प्रेग्नेंसी की असली शुरुआत इम्प्लांटेशन से मानी जाती है। यह वह समय है जब एम्ब्रियो (भ्रूण) गर्भाशय की दीवार (Uterine Lining) से चिपककर वहां “सेटल” हो जाता है, फिर चाहे वह प्राकृतिक रूप से गर्भधारण हो या IVF के जरिए। कुछ महिलाओं को इस दौरान हल्के लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन इनके समय और तीव्रता में काफी फर्क हो सकता है।
शुरुआती इम्प्लांटेशन संकेतों को पहचान लेना कई बार मन को राहत देता है, लेकिन यह भी सच है कि हर महिला को ये लक्षण महसूस
नहीं होते। इस ब्लॉग में हम इम्प्लांटेशन के आम संकेत, IVF से जुड़े खास लक्षण, और प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का सही समय, सब आसान भाषा में समझेंगे।
कंसीविंग की सबसे खास स्टेज में से एक है इम्प्लांटेशन। इसमें निषेचित अंडा (Fertilised Egg) गर्भाशय की परत में जाकर “जुड़” जाता है और एक सुरक्षित एवं मजबूत संबंध बना लेता है। इस प्रक्रिया से भ्रूण (embryo) को जरूरी पोषक तत्व और हार्मोन मिलने लगते हैं। साथ ही, यह शरीर को संकेत देता है कि वह गर्भावस्था के लिए खुद को तैयार करना शुरू कर दे।
इम्प्लांटेशन के समय कुछ महिलाओं को हल्की स्पॉटिंग दिख सकती है, हल्के क्रैम्प्स महसूस हो सकते है, या बस अपनी एनर्जी लेवल या मूड में छोटा सा बदलाव महसूस हो सकता है। यह वही अहम पल होता है जो तय करता है कि प्रेग्नेंसी आगे बढ़ेगी या नहीं।
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इंप्लांटेशन के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं। हर महिला को ये लक्षण महसूस हों, यह जरूरी नहीं है, लेकिन इसके कुछ सबसे सामान्य लक्षण यहाँ दिए गए हैं:
इम्प्लांटेशन के ये लक्षण एक उत्साहजनक संकेत हैं, लेकिन याद रखें कि ये हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकते हैं और जरूरी नहीं कि सबको महसूस हों।
सफल इम्प्लांटेशन (भ्रूण के गर्भाशय में जुड़ने) के बाद, शरीर में हार्मोनल बदलाव बढ़ जाते हैं ताकि शुरुआती गर्भावस्था के लिए अनुकूल स्थिति बन सके। हालांकि हर महिला के अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन इम्प्लांटेशन के सफल होने के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
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IVF में दी जाने वाली दवाएं कई बार प्रेग्नेंसी जैसे लक्षण पैदा कर सकती हैं, इसलिए यह समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि जो महसूस हो रहा है, वह सच में इम्प्लांटेशन का संकेत है या दवाओं का असर। फिर भी कुछ आम संकेत हैं जिन पर आप ध्यान दे सकती हैं:
IVF के बाद हर छोटा क्रैम्प या स्पॉटिंग “बहुत बड़ा संकेत” लग सकता है। ऐसे में अपनी क्लिनिक या डॉक्टर के संपर्क में रहें; वे आपको यह समझने में मदद करेंगे कि कौन से लक्षण सामान्य हैं और आगे क्या करना है।
इम्प्लांटेशन के संकेत महसूस होते ही टेस्ट करने का मन होता है, लेकिन थोड़ा रुकना बेहतर रहता है। प्रेग्नेंसी हार्मोन, खासकर hCG टेस्ट में तुरंत नहीं दिखता। कुछ दिन रुक कर टेस्ट करने से नतीजे ज़्यादा सही आते हैं।
जहाँ प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने पर होम प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का सबसे सही समय आपके पीरियड मिस होने के आसपास का होता है, वहीं IVF के मामले में फर्टिलिटी क्लिनिक आमतौर पर एम्ब्रियो ट्रांसफर के 10-14 दिन बाद Beta hCG ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं जो सबसे सटीक नतीजा देता है; इसलिए इस समय थोड़ा धैर्य रखने से आपको स्पष्ट जवाब और मानसिक शांति मिलेगी।
इम्प्लांटेशन जैसे संकेत दिखना वाकई उत्साह बढ़ाने वाला होता है, यह माता-पिता बनने की उम्मीद की पहली झलक जैसा लग सकता है। लेकिन ध्यान रखें, ये लक्षण प्रेग्नेंसी की पक्की पुष्टि नहीं होते।
सही पुष्टि के लिए मेडिकल टेस्ट और योग्य डॉक्टर/फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह जरूरी है। चाहे गर्भधारण नेचुरली हुआ हो या IVF के जरिए, शुरुआती संकेतों को पहचानना आपको जागरूक रखता है और आपकी फर्टिलिटी जर्नी में सही कदम उठाने में मदद करता है।
शुरुआती लक्षणों के तौर पर आप हल्का दाग (Spotting), पेट में हल्की ऐंठन, स्तनों में भारीपन या थकान महसूस कर सकती हैं। लगभग 1-2 हफ्ते बाद, एक पॉजिटिव टेस्ट इस बात की पुष्टि कर सकता है कि इम्प्लांटेशन सफल रहा है।
हाँ, कुछ महिलाओं को हल्का दर्द और स्पॉटिंग पीरियड्स जैसी लग सकती है, लेकिन आमतौर पर यह बहुत हल्का और कम समय का होता है।
यह दर्द आमतौर पर पेट के निचले हिस्से या कमर के निचले हिस्से में महसूस होता है, जो बिल्कुल पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द (क्रैम्प्स) जैसा लगता है।
आमतौर पर ओव्यूलेशन के लगभग 6–10 दिन बाद (या IVF में ट्रांसफर के 5–10 दिन बाद) कुछ लक्षण दिख सकते हैं।
प्राकृतिक रूप से गर्भधारण (Natural Conception) में इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया बिना किसी डॉक्टरी मदद के शरीर के अंदर अपने आप होती है। इसके विपरीत, IVF इलाज में भ्रूण (Embryo) को बाहर से गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है, और इस दौरान दी जाने वाली सहायक दवाओं का असर आपके लक्षणों पर पड़ सकता है।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग आमतौर पर बहुत हल्की, 1–2 दिन की, गुलाबी/भूरी होती है; जबकि पीरियड्स का फ्लो ज्यादा और लंबे समय का होता है।
यह आमतौर पर गहरा लाल होने के बजाय हल्का गुलाबी या भूरा होता है।