मिसकैरेज कैसे होता है कारण, लक्षण, और आगे क्या करें (Miscarriage kaise hota hai)

Last updated: February 19, 2026

Overview

प्रेगनेंसी की खबर जितनी खुशियां लाती है, उसका अचानक खत्म हो जाना उतना ही बड़ा खालीपन दे जाता है। मिसकैरेज (Miscarriage) यानि गर्भपात सिर्फ एक मेडिकल टर्म नहीं है, बल्कि एक टूटते हुए सपने का दुख है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। सबसे तकलीफदेह बात यह है कि कई बार इस दुख के साथ एक 'अपराध बोध' यानी गिल्ट (guilt) भी जुड़ जाता है जब महिला को लगने लगता है कि कहीं उसकी ही किसी गलती या लापरवाही की वजह से ऐसा न हो गया हो। सच तो यह है कि miscarriage kaise hota hai, इसे गहराई से समझना आपको इस मानसिक बोझ से आज़ाद कर सकता है। क्योंकि आधे से ज्यादा मामलों में गर्भपात पर आपका कोई बस नहीं होता। कुदरती तौर पर, जब भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) के बनने में कोई जेनेटिक या क्रोमोसोम से सम्बंधित गड़बड़ी रह जाती है, तो शरीर खुद ही उस प्रेगनेंसी को आगे नहीं बढ़ाता। यह आर्टिकल miscarriage kaise hota hai को जानने और दोबारा एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ने का रास्ता दिखायेगा। इस लेख का सार (Take Away): यहाँ आप जानेंगे कि मिसकैरेज के पीछे क्या कारण होते हैं, इसके शरीर में दिखने वाले शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और अगर किसी को बार-बार यह समस्या हो रही है, तो इसका इलाज क्या है।

मिसकैरेज क्या होता है? (What is Miscarriage)

मिसकैरेज यानी गर्भपात तब होता है जब प्रेगनेंसी के पहले 20 हफ्तों में भ्रूण अपने आप गिर जाता है या उसका विकास रुक जाता है। ज़्यादातर मिसकैरेज पहले 12 हफ्तों यानी पहली तिमाही में होते हैं।

यह जानना ज़रूरी है कि मिसकैरेज बहुत कॉमन है। :विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और क्लिनिकल डेटा के अनुसार, लगभग 10% से 15% क्लिनिकल प्रेगनेंसी मिसकैरेज में समाप्त होती हैं। ज़्यादातर मामले पहली तिमाही (First 12 weeks) में देखे जाते हैं। कई बार तो महिला को पता भी नहीं चलता कि वो प्रेग्नेंट थी और मिसकैरेज हो गया एवं इसे पीरियड्स समझ लिया जाता है।

मिसकैरेज होने का मतलब यह नहीं कि आप दोबारा माँ नहीं बन सकतीं। ज़्यादातर महिलाएं मिसकैरेज के बाद सफलतापूर्वक प्रेग्नेंट होती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं।

Miscarriage kaise hota hai: इसके मुख्य कारण

यह सेक्शन उन महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी है जो समझना चाहती हैं कि miscarriage kaise hota hai और इसके पीछे क्या वजहें होती हैं।

क्रोमोसोमल असामान्यता

50% से ज़्यादा मिसकैरेज इसी वजह से होते हैं। जब एग और स्पर्म मिलते हैं और भ्रूण यानी एम्ब्रीओ बनता है, तो कभी-कभी क्रोमोसोम की संख्या में गड़बड़ी हो जाती है। ऐसे भ्रूण का विकास ठीक से नहीं हो पाता और शरीर उसे अपने आप रिजेक्ट कर देता है।

यह किसी की गलती नहीं होती यह प्रकृति का एक अस्वस्थ प्रेगनेंसी को रोकने का अपना तरीका है।

हॉर्मोनल असंतुलन

प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन प्रेगनेंसी को बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। अगर प्रोजेस्टेरोन कम हो तो एम्ब्रीओ यूट्रस में ठीक से इम्प्लांट नहीं हो पाता या टिक नहीं पाता। थायरॉइड की समस्या भी मिसकैरेज का कारण बन सकती है।

यूट्रस की समस्याएं

यूट्रस यानी गर्भाशय की संरचना में कोई दिक्कत हो जैसे सेप्टेट यूट्रस यानी बीच में पर्दा, फाइब्रॉइड, या यूट्रस का आकार असामान्य हो तो एम्ब्रीओ को इम्प्लांट होने या बढ़ने में दिक्कत आती है।

इंफेक्शन

कुछ इंफेक्शन जैसे रूबेला, टॉक्सोप्लाज़्मोसिस, या सीएमवी (CMV) प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकते हैं और मिसकैरेज का कारण बन सकते हैं।

लाइफस्टाइल फैक्टर्स

धूम्रपान, शराब का सेवन, बहुत ज़्यादा कैफीन, और ड्रग्स का उपयोग मिसकैरेज का खतरा बढ़ाते हैं। बहुत कम या बहुत ज़्यादा वज़न भी रिस्क फैक्टर है।

उम्र

35 साल के बाद मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि एग की क्वालिटी उम्र के साथ कम होती जाती है। 40 के बाद यह खतरा और भी ज़्यादा होता है।

ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर

एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम (APS) जैसी कंडीशन में खून के थक्के बनने की समस्या होती है जो प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो को प्रभावित करती है जिसके कारण मिसकैरेज हो सकता है।

मिसकैरेज के लक्षण क्या हैं?

