सारांश (Overview)
प्रेगनेंसी में कमर दर्द इतना आम है कि ज्यादातर महिलाएं इसे झेलती रहती हैं और बताती भी नहीं। पर इसे चुपचाप सहना जरूरी नहीं, क्योंकि सही तरीकों से इसमें काफी फर्क पड़ता है। दूसरी तरफ, कुछ स्थितियों में यही दर्द किसी और बात का संकेत होता है। इसे समझने का आसान तरीका दर्द का पैटर्न देखना है। सामान्य कमर दर्द दिनभर की गतिविधि से बढ़ता है, आराम और पोजीशन बदलने से कम होता है, और लगातार बना नहीं रहता। इसके उलट अगर दर्द नियमित अंतराल पर लहर की तरह आ रहा हो, या बुखार और ब्लीडिंग जैसे लक्षण साथ हों, तो वह जांच मांगता है। pregnancy me kamar dard की इस गाइड में आगे हम देखेंगे कि यह होता क्यों है, किस तिमाही में क्यों बढ़ता है, राहत के लिए क्या करें, और किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
प्रेगनेंसी में रिलैक्सिन नाम का हार्मोन बनता है, जो जोड़ों के लिगामेंट को नरम और लचीला बना देता है ताकि शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो सके। इसी ढीलेपन से कमर और पेल्विस के जोड़ों पर काम का बोझ बढ़ जाता है।
बच्चा बढ़ने के साथ वजन आगे की ओर खिंचता है और पेट की मांसपेशियां खिंचकर कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे रीढ़ को ज्यादा भार संभालना पड़ता है।
बढ़ते वजन को संभालने के लिए रीढ़ का प्राकृतिक मोड़ बढ़ जाता है, और यही दर्द की बड़ी वजह बनता है। खड़े होने और चलने का तरीका बदलने से भी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है।
इस दौरान पेट भारी नहीं होता, इसलिए दर्द ज्यादातर हार्मोन के असर और हल्के खिंचाव से होता है और हल्का ही रहता है।
गर्भाशय बढ़ने और पोस्चर बदलने से दर्द ज्यादा महसूस होने लगता है, और कई महिलाओं में पेल्विक एरिया का दर्द भी जुड़ जाता है।
इस समय सबसे ज्यादा दर्द होता है, जो अक्सर शाम को तथा 28 हफ्ते के बाद बढ़ जाता है। बच्चे का सिर नीचे आने से पेल्विस पर दबाव भी बढ़ता है।
ट्राइमेस्टर | दर्द की मुख्य वजह |
|---|---|
फर्स्ट | हार्मोन का असर, हल्का खिंचाव |
सेकंड | बढ़ता गर्भाशय और पोस्चर में बदलाव |
थर्ड | वजन, पेल्विक दबाव, शाम को बढ़ता दर्द |
आमतौर पर यह कमर के निचले हिस्से में भारीपन या खिंचाव जैसा होता है, जो देर तक खड़े रहने या झुककर काम करने पर बढ़ता है और आराम से कम हो जाता है।
कुछ महिलाओं में दर्द पेल्विस के जोड़ों से आता है, जिसे पेल्विक गर्डल पेन कहते हैं। इसमें चलने, सीढ़ी चढ़ने और करवट बदलने में तकलीफ होती है, और इसकी पहचान जल्दी हो जाए तो इलाज से दर्द काफी कम रखा जा सकता है। यह इलाज प्रेगनेंसी के किसी भी ट्राइमेस्टर में सेफ है।
सामान्य कमर दर्द | ध्यान देने वाला दर्द |
|---|---|
गतिविधि से बढ़ता है | बिना वजह लगातार बना रहता है |
आराम से कम हो जाता है | आराम से भी फर्क नहीं पड़ता |
लगातार एक जैसा रहता है | नियमित अंतराल पर लहर की तरह आता है |
कोई और लक्षण नहीं | बुखार, ब्लीडिंग या पेशाब में जलन साथ |
कमर दर्द अगर इतना बढ़ जाए कि चलना या करवट बदलना मुश्किल हो, तो डॉक्टर से मिलें, क्योंकि इलाज़ जल्दी शुरू कर देने से दर्द कम होता है। बुखार, ब्लीडिंग, पानी जैसे रिसाव या पेशाब में जलन के साथ दर्द हो तो इंतजार न करें।
37 हफ्ते से पहले कमर दर्द नियमित अंतराल पर होने लगे या पेट बार बार टाइट हो, तो तुरंत अस्पताल से संपर्क करें। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं में यह दर्द डिलीवरी के बाद अक्सर तुरंत या दो से तीन हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाता है।
प्रेगनेंसी में कमर दर्द रिलैक्सिन हार्मोन की वजह से लिगामेंट ढीले होने, बढ़ते वजन और पोस्चर में बदलाव के कारण होता है। यह फर्स्ट ट्राइमेस्टर में हल्का रहता है और थर्ड ट्राइमेस्टर में ज्यादा महसूस हो सकता है, खासकर शाम को और 28 हफ्ते के बाद। कुछ महिलाओं में दर्द पेल्विस के जोड़ों से आता है, जिसे पेल्विक गर्डल पेन कहते हैं।
प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत के लिए पोजीशन बदलते रहें, सिकाई करें, घुटनों के बीच तकिया रखें और सपाट चप्पल पहनें। लेकिन नियमित अंतराल पर दर्द, बुखार, ब्लीडिंग या पेशाब में जलन हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।