सारांश (Overview)
प्रेगनेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग होने पर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज नहीं होता। Threatened abortion में ब्लीडिंग होती है, लेकिन प्रेगनेंसी अभी गर्भाशय में बनी रहती है और सर्विक्स बंद होता है। इसलिए इस समय सिर्फ ब्लीडिंग के आधार पर यह कहना संभव नहीं होता कि प्रेगनेंसी आगे चलेगी या नहीं।
इस स्थिति को समझने में अल्ट्रासाउंड सबसे अहम है। इसमें बच्चे की हार्टबीट, ब्लीडिंग की मात्रा और अगर कोई खून का थक्का है तो उसका आकार देखा जाता है। आगे इसी आधार पर समझेंगे कि हार्टबीट दिखने के बाद प्रेगनेंसी की संभावना कितनी रहती है, बेड रेस्ट और प्रोजेस्टेरोन का क्या रोल है और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Threatened abortion का मतलब है कि प्रेगनेंसी के 20 हफ्तों से पहले वजाइनल ब्लीडिंग या पेट में ऐंठन यानी यूट्रिन क्रैम्पिंग हो रही है, लेकिन प्रेगनेंसी अभी यूट्रस के अंदर बनी हुई है। इस कंडीशन में यूट्रस का मुंह यानी सर्विक्स बंद रहता है।
इसलिए ब्लीडिंग होने का मतलब यह नहीं है कि मिसकैरेज हो ही रहा है। डॉक्टर स्कैन के जरिए देखते हैं कि प्रेगनेंसी ठीक तरह से आगे बढ़ रही है या नहीं और बच्चे की हार्टबीट मिल रही है या नहीं।
प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग होना काफी कॉमन है। करीब 25 प्रतिशत प्रेगनेंसी में इस दौरान किसी न किसी तरह की वजाइनल ब्लीडिंग होती है, यानी लगभग हर चार में से एक महिला को इसका सामना करना पड़ सकता है।
ब्लीडिंग होने के बाद प्रेगनेंसी आगे चलेगी या नहीं, इसका कोई एक फिक्स जवाब नहीं है। अलग-अलग स्टडीज़ में ब्लीडिंग वाली महिलाओं में प्रेगनेंसी लॉस का रिस्क 12 से 57 प्रतिशत तक पाया गया है। इसका कारण यह है कि हर महिला की सिचुएशन एक जैसी नहीं होती।
उदाहरण के लिए, हल्की स्पॉटिंग के साथ स्कैन में बच्चे की हार्टबीट मिल रही हो, तो सिचुएशन अलग होती है। वहीं हैवी ब्लीडिंग हो और अभी स्कैन में हार्टबीट न मिली हो, तो सिचुएशन अलग हो सकती है।
इसलिए सिर्फ एवरेज डाटा देखकर अपनी सिचुएशन का अंदाजा न लगाएं। आपकी प्रेगनेंसी की संभावना समझने के लिए आपकी स्कैन रिपोर्ट और उसमें दिखने वाली चीजें ज्यादा मायने रखती हैं।
अगर स्कैन में बच्चे की हार्टबीट मिल चुकी है, तो आप थोड़ा निश्चिंत हो सकती हैं। StatPearls के अनुसार, ब्लीडिंग होने के बावजूद करीब 89 प्रतिशत मामलों में प्रेगनेंसी आगे चलती है।
लेकिन हर कंडीशन एक जैसी नहीं होती। ब्लीडिंग कितनी है, उसके साथ दर्द या ऐंठन यानी क्रैम्पिंग है या नहीं, और स्कैन में क्या दिख रहा है, इन बातों से आगे की संभावना का पता चलता है।
आपकी स्थिति | क्या समझ आता है |
|---|---|
स्कैन में हार्टबीट मिल चुकी है | प्रेगनेंसी के आगे चलने की संभावना ज्यादा रहती है |
हार्टबीट अभी नहीं मिली और प्रेगनेंसी शुरुआती है | अभी जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए, कुछ दिन बाद दोबारा स्कैन किया जा सकता है |
ब्लीडिंग हल्की है और दर्द नहीं है | स्थिति आमतौर पर बेहतर मानी जाती है |
ब्लीडिंग ज्यादा है और साथ में दर्द या ऐंठन है | यह चिंता करने का साइन हो सकता है |
कुछ महिलाओं में स्कैन के दौरान प्रेगनेंसी थैली यानी जेस्टेशनल सैक (gestational sac) के पास ब्लड क्लॉट भी दिख सकता है, जिसे सबकोरियोनिक हेमाटोमा कहते हैं। अगर क्लॉट छोटा है तो आमतौर पर ज्यादा चिंता की बात नहीं होती, लेकिन क्लॉट बड़ा होने पर प्रेगनेंसी लॉस का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए अगर रिपोर्ट में सिर्फ हेमाटोमा लिखा हो, तो डॉक्टर से उसका साइज जरूर पूछें।
