मेडिकल भाषा में पीरियड्स में होने वाले दर्द को 'डिस्मेनोरिया' (Dysmenorrhea) कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 70% से 90% युवा महिलाएं इस समस्या का सामना करती हैं। जब महिलाओं पीरियड्स शुरू होते हैं और वह अपने घर की बड़ी महिलाओं से पूछती हैं कि period me pet dard ho to kya kare तो उन्हें बताया जाता है कि पीरियड्स हैं तो दर्द तो होगा ही और इसे सहना भी होगा। इसी वजह से करोड़ों महिलाएं हर महीने पीरियड्स के असहनीय दर्द को चुपचाप सहती रहती हैं। लेकिन दर्द सहना कोई बहादुरी नहीं है। पीरियड के वो 3 से 5 दिन आपके जीवन का हिस्सा हैं, उन्हें तकलीफ में गुज़ारना ज़रूरी नहीं है।
पीरियड में होने वाला पेट दर्द सिर्फ एक शारीरिक परेशानी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के हॉर्मोन्स (hormones) और यूट्रस (uterus) की मांसपेशियों के बीच होने वाला एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि आखिर period me pet dard ho to kya kare और कैसे आप अपनी लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके इन दिनों को आसान बना सकती हैं। साथ ही, हम समझेंगे यह दर्द आपकी फर्टिलिटी (fertility) से कैसे जुड़ा हो सकता है और कोई गंभीर समस्या होने पर माँ बनने का क्या रास्ता है।
जब आप पूछतीं हैं कि period me pet dard ho to kya kare, तो सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि यह दर्द होता क्यों है। पीरियड के दौरान आपके यूट्रस की लाइनिंग यानी गर्भाशय की वह परत जिससे भ्रूण चिपकता है, को प्रेगनेंसी न होने की कंडीशन में शरीर से बाहर निकलना होता है। इसे बाहर निकालने के लिए यूट्रस की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं यानी आपो कॉन्ट्रैक्शन होते हैं।
इन कॉन्ट्रैक्शन के लिए प्रोस्टाग्लैंडिंस (Prostaglandins) नाम का एक केमिकल जिम्मेदार होता है। जिन महिलाओं के शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन्स का लेवल जितना ज्यादा होता है, उन्हें दर्द और मरोड़ यानी क्रैम्प्स (cramps) उतने ही तेज़ महसूस होते हैं। जब यूट्रस बहुत तेज़ी से सिकुड़ता है, तो वहां की ब्लड वेसल्स (blood vessels) पर दबाव पड़ता है, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ देर के लिए कम हो जाती है और यही हमें तेज़ दर्द के रूप में महसूस होता है।
अगर आपको पीरियड्स में तेज़ दर्द हो रहा है, तो ये 5 तरीके तुरंत राहत पहुँचा सकते हैं।
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पीरियड पेन को कम करने में आपकी डाइट का बहुत बड़ा हाथ होता है। अक्सर हम इन दिनों में जंक फूड की क्रेविंग के चक्कर में गलत चीज़ें खा लेते हैं जो दर्द को और बढ़ा देती हैं।
| क्या खाएं (Superfoods) | क्या न खाएं |
|---|---|
| मैग्नीशियम रिच फूड: केला, डार्क चॉकलेट और बादाम (ये मसल्स रिलैक्स करते हैं)। | कैफीन: ज्यादा कॉफी और चाय ब्लड वेसल्स को सिकोड़ती हैं, जिससे दर्द बढ़ता है। |
| ओमेगा-3: अखरोट और अलसी के बीज (ये सूजन कम करते हैं)। | ज्यादा नमक: यह ब्लोटिंग और शरीर में पानी भरने (water retention) का कारण बनता है। |
| हाइड्रेटिंग फल: खीरा और तरबूज (शरीर में पानी की कमी न होने दें)। | तली-भुनी चीज़ें: समोसे, चिप्स और ज्यादा तेल वाला खाना गैस पैदा करता है। |
| गर्म तरल पदार्थ: गुनगुना पानी और सूप। | चीनी: बहुत ज्यादा मीठा खाने से शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ता है। |
