पहली बार IVF फेल होना किसी भी कपल के लिए बहुत मुश्किल होता है। लेकिन एक बात जानना ज़रूरी है कि पहली साइकल का फेल होना बहुत कॉमन है और इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि अब कभी प्रेगनेंसी नहीं होगी।
बहुत से कपल्स दूसरी या तीसरी कोशिश में सफल होते हैं। First ivf failed when to try again in hindi आर्टिकल में आइए जानते हैं कि दोबारा कोशिश कब शुरू करें, दूसरी बार में डॉक्टर ट्रीटमेंट में क्या बदलाव करते हैं, और आप अपनी तरफ़ से क्या कर सकते हैं कि यह कोशिश फ़ेल न हो।
जब IVF का रिजल्ट नेगेटिव आता है, तो डॉक्टर सबसे पहले पूरी साइकल की रिव्यू मीटिंग करते हैं। वे देखते हैं कि दवाइयों पर बॉडी ने कैसा रिस्पॉन्स दिया, कितने एग्स मिले, फर्टिलाइजेशन (fertilization) कैसा रहा, एम्ब्रीओ (embryo) की ग्रोथ कैसी थी, और यूट्रस (uterus) की लाइनिंग कैसी बनी थी।
यह रिव्यू बहुत ज़रूरी होती है क्योंकि हर फेल साइकल से डॉक्टर को आपकी कुछ न कुछ जानकरी मिलती है। हो सकता है एग्स कम बने हों, या एम्ब्रीओ की क्वालिटी अच्छी न रही हो, या यूटरस की लाइनिंग पतली रह गई हो। डॉक्टर इन सब सवालों के जवाब के आधार पर अगली साइकल का प्लान बनाते हैं।
आम तौर पर यह रिव्यू रिजल्ट आने के 2 से 4 वीक बाद होता है। इसीलिए इस मीटिंग में आप अपने सारे सवाल लिखकर ले जाएँ ताकि कुछ छूटे नहीं।
IVF की दवाइयाँ बॉडी पर काफी असर डालती हैं।
इसीलिए दोबारा कोशिश शुरू करने से पहले बॉडी को रिकवर होने का पूरा मौका देना चाहिए। ज़्यादातर डॉक्टर कम से कम एक पूरी पीरियड्स साइकल (menstrual cycle) का इंतज़ार करने को कहते हैं, यानी लगभग 4 से 6 वीक के बाद ही फिर से कोशिश की जाती है।
कुछ केसों में जैसे अगर ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन (OHSS) ज़्यादा रहा हो या बॉडी में सूजन आई हो, तो 2 से 3 महीने का अंतर रखना सही होता है।
अगर फ्रोज़न एम्ब्रीओ पहले से उपलब्ध हैं, तो दोबारा एग्स निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ऐसे में अगली साइकल में ही फ्रोज़न एम्ब्रीओ ट्रांसफर (FET) किया जा सकता है, जिसमें बॉडी पर बहुत कम बोझ पड़ता है।
दूसरा IVF शुरू करने से पहले डॉक्टर यह देखते हैं कि शरीर पिछली साइकल से पूरी तरह रिकवर हुआ है या नहीं। सबसे पहले ओवरी का साइज़ नॉर्मल होना चाहिए, पीरियड्स वापस अपनी नियमित रिदम में आ गए हों, और अंदर कोई सिस्ट या सूजन न बची हो।
इसके साथ ब्लड टेस्ट से हॉर्मोन लेवल चेक किए जाते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि शरीर अगली साइकल के लिए तैयार है या नहीं। अगर ज़रूरत लगे तो डॉक्टर यूटेरस के अंदर की स्थिति देखने के लिए हिस्टेरोस्कोपी भी सलाह दे सकते हैं।
लेकिन सिर्फ शरीर ही नहीं, अगली कोशिश के लिए आप मानसिक रूप से भी तैयार होने चाहिए। अगर आप मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं, तो थोड़ा समय लेना सही रहता है, क्योंकि IVF में धैर्य और स्थिरता बहुत मायने रखते हैं।
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दूसरी IVF साइकल में डॉक्टर पहली बार के अनुभव को ध्यान में रखकर बदलाव करते हैं, ताकि वही समस्या दोबारा न आए।
IVF फेल होने के बाद उदासी, गुस्सा, और ख़ुद पर शक होना बिल्कुल नेचुरल है। इसे दबाएँ नहीं, अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। बहुत से कपल्स इस दौर में एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं, जबकि ज़रूरत इसके उलटी होती है।
काउंसलिंग लेना कमज़ोरी नहीं है, बल्कि समझदारी है। कई क्लीनिक में साइकोलॉजिकल सपोर्ट उपलब्ध होता है। सपोर्ट ग्रुप्स से भी मदद मिलती है जहाँ ऐसे ही एक्सपीरियंस से गुज़र रहे लोग मिलते हैं।
अपने लिए टाइम निकालें। वो काम करें जिनसे मन हल्का लगता है। छुट्टी लें, कहीं घूमने जाएँ, या कोई नई हॉबी शुरू करें। दूसरी साइकल में तब जाएँ जब शरीर के साथ मन भी इसके लिए तैयार हो।
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याद रखें कि दूसरी बार सफलता की संभावना अक्सर बेहतर होती है, क्योंकि अब डॉक्टर के पास आपकी बॉडी का पिछला अनुभव होता है और उसी आधार पर ट्रीटमेंट को बेहतर किया जाता है।
पहला IVF फेल होने के बाद अगली कोशिश कब करनी है, यह सिर्फ कैलेंडर देखकर तय नहीं होता। असली सवाल यह होता है कि पिछली साइकल में मुश्किल कहाँ आई थी एग कम बने, फर्टिलाइजेशन नहीं हुआ, या एम्ब्रीओ जुड़ा नहीं। इसी के आधार पर अगली साइकल प्लान की जाती है।
First IVF failed when to try again in hindi का जवाब यही है कि जब शरीर सामान्य हो, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है कि प्लान क्लियर हो। बिना बदलाव के दोबारा शुरू करना अक्सर वही रिज़ल्ट देता है। इसलिए हर अगली कोशिश पिछले अनुभव पर आधारित होनी चाहिए।
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