सारांश (Overview)
एबॉर्शन के बाद शरीर दो चीजों से गुजरता है, खून की कमी और हार्मोन का अचानक बदलाव। इन्हीं से कमजोरी, थकान और चक्कर जैसी शिकायतें होती हैं, और यहीं खानपान असल में फर्क डालता है। यहां सबसे पहले एक बात साफ कर लें। कोई भी खाना ब्लीडिंग रोकने या गर्भाशय साफ करने का काम नहीं करता, इसलिए ऐसी सलाह पर भरोसा न करें। डाइट का असली काम इतना है कि खून दोबारा बनने में मदद मिले, टिश्यू की मरम्मत हो और शरीर की ताकत लौटे। abortion ke baad kya khana chahiye इसका जवाब भी इसी हिसाब से बनता है, यानी आयरन, प्रोटीन, फोलेट, विटामिन B12 और विटामिन C वाली चीजें। आगे हम विस्तार से देखेंगे कि इनमें क्या-क्या शामिल है, पानी कितना जरूरी है, किन चीजों से दूरी रखें, यह डाइट कितने दिन जारी रखनी है, और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
एबॉर्शन के बाद रिकवरी के लिए डाइट में जो चीजें सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं, वे सब रोज के घरेलू खाने में ही मिल जाती हैं।
ब्लीडिंग के साथ शरीर से आयरन भी जाता है, इसलिए इसकी भरपाई सबसे जरूरी है। हरी सब्जियां, चना, राजमा, गुड़, खजूर और अंडा इसके अच्छे स्रोत हैं। मीट और मछली से मिलने वाला आयरन शरीर और आसानी से सोखता है।
प्रोटीन का काम टिश्यू की मरम्मत करना है, इसलिए हर खाने में प्रोटीन को शामिल करें। दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, चिकन, फिश, मीट और सोयाबीन आसान विकल्प हैं। कमजोरी ज्यादा हो तो दिन में दो बार दूध या दाल का पानी लेना मदद करता है।
खून बनाने के लिए आयरन के साथ फोलेट और विटामिन B12 दोनों जरुरी होते हैं। पालक, मेथी और बीन्स में फोलेट मिलता है, जबकि B12 मुख्य रूप से दूध, दही, अंडा और मीट से आता है। शुद्ध शाकाहारी महिलाओं में B12 की कमी आम है, इसलिए जांच करवा लेना ठीक रहता है।
यह सिर्फ इम्यूनिटी के लिए जरुरी नहीं है। विटामिन C प्लांट से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बढ़ा देता है, इसलिए दाल या सब्जी के साथ नींबू निचोड़ना या बाद में संतरा और आंवला लेना सीधा फायदा देता है।
दूध, दही, पनीर, तिल और रागी इसके अच्छे स्रोत हैं। पर ध्यान रखें, कैल्शियम आयरन के अवशोषण में रुकावट डालता है, इसलिए दूध और दही खाने के साथ नहीं, अलग समय पर लें।
पोषक तत्व | क्या खाएं | शरीर में काम |
|---|---|---|
आयरन | हरी सब्जियां, चना, गुड़, खजूर, अंडा | खून दोबारा बनाना |
प्रोटीन | दालें, दूध, पनीर, सोयाबीन | टिश्यू की मरम्मत |
फोलेट | पालक, मेथी, बीन्स | नई रेड ब्लड सेल्स बनाना |
विटामिन B12 | दूध, दही, अंडा, मीट | खून बनने की प्रक्रिया पूरी करना |
विटामिन C | नींबू, संतरा, आंवला, टमाटर | आयरन का अवशोषण बढ़ाना |
कैल्शियम | दूध, दही, तिल, रागी | हड्डियों की मजबूती |
एबॉर्शन के समय होने वाली ब्लीडिंग की वजह से शरीर का फ्लूइड भी बाहर निकल जाता है, और पानी की कमी होने पर थकान और चक्कर बढ़ जाते हैं। इसीलिए दिनभर थोड़ा थोड़ा पानी पीती रहें। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, सूप और दाल का पानी भी हाइड्रेशन के अच्छे ऑप्शन हैं, और विटामिन C वाला जूस आयरन के अवशोषण में भी मदद करता है।
पानी सही मात्रा में जा रहा है या नहीं, यह पेशाब के रंग से आसानी से समझ आ जाता है। रंग हल्का पीला हो तो ठीक है, और गाढ़ा पीला दिखे तो तरल बढ़ाने की जरूरत है।
चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन आयरन का अवशोषण घटा देते हैं, इसलिए इन्हें खाने के एक घंटा पहले या बाद तक टालना बेहतर होता है।
इस विषय पर कई पुरानी धारणाएं चलती हैं, इन्हें भी समझकर गलतफहमी दूर कर लें।
आम धारणा | असल में क्या है |
|---|---|
कोई खास चीज खाने से बचा हुआ टिश्यू निकल जाता है | ऐसा नहीं होता, इसके लिए जांच और इलाज होता है |
ठंडी चीजें खाने से ब्लीडिंग बढ़ती है | खाने के तापमान का ब्लीडिंग से कोई संबंध नहीं |
पपीता या अनानास खाने से नुकसान होता है | सामान्य मात्रा में इनका कोई अलग नुकसान नहीं माना जाता |
पानी कम पीने से ब्लीडिंग जल्दी रुकती है | उल्टा असर होता है, कमजोरी और चक्कर बढ़ते हैं |
ताकत के लिए कोई खास टॉनिक जरूरी है | संतुलित खाना और डॉक्टर की दी दवा ही काफी है |
सबसे जरूरी समय पहले के दो हफ्ते होते हैं, क्योंकि ब्लीडिंग आमतौर पर इसी दौरान होती है। परन्तु आयरन की कमी पूरी करने में इससे ज्यादा समय लगता है, इसलिए डाइट दो हफ्ते पर बंद न करें।
व्यावहारिक तरीका यह है कि अगला पीरियड आने तक, यानी करीब चार से छह हफ्ते तक, आयरन और प्रोटीन वाली डाइट जारी रखें। अगर हीमोग्लोबिन पहले से कम रहा है या डॉक्टर ने आयरन की टैबलेट दी है, तो कोर्स पूरा करें और बीच में बंद न करें।
समय | खानपान में क्या ध्यान रखें |
|---|---|
पहला हफ्ता | हल्का, आसानी से पचने वाला खाना, पर्याप्त तरल |
दूसरा हफ्ता | आयरन और प्रोटीन वाली चीजें बढ़ाएं |
तीसरे से छठे हफ्ते | सामान्य संतुलित डाइट, आयरन जारी रखें |
अगला पीरियड आने के बाद | हीमोग्लोबिन जांच करवा लें |
पहले दो-तीन दिन आराम को प्राथमिकता दें और भारी वजन उठाने से बचें। नींद पूरी लेना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि शरीर की मरम्मत इसी दौरान होती है।
दर्द की दवा और एंटीबायोटिक जो भी दी गई हैं, उन्हें बताए तरीके से पूरा करें। आराम लगने पर बीच में बंद करना ठीक नहीं। ब्लीडिंग बंद होने तक पैड इस्तेमाल करें, टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप नहीं, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है।
हल्का काम दो-तीन दिन में शुरू कर सकते हैं, और भारी एक्सरसाइज ब्लीडिंग बंद होने के बाद। शारीरिक संबंध बनाना भी ब्लीडिंग रुकने तक, यानी करीब एक से दो हफ्ते, टालने की सलाह दी जाती है।
ओव्यूलेशन एबॉर्शन के करीब दस दिन से दो हफ्ते में हो सकता है, यानी पहला पीरियड आने से पहले ही दोबारा प्रेग्नेंसी संभव है। इसलिए गर्भनिरोधक के सम्बन्ध में डॉक्टर से बात जरूर करें। और मन उदास बना रहे या नींद न आए, तो इसे भी उतनी ही गंभीरता से लें।
इनमें से कुछ भी हो तो अगले दिन का इंतजार न करें, क्योंकि समय पर पकड़ी गई जटिलताएं आसानी से ठीक हो जाती हैं।
एबॉर्शन के बाद डाइट का काम सिर्फ ब्लीडिंग रोकना नहीं, बल्कि शरीर में हुई खून और ताकत की कमी को पूरा करना है। इसके लिए आयरन, प्रोटीन, फोलेट, विटामिन B12, विटामिन C और कैल्शियम जरूरी हैं। हरी सब्जियां, दालें, दूध, दही, अंडे और गुड़ से ये पोषक तत्व मिल सकते हैं। विटामिन C आयरन के अवशोषण में मदद करता है, जबकि चाय, कॉफी और कैल्शियम इसे कम कर सकते हैं। इसलिए इन्हें अलग समय पर लें। पर्याप्त पानी और फ्लूइड्स भी जरूरी हैं। साथ में आराम करें, दवाओं का कोर्स पूरा करें और ज्यादा ब्लीडिंग, बुखार या बदबूदार डिस्चार्ज हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।