सारांश (Overview)
सीमेन एनालिसिस की रिपोर्ट में काउंट के ठीक नीचे एक लाइन आती है, मोटिलिटी। यह बताती है कि कितने स्पर्म आगे बढ़ पा रहे हैं और इसलिए प्रेगनेंसी के लिए यह एक जरूरी पैरामीटर है।
स्पर्म काउंट सिर्फ स्पर्म की संख्या बताता है। मोटिलिटी यह बताती है कि उनमें से कितने स्पर्म सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और एग तक पहुँचने की अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं।
इस लेख में sperm motility meaning को आसान भाषा में समझेंगे कि मोटिलिटी क्या है, इसकी नॉर्मल रेंज कितनी मानी जाती है, कम मोटिलिटी क्यों होती है और इसे बेहतर करने के लिए क्या किया जा सकता है।
मोटिलिटी का सीधा मतलब है, स्पर्म का अपने दम पर हिलना और आगे बढ़ना।
स्पर्म के पीछे एक पूंछ जैसी संरचना होती है, जो उसे आगे बढ़ने में मदद करती है। यह पूंछ लगातार हिलती है और इसी वजह से स्पर्म आगे की ओर बढ़ पाता है। अगर स्पर्म की यह गति कमजोर है, तो उसके लिए आगे बढ़ना और एग तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
ध्यान रहे कि हिलना और जिंदा होना दो अलग बातें हैं। कुछ स्पर्म जिंदा होकर भी नहीं हिलते, इसलिए सीमेन एनालिसिस में मोटिलिटी के साथ स्पर्म के जिंदा होने की जांच भी अलग से की जाती है।
रिपोर्ट में मोटिलिटी को एक नंबर में नहीं, तीन हिस्सों में बांटकर देखा जाता है।
प्रकार | इसका मतलब | प्रेगनेंसी में भूमिका |
|---|---|---|
प्रोग्रेसिव (progressive) | सीधी या हल्की घुमावदार रेखा में आगे बढ़ने वाले स्पर्म | सबसे अहम, अंडे तक यही पहुँचते हैं |
नॉन प्रोग्रेसिव (non-progressive) | हिलते हैं पर एक ही जगह, आगे नहीं बढ़ते | गिनती में आते हैं, पर सफ़र पूरा नहीं कर पाते |
इमोटाइल (immotile) | बिल्कुल नहीं हिलते | अपने दम पर निषेचन में हिस्सा नहीं ले पाते |
टोटल मोटिलिटी में पहले दो जुड़ते हैं। प्रोग्रेसिव मोटिलिटी सिर्फ़ पहले वाले की होती है, इसलिए असली मायने इसी नंबर के हैं।
यही वजह है कि दो रिपोर्ट में टोटल मोटिलिटी बराबर होने के बावजूद नतीजे अलग हो सकते हैं। जिसमें प्रोग्रेसिव हिस्सा ज़्यादा है, उसकी स्थिति बेहतर मानी जाएगी।
प्रेगनेंसी के लिए सिर्फ इतना जरूरी नहीं है कि सीमेन में पर्याप्त संख्या में स्पर्म मौजूद हों। इन स्पर्म का सही दिशा में आगे बढ़ पाना भी जरूरी है।
इजैक्युलेशन के बाद स्पर्म को महिला के शरीर के अंदर एक लंबा रास्ता तय करके एग तक पहुंचना होता है। इस पूरे रास्ते में सिर्फ वही स्पर्म आगे बढ़ पाते हैं जिनमें अच्छी मोटिलिटी होती है।
यही वजह है कि स्पर्म काउंट नॉर्मल होने के बावजूद अगर मोटिलिटी कम है, तो प्रेगनेंसी होने में परेशानी आ सकती है। हालांकि, सिर्फ मोटिलिटी देखकर ही किसी पुरुष की fertility के बारे में फैसला नहीं किया जाता। काउंट, मॉर्फोलॉजी (morphology) और दूसरे फैक्टर्स भी देखे जाते हैं।
WHO की 2021 की गाइडलाइन के अनुसार, सीमेन एनालिसिस में कुल मोटिलिटी कम से कम 42% और आगे बढ़ने वाले स्पर्म की मोटिलिटी कम से कम 30% होना सामान्य निचली सीमा मानी जाती है।
पैरामीटर | न्यूनतम सामान्य सीमा |
|---|---|
टोटल मोटिलिटी | 42% |
प्रोग्रेसिव मोटिलिटी | 30% |
स्पर्म कंसंट्रेशन | 1 करोड़ 60 लाख प्रति मिलीलीटर |
कुल स्पर्म संख्या | 3 करोड़ 90 लाख प्रति सैंपल |
वाइटैलिटी यानी ज़िंदा स्पर्म | 54% |
नॉर्मल आकार वाले स्पर्म | 4% |
सीमेन की मात्रा | 1.4 मिलीलीटर |
इसका मतलब यह नहीं है कि 42% से कम मोटिलिटी होने पर प्रेगनेंसी नहीं हो सकती। ये डाटा सिर्फ यह समझने में मदद करते हैं कि रिपोर्ट में स्पर्म की गति सामान्य सीमा के मुकाबले कैसी है।
अगर रिपोर्ट में मोटिलिटी कम आती है, तो डॉक्टर इसे स्पर्म काउंट, स्पर्म की बनावट और दूसरे कारणों के साथ देखकर आगे की जांच या इलाज की सलाह दे सकते हैं।
जब टोटल मोटिलिटी 42% से या प्रोग्रेसिव मोटिलिटी 30% से नीचे रह जाए, तो उसे कम मोटिलिटी कहा जाता है। मेडिकल भाषा में इसे एस्थेनोज़ोस्पर्मिया (asthenozoospermia) कहते हैं।
कम मोटिलिटी का मतलब यह नहीं है कि स्पर्म काउंट भी कम है। स्पर्म की संख्या सामान्य हो सकती है, लेकिन उनमें से आगे बढ़ने वाले स्पर्म कम हो सकते हैं।
