सारांश (Overview)
पांचवां महीना प्रेगनेंसी का वह समय होता है जब आपको पहले की तुलना में थोड़ा हल्का और अच्छा महसूस होने लगता है। इस समय पर मितली कम हो चुकी होती है, भूख अच्छी तरह लगती है, और पेट भी अब साफ दिखने लगता है।
इसी दौरान बच्चे की हलचल पहली बार महसूस हो सकती है, हालांकि हर महिला में इसका समय अलग होता है। इस महीने एनोमली स्कैन भी होता है, जिसमें बच्चे के अंगों और ग्रोथ को करीब से देखा जाता है। 5 month pregnancy की इस गाइड में जानेंगे कि इस दौरान क्या बदलाव आते हैं, क्या खाना चाहिए, कौन टेस्ट जरूरी हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पांचवां महीना करीब 17 से 20 हफ्ते तक चलता है। ACOG के अनुसार, 18वें हफ्ते तक बच्चा आवाजें सुनने लगता है और उसके दिमाग का वह हिस्सा भी विकसित हो जाता है जो शरीर की हरकतों को कंट्रोल करता है। इस दौरान गर्भाशय बढ़कर नाभि के आसपास पहुंच जाता है, इसलिए पेट अब साफ दिखने लगता है। शरीर में खून की मात्रा बढ़ने से कुछ महिलाओं को चक्कर या मसूड़ों से खून आने जैसी शिकायत भी हो सकती है। बच्चे की हलचल भी इसी दौरान महसूस होना शुरू हो सकती है, हालांकि इसका समय हर महिला में अलग होता है।
इस महीने बच्चे की बॉडी तेजी से डेवलप हो रही होती है। 18वें हफ्ते तक उसकी सुनने की क्षमता विकसित होने लगती है और वह बाहर की आवाजों पर प्रतिक्रिया कर सकता है। 19वें हफ्ते तक उसके कान, नाक और होंठ की बनावट ज्यादा साफ होने लगती है। इसी दौरान शरीर पर लैनुगो नाम के महीन बाल आने लगते हैं।
बच्चे की स्किन पर वर्निक्स की एक चिकनी परत भी बनने लगती है, जो उसे एम्नियोटिक फ्लूइड के लगातार संपर्क से बचाने में मदद करती है। यह परत बच्चे की स्किन को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
क्या विकसित होता है | पांचवें महीने में स्थिति |
|---|---|
सुनना | 18 हफ्ते तक आवाज सुनने लगता है |
चेहरा | कान, नाक और होंठ स्कैन में दिखने लगते हैं |
त्वचा | लैनुगो और वर्निक्स की परत बनती है |
लंबाई और वजन | 20 हफ्ते तक 6 इंच से ज्यादा, वजन करीब 320 ग्राम |
हलचल | इसी महीने पहली बार महसूस होना शुरू होती है |
गर्भाशय नाभि तक पहुंचने से पेट साफ दिखने लगता है। त्वचा खिंचने से खुजली हो सकती है और कुछ महिलाओं में स्ट्रेच मार्क्स दिखने लगते हैं।
पहली हलचल तितली जैसी फड़फड़ाहट लगती है। यह 16 से 24 हफ्ते के बीच महसूस होती है, और पहली प्रेगनेंसी में 20 हफ्ते के बाद भी शुरू हो सकती है। अभी इस हलचल का कोई तय पैटर्न नहीं बनता, इसलिए रोज किक्स गिनने की जरूरत नहीं है।
बढ़ते वजन और पोस्चर बदलने से कमर में खिंचाव रहता है। रात में पैरों की ऐंठन और टखनों में हल्की सूजन भी आम है।
मितली कम होने से भूख लौट आती है, पर हार्मोन के असर से पाचन धीमा रहता है, जिससे कब्ज, गैस और सीने में जलन बढ़ जाती है।
इस महीने भूख बढ़ जाती है, इसलिए सिर्फ पेट भरने वाली चीजों की जगह पोषण देने वाली डाइट खाएं। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा और कई बार खाएं, इससे सीने की जलन भी कम रहती है।
पोषक तत्व | क्या खाएं |
|---|---|
प्रोटीन | दालें, अंडा, पनीर, दूध, सोयाबीन |
आयरन | हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, खजूर, चना |
कैल्शियम | दूध, दही, तिल, रागी |
फाइबर | फल, सलाद, साबुत अनाज |
तरल | पानी, नारियल पानी, छाछ, सूप |
आयरन और कैल्शियम की गोलियां डॉक्टर की सलाह से जारी रखें, और दोनों अलग-अलग समय पर लें, क्योंकि कैल्शियम आयरन के अवशोषण में रुकावट डालता है।
यह इस महीने की सबसे अहम जांच है, जो 18 से 21 हफ्ते के बीच की जाती है। इसमें बच्चे के अंगों की बनावट, ग्रोथ, प्लेसेंटा की स्थिति और एम्नियोटिक फ्लूइड की मात्रा देखी जाती है। इस टेस्ट की टाइमलाइन फ़िक्स होती है, इसलिए इसे टालें नहीं।
हर विजिट पर वजन, ब्लड प्रेशर और पेट की माप देखी जाती है। हीमोग्लोबिन दोबारा जांचा जाता है, क्योंकि इस दौर में आयरन की जरूरत तेजी से बढ़ती है, और यूरिन टेस्ट से इंफेक्शन तथा प्रोटीन देखा जाता है।
पांचवां महीना करीब 17 से 20 हफ्ते तक चलता है। इसी दौरान बच्चे की ग्रोथ तेजी से होती है और उसकी हलचल महसूस होना शुरू हो सकती है। इस महीने एनोमली स्कैन भी होता है, जिसमें बच्चे के अंगों और ग्रोथ को देखा जाता है।
डाइट में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर रखें और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लेते रहें। हल्की परेशानी सामान्य हो सकती है, लेकिन ब्लीडिंग, तेज पेट दर्द, अचानक सूजन या बच्चे की हलचल में कमी लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से संपर्क करें।