प्रेगनेंसी में कमर दर्द के कारण, राहत के उपाय और कब डॉक्टर से मिलें

Last updated: September 02, 2026

सारांश (Overview)

प्रेगनेंसी में कमर दर्द इतना आम है कि ज्यादातर महिलाएं इसे झेलती रहती हैं और बताती भी नहीं। पर इसे चुपचाप सहना जरूरी नहीं, क्योंकि सही तरीकों से इसमें काफी फर्क पड़ता है। दूसरी तरफ, कुछ स्थितियों में यही दर्द किसी और बात का संकेत होता है। इसे समझने का आसान तरीका दर्द का पैटर्न देखना है। सामान्य कमर दर्द दिनभर की गतिविधि से बढ़ता है, आराम और पोजीशन बदलने से कम होता है, और लगातार बना नहीं रहता। इसके उलट अगर दर्द नियमित अंतराल पर लहर की तरह आ रहा हो, या बुखार और ब्लीडिंग जैसे लक्षण साथ हों, तो वह जांच मांगता है। pregnancy me kamar dard की इस गाइड में आगे हम देखेंगे कि यह होता क्यों है, किस तिमाही में क्यों बढ़ता है, राहत के लिए क्या करें, और किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द क्यों होता है?

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी में रिलैक्सिन नाम का हार्मोन बनता है, जो जोड़ों के लिगामेंट को नरम और लचीला बना देता है ताकि शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो सके।  इसी ढीलेपन से कमर और पेल्विस के जोड़ों पर काम का बोझ बढ़ जाता है।

बढ़ते गर्भाशय और वजन का असर

बच्चा बढ़ने के साथ वजन आगे की ओर खिंचता है और पेट की मांसपेशियां खिंचकर कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे रीढ़ को ज्यादा भार संभालना पड़ता है।

शरीर के पोस्चर में बदलाव

बढ़ते वजन को संभालने के लिए रीढ़ का प्राकृतिक मोड़ बढ़ जाता है, और यही दर्द की बड़ी वजह बनता है। खड़े होने और चलने का तरीका बदलने से भी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है।

प्रेगनेंसी के किस स्टेज में कमर दर्द होता है?

फर्स्ट ट्राइमेस्टर में कमर दर्द

इस दौरान पेट भारी नहीं होता, इसलिए दर्द ज्यादातर हार्मोन के असर और हल्के खिंचाव से होता है और हल्का ही रहता है।

सेकंड ट्राइमेस्टर में कमर दर्द

गर्भाशय बढ़ने और पोस्चर बदलने से दर्द ज्यादा महसूस होने लगता है, और कई महिलाओं में पेल्विक एरिया का दर्द भी जुड़ जाता है।

थर्ड ट्राइमेस्टर में कमर दर्द

इस समय सबसे ज्यादा दर्द होता है, जो अक्सर शाम को तथा 28 हफ्ते के बाद बढ़ जाता है। बच्चे का सिर नीचे आने से पेल्विस पर दबाव भी बढ़ता है।

 

ट्राइमेस्टर

दर्द की मुख्य वजह

फर्स्ट 

हार्मोन का असर, हल्का खिंचाव

सेकंड

बढ़ता गर्भाशय और पोस्चर में बदलाव

थर्ड

वजन, पेल्विक दबाव, शाम को बढ़ता दर्द

प्रेगनेंसी में कमर दर्द कैसा होता है?

आमतौर पर यह कमर के निचले हिस्से में भारीपन या खिंचाव जैसा होता है, जो देर तक खड़े रहने या झुककर काम करने पर बढ़ता है और आराम से कम हो जाता है।

कुछ महिलाओं में दर्द पेल्विस के जोड़ों से आता है, जिसे पेल्विक गर्डल पेन कहते हैं। इसमें चलने, सीढ़ी चढ़ने और करवट बदलने में तकलीफ होती है, और इसकी पहचान जल्दी हो जाए तो इलाज से दर्द काफी कम रखा जा सकता है। यह इलाज प्रेगनेंसी के किसी भी ट्राइमेस्टर में सेफ है

 

सामान्य कमर दर्द

ध्यान देने वाला दर्द

गतिविधि से बढ़ता है

बिना वजह लगातार बना रहता है

आराम से कम हो जाता है

आराम से भी फर्क नहीं पड़ता

लगातार एक जैसा रहता है

नियमित अंतराल पर लहर की तरह आता है

कोई और लक्षण नहीं

बुखार, ब्लीडिंग या पेशाब में जलन साथ

प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत कैसे पाएं?

