सारांश (Overview)
आठवें महीने में पेट बढ़ने से सांस भारी लगना, थकान और करवट बदलने में परेशानी आम है। इस दौरान बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है और दिमाग का विकास भी तेज होता है। इस महीने बच्चे की हलचल पर रोज नजर रखना और प्रीटर्म लेबर के लक्षण पहचानना सबसे जरूरी है। 8 महीने की प्रेगनेंसी की इस गाइड में जानेंगे कि बच्चे की ग्रोथ कितनी होती है, कौन से लक्षण सामान्य हैं, क्या खाना चाहिए, कौन-सी जांचें होती हैं और कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
ACOG के अनुसार आठवां महीना करीब 29 से 32 हफ्ते तक चलता है। इस दौरान बच्चे के सारे बड़े अंग बन चुके होते हैं और 31वें हफ्ते के बाद उसका मुख्य काम तेजी से वजन बढ़ाना रह जाता है।
गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) ऊपर बढ़कर पसलियों तक पहुंच जाता है, जिससे सांस भारी लगती है और खाना खाते ही पेट भरा महसूस होता है। इसीलिए थोड़ा थोड़ा और कई बार खाना आरामदायक रहता है।
32 हफ्ते तक बच्चे की लंबाई करीब 17 इंच और वजन लगभग 1.8 किलो हो जाता है, और इसके बाद वजन और तेजी से बढ़ता है।
दिमाग का विकास इस दौरान सबसे तेज रहता है। फेफड़े सबसे आखिर में तैयार होते हैं, इसीलिए इस महीने जन्म लेने वाले बच्चों को सांस में मदद की जरूरत पड़ सकती है।
बच्चा खिंचता है, लात मारता है और उसकी आंखें रोशनी का अंतर महसूस करती हैं। पोजीशन को लेकर घबराएं नहीं, क्योंकि ज्यादातर बच्चे 36 हफ्ते तक सिर नीचे कर लेते हैं।
क्या देखा जाता है | आठवें महीने में स्थिति |
|---|---|
वजन | 32 हफ्ते तक करीब 1.8 किलो, फिर तेजी से बढ़त |
लंबाई | करीब 17 इंच |
दिमाग | सबसे तेज विकास इसी दौर में |
फेफड़े | अभी मैच्योर हो रहे होते हैं |
हलचल | पहले जैसी ही बनी रहनी चाहिए |
इनमें से ज्यादातर सामान्य हैं। पर सूजन अचानक बहुत बढ़ जाए, खासकर चेहरे और हाथों पर, और साथ में तेज सिरदर्द या धुंधली नजर हो, तो तुरंत दिखाएं।
क्या खाएं | इससे क्या मिलेगा | क्यों जरूरी है |
दाल, चना, राजमा, अंडा प्रोटीन, | आयरन | बच्चे की ग्रोथ और मां के हीमोग्लोबिन के लिए |
पनीर, दूध, दही प्रोटीन, | कैल्शियम | बच्चे की हड्डियों और मसल्स ग्रोथ के लिए |
पालक, मेथी, सरसों का साग | आयरन, फोलेट, फाइबर | खून बनने और कब्ज से बचने में मदद के लिए |
रागी, तिल | कैल्शियम, आयरन | बच्चे की हड्डियों के विकास और मां की कैल्शियम जरूरत पूरी करने के लिए |
गुड़, खजूर, किशमिश | आयरन | शरीर में आयरन की जरूरत पूरी करने में मदद के लिए |
संतरा, अमरूद, आंवला | विटामिन C, फाइबर | आयरन के अवशोषण और पाचन के लिए |
सेब, नाशपाती, केला | फाइबर, कार्बोहाइड्रेट | कब्ज से बचने और एनर्जी के लिए |
गाजर, शकरकंद, कद्दू | फाइबर, विटामिन A | पाचन और बच्चे के सामान्य विकास के लिए |
गेहूं, बाजरा, ज्वार, ओट्स | फाइबर, कार्बोहाइड्रेट | कब्ज से बचने और लंबे समय तक एनर्जी के लिए |
अखरोट, बादाम, मूंगफली | हेल्दी फैट, प्रोटीन | बच्चे के दिमाग के विकास और एनर्जी के लिए |
नारियल पानी, छाछ, सूप | पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स | शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए |
सलाद और दूसरी सब्जियां | फाइबर, विटामिन और मिनरल्स | पाचन और शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों के लिए |
इस महीने डॉक्टर की विजिट बढ़ जाती हैं। हर विजिट पर वजन, ब्लड प्रेशर, पेट की माप और बच्चे की धड़कन देखी जाती है, और पेशाब की जांच से प्रोटीन तथा इंफेक्शन देखा जाता है।
इसके अलावा ग्रोथ स्कैन होता है, जिसमें बच्चे का अनुमानित वजन, एम्नियोटिक फ्लूइड और प्लेसेंटा की स्थिति देखी जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉप्लर से बच्चे तक खून का बहाव देखा जाता है, और हीमोग्लोबिन तथा ब्लड शुगर की जांच दोहराई जाती है।
37 हफ्ते से पहले लेबर शुरू होने को प्रीटर्म लेबर कहते हैं, और इसके संकेत पहचानना इस महीने सबसे जरूरी है।
इनमें से कुछ भी दिखे तो घर पर इंतजार न करें, तुरंत अस्पताल से संपर्क करें।
आठवां महीना 29 से 32 हफ्ते तक चलता है। इस दौरान बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है और दिमाग का विकास होता है, जबकि फेफड़े अभी तैयार हो रहे होते हैं। मां को सांस भारी लगना, सीने में जलन, कमर दर्द और हल्की सूजन जैसे लक्षण हो सकते हैं। खाने में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर रखें। इस महीने ग्रोथ स्कैन और जरूरत पड़ने पर डॉप्लर किया जाता है। बच्चे की हलचल कम होना सामान्य नहीं है। 37 हफ्ते से पहले नियमित दर्द, पानी का रिसाव या ब्लीडिंग हो, तो तुरंत अस्पताल जाएं।