मोटिलिटी कितनी कम है, यह भी मायने रखता है। प्रोग्रेसिव मोटिलिटी 25 से 30% के बीच होना और 5% पर होना, दोनों की तस्वीर और दोनों के रास्ते अलग हैं। इसीलिए एक रिपोर्ट देखकर घबराने से पहले यह देखना चाहिए कि कमी कितनी है।
वजह | क्या होता है | आमतौर पर क्या किया जाता है |
|---|---|---|
टेस्टिकल्स की नसों में सूजन से तापमान बढ़ता है और मोटिलिटी कम हो सकती है। | जांच के बाद जरूरत पड़ने पर इलाज या सर्जरी की जाती है। | |
इंफेक्शन | प्रोस्टेट या नलियों की सूजन से स्पर्म को नुकसान हो सकता है | सीमेन कल्चर, फिर एंटीबायोटिक कोर्स |
ज्यादा गर्मी | गोद में लैपटॉप, गर्म पानी, टाइट कपड़े और लंबी ड्राइविंग | गर्मी के कारणों को कम करने की सलाह दी जाती है। |
हॉर्मोन की गड़बड़ी | टेस्टोस्टेरोन कम या FSH और प्रोलैक्टिन असामान्य | खून की जांच, फिर उसी के हिसाब से दवा |
डायबिटीज और मोटापा | ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया और हॉर्मोन दोनों प्रभावित होते हैं | शुगर और वजन पर कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है |
कुछ दवाएं और स्टेरॉयड | बाहर से लिया गया टेस्टोस्टेरोन स्पर्म बनना ही रोक देता है | डॉक्टर की निगरानी में बदलाव या बंद करना |
हाल का तेज़ बुखार या बीमारी | दो से तीन महीने तक रिपोर्ट खराब आ सकती है | कुछ हफ्ते बाद दोबारा जांच |
जेनेटिक कारण | स्पर्म की बनावट जन्म से ही अलग होती है | जांच के बाद सीधे ICSI का रास्ता चुना जाता है |
स्पर्म को एग तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ना जरूरी है। इसलिए मोटिलिटी कम होने पर प्रेगनेंसी होने में परेशानी आ सकती है। लेकिन कम मोटिलिटी का मतलब यह नहीं है कि प्रेगनेंसी संभव नहीं है।
अगर मोटिलिटी थोड़ी कम है और बाकी रिपोर्ट ठीक है, तो कुछ मामलों में बिना किसी इलाज के भी प्रेगनेंसी हो सकती है। कितनी जल्दी प्रेगनेंसी होगी, यह मोटिलिटी के साथ स्पर्म काउंट, महिला की fertility और दूसरे factors पर भी निर्भर करता है।
अगर मोटिलिटी काफी कम है या लंबे समय से प्रेगनेंसी नहीं हो रही है, तो डॉक्टर कुछ दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:
कौन सा विकल्प सही रहेगा, यह सिर्फ मोटिलिटी की रिपोर्ट देखकर तय नहीं किया जाता। डॉक्टर दोनों पार्टनर्स की जांच और प्रेगनेंसी न होने के दूसरे कारणों को देखकर आगे का इलाज तय करते हैं।
स्पर्म की मोटिलिटी जानने के लिए सीमेन एनालिसिस किया जाता है। इसमें सीमेन के सैंपल को लैब में माइक्रोस्कोप से देखकर यह जांचा जाता है कि कितने स्पर्म आगे बढ़ रहे हैं, कितने सिर्फ हिल रहे हैं और कितने बिल्कुल नहीं हिल रहे।
एक बार के सैंपल से इस जांच की रिपोर्ट हमेशा पूरी नहीं आती। स्पर्म की संख्या और मोटिलिटी में कुछ समय के लिए बदलाव हो सकता है, इसलिए अगर रिपोर्ट में मोटिलिटी कम आती है, तो डॉक्टर कुछ समय बाद दोबारा जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
सैंपल देते समय नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
इसलिए सिर्फ एक रिपोर्ट में मोटिलिटी कम आने पर तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि स्पर्म की समस्या स्थायी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा सीमेन एनालिसिस या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन इन्हें अपने आप शुरू करने के बजाय डॉक्टर से बात करें।
स्पर्म मोटिलिटी कम आने पर सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है। एक रिपोर्ट में कम मोटिलिटी आने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं और हर मामले में समस्या स्थायी हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
अगर रिपोर्ट में मोटिलिटी कम है, तो डॉक्टर से इसकी वजह समझना ज्यादा जरूरी है। जरूरत पड़ने पर दोबारा सीमेन एनालिसिस और दूसरी जांचों से कंडीशन को अच्छे तरीके से समझा जा सकता है।
इसलिए सिर्फ एक नंबर को देखकर अपनी फर्टिलिटी के बारे में फैसला न करें। पूरी रिपोर्ट और दोनों पार्टनर की फर्टिलिटी रिपोर्ट को ध्यान में रखकर ही आगे का फैसला करना चाहिए।