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कोरोना संक्रमण के दौर में गर्भवती महिलाओं क्या है खतरा

कोरोना वायरस संक्रमण के बीच दुनियाभर के कई देशों में आपातकाल जैसे हालात हैं। हर कोई इसके वैक्सीन और दवा का इंतजार कर रहा है। इसके लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। कई शोधों के सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। यह वायरस चीन के वुहान से शुरू हुआ था और चीन में महिलाएं भी कोरोना से पीड़ित हो गई थीं। इनमें से कुछ महिलाओं को प्री-मैच्योर यानी नौ महीने से पहले ही डिलीवरी कराई गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कोरोना की वजह से किया गया था या फिर प्रसूताओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए किया गया था।

भारत में आईवीएफ करा चुकी महिलाओं ने तो इस समय स्वस्थ संतानों को जन्म दिया ही। बल्कि इंदिरा आईवीएफ के पुणे सेंटर पर एक कोरोना संक्रमित महिला ने जुड़वाँ स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया और बाद में वो भी कोरोना निगेटिव होकर घर गयी। वैसे इसमें कोई संदेह नहीं कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में गर्भवती महिलाएं भी अपने और अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। बहुत से लोग ये जानना चाहते हैं कि गर्भवती
महिलाओं को कोरोना संक्रमण का कितना खतरा है और बचाव के लिए उन्हें क्या करना चाहिए।

दरअसल, अबतक कोरोना वायरस की कोई वैक्सीन या दवा नहीं उपलब्ध है, इस कारण भी लोग डरे-सहमे हैं। अबतक कोरोना की वजह से हुई मौतों के आंकड़ों के आधार पर विशेषज्ञ बताते हैं कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर कोरोना का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता
है। गर्भवती होने पर महिलाओं के इम्यून सिस्टम में भी बदलाव आते हैं। रोगों से लड़ने की उनके शरीर की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में आम वायरल संक्रमण होने का खतरा तो रहता ही है।

कोरोना संक्रमण के लक्षण गर्भवती महिलाओं में अलग नहीं होते, बल्कि बाकी लोगों की ही तरह होते हैं। तेज बुखार, सूखी खांसी,मांसपेशियों में दर्द और
थकान इसके शुरुआती लक्षणों में हैं, जबकि सिर दर्द, दस्त और खून वाली खांसी भी हो सकती है। चिकित्सक बताते हैं कि सेहतमंद लोगों की तुलना में
गर्भवती महिलाओं को भी कोरोना वायरस बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं कर रहा। अबतक इस तरह का कोई रिसर्च नहीं सामने आया है जिसमें अन्य लोगों की तुलना में गर्भवती महिलाओं को संक्रमण का ज्यादा खतरा हो।

लेकिन आपको ऐसे मौके में संभल कर रहना चाहिए और डॉक्टर्स के बताये गए जाँच/टेस्ट को नियमित रूप से फॉलो करना चाहिए। ताकि समय समय पर आपको अपने और अपने गर्भ की वास्तविक स्थिति का पता चलता रहे।

कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला से उसके शिशु को संक्रमण होने के चांस पर बात करें तो वायरस के वर्टिकल ट्रांसमिशन के दो मामले सामने आए हैं। हालांकि यह नहीं स्पष्ट हो पाया कि वायरस का संक्रमण गर्भ में हुआ या फिर जन्म लेने के बाद। ऐसा भी कोई मामला अब तक सामने नहीं आया, जिसमें कोरोना वायरस से संक्रमित गर्भवती महिला के शिशु के विकास पर कोई असर पड़े।

कुछ बातों का ध्यान रखकर गर्भवती महिलाएं खुद का और अपने होने वाले बच्चे का कोरोना वायरस से बचाव कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के गाइड लाइन पर इंदिरा आईवीएफ ने कोरोना से बचने के लिए कुछ गाइड लाइन्स तैयार किये हैं जो निम्न हैं —–

आप नियमित रूप से हाथ धोएं। हाथों को 20 सेकेंड तक अच्छे से धोएं। खासकर चेहरे को हाथ लगाने से पहले हाथ जरूर धोएं।

खाने से पहले तो हाथों को हम धोते ही हैं, यह बहुत जरूरी है।
गर्भावस्था में घर में रहना और जरूरी हो जाता है। खासकर भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें आसपास किसी को छींक या खांसीआए तो टिश्यू का इस्तेमाल करें।

आपको भी छींक आए तो ऐसा करें और फिर हाथ जरूर धोएं। कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आएं। मेट्रो, बस, ट्रेन या अन्य सार्वजनिक परिवहन से यात्रा न करें। लोगों से दूरी बनाकर ही बात करें।

पोषणयुक्त डाइट लें और खुद का इम्यून सिस्टम बनाए रखें। इसके अलावा किसी भी तरह की सर्दी, खांसी या बुखार जैसा महसूस होने पर डॉक्टर से
संपर्क करें।

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