  • बहुत देर तक एक ही स्थिति में न रहें, हर 5 से 10 मिनट में बैठने और खड़े होने के बीच बदलाव करें।
  • कमर, कूल्हों और जांघ पर गुनगुनी सिकाई करें, पर इसे सीधे पेट पर न लगाएं।
  • हल्के मसाज से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है।
  • बाईं करवट सोएं और घुटनों के बीच तकिया रखें।
  • बिस्तर पर करवट बदलते समय दोनों घुटने साथ रखें और झटके से न उठें ।
  • पेल्विक दर्द ज्यादा हो तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से पेल्विक सपोर्ट बेल्ट के बारे में पूछें।
  • दर्द की कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के साथ किन लक्षणों पर ध्यान दें?

  • बुखार या ठंड लगना, जो इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • पेशाब में जलन, क्योंकि यूरिन इंफेक्शन कमर दर्द की आम वजह है।
  • किसी भी तरह की ब्लीडिंग या पानी जैसा रिसाव
  • 37 हफ्ते से पहले नियमित अंतराल पर आने वाला कमर दर्द, जो समय से पहले लेबर का संकेत हो सकता है।
  • पैरों में कमजोरी, सुन्नपन, या पेशाब पर नियंत्रण में दिक्कत।
  • पेट में बच्चे की हलचल कम लगना।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द से बचने के लिए क्या करें?

  • सपाट और सहारा देने वाली चप्पल पहनें, ऊंची हील से बचें।
  • कुछ उठाते समय कमर से झुकने के बजाय घुटने मोड़ें और वजन शरीर के पास रखें।
  • भारी सामान उठाने से बचें और घर के कामों में मदद लेने में झिझकें नहीं।
  • बैठते समय कमर के पीछे तकिया लगाएं और पैर जमीन पर टिकाकर रखें।
  • डॉक्टर मना न करें तो रोज हल्की वॉक और पेल्विक फ्लोर की एक्सरसाइज जारी रखें।
  • दिन में बीच-बीच में पांच से दस मिनट आराम कर लें, क्योंकि प्रेगनेंसी में शरीर जल्दी थकता है।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

कमर दर्द अगर इतना बढ़ जाए कि चलना या करवट बदलना मुश्किल हो, तो डॉक्टर से मिलें, क्योंकि इलाज़ जल्दी शुरू कर देने से दर्द कम होता है। बुखार, ब्लीडिंग, पानी जैसे रिसाव या पेशाब में जलन के साथ दर्द हो तो इंतजार न करें।

37 हफ्ते से पहले कमर दर्द नियमित अंतराल पर होने लगे या पेट बार बार टाइट हो, तो तुरंत अस्पताल से संपर्क करें। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं में यह दर्द डिलीवरी के बाद अक्सर तुरंत या दो से तीन हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाता है।

निष्कर्ष (conclusion)

प्रेगनेंसी में कमर दर्द रिलैक्सिन हार्मोन की वजह से लिगामेंट ढीले होने, बढ़ते वजन और पोस्चर में बदलाव के कारण होता है। यह फर्स्ट ट्राइमेस्टर में हल्का रहता है और थर्ड ट्राइमेस्टर में ज्यादा महसूस हो सकता है, खासकर शाम को और 28 हफ्ते के बाद। कुछ महिलाओं में दर्द पेल्विस के जोड़ों से आता है, जिसे पेल्विक गर्डल पेन कहते हैं। 

प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत के लिए पोजीशन बदलते रहें, सिकाई करें, घुटनों के बीच तकिया रखें और सपाट चप्पल पहनें। लेकिन नियमित अंतराल पर दर्द, बुखार, ब्लीडिंग या पेशाब में जलन हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। 

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना सामान्य है?

2. प्रेगनेंसी में कमर दर्द किस महीने से शुरू होता है?

3. क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द बच्चे के विकास से जुड़ा होता है?

4. क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द के लिए गर्म पानी की सिकाई कर सकते हैं?

5. क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द के लिए एक्सरसाइज करना सुरक्षित है?

6. क्या प्रेगनेंसी में तेज कमर दर्द लेबर का संकेत हो सकता है?

7. प्रेगनेंसी में कमर दर्द के साथ पेट में दर्द हो तो क्या करें?

8. प्रेगनेंसी में कमर दर्द के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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