StatPearls के अनुसार, हार्टबीट मिल चुके और ब्लीडिंग वाले मामलों में करीब 11 प्रतिशत प्रेगनेंसी में आगे मिसकैरेज होता है।
इसके लक्षण दो ही हैं, और उन्हीं से इसको पहचाना जाता है।
अब समझिये कि इसमें क्या नहीं होता। इसमें सर्विक्स खुलता नहीं है और ब्लीडिंग के साथ प्रेगनेंसी का टिश्यू बाहर नहीं निकलता। यानी ब्लीडिंग होने के बावजूद प्रेगनेंसी यूट्रस के अंदर बनी रहती है और स्कैन में भी दिखाई देती है।
ब्लीडिंग की मात्रा पर भी ध्यान दें। डॉक्टर को बताएं कि कितने घंटे में पैड भर रहा है, थक्के निकल रहे हैं या नहीं और अगर निकल रहे हैं, तो उनका आकार कितना है। इससे डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद मिलती है।
सबसे पहले एक जरूरी बात। Threatened abortion होने का मतलब यह नहीं है कि आपने कुछ गलत किया है। शुरुआती प्रेगनेंसी में होने वाले नुकसान की सबसे बड़ी वजह अक्सर क्रोमोसोम में होने वाली ऐसी गड़बड़ी होती है, जो प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही बन जाती है। इसका संबंध आमतौर पर खानपान, सफर, सीढ़ियां चढ़ने या घर के काम करने से नहीं होता।
इसके अलावा कुछ दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।
अगर ब्लीडिंग या प्रेगनेंसी लॉस बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर आगे की जांच कर सकते हैं।
बेड रेस्ट से मिसकैरेज रुकता है, इसका कोई पक्का एविडेंस नहीं है। कॉक्रेन एनालिसिस में शुरुआती प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग वाली महिलाओं में बेड रेस्ट करने से मिसकैरेज का रिस्क कम नहीं हुआ। हालांकि, यह एनालिसिस सिर्फ 84 महिलाओं पर किया गया था।
इसका मतलब यह नहीं है कि आप सामान्य से ज्यादा मेहनत करें। भारी काम से बचना ठीक है, लेकिन लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने से कोई साबित फायदा नहीं है। उल्टा, इससे पैरों में खून का थक्का बनना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर डॉक्टर ने आराम करने को कहा है, तो खुद से बंद न करें। उनसे यह ज़रूर पूछें कि आपको कितना और कितने दिन आराम करना है।
प्रोजेस्टेरोन हर महिला में एक जैसा फायदा नहीं करता। इसका फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि पहले मिसकैरेज हुए हैं या नहीं।
PRISM ट्रायल में शुरुआती प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग वाली महिलाओं को देखा गया। कुल मिलाकर प्रोजेस्टेरोन से खास फायदा नहीं मिला, लेकिन जिन महिलाओं के पहले तीन या उससे ज्यादा मिसकैरेज हो चुके थे, उनमें प्रेगनेंसी के आगे चलने की संभावना बेहतर रही।
इसलिए अगर आपको पहले मिसकैरेज हो चुके हैं, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें। आपके पिछले प्रेगनेंसी इतिहास के आधार पर डॉक्टर तय करेंगे कि प्रोजेस्टेरोन से आपको फायदा हो सकता है या नहीं।
इनमें से कुछ भी हो तो इंतजार नहीं करना है, क्योंकि इन स्थितियों में इलाज का तरीका बदल जाता है।
Threatened abortion में ब्लीडिंग होने से डर लग सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेगनेंसी खत्म होने वाली है। अगर स्कैन में हार्टबीट मिल चुकी है, तो करीब 89 प्रतिशत मामलों में प्रेगनेंसी आगे चलती है।
बेड रेस्ट से मिसकैरेज रुकता है, इसका पक्का सबूत नहीं है। प्रोजेस्टेरोन का फायदा भी हर महिला में नहीं होता और पहले कई मिसकैरेज हो चुके हों, तो इससे फायदा मिल सकता है।
सबसे जरूरी बात, शुरुआती प्रेगनेंसी का नुकसान आमतौर पर आपकी किसी गलती की वजह से नहीं होता। ब्लीडिंग पर नजर रखें, रिपोर्ट संभालकर रखें और खतरे के संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।