कई महिलाओं को जाँच के दौरान पता चलता है कि उनके गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) के आसपास के एरिया में सिस्ट मौजूद है। इस कंडीशन में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में “Adnexal Cyst” लिखा हुआ दिख सकता है। यूट्रस के आसपास का जो हिस्सा होता है, जिसमें ओवरी, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के टिश्यू शामिल होते हैं, उसे एडनेक्सा (adnexa) कहा जाता है। इसी एरिया में बनने वाली किसी भी सिस्ट को एडनेक्सल सिस्ट कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि सिस्ट कहाँ बनी है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उसी के आधार पर आगे का कोर्स या ट्रीटमेंट तय करते हैं।
इस आर्टिकल में आप adnexal cyst meaning in hindi समझेंगे, यह किन जगहों पर बन सकती है, इसके अलग-अलग प्रकार क्या होते हैं, और फर्टिलिटी पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
एडनेक्सा (adnexa) उस एरिया को कहा जाता है जो यूट्रस के दोनों तरफ होता है। इसमें वही हिस्से शामिल होते हैं जो प्रजनन प्रक्रिया में सीधे जुड़े होते हैं।
जब रिपोर्ट में “right adnexal cyst” या “left adnexal cyst” लिखा होता है, तो इसका मतलब होता है कि यूट्रस के दाईं या बाईं तरफ इस एरिया में सिस्ट दिखाई दी है। ज़्यादातर मामलों में यह सिस्ट ओवरी पर ही होती है, लेकिन कुछ मामलों में ट्यूब या आसपास के टिश्यू से भी जुड़ी हो सकती है।
यह शब्द इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि हर बार सिस्ट की सटीक जगह साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में डॉक्टर पूरे एरिया को ध्यान में रखकर “adnexal” लिखते हैं।
एडनेक्सल सिस्ट (adnexal cyst) कई तरह की हो सकती हैं। ज़्यादातर मामलों में यह सामान्य होती हैं और समय के साथ अपने आप ठीक भी हो जाती हैं। सिस्ट का टाइप इस बात पर निर्भर करता है कि वह कहाँ से बनी है और उसके अंदर क्या मौजूद है।
यह सबसे कॉमन सिस्ट होती है ओवरी की नॉर्मल प्रॉसेस से बनती हैं। यह दो तरह की होती है।
इसे चॉकलेट सिस्ट भी कहते हैं। यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) की वजह से बनती है। जब यूट्रस की लाइनिंग का टिश्यू ओवरी पर बढ़ने लगता है तो इसमें पुराना ब्लड जमा हो जाता है जो चॉकलेट कलर का दिखता है। यह फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है।
टेराटोमा (teratoma) भी कहा जाता है, एक अलग तरह की सिस्ट होती है। इसमें बाल, त्वचा या दाँत जैसे टिश्यू भी मिल सकते हैं। यह ज़्यादातर बिनाइन (benign) होती है, लेकिन अगर साइज बड़ा हो जाए तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
यह ओवरी पर नहीं बल्कि फ़ैलोपियन ट्यूब के पास बनती है। यह सिस्ट छोटी होती है और आमतौर पर कोई प्रॉब्लम नहीं करती। अल्ट्रासाउंड में एडनेक्सल सिस्ट जैसी दिखती है लेकिन ओवरी से अलग होती है।
यह ओवरी की सतह से बनने वाली एक बिनाइन ग्रोथ होती है। इसमें पानी जैसा या गाढ़ा फ्लूइड हो सकता है। इसका साइज बढ़ सकता है, इसलिए ऐसी सिस्ट में निगरानी या जरूरत पड़ने पर इलाज किया जाता है।
सिस्ट होने पर आमतौर पर कोई सिम्पटम नहीं होते और इसका ज़्यादातर रूटीन अल्ट्रासाउंड में ही पता चलता है। लेकिन अगर सिस्ट बड़ी हो या कॉम्प्लिकेशन हो, तो नीचे दिए सिम्पटम्स आ सकते हैं।
अगर अचानक बहुत तेज़ पेट दर्द हो, उल्टी आए, या चक्कर आएँ तो तुरंत इमरजेंसी में जाएँ। यह सिस्ट रप्चर या ओवेरियन टॉर्शन (Ovarian Torsion) हो सकता है। दोनों ही सीरियस कंडीशन हैं।
Adnexal cyst का पता आमतौर पर जाँच के दौरान चलता है। इसके लिए कुछ टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे सिस्ट का साइज, लोकेशन और नेचर समझने में मदद मिलती है।
रिपोर्ट को सही तरह से पढ़ना जरूरी होता है, ताकि आपको समझ आए कि सिस्ट कैसी है और आगे क्या करना है।
ज़्यादातर एडनेक्सल सिस्ट बिनाइन (Benign) होती हैं। इनसे कैंसर का रिस्क बहुत कम होता है, खासकर तब जब आप माँ बनने यानी रिप्रोडक्टिव एज (15-45 साल) में हैं। लेकिन कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन पर ध्यान देना जरुरी होता है।
ऐसे केसेस में डॉक्टर MRI, डॉपलर, और ज़रूरत पड़े तो बायोप्सी करवाते हैं।
ट्रीटमेंट सिस्ट के टाइप, साइज़, और सिम्पटम्स पर डिपेंड करता है।
फंक्शनल सिस्ट आमतौर पर फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं डालती। यह ओवरी की नॉर्मल एक्टिविटी का हिस्सा है। कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट तो अर्ली प्रेगनेंसी में बनती ही है और यह अच्छा साइन है। लेकिन कुछ सिस्ट फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं।
एंडोमेट्रियोमा ओवेरियन रिज़र्व को कम कर सकती है। बड़ी एंडोमेट्रियोमा में सर्जरी से पहले डॉक्टर AMH टेस्ट करवाते हैं ताकि एग रिज़र्व चेक हो सके। IVF से पहले सिस्ट हटाना ज़रूरी है या नहीं, यह डॉक्टर तय करते हैं।
बड़ी सिस्ट ओवरी के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है, जिससे ओवुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में फॉलिकल मॉनिटरिंग (follicular monitoring) से साइकिल को ट्रैक किया जाता है।
IVF साइकिल में एडनेक्सल सिस्ट मिले तो डॉक्टर पहले इसे सही करते हैं। Stimulation शुरू करने से पहले सिस्ट 2 सेमी से छोटी या फंक्शनल होनी चाहिए।
एडनेक्सल सिस्ट नाम सिर्फ उसकी लोकेशन बताता है, गंभीरता नहीं। ज़्यादातर सिस्ट सामान्य होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। फर्क इस बात से पड़ता है कि सिस्ट का टाइप और साइज क्या है।
रिपोर्ट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर से समझें कि सिस्ट कैसी है और क्या सिर्फ़ मॉनिटरिंग काफी है या इलाज जरूरी है। सही गाइडेंस के साथ स्थिति संभाली जा सकती है और फर्टिलिटी भी सुरक्षित रहती है।