पीरियड्स में दर्द की दवाइयों जैसे पेनकिलर को लेकर लड़कियां अक्सर संशय में रहती हैं। वे जानना चाहती हैं कि क्या पीरियड में पेनकिलर लेने से आगे चलकर माँ बनने में दिक्कत आएगी या उनके एग्स (eggs) खराब हो जाएंगे। इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत बड़ा मिथक है।
पीरियड के दर्द के लिए दी जाने वाली दवाएं मेफेनामिक एसिड और डायसाइक्लोमीन का मिश्रण होती हैं। ये सीधे यूट्रस की मसल्स के खिंचाव को कम करती हैं। अगर दर्द इतना ज्यादा है कि आप बिस्तर से नहीं उठ पा रही हैं, तो दिन में एक या दो बार पेनकिलर लेना पूरी तरह सेफ है, हालाँकि इसे खाली पेट न लें और पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अगर आपको हर महीने पीरियड्स के दौरान कई बार पेनकिलर लेनी पड़ रही है तो डॉक्टर को दिखायें, यह कोई अंदरूनी समस्या भी हो सकती है।
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हल्की फिजिकल एक्टिविटी से शरीर में एंडोर्फिन (endorphin) रिलीज होते हैं, जिन्हें हम 'फील गुड हॉर्मोन' कहते हैं। ये नैचुरल पेनकिलर का काम करते हैं, इसीलिए बिस्तर में घुसे रहने के बजाय हल्की एक्सरसाइज और योग करें।
क्या आपने कभी गौर किया है कि जिस महीने आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस (stress) में होती हैं, उस महीने दर्द ज्यादा होता है? तनाव शरीर में कोर्टिसोल (cortisol) बढ़ाता है, जो पीरियड के हॉर्मोन्स को डिस्टर्ब कर देता है।
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अगर आप period me pet dard ho to kya kare का जवाब ढूंढते-ढूंढते थक चुकी हैं और कोई भी घरेलू नुस्खा काम नहीं कर रहा, तो डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) हो सकता है। इसमें यूट्रस की लाइनिंग जैसी टिश्यू यूट्रस के बाहर ओवरी या ट्यूब्स पर बढ़ने लगते हैं। जिसकी वजह से न सिर्फ असहनीय दर्द होता है, बल्कि माँ बनने में भी परेशानी हो सकती है।
जब एंडोमेट्रियोसिस की वजह से नैचुरल कंसीव करना असंभव हो जाता है, तब आईवीएफ (IVF) ही माँ बनने का एकमात्र रास्ता होता है। आईवीएफ में लैब में एक हेल्दी एम्ब्रीओ (embryo) तैयार करते हैं और उसे सीधे माँ के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
हर महिला का शरीर अलग होता है और सबकी दर्द सहने की क्षमता भी अलग होती है। period me pet dard ho to kya kare के जवाब में आप अगर गरम सिकाई, अच्छी डाइट और हल्की एक्सरसाइज कर रही हैं और आपको आराम मिल रहा है, तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन दर्द में फिर भी आराम न मिले तो डॉक्टर से संपर्क करें।
पीरियड पेन को नॉर्मल कहकर टालना कई बार एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं को बढ़ा देता है, जो आगे चलकर माँ बनने में दिक्कत पैदा करती हैं।
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जी हाँ, गुनगुने पानी से आपकी मांसपेशियाँ यानी मसल्स को आराम मिलता है जिससे पीरियड क्रैम्प्स में भी राहत मिलती है।
महीने में 1 या 2 गोलियां लेने से कोई नुकसान नहीं होता। समस्या तब होती है जब आप डॉक्टर की सलाह के बिना रोज़ाना कई गोलियां लेती हैं।
हाँ, डार्क चॉकलेट (70% cocoa) में मैग्नीशियम होता है जो यूट्रस की मसल्स को आराम पहुँचाता है और आपका मूड भी बेहतर करता है।
अक्सर डिलीवरी के बाद यूट्रस का आकार थोड़ा बदलता है और मसल्स रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे कई महिलाओं का दर्द कम हो जाता है। लेकिन यह कोई गारंटी नहीं है।
इसका कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं है। यह सब आपकी पाचन क्षमता यानी डाइजेशन पर निर्भर करता है। अगर आपको ब्लोटिंग की समस्या है, तो खट्टी और ठंडी चीज़ों से परहेज करना बेहतर है।