Ivf Success Rate In Hindi -क्या IVF वाकई में सक्सेस होती है?

Last updated: May 14, 2026

Overview

जब कोई कपल IVF के बारे में सोचता है, तो पहला सवाल यही होता है कि इसमें सफलता के चांसेस कितने हैं। यह सवाल बिल्कुल सही है। IVF एक बड़ा आर्थिक, शारीरिक और इमोशनल कमिटमेंट है, इसलिए सही उम्मीद रखना ज़रूरी है। सच यह है कि IVF success rate कोई फिक्स्ड नंबर नहीं है। यह उम्र, हेल्थ, क्लिनिक की एक्सपर्टीज़, और कई दूसरे फैक्टर्स पर निर्भर करती है। ivf success rate in hindi आर्टिकल में IVF के द्वारा संतान प्राप्त करने के कितने चांस होते हैं इस बात की प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी ताकि आप सही फैसला ले सकें।

IVF Success Rate और इसे मापने का तरीका

IVF की सक्सेस रेट का मतलब है कि एक साइकल में प्रेगनेंसी होने या बच्चा पैदा होने का चांस कितना है। लेकिन इसे समझने के लिए एक बात साफ़ करना ज़रूरी है कि सक्सेस का मतलब हर जगह एक जैसा नहीं होता।

इसे आमतौर पर दो तरीकों से मापा जाता है। पहला होता है प्रति साइकल, यानी एक बार एम्ब्रीओ ट्रांसफर में प्रेगनेंसी होने का चांस कितना है। दूसरा होता है क्यूमुलेटिव, यानी अगर आप 2 से 3 साइकल करते हैं तो कुल मिलाकर सफलता की संभावना कितनी हो जाती है।

एक और ज़रूरी फर्क यहाँ समझना चाहिए। प्रेगनेंसी रेट का मतलब है कि टेस्ट पॉज़िटिव आया, जबकि लाइव बर्थ रेट का मतलब है कि बच्चा सुरक्षित जन्मा। कई बार क्लिनिक प्रेगनेंसी रेट बताते हैं, जो सुनने में ज़्यादा लगता है, लेकिन असली महत्त्व लाइव बर्थ रेट का होता है।

उम्र के अनुसार IVF Success Rate

IVF में सबसे बड़ा फैक्टर महिला की उम्र है, क्योंकि इसका सीधा कनेक्शन एग की क्वालिटी से है। एक महिला जन्म से ही सारे एग्स लेकर पैदा होती है। उम्र बढ़ने के साथ एग्स की संख्या और क्वालिटी दोनों कम होती जाती हैं।

  • 30 साल से पहले IVF success rate लगभग 40 से 50 प्रतिशत प्रति साइकल होती है।
  • 30 से 34 साल में 35 से 45 प्रतिशत।
  • 35 से 37 में 30 से 40 प्रतिशत।
  • 38 से 40 में 20 से 25 प्रतिशत। 40 के बाद तेज़ी से गिरती है
  • 43 के बाद अपने एग्स से 5 प्रतिशत से भी कम रह जाती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उम्र के साथ एग्स में क्रोमोसोमल (chromosomal) एबनॉर्मेलिटीज़ बढ़ जाती हैं। इम्प्लांटेशन (implantation) के चांसेस कम होते हैं, और मिसकैरेज (miscarriage) का रिस्क बढ़ जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुष की फर्टिलिटी भी प्रभावित होती है, लेकिन उतनी तेज़ी से इस पर असर नहीं पड़ता। इसलिए IVF ट्रीटमेंट करवाने का फैसला लेने में देर न करें, क्योंकि जितनी जल्दी ट्रीटमेंट शुरू होगा सक्सेस के चांसेस होंगे।

सक्सेस रेट को कम या ज़्यादा करने वाले फैक्टर्स

  • उम्र के अलावा एग की क्वालिटी और ओवेरियन रिज़र्व IVF के रिज़ल्ट को सीधे प्रभावित करते हैं, जिन्हें AMH टेस्ट और एंट्रल फॉलिकल काउंट से समझा जाता है।
  • अच्छे ओवेरियन रिज़र्व में ज़्यादा एग्स मिलते हैं, जिससे अच्छे एम्ब्रीओ बनने के चांस बढ़ते हैं।
  • स्पर्म की क्वालिटी भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि कम काउंट या कम मोटिलिटी होने पर फर्टिलाइजेशन में दिक्कत आती है और ऐसे केसों में ICSI की जरूरत पड़ सकती है।
  • यूट्रस की हेल्थ बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि फ़ाइब्रॉइड, पॉलिप या पतली एंडोमेट्रियम एम्ब्रीओ के इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकते हैं।
  • लाइफस्टाइल फैक्टर्स जैसे स्मोकिंग, ज़्यादा अल्कोहल, मोटापा, ज़्यादा तनाव और खराब नींद IVF की सफलता को कम कर सकते हैं।
  • कुछ मेडिकल कंडीशन्स जैसे गंभीर एंडोमेट्रियोसिस, अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़ या थायरॉइड की समस्या भी ivf success rate पर नेगेटिव असर डालती हैं।
  • क्लिनिक और मेडिकल टीम का अनुभव भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सही लैब कंडीशन और एक्सपर्ट हैंडलिंग से बेहतर रिज़ल्ट मिलते हैं।

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पहली कोशिश में सफलता न मिले तो

