Natural Cycle IVF क्या है? बिना ज्यादा दवाओं के IVF कैसे होता है

Last updated: September 21, 2026

Overview

"बिना ज्यादा दवा वाला IVF" सुनकर यह आसान ऑप्शन लगता है, लेकिन नेचुरल साइकिल IVF, कन्वेंशनल IVF का लाइट वर्जन (light version) नहीं है। कन्वेंशनल IVF में कई फॉलिकल बढ़ाने के लिए पेशेंट को दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते हैं, जबकि नेचुरल साइकिल IVF में शरीर उस महीने जो एक एग खुद तैयार करता है, उसी का इस्तेमाल किया जाता है। 

इसलिए दवाएं और इंजेक्शन भले कम इस्तेमाल होते हैं, लेकिन नेचुरल साइकिल IVF में एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें कई बार एग समय पर नहीं मिलता, जिससे उस महीने IVF आगे नहीं बढ़ पाता। आगे जानेंगे कि नेचुरल साइकिल IVF कैसे किया जाता है और यह किन लोगों के लिए सही विकल्प हो सकता है। 

नेचुरल साइकिल आईवीएफ क्या है?

Natural cycle IVF यानी नेचुरल साइकिल आईवीएफ में फॉलिकल बढ़ाने के लिए फर्टिलिटी दवाएं नहीं दी जाती हैं। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और हार्मोन टेस्ट की मदद से देखते हैं कि एग कब तैयार हो रहा है। सही समय पर एग निकालकर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और बनने वाले एम्ब्रीओ को गर्भाशय यानी यूट्रस में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

इसमें शरीर की अपनी नेचुरल साइकिल को ही फॉलो किया जाता है। एग रिलीज होने का सही समय तय करने के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिगर इंजेक्शन भी दिया जा सकता है। इसके बाद फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसे स्टेप्स कन्वेंशनल IVF की तरह ही होते हैं।

Natural Cycle IVF कैसे किया जाता है?

पूरा प्रोसेस चार स्टेप में होता है और पूरी IVF साइकिल एक ही महीने में कम्पलीट हो जाती है, क्योंकि नेचुरल साइकिल IVF में ओवरी स्टिमुलेशन का हफ्तों लंबा चलने वाला स्टेप इसमें होता ही नहीं है।

ओव्यूलेशन की ट्रैकिंग

पीरियड शुरू होने के करीब आठवें से दसवें दिन से अल्ट्रासाउंड की सहायता से फॉलिकल की ग्रोथ देखी जाती है। साथ ही ब्लड टेस्ट से एस्ट्रोडियोल और LH देखे जाते हैं।

 

जब LH बढ़ता है तब पता लगता है कि ओव्यूलेशन होने वाला है। एग समय से पहले रिलीज न हो जाए, इसलिए सही समय पर एग निकालने के लिए ट्रैकिंग जरूरी होती है। 

 

यहीं दो तरह के प्रोटोकॉल का अंतर भी आता है।

 

  • ट्रू नेचुरल साइकिल (True natural cycle): सिर्फ ऑब्जर्वेशन, और एग रिट्रीवल का समय तय करने के लिए एक ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है। 
  • मॉडिफाइड नेचुरल साइकिल (Modified natural cycle): इसमें ओव्यूलेशन को समय से पहले होने से रोकने के लिए GnRH एंटागोनिस्ट दिया जाता है। साथ में कम डोज में FSH या hMG जैसी दवा दी जाती है, ताकि फॉलिकल को बढ़ने के लिए जरूरी हार्मोनल सपोर्ट मिलता रहे। 

एग रिट्रीवल का प्रोसेस

जब स्कैन में फॉलिकल मैच्योर हो जाता है, तब ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है और उसके करीब डेढ़ दिन बाद एग निकाला जाता है।  यह वही प्रोसेस है जो कन्वेंशनल IVF में होता है, लेकिन इसमें एक ही फॉलिकल से एग निकाला जाता है। यह प्रोसेस आमतौर पर हल्की बेहोशी की दवा देकर किया जाता है।

कभी-कभी फॉलिकल होने के बावजूद एग नहीं मिलता। नेचुरल साइकिल IVF में इसका मतलब है कि उस साइकिल में आगे बढ़ने के लिए एग उपलब्ध नहीं होगा।

फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो डेवलपमेंट

मिले हुए एग को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है, अक्सर ICSI की मदद से। इसके बाद कुछ दिनों तक देखा जाता है कि एम्ब्रियो बन रहा है और आगे बढ़ रहा है या नहीं। 

एम्ब्रीओ ट्रांसफर

एम्ब्रियो बन जाने पर आमतौर पर उसी साइकिल में उसे यूट्रस में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसका फायदा यह है कि गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम उसी महीने के प्राकृतिक हार्मोन से तैयार हुई होती है, न कि स्टिमुलेशन के बाद बनी हुयी। इसके बाद का प्रोसेस कन्वेंशनल IVF जैसा ही रहता है।

Natural Cycle IVF और Conventional IVF में क्या अंतर है?

