।
  • अगर आपको पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होता है।
  • अगर आप कंसीव (Conceive) करने की कोशिश कर रही हैं और साइकिल बिगड़ गई है।
  • अगर पीरियड्स के बीच में स्पॉटिंग (Spotting) या ब्लीडिंग होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

पीरियड्स का समय पर आना आपके ओवरऑल (Overall) स्वास्थ्य का आईना है। "periods jaldi kaise laye" यह सवाल केवल एक तारीख तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह आपके शरीर के हार्मोनल बैलेंस को समझने का एक मौका है। सही खान-पान, एक्सरसाइज और कम तनाव के जरिए आप अपनी साइकिल को पटरी पर ला सकती हैं। लेकिन याद रखें, हर शरीर की अपनी एक लय होती है। अगर घरेलू उपाय काम नहीं कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर को प्रोफेशनल मेडिकल केयर (Professional Medical Care) की जरूरत है। फर्टिलिटी की राह में छोटी-छोटी परेशानियां भी बड़ी रुकावट बन सकती हैं, इसलिए सही समय पर सही सलाह लेना ही समझदारी है। आईवीएफ (IVF) और अन्य मॉडर्न (Modern) तकनीकों ने अब मां बनने के सपने को बहुत आसान बना दिया है, बशर्ते आप अपने शरीर के संकेतों को समझें और सही कदम उठाएं।

Common Questions Asked

क्या पपीता खाने से वाकई पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं?

 

हाँ, कच्चे पपीते में ऐसे तत्व होते हैं जो गर्भाशय के संकुचन (Contraction) को बढ़ाते हैं, जिससे रुकी हुई ब्लीडिंग शुरू होने में मदद मिल सकती है।

पीरियड्स लेट होने पर क्या मुझे प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए?

 

अगर आप सेक्सुअली एक्टिव (Sexually Active) हैं और पीरियड्स एक हफ्ते से ज्यादा लेट हैं, तो सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करना ही सबसे जौरी है।

क्या ज्यादा एक्सरसाइज करने से पीरियड्स रुक सकते हैं?

 

हाँ, बहुत ज्यादा इंटेंस वर्कआउट (Intense Workout) करने से शरीर पर तनाव बढ़ता है, जिससे हार्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं और पीरियड्स में देरी हो सकती है।

तनाव पीरियड्स को कैसे प्रभावित करता है?

 

तनाव के दौरान शरीर में एड्रेनालिन (Adrenaline) और कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जो उन हार्मोन्स को दबा देता है जो ओव्यूलेशन के लिए जिम्मेदार होते हैं।

क्या दालचीनी पीरियड्स लाने में मदद करती है?

 

दालचीनी शरीर में इंसुलिन (Insulin) के लेवल को कंट्रोल करती है, जो विशेष रूप से पीसीओएस (PCOS) वाली महिलाओं में पीरियड्स को नियमित करने में बहुत प्रभावी है।

क्या दवा लेकर पीरियड्स जल्दी लाना सुरक्षित है?

 

बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी हार्मोनल पिल्स (Hormonal Pills) न लें। यह आपकी फर्टिलिटी और भविष्य की साइकिल को नुकसान पहुँचा सकता है।

आईवीएफ ट्रीटमेंट में पीरियड्स का क्या रोल है?

 

आईवीएफ में इंजेक्शन और दवाओं की शुरुआत पीरियड्स के साइकिल के अनुसार ही की जाती है, इसलिए इलाज की सफलता के लिए इनका सही समय पर आना जरूरी है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Private Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer