on April 25, 2020

ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound) मतलब ‘ योनि के माध्यम से आंतरिक स्कैन’ ।यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण परीक्षण होता है जिसमें महिला के प्रजनन अंगों जैसे अंडाशय, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब आदि का योनि (वैजाइना ) के रास्ते बहुत ही स्पष्ट रूप से देखा जाता है। अल्ट्रासाउंड एक उपकरण है जो हमारे शरीर के अंदरूनी जीवों की लाइव छवियां बनाने के लिए सोनार तकनीक का उपयोग करता है। महिलाओं में किए जाने वाला अल्ट्रासाउंड टेस्ट अधिकतर 2 तरीके के होते हैं।

• पहला ट्रान्सएब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड (ट. ऐ. स)- जिसमें हम महिला के पेट के ऊपर से अल्ट्रासाउंड प्रोब को रख कर अंदरूनी अंगों का विश्लेषण करते हैं। पेट के ऊपर से स्कैन करते समय महिला का मूत्राशय पूरा भरा हुआ होना जिससे कई महिलाओं को असहज महसूस होती है।

• दूसरा ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड यानी(टीवीएस)- इसमे महिला के योनि केअल्ट्रासाऊंड अंदर प्रोब ले जाकर गर्भाशय और दूसरे पेल्विक अंगों की ज्यादा संवेदनशील तरीके से जांच की जाती है।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड अधिक आरामदायक होता है क्योंकि इस प्रक्रिया के लिए मूत्राशय का भरा होना जरुरी नहीं ।ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड में ज्यादा साफ छवि भी मिलती है।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड करने की प्रक्रिया-

डॉक्टर महिला को पीठ के बल लेटाती है और अल्ट्रासाउंड प्रोग के ऊपर कंडोम चढ़ाकर,उस पर जेली लगाई जाती है फ़िर योनि के अंदर 2 से
3 इंच तक लेकर जाकर स्कैनिंग की जाती है। ऐसा करने से महिला को किसी भी तरह का दर्द नही होता है। इस पूरे प्रक्रिया में करीब 15 से 20
मिनट लगते हैं।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड करने के आठ कारण-

किन-किन परिस्थितियों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड करने से लाभ होता है।

1- निसंतान महिला / फीमेल इनफर्टिलिटी-

भांजपंन से जूझ रही महिलाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसलिए सही समय पे जाँच कराना और भांजपंन के कारण का पता लगाना बहुत ही जरूरी है। इसमे डॉक्टर सबसे पहले किसी भी निसंतान महिला को अपना ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड कराने को कहते हैं क्योंकि ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड निसंतान के परीक्षण और उसके निदान में भी उपयोगी होता है-

• ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड से गर्भाशय में किसी गांठ, रसौली ,फाइब्रॉइड और सूजन (एडिनोमायोसिस) की कंडीशन का पता चल सकता है।
• बच्चेदानी में किसी तरह के आनुवंशिक विकार को देख जाता है।
• बच्चेदानी की अंदर की परत जिसे एंडोमेट्रियम कहते हैं उसे नापा जाता है क्योंकि यह परत अगर कमजोर या बहुत पतली है तो भांजपंन की दिक्कत हो सकती है।
• टीवीएस द्वारा महिला के दोनों फैलोपियन ट्यूब खुली है या बंद ,इसका भी पता लगाया जाता हैं। इस महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया को ‘सोनोसलपिंगोग्राफी’ कहते हैं।
• अगर महिला के फैलोपियन ट्यूब में पानी भरा हुआ है,जिसे ‘हाइड्रोसेल्पिंग’ कहते हैं तो भी मा बनाने में दिक्कत होती है। इसका पता भी ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड द्वारा लगाया जा सकता है।
• टीवीएस से महिला के अंडाशय में अंडों की संख्या का पता करते हैं।
• अंडाशय में किसी तरह की गांठ ,सिस्ट, इंडोमेट्रियोमा का पता लगा सकते है।
• पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम जैसे समस्या का भी टीवीएस द्वारा पता किया जा सकता है।

महिला में अल्ट्रासाउंड के रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर निसंतान महिला का यातो फर्टिलिटी दवाइयों से इलाज करते है या सर्जरी द्वारा या फिर उसे कृत्रिम गर्भधारण जैसे कि आईयूआई(IUI) या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया (IVF) की जरूरत पड़ती है।

2- कृत्रिम गर्भधारण( IUI/IVF)

