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ओवेरियन सिस्ट
16
November
2019

ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय में गांठ): लक्षण, कारण और उपचार

क्या होती है ओवेरियन सिस्ट-जिस प्रकार गांठ तरल पदार्थ से भरी एक थैलीनुमा आकृति होती है, उसी के समान अंडाशय में विकसित होने वाली गांठ भी तरल से भरी एक थैली होती है जो आपके दोनों में से एक या दोनों अंडाशयों में विकसित होती है। राजमा के आकार में बने आपके दोनों अंडाशय, शरीर के वे अंग होते है जिनमें गर्भाशय में पहुँचने से पूर्व, आपके अंडे संग्रहीत रहते हैं और जिससे उसमें प्रजनन उर्वरता उत्पन्न होती है। ये गर्भाशय की दोनों ओर पेट के नीचे के स्थान पर स्थित होते हैं। महिलाओं के शरीर में ये दोनों अंडाशय, अंडे के साथ एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन की रचना करते हैं।

ओवेरियन सिस्ट अर्थात् अंडाशय में गांठ होने का सरल अर्थ- ओवरी एक तरल पदार्थ से भरी थैली होती है जबकि सिस्ट का मतलब गांठ होता है। जब तक सिस्ट या गांठ एक बड़ा आकार ना ले लें, तब तक अंडाशय में गांठ बनने के कोई विदित लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

ओवरियन सिस्ट के लक्षण-
ओवरियन सिस्ट या अंडाशय में गांठ महिला के षरीर में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक भी बनी रह सकती है और स्वयं ही बढ़ती चली जा सकती है। इस बात की भी अधिकतम संभावना होती है कि शायद आप अपने अंडाशय में उपज रही गांठ से बिल्कुल अवगत नहीं हो। लेकिन कई बार इसके विभिन्न ल़क्षण महिलाओं का शरीर महसूस करता है। ओवरियन सिस्ट के लक्षण निम्नांकित हैः
->कमर का आकार बढ़ना
->पेट अथवा श्रोणि में दर्द
->कम भूख लगना
->पेट में अत्यधिक फुलावट या सूजन
->बार-बार पेशाब आना
->मलाशय या मूत्राशय पर दबाव
->मलत्याग में असहजता व अत्यधिक दर्द
->संभोग के दौरान अधिक दर्द होना

ivf - iui

ओवरियन सिस्ट के कारण और ज़रूरी प्रकार-

एक क्रियात्मक (फंक्शनल) आवेरियन गांठ जो एक महिला के अंदर गर्भावस्था के दौरान पाई जाती है, वह आमतौर पर आपके या आपके बच्चे के लिए कोई परेशानी नहीं पैदा करती है। क्रियात्मक ओवेरियन सिस्ट दो प्रकार की होती है- फॉलिक्युलर सिस्ट और ल्युटियम सिस्ट।
ओवेरियन सिस्ट के कारण और ज़रूर प्रकार निम्नलिखित है-
1 फॉलिकुलर सिस्ट- महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान तरल पदार्थ युक्त थैलीनुमा आकृति अर्थात् ओवरी में उत्पन्न होने वाले अंडों को फॉलिकल कहा जाता है। अमूमन हर माह ये थैली फट जाती है और अंडे इससे बाहर निकल जाते हैं लेकिन जब यह थैली फटने में असमर्थ रहती है, उस समय अंडाशय में मौजूद तरल पदार्थ सिस्ट या गांठ का रूप ले लेता है।

2 कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट-
ये सिस्ट आमतौर पर फॉलिकल निकलने के बाद स्वयं ही नश्ट हो जाते हैं, किंतु किसी कारण यदि ये नश्ट नहीं हो पाते हैं तो इसमें जगह से अधिक तरल एकत्रित हो जाता है जो कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट में तब्दील होने का कारण बन जाता है।

3 पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम-
महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए महिलाओं को सावाधनीपूर्वक मूल्यांकन, उचित उपचार और समय पर हस्तक्षेप की अत्यधिक ज़रूरत होती है। सही समय पर उपचार न होने पर पीसोओएस ग्रस्त महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रोल, चिंता और अवसाद, दिल का दौरा आदि बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
इससे ओवरी के भीतर कई छोटी-छोटी गांठे या सिस्ट पैदा हो जाते है जिसके बढ़ने पर महिलाओं को बांझपन की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