नेचुरल साइकिल IVF में फॉलिकल की ग्रोथ के लिए दवा नहीं दी जाती। उस महीने जो एग शरीर खुद तैयार करता है, उसी को निकालकर IVF किया जाता है। लेकिन, कन्वेंशनल IVF में दवाओं और इंजेक्शन से एक साथ कई फॉलिकल बढ़ाए जाते हैं, ताकि ज्यादा एग मिलें और उनमें से सबसे हेल्दी एम्ब्रीओ चुनने की गुंजाइश रहे। 

 

प्रोटोकॉल

दवाओं का इस्तेमाल 

कितने एग का लक्ष्य 

ट्रू नेचुरल साइकिल IVF

फॉलिकल बढ़ाने की दवा नहीं, सिर्फ ट्रिगर

एक

मॉडिफाइड नेचुरल साइकिल IVF

एंटागोनिस्ट और कम डोज की दवा

एक

माइल्ड IVF

कम डोज में फॉलिकल बढ़ाने वाली दवा

एक से ज्यादा, लेकिन कन्वेंशनल IVF से कम

कन्वेंशनल IVF

फॉलिकल बढ़ाने वाली दवा की पूरी डोज

आमतौर पर 10 से 15 के आसपास 

 

माइल्ड IVF और नेचुरल साइकिल IVF को एक जैसा समझना सही नहीं है। नेचुरल साइकिल में दी जाने वाली दवा का उद्देश्य उसी एक फॉलिकल को सपोर्ट करना होता है, जबकि माइल्ड IVF में दवाओं से एक से ज्यादा फॉलिकल बढ़ाए जाते हैं।

Natural Cycle IVF के फायदे

नेचुरल साइकिल IVF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें फॉलिकल बढ़ाने वाली दवाएं और इंजेक्शन बहुत कम इस्तेमाल होते हैं। इससे दवाओं का खर्च कम हो सकता है और OHSS का रिस्क लगभग नहीं रहता। 

  • इंजेक्शन कम लगते हैं: ट्रू नेचुरल साइकिल में फॉलिकल बढ़ाने की दवा नहीं दी जाती, जबकि मॉडिफाइड साइकिल में भी दवाओं की मात्रा कम होती है।
  • दवाओं का खर्च कम होता है: फॉलिकल बढ़ाने वाली दवाएं कम या नहीं होने से IVF की दवा का खर्च भी कम हो जाता है।
  • OHSS का रिस्क लगभग नहीं होता, क्योंकि ओवरी को स्टिमुलेट करके कई फॉलिकल्स बढ़ाए ही नहीं जाते।
  • गर्भाशय की परत प्राकृतिक हार्मोन से तैयार होती है: इसलिए एम्ब्रीओ को उसी साइकिल में ट्रांसफर किया जा सकता है।
  • हर महीने कोशिश की जा सकती है: ओवरी स्टिमुलेशन के बाद जरूरी होने वाले अंतराल की जरूरत नहीं पड़ती।

Natural Cycle IVF के नुकसान और सीमाएं

नेचुरल साइकिल IVF की सबसे बड़ी कमी यह है कि एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर एग न मिले, फर्टिलाइज न हो या एम्ब्रीओ आगे न बढ़े, तो उस साइकिल में आगे बढ़ने का दूसरा मौका नहीं रहता। 

नेचुरल साइकिल में साइकिल कैंसलेशन भी ज्यादा हो सकता है। 13,013 साइकल्स की एक बड़ी स्टडी में नेचुरल साइकिल की 26.8% साइकल्स एग रिट्रीवल तक नहीं पहुंचीं, जबकि कम डोज और ज्यादा डोज स्टिमुलेशन में यह दर 8% और 7.6% थी।

  • बैकअप नहीं रहता: एक ही एग मिलता है। वह फर्टिलाइज न हो या एम्ब्रियो आगे न बढ़े, तो उस साइकिल में आगे बढ़ने का ऑप्शन नहीं रहता।
  • एग या एम्ब्रीओ फ्रीज करने की गुंजाइश कम रहती है: एक ही एग होने के कारण अतिरिक्त एम्ब्रीओ बचने की संभावना कम होती है।
  • कुल समय बढ़ सकता है: एक साइकिल में एग या एम्ब्रियो न मिलने पर दोबारा कोशिश करनी पड़ सकती है।
  • ऑब्जर्वेशन कम नहीं होता: दवाएं कम होने के बावजूद स्कैन और ब्लड टेस्ट के लिए बार-बार क्लिनिक जाना पड़ सकता है।

किन लोगों के लिए Natural Cycle IVF पर विचार किया जा सकता है?

Natural Cycle IVF पर आमतौर पर तब विचार किया जाता है जब ज्यादा दवा देने पर भी एग की संख्या बढ़ने की उम्मीद कम हो, या स्टिमुलेशन की दवाएं इस्तेमाल न करनी हों। 

जिनके लिए किया जा सकता है

  • बहुत कम ओवेरियन रिजर्व: ज्यादा डोज देने पर भी एग की संख्या बढ़ने की संभावना कम हो।
  • स्टिमुलेशन की दवाएं नहीं ले सकतीं: किसी मेडिकल वजह से या अपनी पसंद से।
  • दवाओं का खर्च कम रखना चाहती हैं: क्योंकि इसमें फर्टिलिटी दवाओं का इस्तेमाल कम होता है।

जिनके लिए यह आमतौर पर उपयुक्त नहीं होता

  • ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता: जैसे PCOS में, जहां हर महीने नियमित रूप से फॉलिकल मैच्योर नहीं होता।
  • हाई रिस्पॉन्डर: ESHRE गाइडलाइन के अनुसार, हाई रिस्पॉन्डर महिलाओं में नेचुरल या मॉडिफाइड नेचुरल साइकिल IVF इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त एविडेंस नहीं हैं। 
  • जल्दी प्रेगनेंसी की कोशिश करनी हो: एक साइकिल में एग न मिलने या एम्ब्रीओ न बनने पर दोबारा कोशिश करनी पड़ सकती है। इसलिए इलाज में ज्यादा समय लग सकता है। 

Natural Cycle IVF की सफलता को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

नेचुरल साइकिल IVF में सफलता कई बातों पर निर्भर करती है। इसमें सबसे जरुरी हैं महिला की उम्र, एग की क्वालिटी, ओव्यूलेशन का सही समय पकड़ना और IVF लैब की क्वालिटी। 

  • उम्र और एग की क्वालिटी: नेचुरल साइकिल में आमतौर पर एक ही एग मिलता है, इसलिए उसकी क्वालिटी का महत्व और बढ़ जाता है। कन्वेंशनल IVF में कई एग मिलने पर उनमें से बेहतर एग और एम्ब्रियो चुनने की गुंजाइश रहती है।
  • ओव्यूलेशन की सही टाइमिंग: LH में बढ़ोतरी का सही समय पकड़ना जरूरी है। अगर ओव्यूलेशन पहले हो गया, तो एग रिट्रीवल से पहले ही एग रिलीज हो सकता है और उस साइकिल में एग नहीं मिल पाएगा।
  • प्रोटोकॉल: ट्रू नेचुरल साइकिल में केवल ओव्यूलेशन के ऑब्जर्वेशन से टाइमिंग की जाती है, जबकि मॉडिफाइड नेचुरल साइकिल में GnRH एंटागोनिस्ट जैसी दवा से समय से पहले ओव्यूलेशन को रोकने में मदद मिलती है।
  • IVF लैब की क्वालिटी: एग मिलने के बाद फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रीओ डेवलपमेंट और एम्ब्रीओ ट्रांसफर का प्रोसेस लैब की क्वालिटी और अनुभव पर भी निर्भर करता है।

Natural Cycle IVF के बाद Pregnancy की संभावना कितनी होती है?

नेचुरल साइकिल IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद क्लिनिकल प्रेगनेंसी की दर 19.1% रही, जबकि इसी आधार पर लाइव बर्थ की दर 16.7% थी। यानी एम्ब्रीओ ट्रांसफर की गई 100 साइकिल में लगभग 19 में प्रेगनेंसी हुई और इन्हीं 100 साइकिल में से करीब 17 में लाइव बर्थ हुई। 

 

क्या देखा गया

Natural cycle

कम डोज स्टिमुलेशन

ज्यादा डोज स्टिमुलेशन

साइकिल कैंसल होना

26.8%

8.0%

7.6%

लाइव बर्थ, प्रति एम्ब्रीओ ट्रांसफर

16.7%

17.5%

18.8%

लाइव बर्थ, प्रति शुरू की गई साइकिल

3.3%

5.5%

5.3%

लेकिन यहां एक बात ध्यान में रखनी जरूरी है। नेचुरल साइकिल में हर बार एम्ब्रीओ ट्रांसफर तक पहुंचना संभव नहीं होता। इस स्टडी में करीब 27% साइकिल में एग रिट्रीवल तक एग नहीं मिल पाया, इसलिए उन साइकिल में प्रेगनेंसी की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से शुरू की गई हर साइकिल को गिनें, तो लाइव बर्थ की दर 3.3% रह जाती है।

