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"बिना ज्यादा दवा वाला IVF" सुनकर यह आसान ऑप्शन लगता है, लेकिन नेचुरल साइकिल IVF, कन्वेंशनल IVF का लाइट वर्जन (light version) नहीं है। कन्वेंशनल IVF में कई फॉलिकल बढ़ाने के लिए पेशेंट को दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते हैं, जबकि नेचुरल साइकिल IVF में शरीर उस महीने जो एक एग खुद तैयार करता है, उसी का इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए दवाएं और इंजेक्शन भले कम इस्तेमाल होते हैं, लेकिन नेचुरल साइकिल IVF में एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें कई बार एग समय पर नहीं मिलता, जिससे उस महीने IVF आगे नहीं बढ़ पाता। आगे जानेंगे कि नेचुरल साइकिल IVF कैसे किया जाता है और यह किन लोगों के लिए सही विकल्प हो सकता है।
Natural cycle IVF यानी नेचुरल साइकिल आईवीएफ में फॉलिकल बढ़ाने के लिए फर्टिलिटी दवाएं नहीं दी जाती हैं। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और हार्मोन टेस्ट की मदद से देखते हैं कि एग कब तैयार हो रहा है। सही समय पर एग निकालकर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और बनने वाले एम्ब्रीओ को गर्भाशय यानी यूट्रस में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इसमें शरीर की अपनी नेचुरल साइकिल को ही फॉलो किया जाता है। एग रिलीज होने का सही समय तय करने के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिगर इंजेक्शन भी दिया जा सकता है। इसके बाद फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसे स्टेप्स कन्वेंशनल IVF की तरह ही होते हैं।
पूरा प्रोसेस चार स्टेप में होता है और पूरी IVF साइकिल एक ही महीने में कम्पलीट हो जाती है, क्योंकि नेचुरल साइकिल IVF में ओवरी स्टिमुलेशन का हफ्तों लंबा चलने वाला स्टेप इसमें होता ही नहीं है।
पीरियड शुरू होने के करीब आठवें से दसवें दिन से अल्ट्रासाउंड की सहायता से फॉलिकल की ग्रोथ देखी जाती है। साथ ही ब्लड टेस्ट से एस्ट्रोडियोल और LH देखे जाते हैं।
जब LH बढ़ता है तब पता लगता है कि ओव्यूलेशन होने वाला है। एग समय से पहले रिलीज न हो जाए, इसलिए सही समय पर एग निकालने के लिए ट्रैकिंग जरूरी होती है।
यहीं दो तरह के प्रोटोकॉल का अंतर भी आता है।
जब स्कैन में फॉलिकल मैच्योर हो जाता है, तब ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है और उसके करीब डेढ़ दिन बाद एग निकाला जाता है। यह वही प्रोसेस है जो कन्वेंशनल IVF में होता है, लेकिन इसमें एक ही फॉलिकल से एग निकाला जाता है। यह प्रोसेस आमतौर पर हल्की बेहोशी की दवा देकर किया जाता है।
कभी-कभी फॉलिकल होने के बावजूद एग नहीं मिलता। नेचुरल साइकिल IVF में इसका मतलब है कि उस साइकिल में आगे बढ़ने के लिए एग उपलब्ध नहीं होगा।
मिले हुए एग को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है, अक्सर ICSI की मदद से। इसके बाद कुछ दिनों तक देखा जाता है कि एम्ब्रियो बन रहा है और आगे बढ़ रहा है या नहीं।
एम्ब्रियो बन जाने पर आमतौर पर उसी साइकिल में उसे यूट्रस में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसका फायदा यह है कि गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम उसी महीने के प्राकृतिक हार्मोन से तैयार हुई होती है, न कि स्टिमुलेशन के बाद बनी हुयी। इसके बाद का प्रोसेस कन्वेंशनल IVF जैसा ही रहता है।
नेचुरल साइकिल IVF में फॉलिकल की ग्रोथ के लिए दवा नहीं दी जाती। उस महीने जो एग शरीर खुद तैयार करता है, उसी को निकालकर IVF किया जाता है। लेकिन, कन्वेंशनल IVF में दवाओं और इंजेक्शन से एक साथ कई फॉलिकल बढ़ाए जाते हैं, ताकि ज्यादा एग मिलें और उनमें से सबसे हेल्दी एम्ब्रीओ चुनने की गुंजाइश रहे।
प्रोटोकॉल | दवाओं का इस्तेमाल | कितने एग का लक्ष्य |
|---|---|---|
ट्रू नेचुरल साइकिल IVF | फॉलिकल बढ़ाने की दवा नहीं, सिर्फ ट्रिगर | एक |
मॉडिफाइड नेचुरल साइकिल IVF | एंटागोनिस्ट और कम डोज की दवा | एक |
माइल्ड IVF | कम डोज में फॉलिकल बढ़ाने वाली दवा | एक से ज्यादा, लेकिन कन्वेंशनल IVF से कम |