ओवरियन सिस्ट (अंडाशय में गांठ) के उपचार-

ओवेरियन सिस्ट या अंडाशय में गांठों के विभिन्न उपचार है। हालांकि, इनका उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि ये गांठे शरीर के लिए कितनी और किस रूप में हानिकारक है या कितनी सौम्य हैं और कहां से विकसित हुई हैं। यदि ये गांठे सौम्य है तो कई बार ये स्वयं ही खत्म हो जाती है किंतु यदि ये गांठे हानिकारक है तो इन्हें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।
यदि आपके अंडाशय में गांठ होगी तो आपके रूटीन अल्ट्रासाउंड स्कैन में ज़रूर दिखाई देगी। लेकिन यदि आप उपरोक्त किसी भी लक्षण का सामना कर रहीं हैं तो डॉक्टर से एक बार इस संदर्भ में ज़रूर परामर्ष लें। उनके द्वारा गर्भावस्था में सिस्ट पर नज़र रखने के लिए अतिरिक्त स्कैन कर गांठ की पुश्टि करवाई जा सकती है।
एक साधारण गांठ आमतौर पर आपके गर्भवती होने की क्षमता पर असर नहीं डालती मगर यदि सिस्ट अन्तर्गर्भाशय अस्थानता (एंडोमेट्रिओसिस) या बहुपुटीय डिम्बाषयी सिंड्रोम (पोलिसिस्टि ओवेरियन सिंड्रोम) की वजह से हो तो गर्भधारण में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
 20 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद ही ऑपरेषन-
यदि आपका ओवेरियन सिस्ट लगातार बढ़ रहा है और इसके कारण आप बहुत ज़्यादा दर्द का सामना कर रहीं हैं तो डॉक्टर इसे ऑपरेशन के माध्यम से हटाने की सलाह भी दे सकते हैं। हालांकि महिला के शरीर से गांठ निकालने के लिए ऑपरेशन केवल 20 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद ही किया जा सकता है। इस अवस्था की शुरुआत में ही सिस्ट हटाने का ऑपरेशन करने के कारण गर्भपात की संभावना व खतरा बढ़ सकता है।

 किसी भी चरण में अंडाशय को क्षति से बचाना-
कई गर्भवती महिलाओं में गांठ अंडाशय के स्टेम में विकसित हो जाती है और टेढ़ा-मेढ़ा आकार ले लेती है। ऐसे प्रकरण में, गर्भवती महिला बहुत अधिक बीमार हो सकती है और उसके अंडाशय को क्षति भी पहुँच सकती है। यदि ऐसी समस्या हो जाती है तो गर्भवती महिला चाहे किसी भी चरण में क्यों ना हो, डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन कर इस गांठ को निकालना ज़रूरी हो जाता है।

 लेप्रोस्कोपी सर्जरी-
गर्भावस्था की शुरुआत में की होल सर्जरी अर्थात् लैप्रोस्कॉपी सर्जरी के जरिये गांठ को बाहर निकाला जा सकता है। यह सर्जरी तब करवाई जाती है जब आपकी गांठ छोटी हो। इस थैरेपी में डॉक्टर्स द्वारा नाभि के पास एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है, जिसके पष्चात् गांठ अर्थात् सिस्ट को बाहर निकाला जाता है।

 लेपरोटॉमी सर्जरी-
यदि आपकी सिस्ट साधारण होने के विपरित बड़ी है तो डॉक्टर्स द्वारा उसे इस सर्जरी के माध्यम से नाभि के पास एक बढ़ा चीरा लगाकर बाहर निकाल दिया जाता है। यदि सिस्ट के चलते गर्भाशय या अंडाशय में कैंसर फैलने का खतरा हो तो डॉक्टरों द्वारा गर्भाशय और अंडाशय की सर्जरी कर इन्हें भी निकाल दिया जाता है। उपरोक्त सभी ओवरियन सिस्ट के उपचार है।

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