कृत्रिम गर्भधारण और ट्यूब बेबी प्रक्रिया में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड के बहुत सारे लाभ हैं।
• सबसे पहले जब महिला को उसके अंडे बढ़ाने की दवा दी जाती है तो ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड द्वारा के अंडों का विकास का विश्लेषण किया जाता है मतलब महिला के ओवरी में कितनी संख्या और साइज में अंडे बड़े हो रहे। इस प्रक्रिया को ‘फॉलिक्यूलर मोनिटरिंग’ कहते है ।
• जब महिला के ओवरी में अंडो का पूरी तरह से निर्माण हो जाता है,तो ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड द्वारा एक लंबी सुई की मदद से उन सारे अंडो को महिला के शरीर से बाहर निकाला जाता है। उन अंडों को शुक्राणु से मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है।
• फिर अल्ट्रासाउंड की निगरानी में ही भ्रूण को वापस महिला के गर्भाशय में प्रत्यर्पित कर दिया जाता है।

इस तरह से टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के हर स्टेप पर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके बिना यह इलाज संभव नहीं।

3- अनियमित माहवारी

किसी भी उम्र की महिला को अगर अनियमित माहवारी की शिकायत है मतलब हर बार उसका पीरियड यातो समय के पहले या बाद में होता है या फिर पीरियड के समय अत्यधिक ब्लीडिंग होती है या बहुत कम ब्लीडिंग होती है तो इन सभी परिस्थियों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड द्वारा कारणों का पता लगाया जाता है।

4- अत्याधिक मोटी महिला की जांच

अगर किसी महिला का वजन बहुत ज्यादा है तो ऐसे में पेट के द्वारा अल्ट्रासाउंड यानी ट्रान्सएब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि पेट के नीचे की चर्बी अल्ट्रासाउंड से निकले ध्वनि तरंगों को ठीक से गर्भाशय तक नहीं पहुंचा पाती। ऐसी स्थिति में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड द्वारा जब हम प्रोब को योनि के रास्ते ले जाते हैं तब गर्भाशय जैसे अंदरूनी अंगो को ज्यादा स्पष्ट तरीके से देख सकते हैं और किसी भी असमानता को पता कर सकते है।

गर्भावस्था में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड –

5- गर्भावस्था का प्रारंभिक चरण –

गर्भावस्था के दौरान मुख्य रूप से ट्रान्सएब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड का उपयोग करते हैं पर ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड की जरूरत विशेष रूप से प्रेगनेंसी के पहली तिमाही में होती है। पहले 10-12 हफ्तों तक बच्चेदानी पेट के निचले हिस्से यानी पैलेस में होती है जिसे ट्रांसएब्डोमिनल अल्ट्रासाऊंड यानी पेट के रास्ते देखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसलिए ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड गर्भाशय के शुरुआती हफ्ते में भ्रूण के विकास को देखने के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसमें अल्ट्रासाउंड प्रोब योनि द्वारा जाता है जो की गर्भाशय के ज्यादा निकट होता है जिससे शिशु की ज्यादा अच्छी और बड़ी छवि स्क्रीन पर दिखती है।

• गर्भावस्था की पुष्टि कर सकते है।
• यह पता कर सकते हैं की गर्भाशय में एक शिशु है या जुड़वां या दो से अधिक यानी मल्टीपल प्रेगनेंसी है। में।
• गर्भावस्था की तिथि का पता लगाने के लिए और शिशु के जन्म की सही नियत तिथि का पता कर सकते है खासकर अगर महिला की माहवारी चक्र अनियमित हो।
• शिशु के दिल की धड़कन है या नहीं इसका पता करते हैं।
• शिशु में किसी तरह की अनुवांशिक विकार का पता कर सकते है।
• यदि मां के पेट के निचले हिस्से में कोई दर्द है या ब्लीडिंग हो रही है तो उसका कारण भी पता किया जा सकता है।कई बार सबकोरियोनिक हीमोरेज यानी सैक के आसपास छोटे क्षेत्र में रक्तस्त्राव होने से गर्भपात हो सकता है।

6- अस्थानिक गर्भावस्था(एक्टोपिक प्रेगनेंसी)-

कई बार गर्भाशय में शिशु ना ठहर कर उसके आसपास के अंगों जैसे कि फेलोपियन ट्यूब , अंडाशय ,सर्विक्स आदि में प्रेगनेंसी लग जाती है। इसे ‘एक्टोपिक प्रेगनेंसी’ कहते हैं। और ऐसी प्रेगनेंसी में कभी भी गर्भपात हो सकता है जिससे मां की जान को भी खतरा होता है।ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड के माध्यम से अस्थानिक गर्भावस्था की आशंका दूर किया जा सकता है।

