POI को पहले प्रीमेच्योर मेनोपॉज़ (premature menopause) या प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर (premature ovarian failure) कहते थे। लेकिन ये नाम एक्यूरेट नहीं थे क्योंकि POI में ओवेरियन फंक्शन कभी-कभी अस्थायी रूप से वापस भी आ सकता है।
इस कंडीशन का असर सिर्फ फर्टिलिटी पर नहीं, बल्कि बोन, हार्ट, और मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। इसीलिए premature ovarian insufficiency का इलाज सिर्फ प्रेगनेंसी के नज़रिए से नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य के नज़रिए से होना चाहिए।
पैरामीटर |
POI (40 से पहले) |
नेचुरल मेनोपॉज़ |
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उम्र |
40 साल से पहले, अक्सर 20 से 35 साल के बाद |
औसतन 45 से 52 साल पर |
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ओवेरियन फंक्शन |
ओवुलेशन रेगुलर नहीं होता, कभी कभी वापस आ सकता है |
स्थायी रूप से बंद |
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प्रेगनेंसी |
5 से 10% नेचुरल, डोनर एग विकल्प |
शून्य |
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FSH |
25 IU/L से ज़्यादा |
25 IU/L से ज़्यादा |
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मानसिक असर |
पहचान और फर्टिलिटी दोनों पर गहरा |
उम्र के अनुसार expected |
POI और नेचुरल मेनोपॉज़ के लैब टेस्ट एक जैसे दिख सकते हैं लेकिन दोनों बिल्कुल अलग कंडीशन होती हैं। NIH StatPearls के अनुसार, POI में ओवेरियन फंक्शन इंटरमिटेंट (intermittent) होता है यानी आता जाता रह सकता है। मेनोपॉज़ में यह स्थायी रूप से बंद होता है।
POI का एक बड़ा फर्क यह है कि इसमें पीरियड्स पूरी तरह बंद ज़रूरी नहीं है। इसमें पीरियड्स कभी आ सकते हैं, कभी कई महीने बंद रह सकते हैं। इसीलिए इसे 'insufficiency' यानी अपर्याप्तता कहते हैं, 'failure' नहीं।
हर महिला के जन्म के समय उसकी दोनों ओवरी में लगभग 10 से 20 लाख फॉलिकल्स (Follicles) मौजूद होते हैं, जिसे ओवेरियन रिज़र्व कहा जाता है।
ये फॉलिकल्स हर महीने डेवलप होना शुरू करते हैं और मैच्योर होकर एग रिलीज़ करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ओवरी में मौजूद फॉलिकल्स की संख्या और क्वालिटी दोनों धीरे-धीरे कम होती जाती हैं।
इसी नेचुरल प्रोसेस को मेडिकल लैंग्वेज में "ओवेरियन क्लॉक" कहा जाता है, जिसका प्रयोग महिला की ओवरी में बचे हुए एग्स यानी ओवेरियन रिजर्व और उनकी क्वालिटी को समझाने के लिए किया जाता है।
POI में यह प्रोसेस नॉर्मल से बहुत तेज हो जाती है। जिससे या तो एग्स की संख्या यानी ओवेरियन रिजर्व (ovarian reserve) बहुत जल्दी खत्म हो जाता है, या बचे हुए फॉलिकल्स FSH के सिग्नल पर रियेक्ट करना बंद कर देते हैं। इसे 'depleted ovarian reserve' और 'resistant ovary syndrome' कहते हैं। इस वजह से कम उम्र में ही ओवरी ठीक से काम करना बंद कर देती है।
AMH यानी एंटी म्यूलेरियन हॉर्मोन (Anti Müllerian Hormone) इस ओवेरियन क्लॉक की स्पीड यानी एग्स की संख्या और क्वालिटी कितनी जल्दी गिर रही है, को समझने का सबसे सटीक मार्कर होता है। चूंकि यह हॉर्मोन बढ़ते हुए फॉलिकल्स से बनता है तो जैसे जैसे फॉलिकल्स की संख्या कम होती है, AMH का लेवल भी घटने लगता है।
POI के लक्षण
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POI के लक्षण |
क्या महसूस हो सकता है? |
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अनियमित पीरियड्स |
पीरियड्स का 2–3 महीने तक न आना, बार-बार स्किप होना या पीरियड साइकल का अनियमित हो जाना। |
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हॉट फ्लैश (Hot Flashes) |
अचानक बहुत गर्मी लगना, चेहरे और शरीर पर गर्माहट महसूस होना। |
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नाइट स्वेट्स (Night Sweats) |
