रिपोर्ट सामान्य होने के बाद भी गर्भधारण नहीं होने पर IUI से बने माँ

September 27, 2018

ivf babies

शादी के  काफी समय बाद तक प्रयास करने पर भी गर्भधारण में सफलता नहीं मिलने पर दम्पति मानसिक परेशानी से गुजरते है ऐसे में  दोनों  की जांचो की रिपोर्ट्स सामान्य आये तो IUI तकनीक कृत्रिम गर्भाधान का अच्छा माध्यम बन सकती है |

 

आईयूआई गर्भावस्था क्या है  इस बारे इन्दिरा आई वी एफ बोरीवली, मुंबई की फर्टिलिटी एक्सपर्ट बताती हैं कि

– आईयूआई गर्भावस्था का विकल्प उन जोड़ों को दिया जाता है, जिनमे महिला एवं पुरुष दोनों ही स्वस्थ हैं अंडा एवं शुक्राणु भी अच्छे हैं लेकिन प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में परेशानी हो रही है । इस प्रक्रिया में निषेचन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए शुक्राणु को सीधे गर्भाशय के भीतर रखा जाता है। महिला के गर्भाशय में शुक्राणु डालने के लिए एक कैथेटर का उपयोग किया जाता है। यह विधि कई मामलों में सफल रही है और कृत्रिम गभार्धानों के तरीकों में से एक है।

गर्भावस्था के लक्षणों को आप कब महसूस करना शुरू करते हैं?

-हालांकि कुछ महिलाओं को उपचार के बाद गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं, यह प्रोजेस्टेरोन युक्त दवाओं के सेवन के कारण होता है। इससे स्तन में सूजन और आपको थकान हो सकती है जबकि अधिकांश में लक्षण आमतौर पर उपचार के दो सप्ताह के बाद दिखाई देते हैं।

ivf

आईयूआई प्रक्रिया के बाद गर्भावस्था के लक्षण

-युवा महिला में उल्टियां होना

-आईयूआई के बाद प्रत्यारोपण के लक्षण सामान्य गर्भावस्था के समान होते हैं। उनमें से कुछ में ये शामिल हैं:

1.प्रत्यारोपण रक्तस्राव [इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग]

-प्रत्यारोपण [इम्प्लांटेशन]के पहले संकेतों में से एक प्रत्यारोपण रक्तस्राव है। जबकि हर महिला को यह अनुभव नहीं होता है, यह सामान्य प्रक्रिया है। इम्प्लांटेशन रक्तस्राव तब होता है जब अंडा गर्भाशय की परत में डिपोसिट हो जाता है, इस दौरान ऐंठन भी हो सकती है। यह आमतौर पर गर्भधारण के बाद छह से बारह दिनों के दौरान होता है।

2.मासिक धर्म में विलंब- अगर पीरियड्स रेगुलर है तो

-पीरियड्स में देरी होना गर्भधारण की संभावना के प्रति एक बड़ा संकेत है। जबकि बीच में स्पॉटिंग या लाइट ब्लीडिंग भी हो सकती है। आपको इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप ब्लीडिंग को लेकर चिंतित हैं, तो आप डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं।

3.स्तनों में संवेदनशीलता

-यदि आपके स्तन भारी, संवेदनशील और थोड़ा दर्द महसूस करते हैं, तो आप गर्भावस्था की ओर बढ़ सकते हैं। स्तनों में सूजन और संवेदनशीलता वे लक्षण हैं जो पीरियड्स के दौरान भी आम हैं। लेकिन अगर ये लक्षण पीरियड्स के बाद भी बने रहते हैं, तो गर्भावस्था का परीक्षण करना चाहिए।

4.उल्टी होना

-सामान्य लक्षणों में उल्टी या मॉर्निंग सीकनेस होना शामिल है। ऐसा कभी किसी गंध तो कभी बिना कारण के भी होता है। यह सिर्फ आपके शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन के बढ़ते स्तर के कारण होता है।

5.थकान

-गर्भवती महिलाएं अपने सिस्टम में उच्च स्तर के प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कारण बहुत थक जाती हैं क्योंकि यह हार्मोन नींद को प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, रक्तचाप और रक्त शर्करा के स्तर भी रक्त उत्पादन में वृद्धि के कारण कम हो जाते हैं। इससे गर्भवती महिला में थकान रहती है।