मिसकैरेज के कुछ लक्षण हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। प्रेगनेंसी में हल्की स्पॉटिंग हमेशा मिसकैरेज नहीं होती। कई बार यह नॉर्मल होती है। लेकिन अगर ब्लीडिंग हो या दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

  • ब्लीडिंग: योनि मतलब वैजाइना (vagina) से खून आना मिसकैरेज का सबसे कॉमन लक्षण है। यह हल्की स्पॉटिंग से लेकर भारी ब्लीडिंग तक हो सकती है। ब्लीडिंग के साथ क्लॉट्स या टिशू भी आ सकते हैं।
  • पेट में दर्द और ऐंठन: पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द या क्रैम्प्स जो पीरियड्स के दर्द जैसे लगें लेकिन ज़्यादा तेज़ हों।
  • कमर में दर्द: पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द भी मिसकैरेज का लक्षण हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के लक्षणों का अचानक गायब होना: अगर जी मिचलाना, ब्रेस्ट में भारीपन जैसे लक्षण अचानक बंद हो जाएं तो वह मिसकैरेज के लक्षण हो सकते हैं।

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मिसकैरेज के प्रकार (Types of Miscarriage)

मिसकैरेज कई प्रकार के होते हैं, जैसे थ्रेटेंड (Threatened), इनएविटेबल (Inevitable), इनकम्प्लीट (Incomplete), कम्प्लीट (Complete) और मिस्ड मिसकैरेज (Missed Miscarriage)। हर प्रकार के लक्षण, कारण और इलाज अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए समय पर डॉक्टर से जांच और सही मार्गदर्शन बहुत ज़रूरी होता है।

थ्रेटेंड मिसकैरेज (Threatened Miscarriage)

इसमें हल्की ब्लीडिंग और दर्द होता है लेकिन सर्विक्स बंद रहता है और अल्ट्रासाउंड में एम्ब्रीओ ठीक दिखता है। सही इलाज और आराम से ऐसे मिसकैरेज को रोका जा सकता है।

मिस्ड मिसकैरेज (Missed Miscarriage)

इसमें एम्ब्रीओ की ग्रोथ रुक जाती है लेकिन शरीर उसे बाहर नहीं निकालता। महिला को कोई लक्षण नहीं दिखते और अल्ट्रासाउंड में ही पता चलता है कि बच्चे की हार्टबीट नहीं है। इसे साइलेंट मिसकैरेज भी कहते हैं।

इनकंप्लीट मिसकैरेज (Incomplete Miscarriage)

इसमें मिसकैरेज हो जाता है लेकिन कुछ टिशू यूट्रस में रह जाते हैं। इन्हें निकालने के लिए दवाई या प्रोसीजर की ज़रूरत पड़ती है।

कम्प्लीट मिसकैरेज (Complete Miscarriage)

इसमें सारा टिशू अपने आप बाहर आ जाता है और यूट्रस पूरी तरह खाली हो जाता है।

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मिसकैरेज के बाद क्या होता है?

मिसकैरेज के बाद शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह की देखभाल बहुत ज़रूरी है।

शारीरिक रिकवरी

मिसकैरेज के बाद कुछ दिनों तक ब्लीडिंग और क्रैम्प्स हो सकते हैं। डॉक्टर जाँच करके देखते हैं कि यूट्रस पूरी तरह खाली हो गया है या नहीं। अगर कुछ टिशू रह गया हो तो दवाई दी जाती है या D&C (डाइलेशन एंड क्यूरेटेज) प्रोसीजर किया जाता है।

आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में पीरियड्स वापस आ जाते हैं और शरीर नॉर्मल हो जाता है।

भावनात्मक रिकवरी

मिसकैरेज के बाद दुख, गुस्सा, अपराध बोध यानी गिल्ट (guilt), या खालीपन महसूस होना बिल्कुल नॉर्मल है। अपने आप को समय दें। पार्टनर, परिवार, या किसी काउंसलर से बात करें। यह समझें कि ज़्यादातर मिसकैरेज आपकी गलती से नहीं होते।

बार-बार मिसकैरेज हो तो क्या करें?

