गर्भाशय फाइब्रॉएड अथवा रसौली की समस्या: कारण, लक्षण, और इलाज

December 9, 2020

गर्भाशय फाइब्रॉएड अथवा रसौली की समस्या गर्भशय की एक ऐसी स्थिति है जिसमे गर्भशय में असामान्य रूप से वृद्धि होती है और यह महिलाओं में अक्सर माँ बनने के वर्षों के दौरान दिखाई देती है। रसौली की समस्या को अन्य नामों से भी जाना जाता है, जो कुछ इस प्रकार से हैं:

लिओमयोमस (Leiomyomas)
मयोमस (Myomas)
गर्भाशय मायोमा
फिब्रोमस (Fibromas)

रसौली की समस्या गर्भाशय के कैंसर के जोखिम से जुडा हुआ नही है और कभी कैंसर में विकसित भी नही होता है। गर्भाशय फाइब्रॉएड आकार में एक छोटे बीज (जो मानव आंखों से आसानी से नहीं देखा जा सकता) से लेकर काफी बड़ा ट्यूमर हो सकता है जो कि गर्भाशय को विकृत और बड़ा कर सकता है। संख्या में फाइब्रॉएड एकल या कई हो सकते हैं। गंभीर मामलों में, यह विस्तार करके पसलियों तक पहुँच जाते हैं और शरीर के वजन को बढ़ने का कारण बनते हैं। रसौली की समस्या कई महिलाओं को होती है लेकिन कोई लक्षण न प्रकट होने के कारण इसका पता नहीं चल पता। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर एक श्रोणि परीक्षा (pelvic examination) या प्रसवपूर्व अल्ट्रासाउंड (prenatal ultrasound) के माध्यम से इस समस्या का पता लागतें हैं।

यह लेख रसौली होने के कारण, लक्षण, तथा इसके इलाज पर प्रकाश डालता है।

रसौली होने के कारण

रसौली होने के कारण अभी भी अस्पष्ट है लेकिन अनुसंधान तथा नैदानिक अनुभव निम्नलिखित कारको को दर्शाते हैं:

हार्मोन

एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन, ये दो हार्मोन अंडाशय द्वारा उत्पन्न होती हैं। ये दोनों हार्मोन गर्भशय के स्तर को पुन: उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा गर्भावस्था की तैयारी में हर महीने मासिक धर्म के दौरान गर्भाशय के अस्तर के विकास को सक्रिय तथा उत्तेजित करते हैं और साथ ही फाइब्रॉएड के विकास को उत्तेजित कर सकते हैं।

आनुवंशिक परिवर्तन


आनुवंशिक परिवर्तन रसौली के कारण का एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है। गर्भाशय फाइब्रॉएड में कुछ गुणसूत्र असामान्यताएं (chromosomal abnormalities) होती हैं जो सामान्य गर्भाशय की मांसपेशियों की कोशिकाओं से अलग होते हैं।

पारिवारिक इतिहास


यदि परिवार में माँ, बहन, या दादी में से किसी को रसौली की समस्या हो चुकी है तो इसके होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स (ईसीएम)


ईसीएम एक प्रकार का ऐसा पदार्थ है जो कोशिकाओं को आपस में चिपका के रखती है। अगर इसके उत्पादन में बढ़ोतरी होती है तो यह फाइब्रॉएड के निर्माण तथा वृध्दि का कारण बनता है।

रसौली के लक्षण

रसौली के लक्षण ट्यूमर की संख्या, उनके स्थान, तथा उनके आकार पर निर्भर करता है। रसौली के बहुत से मामलो में लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते जिसके कारण डॉक्टरों को इसकी खोज करने में परेशानी होती है। जिन महिलाओं में लक्षण होते हैं, उन्हे निम्लिखित लक्षण हो सकते हैं:

सामान्य से अधिक मात्रा में मासिक धर्म में रक्तस्राव
एक सप्ताह से अधिक मासिक धर्म होना
मासिक धर्म ऐंठन में वृद्धि
संभोग के दौरान दर्द
लगातार पेशाब आना
श्रोणि या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
कब्ज़
पेट की सूजन या इज़ाफ़ा
मूत्राशय को खाली करने में कठिनाई

रसौली होने के कारण

रसौली का इलाज: डॉक्टर से परामर्श कब लें?

रसौली का इलाज सही समय पर कराना चाहिए अन्यथा यह समस्या कुछ गर्भावस्था जटिलताओं का खतरा भी बढ़ा सकता है, जैसे कि अपरा विघटन (placental abruption), भ्रूण की वृद्धि में प्रतिबंध, और अपरिपक्व अथवा समय से पूर्व (preterm) डिलीवरी। इसके लिए उपरोक्त लक्षणों के उजागर होने पर डॉक्टर से बिना किसी देरी के तुरंत संपर्क करना चाहिए।

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