प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए? (Pregnancy Me Kaise Sona Chahiye)

Last updated: January 27, 2026

Overview

प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के सफर में जैसे-जैसे दिन बढ़ते हैं, शरीर में होने वाले बदलाव केवल बाहर से ही नहीं बल्कि अंदरूनी तौर पर भी महसूस होने लगते हैं। शुरुआत में नींद की समस्या केवल थकान और मॉर्निंग सिकनेस की वजह से होती है, लेकिन दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर तक पहुँचते-पहुँचते एक अच्छी नींद लेना बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। बढ़ता हुआ पेट, कमर दर्द और बार-बार पेशाब आने की इच्छा आपकी नींद में खलल डालती है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि आखिर pregnancy me kaise sona chahiye जिससे बच्चे तक खून की सप्लाई सही बनी रहे? यह केवल आपके आराम की बात नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की अंदरूनी नसों पर पड़ने वाले दबाव को मैनेज करने का एक वैज्ञानिक तरीका है। इस लेख में हम समझेंगे कि सोने की कौन सी पोजीशन आपके बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित है और क्यों कुछ पोजीशन में सोने से आपको सांस फूलने या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान स्लीप पोजीशन क्यों बदलनी पड़ती है?

जैसे-जैसे गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) का साइज बढ़ता है, यह आपके पेट के अंदर मौजूद अन्य अंगों और नसों पर दबाव डालना शुरू कर देता है। पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर (1st Trimester) तक आप जैसे चाहें सो सकती हैं, क्योंकि यूट्रस अभी पेल्विक बोन के अंदर सुरक्षित होता है। लेकिन 20वें हफ्ते के बाद, यूट्रस का वजन काफी बढ़ जाता है। जब हम पूछते हैं कि pregnancy me kaise sona chahiye, तो इसका मुख्य उद्देश्य आपके शरीर की मुख्य रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसल्स (Blood Vessels) को दबाव से बचाना होता है। अगर आप गलत पोजीशन में सोती हैं, तो बच्चे तक पहुँचने वाले ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स (Nutrients) की मात्रा प्रभावित हो सकती है, जिससे बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है।

सबसे सुरक्षित पोजीशन 'लेफ्ट साइड' (Left Side) ही क्यों है?

डॉक्टर्स और फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स प्रेग्नेंसी में 'बाएं करवट' (Left side) सोने की सबसे ज्यादा सलाह देते हैं। इसे 'SOS' (Sleep On Side) पोजीशन भी कहा जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही ठोस मेडिकल कारण है।

  • वेना कावा (Vena Cava) पर दबाव: हमारे शरीर की एक मुख्य नस (Inferior Vena Cava) रीढ़ की हड्डी के दाईं ओर होती है, जो निचले शरीर से दिल तक खून ले जाती है। बाएं करवट सोने से यूट्रस का पूरा भार इस नस पर नहीं पड़ता।
  • बेहतर सर्कुलेशन: इससे प्लेसेंटा (Placenta) तक खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे बच्चे को भरपूर पोषण मिलता है।
  • किडनी फंक्शन: बाएं करवट सोने से किडनी बेहतर तरीके से काम करती है, जिससे शरीर की सूजन यानी एडेमा (Edema) कम होती है।

पीठ के बल सोने के क्या रिस्क हैं?

तीसरी तिमाही यानी थर्ड ट्राइमेस्टर (3rd Trimester) में पीठ के बल सोना रिस्की हो सकता है। जब आप सीधी लेटती हैं, तो यूट्रस का बढ़ा हुआ वजन आपकी रीढ़ की हड्डी, आंतों और मुख्य नसों को दबा देता है।

  • इससे आपको पीठ दर्द, बवासीर (Hemorrhoids) और डाइजेशन (Digestion) की समस्या हो सकती है।
  • कई महिलाओं को पीठ के बल लेटने पर अचानक बीपी (BP) कम होने और चक्कर आने जैसा महसूस होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल तक जाने वाले खून की रफ्तार धीमी हो जाती है।
  • रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक पीठ के बल सोने से गर्भ में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन कम पहुँचने का खतरा रहता है।

क्या प्रेगनेंसी में पेट के बल सो सकते हैं?

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में पेट के बल सोना पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि तब गर्भाशय पेल्विक बोन (Pelvic Bone) के अंदर गहराई में सुरक्षित रहता है। लेकिन 13वें हफ्ते के बाद जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, इस पोजीशन में सोना न केवल असहज होता है बल्कि असुरक्षित भी। भारी गर्भाशय मुख्य नसों और अंगों पर दबाव डाल सकता है, जिससे बच्चे तक ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने का खतरा रहता है।

प्रेगनेंसी में नींद न आने के मुख्य कारण

केवल पोजीशन जानना ही काफी नहीं है, उन समस्याओं को समझना भी जरूरी है जो आपको सोने नहीं देतीं।

  • एसिड रिफ्लक्स: प्रेग्नेंसी में हार्मोन्स की वजह से डाइजेशन धीमा हो जाता है, जिससे लेटने पर खट्टी डकारें आती हैं।
  • बार-बार पेशाब आना: यूट्रस का दबाव ब्लैडर पर पड़ता है, जिससे रात में कई बार उठना पड़ता है।
  • पैर में ऐंठन (Leg Cramps): मैग्नीशियम की कमी या भारी वजन के कारण रात में पिंडलियों में तेज दर्द हो सकता है।
  • बढ़ती धड़कन: शरीर को ज्यादा खून पंप करना पड़ता है, जिससे कभी-कभी घबराहट महसूस होती है।

