प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के सफर में जैसे-जैसे दिन बढ़ते हैं, शरीर में होने वाले बदलाव केवल बाहर से ही नहीं बल्कि अंदरूनी तौर पर भी महसूस होने लगते हैं। शुरुआत में नींद की समस्या केवल थकान और मॉर्निंग सिकनेस की वजह से होती है, लेकिन दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर तक पहुँचते-पहुँचते एक अच्छी नींद लेना बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। बढ़ता हुआ पेट, कमर दर्द और बार-बार पेशाब आने की इच्छा आपकी नींद में खलल डालती है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि आखिर pregnancy me kaise sona chahiye जिससे बच्चे तक खून की सप्लाई सही बनी रहे? यह केवल आपके आराम की बात नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की अंदरूनी नसों पर पड़ने वाले दबाव को मैनेज करने का एक वैज्ञानिक तरीका है। इस लेख में हम समझेंगे कि सोने की कौन सी पोजीशन आपके बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित है और क्यों कुछ पोजीशन में सोने से आपको सांस फूलने या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।
जैसे-जैसे गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) का साइज बढ़ता है, यह आपके पेट के अंदर मौजूद अन्य अंगों और नसों पर दबाव डालना शुरू कर देता है। पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर (1st Trimester) तक आप जैसे चाहें सो सकती हैं, क्योंकि यूट्रस अभी पेल्विक बोन के अंदर सुरक्षित होता है। लेकिन 20वें हफ्ते के बाद, यूट्रस का वजन काफी बढ़ जाता है। जब हम पूछते हैं कि pregnancy me kaise sona chahiye, तो इसका मुख्य उद्देश्य आपके शरीर की मुख्य रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसल्स (Blood Vessels) को दबाव से बचाना होता है। अगर आप गलत पोजीशन में सोती हैं, तो बच्चे तक पहुँचने वाले ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स (Nutrients) की मात्रा प्रभावित हो सकती है, जिससे बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है।
डॉक्टर्स और फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स प्रेग्नेंसी में 'बाएं करवट' (Left side) सोने की सबसे ज्यादा सलाह देते हैं। इसे 'SOS' (Sleep On Side) पोजीशन भी कहा जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही ठोस मेडिकल कारण है।
तीसरी तिमाही यानी थर्ड ट्राइमेस्टर (3rd Trimester) में पीठ के बल सोना रिस्की हो सकता है। जब आप सीधी लेटती हैं, तो यूट्रस का बढ़ा हुआ वजन आपकी रीढ़ की हड्डी, आंतों और मुख्य नसों को दबा देता है।
प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में पेट के बल सोना पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि तब गर्भाशय पेल्विक बोन (Pelvic Bone) के अंदर गहराई में सुरक्षित रहता है। लेकिन 13वें हफ्ते के बाद जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, इस पोजीशन में सोना न केवल असहज होता है बल्कि असुरक्षित भी। भारी गर्भाशय मुख्य नसों और अंगों पर दबाव डाल सकता है, जिससे बच्चे तक ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने का खतरा रहता है।
केवल पोजीशन जानना ही काफी नहीं है, उन समस्याओं को समझना भी जरूरी है जो आपको सोने नहीं देतीं।
pregnancy me kaise sona chahiye इसे आसान बनाने के लिए आप तकियों (Pillows) का इस्तेमाल एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह कर सकती हैं।
आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) से रुकी प्रेगनेंसी अक्सर 'प्रीशियस प्रेगनेंसी' मानी जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं बहुत ज्यादा चिंता यानी एंग्जायटी (Anxiety) में रहती हैं।
नींद की समस्या सामान्य है, लेकिन इन स्थितियों में डॉक्टर से मिलना जरूरी होता है।
प्रेगनेंसी में नींद का पूरा होना केवल आपकी थकान मिटाने के लिए नहीं, बल्कि आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी है। pregnancy me kaise sona chahiye एक्सपर्ट के अनुसार लेफ़्ट यानी बायीं करवट है। हालांकि, यह याद रखें कि अगर आप रात में अनजाने में पीठ के बल हो जाती हैं, तो घबराएं नहीं; बस जागने पर दोबारा करवट ले लें। आपका शरीर आपको खुद संकेत देता है कि कौन सी पोजीशन आरामदायक है। तकियों का सही इस्तेमाल करें, सोने से पहले हल्का संगीत सुनें या गुनगुने पानी से नहाएं ताकि तनाव कम हो सके। आपकी एक अच्छी नींद आपके बच्चे के विकास की नींव को मजबूत बनाती है।
नहीं, दाईं करवट सोना भी सुरक्षित है, लेकिन बाईं करवट (Left side) को सबसे बेस्ट माना जाता है क्योंकि यह मुख्य नस (Vena Cava) पर सबसे कम दबाव डालता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर सुरक्षित हर्बल तरीके या लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं।
शुरुआती हफ्तों में तो नहीं, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, पेट के बल सोना नामुमकिन और असुरक्षित हो जाता है क्योंकि यह सीधे यूट्रस पर दबाव डालता है।
सोने से 2-3 घंटे बाद पानी न पिएं, लेकिन दिन भर में भरपूर पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
आईवीएफ (IVF) के बाद 24 घंटे का बेड रेस्ट काफी होता है। इस दौरान आप अपनी पसंद की किसी भी आरामदायक पोजीशन में सो सकती हैं, जब तक पेट का साइज न बढ़ जाए।
हाँ, इसे 'राउंड लिगामेंट पेन' (Round Ligament Pain) कहते हैं। करवट बदलते समय यूट्रस के खिंचाव की वजह से यह हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
आमतौर पर दूसरे ट्राइमेस्टर (16-20 हफ्तों) के बाद जब पेट का वजन बढ़ना शुरू होता है, तब ये तकिए ज्यादा आरामदायक साबित होते हैं।