7- अपरिपक्व प्रसव(प्रीमेच्योर प्रसव)-

अगर महिला को समय से पहले प्रसव होने की शिकायत है तो गर्भावस्था के दौरान टीवीएस द्वारा सर्विस की लंबाई नापते हैं। सर्वाइकल लेंथ बहुत कम होने पे महिला के बच्चेदानी के नीचे के रास्ते को टांका लगा कर मज़बूत किया जाता है।

8- बार बार गर्भपात-

अगर किसी महिला को बार बार गर्भपात होता है तो टीवीएस करके कारणों का पता लगाया जा सकता है जैसे की बच्चेदानी में किसी तरह की आनुवंशिक विकार ,किसी तरह का गांठ या झिल्ली या फिर बच्चेदानी की परत बहुत कमजोर है तो इन सारे ही स्थितियों में गर्भपात हो सकता है।

माँ बनाना किसी भी महिला के लिए बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण है, और माँ और बच्चे दोनों की भलाई के लिए किए गए विभिन्न परीक्षणों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड स्कैन या टीवीएस आज के समय में सबसे विश्वसनीय परीक्षणों में से एक है।
गर्भावस्था के सभी चरणों के दौरान ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड अगर प्रभावशाली डॉक्टर द्वारा कराया जाए तो यह प्रक्रिया एकदम सुरक्षित है और मां या बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है।

उसी तरह से कोई भी महिला अगर अपना ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड किसी प्रभावशाली डॉक्टर से कराती है तो उसकी ज्यादातर समस्या का कारण पता किया जा सकता है। खासकर निसंतान महिलाओं में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड जांच और निदान दोनो के लिए उपयोगी है।ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाऊंड किसी वरदान से कम नही जिसका लाभ उठा कितनी महिलाओं के जीवन में संतान सुख की प्राप्ती हुई है!!!

RELATED VIDEO


You may also link with us on Facebook, Instagram, Twitter, Linkedin, Youtube & Pinterest

Talk to the best team of fertility experts in the country today for all your pregnancy and fertility-related queries.

Call now 18003092323

(Visited 10,573 times, 2 visits today)
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

LATEST BLOG

IVF

Pregnancy Exercise

At Indira IVF, we advocate...
Read More
PCOD

What is PCOD

The full form of PCOD...
Read More
PCOS

PCOS Diet Plan

Most women who have PCOS...
Read More
PCOS

What is PCOS

Experts at Indira IVF know...
Read More
IVF

Foods Increase Sperm Count

Our fertility experts know that...
Read More
IVF

Test Tube Baby And Its Process

There are multiple reasons for...
Read More
IVF

Latest Technology in IVF

Since the first test tube...
Read More
IVF

IVF Failure – What You Need To Know

Today, with numerous technological advancements,...
Read More
IVF

New Fertility Technology and their Benefits

There are many assisted reproductive...
Read More
IVF

Evolution of Fertility Treatments and Development of IVF

Scientists saw a glimmer of...
Read More
IVF

Is there any difference between Test Tube Baby and IVF Process?

In India, about 10-15% of...
Read More
PCOS

PCOS Awareness Month – Everything You Need to Know about PCOS and its Prevention

September 1 denotes the beginning...
Read More
IVF

A Complete IVF Guide: All You Need to Know About IVF

1. When to consult for...
Read More
IVF

Is Covid-19 Vaccination dangerous for pregnant women? Know the Benefits and Risks

What do we know today...
Read More
IVF

The Impact of Covid-19 on Pregnant Women & their Babies

Pregnant women and those in...
Read More
IVF

IVF Treatment in Covid-19 Age: Yes or No?

IVF in Pandemic: Safety Measures...
Read More
IVF

Pregnancy in COVID-19: What are the Risks?

Is the infection more dangerous...
Read More
IVF

Diet Plan for Lactating Mothers: What to eat while breastfeeding?

You know breast milk is...
Read More
IVF

आईवीएफ में जुड़वा बच्चेः आईवीएफ गर्भावस्था और एकाधिक प्रेगनेंसी

सामान्य जुड़वा बच्चे बनाम आईवीएफ...
Read More
IVF

Right Time For IVF: Indications and Contraindications

The IVF procedure can be...
Read More
Request Call Back
IVF
IVF telephone
Book An Appointment