आरामदायक नींद के लिए व्यावहारिक टिप्स और पिलो (Pillow) हैक्स

pregnancy me kaise sona chahiye इसे आसान बनाने के लिए आप तकियों (Pillows) का इस्तेमाल एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह कर सकती हैं।

  • पैरों के बीच तकिया: करवट लेकर सोते समय घुटनों के बीच एक मोटा तकिया रखें। इससे आपके कूल्हों (Hips) और पेल्विक एरिया का तनाव कम होता है।
  • पीठ के पीछे सहारा: सोने के दौरान अनजाने में पीठ के बल होने से बचने के लिए पीठ के पीछे एक लंबा तकिया रखें।
  • प्रेग्नेंसी पिलो (Pregnancy Pillow): बाजार में 'C' या 'U' शेप के तकिए मिलते हैं जो आपके पूरे शरीर को एक साथ सपोर्ट देते हैं।
  • सिर को ऊपर रखें: अगर आपको सीने में जलन की समस्या है, तो सिर के नीचे दो तकिए रखें ताकि एसिड वापस गले तक न आए।

आईवीएफ (IVF) प्रेग्नेंसी और स्लीप एंग्जायटी

आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) से रुकी प्रेगनेंसी अक्सर 'प्रीशियस प्रेगनेंसी' मानी जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं बहुत ज्यादा चिंता यानी एंग्जायटी (Anxiety) में रहती हैं।

  • शुरुआती हफ्तों का डर: एम्ब्रीओ ट्रांसफर (Embryo Transfer) के बाद कई महिलाओं को लगता है कि पेट के बल सोने से एम्ब्रीओ (Embryo) को नुकसान होगा। फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स स्पष्ट करते हैं कि शुरुआती 12 हफ्तों तक यूट्रस बहुत छोटा होता है और पेल्विस में सुरक्षित होता है, इसलिए पोजीशन का बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता।
  • बढ़ती मॉनिटरिंग: आईवीएफ (IVF) के मरीजों को अक्सर डॉक्टर 24वें हफ्ते के बाद से सख्त 'साइड स्लीपिंग' की सलाह देते हैं ताकि बच्चे की ग्रोथ में कोई रुकावट न आए।

क्या डॉक्टर से मिलना जरुरी है?

नींद की समस्या सामान्य है, लेकिन इन स्थितियों में डॉक्टर से मिलना जरूरी होता है।

  • अगर नींद न आने की वजह से आप डिप्रेशन या बहुत ज्यादा स्ट्रेस (Stress) महसूस कर रही हैं।
  • अगर आपके पैरों में बहुत ज्यादा सूजन है और तेज सिरदर्द रहता है, ध्यान रहे यह प्री-एक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है।
  • अगर सोते समय आपको अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगे।
  • अगर रात के समय बच्चे की हलचल (Fetal Movement) में कोई बड़ा बदलाव महसूस हो।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेगनेंसी में नींद का पूरा होना केवल आपकी थकान मिटाने के लिए नहीं, बल्कि आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी है। pregnancy me kaise sona chahiye एक्सपर्ट के अनुसार लेफ़्ट यानी बायीं करवट है। हालांकि, यह याद रखें कि अगर आप रात में अनजाने में पीठ के बल हो जाती हैं, तो घबराएं नहीं; बस जागने पर दोबारा करवट ले लें। आपका शरीर आपको खुद संकेत देता है कि कौन सी पोजीशन आरामदायक है। तकियों का सही इस्तेमाल करें, सोने से पहले हल्का संगीत सुनें या गुनगुने पानी से नहाएं ताकि तनाव कम हो सके। आपकी एक अच्छी नींद आपके बच्चे के विकास की नींव को मजबूत बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या प्रेग्नेंसी में दाईं करवट (Right side) सोना गलत है?

 

नहीं, दाईं करवट सोना भी सुरक्षित है, लेकिन बाईं करवट (Left side) को सबसे बेस्ट माना जाता है क्योंकि यह मुख्य नस (Vena Cava) पर सबसे कम दबाव डालता है।

अगर मुझे रात में नींद नहीं आती तो क्या मैं नींद की दवा ले सकती हूँ?

 

बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर सुरक्षित हर्बल तरीके या लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं।

क्या पेट के बल सोना बच्चे को दबा सकता है?

 

शुरुआती हफ्तों में तो नहीं, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, पेट के बल सोना नामुमकिन और असुरक्षित हो जाता है क्योंकि यह सीधे यूट्रस पर दबाव डालता है।

रात में बार-बार पेशाब आने से कैसे बचें?

 

सोने से 2-3 घंटे बाद पानी न पिएं, लेकिन दिन भर में भरपूर पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो।

आईवीएफ (IVF) के बाद बेड रेस्ट के दौरान कैसे सोना चाहिए?

 

आईवीएफ (IVF) के बाद 24 घंटे का बेड रेस्ट काफी होता है। इस दौरान आप अपनी पसंद की किसी भी आरामदायक पोजीशन में सो सकती हैं, जब तक पेट का साइज न बढ़ जाए।

क्या सोते समय पेट में होने वाला हल्का दर्द सामान्य है?

 

हाँ, इसे 'राउंड लिगामेंट पेन' (Round Ligament Pain) कहते हैं। करवट बदलते समय यूट्रस के खिंचाव की वजह से यह हल्का दर्द महसूस हो सकता है।

प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल कब शुरू करना चाहिए?

 

आमतौर पर दूसरे ट्राइमेस्टर (16-20 हफ्तों) के बाद जब पेट का वजन बढ़ना शुरू होता है, तब ये तकिए ज्यादा आरामदायक साबित होते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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