IVF में पहली कोशिश में सफलता न मिलना बहुत कॉमन होता है। इसका मतलब यह नहीं कि अब कभी प्रेगनेंसी नहीं होगी। असल में, बहुत सारे कपल को दूसरी या तीसरी कोशिश में ही सफलता मिलती है।

जब पहला साइकल फेल होता है, तो डॉक्टर केस रिव्यू करते हैं। वे देखते हैं कि एग्स कम मिले या फर्टिलाइज़ेशन (fertilization) में दिक्कत थी, एम्ब्रीओ (embryo) की क्वालिटी कैसी थी, या इम्प्लांटेशन फेल हुआ।

इन सवालों के बेसिस पर अगले साइकल की स्ट्रैटेजी बनाई जाती है। कई बार प्रोटोकॉल (protocol) बदला जाता है या PGT यानी प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (Preimplantation Genetic Testing) जैसे टेस्ट की सलाह दी जाती है।

भावनात्मक रूप से भी, पहली साइकल फ़ेल होने के बाद कुछ टाइम का ब्रेक लेना ज़रूरी है। काउंसलिंग या सपोर्ट ग्रुप से मदद लेना भी अच्छा रहता है।

एक से ज़्यादा साइकल क्यों लगती हैं?

कई कपल को सुनकर हैरानी होती है कि IVF में 2 या 3 साइकल लग सकती हैं। इसके कुछ बायोलॉजिकल कारण होते हैं।

  • हर साइकल में एग्स की क्वालिटी एक जैसी नहीं होती, इसलिए हर बार बने एम्ब्रीओ की क्षमता भी बदल सकती है।
  • इम्प्लांटेशन एक कॉम्प्लेक्स प्रक्रिया है, जिसमें सब कुछ सही होने के बाद भी कुछ अनदेखे फैक्टर्स असर डाल सकते हैं।
  • हर IVF साइकल से डॉक्टर को आपके बारे में नई जानकारी मिलती है, जिससे अगली बार ट्रीटमेंट की प्लानिंग और अच्छी बनाई जा सके।

क्यूमुलेटिव success rate के हिसाब से, 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में 2 से 3 साइकल के बाद सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए IVF शुरू करते समय मानसिक और आर्थिक रूप से एक से ज़्यादा कोशिशों के लिए तैयार रहना ज़रूरी होता है।

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IVF success rate बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकते हैं

कुछ फैक्टर्स आपके कंट्रोल में नहीं हैं लेकिन बहुत कुछ आप खुद कर सकती हैं।

  • हेल्दी वेट मेंटेन करें और BMI को 19 से 25 के बीच रखने की कोशिश करें।
  • स्मोकिंग और अल्कोहल IVF से कम से कम 3 महीने पहले बंद कर दें, क्योंकि ये एग और स्पर्म की क्वालिटी को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • बैलेंस्ड डाइट लें जिसमें प्रोटीन, फल, हरी सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स शामिल हों, ताकि शरीर को सही पोषण मिल सके।
  • प्रोसेस्ड फूड और ज़्यादा शुगर कम करें, क्योंकि ये इंसुलिन और हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह से फ़ॉलिक एसिड (folic acid) लेना शुरू करें, क्योंकि यह एग क्वालिटी और शुरुआती प्रेगनेंसी सपोर्ट में मदद करता है।
  • हल्की एक्सरसाइज़ जैसे वॉकिंग, योगा या स्विमिंग नियमित करें, लेकिन हेवी वर्कआउट से बचें ताकि शरीर पर ज़्यादा स्ट्रेस न पड़े।
  • स्ट्रेस मैनेज करें, क्योंकि मानसिक तनाव हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए मेडिटेशन या काउंसलिंग मददगार हो सकती है।
  • रोज़ 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें, क्योंकि सही नींद शरीर की रिकवरी और हार्मोन बैलेंस के लिए जरूरी है।

सबसे ज़रूरी बात, डॉक्टर की हर सलाह को सही तरीके से फॉलो करें, दवाइयाँ समय पर लें और कोई भी अपॉइंटमेंट मिस न करें, क्योंकि IVF में टाइमिंग बहुत मायने रखती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

IVF Success rate कई फ़ैक्टर्स पर निर्भर करती है। जैसे आपकी उम्र, एग और स्पर्म की क्वालिटी, एम्ब्रीओ की क्वालिटी, और यूट्रस की कंडीशन इत्यादि के आधार पर सक्सेस रेट तय होती है। इसलिए दो अलग महिलाओं या कपल्स में रिज़ल्ट अलग हो सकते हैं।

उम्र सबसे बड़ा फैक्टर है, लेकिन लाइफस्टाइल, हेल्थ, और सही मेडिकल केयर भी काफ़ी महत्वपूर्ण होते हैं। सही उम्मीद के साथ ट्रीटमेंट शुरू करें। सही प्लानिंग और सपोर्ट के साथ सफलता के चांसेस काफ़ी बढ़ जाते हैं।

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IVF Success rate के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

एवरेज IVF success rate कितनी होती है?

क्या 40 के बाद IVF सक्सेसफुल हो सकता है?

IVF success पर सबसे ज़्यादा कौन-सा फैक्टर असर डालता है?

अगर पहला IVF साइकल फेल हो जाए, तो दूसरा कब करना चाहिए?

कितनी साइकल के बाद IVF छोड़ देना चाहिए?

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