कन्वेंशनल IVF | फॉलिकल बढ़ाने वाली दवा की पूरी डोज | आमतौर पर 10 से 15 के आसपास |
माइल्ड IVF और नेचुरल साइकिल IVF को एक जैसा समझना सही नहीं है। नेचुरल साइकिल में दी जाने वाली दवा का उद्देश्य उसी एक फॉलिकल को सपोर्ट करना होता है, जबकि माइल्ड IVF में दवाओं से एक से ज्यादा फॉलिकल बढ़ाए जाते हैं।
नेचुरल साइकिल IVF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें फॉलिकल बढ़ाने वाली दवाएं और इंजेक्शन बहुत कम इस्तेमाल होते हैं। इससे दवाओं का खर्च कम हो सकता है और OHSS का रिस्क लगभग नहीं रहता।
नेचुरल साइकिल IVF की सबसे बड़ी कमी यह है कि एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर एग न मिले, फर्टिलाइज न हो या एम्ब्रीओ आगे न बढ़े, तो उस साइकिल में आगे बढ़ने का दूसरा मौका नहीं रहता।
नेचुरल साइकिल में साइकिल कैंसलेशन भी ज्यादा हो सकता है। 13,013 साइकल्स की एक बड़ी स्टडी में नेचुरल साइकिल की 26.8% साइकल्स एग रिट्रीवल तक नहीं पहुंचीं, जबकि कम डोज और ज्यादा डोज स्टिमुलेशन में यह दर 8% और 7.6% थी।
Natural Cycle IVF पर आमतौर पर तब विचार किया जाता है जब ज्यादा दवा देने पर भी एग की संख्या बढ़ने की उम्मीद कम हो, या स्टिमुलेशन की दवाएं इस्तेमाल न करनी हों।
नेचुरल साइकिल IVF में सफलता कई बातों पर निर्भर करती है। इसमें सबसे जरुरी हैं महिला की उम्र, एग की क्वालिटी, ओव्यूलेशन का सही समय पकड़ना और IVF लैब की क्वालिटी।
नेचुरल साइकिल IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद क्लिनिकल प्रेगनेंसी की दर 19.1% रही, जबकि इसी आधार पर लाइव बर्थ की दर 16.7% थी। यानी एम्ब्रीओ ट्रांसफर की गई 100 साइकिल में लगभग 19 में प्रेगनेंसी हुई और इन्हीं 100 साइकिल में से करीब 17 में लाइव बर्थ हुई।
क्या देखा गया | Natural cycle | कम डोज स्टिमुलेशन | ज्यादा डोज स्टिमुलेशन |
|---|---|---|---|
साइकिल कैंसल होना | 26.8% | 8.0% | 7.6% |
लाइव बर्थ, प्रति एम्ब्रीओ ट्रांसफर | 16.7% | 17.5% | 18.8% |
लाइव बर्थ, प्रति शुरू की गई साइकिल | 3.3% | 5.5% | 5.3% |
लेकिन यहां एक बात ध्यान में रखनी जरूरी है। नेचुरल साइकिल में हर बार एम्ब्रीओ ट्रांसफर तक पहुंचना संभव नहीं होता। इस स्टडी में करीब 27% साइकिल में एग रिट्रीवल तक एग नहीं मिल पाया, इसलिए उन साइकिल में प्रेगनेंसी की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से शुरू की गई हर साइकिल को गिनें, तो लाइव बर्थ की दर 3.3% रह जाती है।
दूसरी तरफ, कॉक्रेन रिव्यु (Cochrane Review) में उपलब्ध रैंडमाइज्ड ट्रायल्स में नेचुरल साइकिल IVF और कन्वेंशनल IVF के बीच लाइव बर्थ की दर में स्पष्ट अंतर नहीं मिला।
इसलिए अगर आप अपनी प्रेगनेंसी की संभावना जानना चाहती हैं, तो सिर्फ "ट्रांसफर के बाद कितने प्रतिशत प्रेगनेंट हुईं" देखना काफी नहीं है। आपको यह भी देखना होगा कि आपकी साइकिल में एग मिलने और एम्ब्रियो बनने की संभावना कितनी है। उम्र, ओवेरियन रिजर्व और एग की क्वालिटी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
नेचुरल साइकिल IVF चुनने से पहले सिर्फ दवाएं कम लगेंगी, इतना देखना काफी नहीं है। डॉक्टर से ये पांच बातें जरूर पूछें।
नेचुरल साइकिल IVF में दवाएं और इंजेक्शन कम लगते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि IVF आसान हो जाता है। इसमें एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है और साइकिल कैंसलेशन होने की संभावना भी ज्यादा रहती है।
उपलब्ध स्टडीज में एम्ब्रीओ ट्रांसफर तक पहुंचने वाली साइकिल में सफलता के नतीजे कन्वेंशनल IVF से बहुत अलग नहीं दिखे, लेकिन नेचुरल साइकिल में शुरुआत से ही एग न मिल पाने का रिस्क ज्यादा रहता है। इसलिए सिर्फ ट्रांसफर के बाद की सक्सेस रेट देखकर फैसला करना सही नहीं होगा।
आखिर में यह फैसला उम्र, AMH, ओव्यूलेशन, पिछली IVF साइकिल के नतीजों और इस बात को देखकर लेना चाहिए कि आपको कितनी साइकिल के लिए समय और बजट उपलब्ध है। सिर्फ कम दवा लगने की वजह से नेचुरल साइकिल IVF चुनना सही आधार नहीं है।