रात में अत्यधिक पसीना आना, जिससे कपड़े या बिस्तर तक गीले हो सकते हैं। |
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योनि में सूखापन (Veginal Dryness) |
एस्ट्रोजन की कमी के कारण योनि मतलब वेजाइना में नमी कम हो जाती है। |
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संबंध बनाते समय के दौरान दर्द |
योनि में सूखेपन और टिश्यू में बदलाव की वजह से संबंध बनाते समय दर्द हो सकता है। |
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बार बार पेशाब आना |
यूरिनरी फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है या पेशाब से जुड़ी असुविधा महसूस हो सकती है। |
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मूड में बदलाव |
चिड़चिड़ापन, उदासी, चिंता या भावनात्मक उतार चढ़ाव महसूस हो सकते हैं। |
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ध्यान और याददाश्त में कमी |
किसी काम पर फोकस करने में परेशानी या छोटी छोटी बातें भूलने की शिकायत हो सकती है। |
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मानसिक और भावनात्मक असर |
कम उम्र में POI का पता चलना कई महिलाओं को इमोशनली परेशान कर सकता है। इससे डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी बढ़ सकती है। |
कुछ महिलाओं में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से ओवरी को ही नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है। इस दौरान ओवेरियन एंटीबॉडीज़ (Ovarian Antibodies) बन सकती हैं, जो फॉलिकल्स को प्रभावित करके ओवेरियन फंक्शन को कमजोर कर देती हैं।
POI का संबंध कई ऑटोइम्यून बीमारियों से भी देखा गया है, खासकर हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस (Hashimoto's Thyroiditis) और एड्रीनल ऑटोइम्यूनिटी से। इसी वजह से POI का डायग्नोसिस होने पर थायरॉइड और एड्रीनल फंक्शन की जाँच कराने की सलाह दी जाती है।
X क्रोमोसोम में गड़बड़ी POI का दूसरा बड़ा कारण हैं। टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) में एक X क्रोमोसोम पूरा या आंशिक रूप से मिसिंग होता है जो ओवेरियन डेवलपमेंट को प्रभावित करता है।
फ्रेजाइल X सिंड्रोम (Fragile X syndrome) के लिए जिम्मेदार FMR1 जीन में प्री-म्यूटेशन (premutation) वाली महिलाओं में POI का रिस्क ज़्यादा होता है। इसे FMR1-associated POI कहते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह माँ से बेटी में जा सकता है, इसलिए जेनेटिक काउंसलिंग ज़रूरी है।
कीमोथेरेपी (chemotherapy) और रेडिएशन ओवेरियन फंक्शन को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचा सकते हैं। एल्काइलेटिंग एजेंट्स (alkylating agents) सबसे ज़्यादा नुकसानदेह हैं। रेडिएशन जितना ज़्यादा ओवरी के करीब हो, नुकसान उतना ज़्यादा होता है।
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जाँच |
क्या पता चलता है? |
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FSH टेस्ट |
कम से कम एक महीने के अंतर पर दो बार FSH टेस्ट किया जाता है। FSH का लेवल 25 IU/L या उससे अधिक होने का मतलब है ओवरी पर्याप्त फॉलिकल्स डेवलप नहीं कर पा रही। |
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AMH टेस्ट |
AMH ओवेरियन रिजर्व पहचानने का सबसे विश्वसनीय मार्कर है। अगर इसका लेवल बहुत कम है तो यह ओवरी में एग्स की संख्या कम होने का लक्षण है। |
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एंट्रल फॉलिकल काउंट कम होना ओवेरियन रिजर्व में कमी की ओर इशारा करता है। |
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ऑटोइम्यून स्क्रीनिंग |
पॉजिटिव एंटीबॉडीज़ मिलने पर यह पता चल सकता है कि इम्यून सिस्टम ओवरी को नुकसान पहुँचा रहा है। |