अगर किसी महिला को लगातार दो या तीन बार मिसकैरेज हो जाए, तो इसे रिकरेंट मिसकैरेज (Recurrent Miscarriage) कहते हैं। यह सेक्शन ऐसी महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी है।

डिटेल्ड जाँच करवाएं

बार-बार मिसकैरेज होने पर विस्तृत यानी डिटेल्ड जाँच करवाना ज़रूरी है।

  • बार-बार मिसकैरेज होने पर हॉर्मोन, थायरॉइड और ब्लड क्लॉटिंग (blood clotting) जैसे ज़रूरी ब्लड टेस्ट करवाएं।
  • बच्चेदानी की बनावट में किसी कमी या रुकावट को जानने के लिए HSG या हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy) जैसी जांच ज़रूरी है।
  • दोनों पार्टनर का जेनेटिक टेस्ट (Karyotype) करवाएं ताकि यह पता चल सके कि कहीं कोई आनुवंशिक समस्या तो नहीं है।

इलाज के ऑप्शन क्या हैं?

  • हॉर्मोन सपोर्ट: अगर प्रोजेस्टेरोन कम है तो सप्लीमेंट दिए जाते हैं।
  • ब्लड थिनर: APS जैसी कंडीशन में एस्प्रिन या हेपरिन दी जाती है।
  • सर्जरी: यूट्रस में सेप्टम या फाइब्रॉइड हो तो सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।
  • IVF with PGT: अगर कोई जेनेटिक कारण है तो IVF करवाकर एम्ब्रीओ की जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) की जाती है। इससे सिर्फ़ हेल्दी एम्ब्रीओ ट्रांसफर किए जाते हैं और मिसकैरेज का खतरा काफ़ी कम हो जाता है।

मिसकैरेज के बाद दोबारा प्रेगनेंसी कब प्लान करें?

एक मिसकैरेज के बाद अगली प्रेगनेंसी में सफलता की संभावना 85% से ज़्यादा होती है। दो मिसकैरेज के बाद भी 75% महिलाएं सफलतापूर्वक माँ बनती हैं।

ज़्यादातर डॉक्टर मिसकैरेज के बाद कम से कम एक नॉर्मल पीरियड साइकिल का इंतज़ार करने की सलाह देते हैं। शारीरिक रूप से 1 से 3 महीने में दोबारा कंसीव किया जा सकता है।

लेकिन आपको भावनात्मक रूप से तैयार होना भी उतना ही ज़रूरी है। जब आप और आपके पार्टनर दोनों मानसिक रूप से तैयार हों, तब दोबारा कोशिश करें।

एक्सपर्ट की सलाह (Conclusion)

अगर आपको मिसकैरेज हुआ है, तो अपने आप को दोष न दें। शरीर और मन दोनों को ठीक होने का समय दें। Miscarriage kaise hota hai जानने के बाद समझ आता है कि इसके कई कारण हैं जैसे क्रोमोसोम में गड़बड़ी, हॉर्मोनल असंतुलन, यूट्रस की समस्या, या लाइफस्टाइल से संबंधित कारण। लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि ज़्यादातर मिसकैरेज किसी की गलती नहीं होते।

अगर बार-बार मिसकैरेज हो रहा है, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें, आज IVF और PGT जैसी तकनीकों से रिकरेंट मिसकैरेज के बाद भी माँ बनना संभव है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

मिसकैरेज के बाद कितने दिन ब्लीडिंग होती है?

 

आमतौर पर 1-2 हफ्ते तक हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। अगर भारी ब्लीडिंग हो या बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

क्या मिसकैरेज को रोका जा सकता है?

 

ज़्यादातर मिसकैरेज क्रोमोसोम में गड़बड़ी से होते हैं जिन्हें रोकना संभव नहीं है। लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल, फोलिक एसिड लेना, और रेगुलर चेकअप से रिस्क कम किया जा सकता है।

मिसकैरेज के बाद कब दोबारा प्रेग्नेंट हो सकते हैं?

 

शारीरिक रूप से 1-3 महीने में। लेकिन डॉक्टर की सलाह लें और भावनात्मक रूप से भी तैयार होने का इंतज़ार करें।

बार-बार मिसकैरेज क्यों होता है?

 

जेनेटिक कारण, हॉर्मोनल असंतुलन, यूट्रस की समस्या, या ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर इसकी वजह हो सकते हैं। विस्तृत जाँच से कारण पता चलता है।

क्या IVF से मिसकैरेज का खतरा कम होता है?

 

IVF में PGT-A (जेनेटिक टेस्टिंग) करने से क्रोमोसोम की तरफ से हेल्दी एम्ब्रीओ चुने जाते हैं जिससे मिसकैरेज का खतरा काफ़ी कम हो जाता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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