दूसरी तरफ, कॉक्रेन रिव्यु (Cochrane Review) में उपलब्ध रैंडमाइज्ड ट्रायल्स में नेचुरल साइकिल IVF और कन्वेंशनल IVF के बीच लाइव बर्थ की दर में स्पष्ट अंतर नहीं मिला। 

इसलिए अगर आप अपनी प्रेगनेंसी की संभावना जानना चाहती हैं, तो सिर्फ "ट्रांसफर के बाद कितने प्रतिशत प्रेगनेंट हुईं" देखना काफी नहीं है। आपको यह भी देखना होगा कि आपकी साइकिल में एग मिलने और एम्ब्रियो बनने की संभावना कितनी है। उम्र, ओवेरियन रिजर्व और एग की क्वालिटी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

Natural Cycle IVF से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

नेचुरल साइकिल IVF चुनने से पहले सिर्फ दवाएं कम लगेंगी, इतना देखना काफी नहीं है। डॉक्टर से ये पांच बातें जरूर पूछें। 

  • यह ट्रू नेचुरल साइकिल है या मॉडिफाइड? दोनों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और साइकिल कैंसलेशन होने की संभावना अलग हो सकती हैं।
  • मेरी साइकिल कैंसलेशन होने की संभावना कितनी है? क्लिनिक का अपना रिकॉर्ड आपको ज्यादा व्यावहारिक जानकारी दे सकता है।
  • सक्सेस रेट कैसे गिनी जा रही है? प्रति एम्ब्रियो ट्रांसफर और प्रति शुरू की गई साइकिल के नंबर काफी अलग हो सकते हैं।
  • कुल खर्च कितना आएगा? अगर एक से ज्यादा साइकिल की जरूरत पड़ सकती है, तो पूरे इलाज का अनुमान पूछना बेहतर है।
  • मेरी उम्र और AMH को देखते हुए यह विकल्प क्यों चुना जा रहा है? सिर्फ कम दवा लगना ही नेचुरल साइकिल IVF चुनने की वजह नहीं होना चाहिए।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • नेचुरल साइकिल IVF में शरीर के खुद तैयार किए गए एग का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • साइकिल कैंसलेशन होने की संभावना ज्यादा रहती है। एक बड़े अध्ययन में नेचुरल साइकिल की 26.8% साइकिल एग रिट्रीवल तक नहीं पहुंच पाईं।
  • एम्ब्रियो ट्रांसफर हो जाने पर क्लिनिकल प्रेगनेंसी की दर करीब 19% और लाइव बर्थ की दर 16.7% रही।
  • नेचुरल साइकिल हर महिला के लिए सही विकल्प नहीं है। उम्र, ओवेरियन रिजर्व और ओव्यूलेशन नियमित है या नहीं, इसे देखते हुए फैसला किया जाता है।
  • नेचुरल साइकिल IVF चुनने से पहले यह समझना जरूरी है कि सफलता की दर प्रति ट्रांसफर बताई जा रही है या प्रति शुरू की गई साइकिल।

निष्कर्ष (Conclusion)

नेचुरल साइकिल IVF में दवाएं और इंजेक्शन कम लगते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि IVF आसान हो जाता है। इसमें एक ही एग पर निर्भर रहना पड़ता है और साइकिल कैंसलेशन होने की संभावना भी ज्यादा रहती है।

उपलब्ध स्टडीज में एम्ब्रीओ ट्रांसफर तक पहुंचने वाली साइकिल में सफलता के नतीजे कन्वेंशनल IVF से बहुत अलग नहीं दिखे, लेकिन नेचुरल साइकिल में शुरुआत से ही एग न मिल पाने का रिस्क ज्यादा रहता है। इसलिए सिर्फ ट्रांसफर के बाद की सक्सेस रेट देखकर फैसला करना सही नहीं होगा।

आखिर में यह फैसला उम्र, AMH, ओव्यूलेशन, पिछली IVF साइकिल के नतीजों और इस बात को देखकर लेना चाहिए कि आपको कितनी साइकिल के लिए समय और बजट उपलब्ध है। सिर्फ कम दवा लगने की वजह से नेचुरल साइकिल IVF चुनना सही आधार नहीं है।

Natural Cycle IVF पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Natural Cycle IVF और सामान्य IVF में क्या अंतर है?

Natural Cycle IVF में कितने एग मिल सकते हैं?

क्या Natural Cycle IVF में कम दवाएं इस्तेमाल होती हैं?

IVF से पहले कौन सी दवा दी जाती है?

पीरियड के कितने दिन बाद आईवीएफ होता है?

Natural Cycle IVF की सक्सेस रेट कितनी होती है?

आईवीएफ में किसका बच्चा होता है?

फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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