6.क्रेविंग और विचलन

-इस समय कुछ खाद्य पदार्थों के लिए गजब की क्रेविंग होना या लालसा विकसित हो जाती है। किसी प्रकार की गंध में खड़े तक नहीं हो सकते हैं। यह गर्भावस्था का एक लक्षण है जो बच्चे के जन्म के समय तक रहता है। विशेष रूप से इस समय भोजन की इच्छा अजीब समय [ओड टाइम] पर होने लगती है। शरीर में हार्मोनल परिवर्तनों के कारण ये गड़बड़ी, गंध आना और खाद्य पदार्थों के प्रति विचलन होता है।

7.लगातार उच्च शारीरिक तापमान

-प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि आपके शरीर के तापमान को 0.50 से. बढ़ा सकती है। यदि आप 20 दिनों से अधिक तापमान में वृद्धि देख रहे हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है, इसका अर्थ आपका गर्भवती होना हो सकता है।

 

आईयूआई के बाद के अन्य लक्षण के बारे में इन्दिरा आई वी एफ वाराणसी की फर्टिलिटी एक्सपर्ट दीपिका मिश्रा बताती हैं कि

-यद्यपि आईयूआई लगभग बगैर सर्जरी की प्रक्रिया है, लेकिन आप ऐसे किसी भी लक्षण के बारे में जानना चाहेंगे जो कुछ संकेत दे सकता है। हालांकि आईयूआई के कारण जटिलताएं असामान्य हैं, लेकिन इसके संकेतों के बारे में जानने में मदद मिल सकती है। मसलन

1-चमकदार लाल पीरियड्स- योनि से ब्लीडिंग होना

2-गर्दन और पैरों में दर्द और पेट में गंभीर क्रैम्पिंग होना।

3-बुखार

4-सुस्ती आना या बेहोशी की स्थिति होना

ये एक ट्यूबल गर्भावस्था या ट्यूबल संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में सलाह दी जाती है कि तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लें और सही उपाय तलाशें।    इसके अलावा अगर आप प्रजनन दवाओं पर हैं, तो आपको ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (ओएचएसएस) स्थिति के बारे में पता होना चाहिए। यह एक ही समय में एक से अधिक ओवेरियन फॉलिकल विकसित करने का कारण बनता है। यह कुछ मामलों में उल्टी, पेट दर्द या यहां तक कि सांस लेने में कठिनाई का कारण बन सकता है। यदि आप इनमें से किसी भी संकेत को देखते हैं, तो सलाह दी जाती है कि आप अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

 

आपको गर्भावस्था परीक्षण कब करना चाहिए?

भले ही आईयूआई प्रक्रिया में अंडे के फूटने के समय शुक्राणु को गर्भाशय में सीधे इंजेक्ट किया जाता है | निशेचन होने के पश्चात्  प्रत्यारोपण में लगभग 5 से 6 दिन का समय लग सकता है| इसलिए प्रक्रिया के बाद कम से कम दो सप्ताह या 14 दिनों के बाद गर्भावस्था परीक्षण करना सबसे अच्छा है।

आईयूआई प्रक्रिया के बाद आपकी गर्भावस्था के बारे में पुष्टि की प्रतीक्षा करना तनावपूर्ण और भावनात्मक दोनों हो सकती है। हालांकि, इस दौरान शांत रहना और  तनाव से बचना महत्वपूर्ण है। इस महत्वपूर्ण चरण के दौरान अपने साथी में विश्वास करें और एक-दूसरे का समर्थन करें और कम से कम दो सप्ताह तक घर पर ही गर्भावस्था परीक्षण करने का प्रयास करें। और जब यह समय बीत जाता है, तब रक्त परीक्षण से गर्भवती होने की जांच करना सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि यह एक सटीक परिणाम देता है।

IUI में विफल होने पर क्या करें – जो दम्पति IUI तकनीक से प्रेगनेंसी का 2-3 बार प्रयास कर चुके है लेकिन सफलता नहीं मिली है उनके लिए आई वी एफ तकनीक ज्यादा लाभदायक तकनीक साबित हुई है | आई वी एफ में महिला के शरीर से अंडो को निकल कर लैब में पति के  शुक्राणुओ के साथ निषेचित करवाया जाता है जिससे भ्रूण बन जाता है  और 2-3 दिन उसे महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है जिससे गर्भधारण हो जाता है |

You may also link with us on Facebook, Instagram, Twitter, Linkedin, Youtube & Pinterest

Talk to the best team of fertility experts in the country today for all your pregnancy and fertility-related queries.

Call now 18003092323

RELATED BLOG

Comments are closed.

Request Call Back
IVF
IVF telephone
Book An Appointment