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जेनेटिक टेस्ट |
अगर रिपोर्ट नॉर्मल नहीं है तो इससे POI के पीछे किसी जेनेटिक या क्रोमोसोम से संबंधित कारण की पहचान की जा सकती है। |
HRT यानी हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (hormone replacement therapy) POI का पहला इलाज है। HRT से एस्ट्रोजन की कमी को पूरा किया जाता है। इससे हॉट फ्लैश, रात को पसीना, और वेजाइनल ड्राईनेस में राहत मिलती है। यह हड्डियों को प्रोटेक्ट करती है और हार्ट डिजीज का रिस्क कम करती है।
जिन महिलाओं बच्चेदानी सुरक्षित है उन्हें एस्ट्रोजन के साथ प्रोजेस्टेरोन (progesterone) भी दिया जाता है। इससे उनमें एंडोमेट्रियल कैंसर से प्रोटेक्शन मिलती है।
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फर्टिलिटी ऑप्शन |
क्या जानना जरूरी है? |
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इसमें डोनर के हैल्थी एग को पार्टनर के स्पर्म से फर्टिलाइज़ करके बना एम्ब्रीओ यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है। अगर यूट्रस हेल्दी है, तो प्रेगनेंसी की संभावना अच्छी रहती है। |
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अगर POI का पता शुरुआती स्टेप में चल जाए और ओवरी में कुछ फॉलिकल्स अभी मौजूद हों, तो भविष्य के लिए एग फ्रीज़ करने पर विचार किया जा सकता है। |
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नेचुरल प्रेगनेंसी |
POI के बावजूद 5 से 10% महिलाओं में नेचुरल प्रेगनेंसी हो जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ महिलाओं में बीच बीच में ओव्युलेशन हो सकता है। इसी वजह से यदि प्रेगनेंसी नहीं चाहिए, तो गर्भनिरोधक का उपयोग करना आवश्यक है। |
निम्न स्थितियों में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेना ज़रूरी है:
जल्दी जाँच कराने से कारण का पता लगाने और भविष्य की फर्टिलिटी प्लानिंग के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
POI एक ऐसी कंडीशन है जो 40 साल की उम्र से पहले हो सकती है। इससे पीरियड्स, फर्टिलिटी के अलावा बहुत सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो जाती हैं। लेकिन सही समय पर पहचान होने से इलाज और फर्टिलिटी से जुड़े कई विकल्प उपलब्ध रहते हैं। इसलिए कम उम्र में पीरियड्स अनियमित होने या मेनोपॉज़ जैसे लक्षण दिखें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें।
हाँ, 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं में POI के बावजूद नेचुरल प्रेगनेंसी हो सकती है। POI में ओवेरियन फंक्शन पूरी तरह बंद नहीं होता, कभी-कभी ओव्युलेशन होती है।
नहीं, ये दो बिल्कुल अलग कंडीशन हैं।
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विशेषता |
PCOS |
POI |
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फॉलिकल्स |
अधिक होते हैं |
कम होते हैं |
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ओवुलेशन |
अनियमित या नहीं होता |
बहुत कम या बंद हो सकता है |
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एस्ट्रोजन |
सामान्य या बढ़ा हुआ |
कम होता है |
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मुख्य समस्या |
एग बनता है, लेकिन रिलीज़ नहीं होता |
ओवरी की एफिशिएंसी कम हो जाती है |
नहीं। POI में HRT शरीर में एस्ट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए दी जाती है। अधिकांश महिलाओं के लिए 50–51 साल की उम्र तक HRT लेना सुरक्षित माना जाता है।
हाँ, कुछ मामलों में। अगर POI का कारण जेनेटिक हो, खासकर FMR1 प्री-म्यूटेशन, तो बेटियों और बहनों में भी इसका रिस्क बढ़ सकता है।
जितनी जल्दी हो उतना बेहतर। HRT हड्डी और हार्ट प्रोटेक्शन के लिए तुरंत शुरू करनी चाहिए। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बारे में भी जल्दी सलाह लें।