पहला बच्चा बिना किसी दिक्कत के हो गया, लेकिन अब दूसरे बच्चे के लिए कोशिश कर रहे हैं और प्रेगनेंसी नहीं हो रही। यह सिचुएशन बहुत से कपल्स केसाथ होती है। इसे Secondary infertility कहते हैं और यह प्राइमरी इनफर्टिलिटी जितनी ही कॉमन है।
दोबारा कंसीव करने में दिक्कत आने के कारणों में उम्र का बढ़ना, लाइफस्टाइल में बदलाव, पिछली डिलीवरी से जुड़ी कम्प्लेक्सिटी , या नई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकते हैं। आर्टिकल Secondary infertility in Hindi के माध्यम से हम समझेंगे कि दोबारा कंसीव करने में दिक्कत क्यों आती है, इसकी जांच और सही ट्रीटमेंट क्या है। आगे यह भी जानेंगे कि क्या सही जांच और सही इलाज से आप दोबारा माँ बन सकती हैं या नहीं?
Secondary infertility तब कही जाती है जब कपल को पहले प्रेगनेंसी हो चुकी हो, चाहे लाइव बर्थ हुई हो या मिसकैरेज (miscarriage), लेकिन अब दोबारा कंसीव करने में दिक्कत आ रही हो। एक साल या ज़्यादा कोशिश के बावजूद प्रेगनेंसी न हो तो डॉक्टर इसे secondary infertility मानते हैं।
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर पहली बार प्रेगनेंसी हो गई थी तो दोबारा भी आसानी से हो जाएगी। लेकिन समय जे साथ शरीर और कंडीशन बदल जाती हैं, और शरीर प्रेगनेंसी के अनुकूल नहीं रहता जिसके कारण सेंकडरी इनफर्टिलिटी हो सकती है। वैसे secondary infertility उतनी ही कॉमन है जितनी प्राइमरी इनफर्टिलिटी।
Primary infertility में पहले कभी कोई प्रेगनेंसी नहीं हुई होती, जबकि secondary infertility में पहले कम से कम एक बार प्रेगनेंसी हो चुकी होती है।
कारण दोनों में मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन secondary infertility में उम्र का फैक्टर अक्सर ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। पहले बच्चे के बाद कुछ साल गुज़र जाते हैं और इस बीच उम्र बढ़ने से फर्टिलिटी कम हो सकती है। पिछली डिलीवरी या सर्जरी से भी कुछ बदलाव आ सकते हैं।
Secondary infertility के कारण कई हो सकते हैं और अक्सर एक नहीं, बल्कि कई फैक्टर मिलकर असर डालते हैं।
अगर पहला बच्चा 28 साल में हुआ और अब 34 या 35 में दूसरे की कोशिश हो रही है, तो इन 6 से 7 सालों में एग की क्वालिटी और संख्या काफ़ी कम हो चुकी होती है। पुरुषों में भी उम्र के साथ स्पर्म क्वालिटी में कमी आती है, हालांकि यह प्रोसेस धीमा होता है।
ओव्यूलेशन (ovulation) में बदलाव भी हो सकता है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जो पहले कंट्रोल में था, अब वज़न बढ़ने या लाइफस्टाइल बदलने से बिगड़ सकता है। थाइरॉइड की गड़बड़ी भी प्रेगनेंसी के बाद शुरू हो सकती है।
पहली डिलीवरी सीज़ेरियन (cesarean) हुई हो तो यूट्रस में स्कार टिश्यू बन सकता है जो दोबारा इम्प्लांटेशन (implantation) में मुश्किल पैदा कर सकता है। इसी तरह पिछली प्रेगनेंसी में अगर कोई इन्फेक्शन हुआ हो तो फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज आ सकती है।
एंडोमेट्रियोसिस जो समय के साथ बढ़ सकती है, फाइब्रॉइड (fibroid) जो नए बन सकते हैं, या वज़न में बड़ा बदलाव भी secondary infertility की वजह हो सकती है।
ब्रेस्टफीडिंग भी अक्सर एक कारण होता है। जब महिला स्तनपान करा रही होती है, तो प्रोलैक्टिन (prolactin) हॉर्मोन बढ़ जाता है जो ओव्यूलेशन को दबाता है। कुछ महिलाओं में स्तनपान के दौरान या बंद करने के तुरंत बाद सालों तक पीरियड्स नहीं आते।
दूसरे बच्चे और पहले बच्चे के बीच की अवधि भी अहम होती है। अगर बहुत कम समय का गैप हो, तो महिला के शरीर को पूरी तरह रिकवर करने का समय नहीं मिलता और वह दोबारा प्रेगनेंसी के लिए शारीरिक रूप से तैयार नहीं होती।
पुरुष पार्टनर में स्पर्म की क्वालिटी कम होना, वैरिकोसील (varicocele), या नई दवाइयां शुरू होना भी कारण हो सकता है।
अगर आपकी आयु 35 वर्ष से कम उम्र है और आप प्रेगनेंसी के लिए 1 साल कोशिश कर रही हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिये।
35 से ज़्यादा उम्र में 6 महीने के प्रयास के बाद ही डॉक्टर से मिल लेना चाहिए। अगर पीरियड्स अनियमित हों, बहुत हैवी ब्लीडिंग हो, या पिछली प्रेगनेंसी में कोई कॉम्प्लिकेशन रहा हो, और आप दूसरी संतान चाहते हैं तो बिना इंतज़ार किये डॉक्टर से मिल लें।
एक ग़लती जो बहुत से कपल्स करते हैं वो यह है कि वो सोचते हैं पहले तो हो गया था, अब भी हो जाएगा, बस थोड़ा और इंतज़ार करें। इस इंतज़ार में कई बार कीमती समय निकल जाता है। इसीलिए पहली संतान होने के पर्याप्त समय बाद आप दूसरी संतान के लिए ज्यादा समय इंतज़ार न करें।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी की जांच primary infertility जैसी ही होती है, लेकिन डॉक्टर पिछली प्रेगनेंसी और डिलीवरी की विस्तार में हिस्ट्री भी लेते हैं।
महिला के लिए हॉर्मोन प्रोफाइल (FSH, LH, AMH, थाइरॉइड), TVS अल्ट्रासाउंड, और HSG टेस्ट होता है। सीज़ेरियन के बाद यूट्रस में स्कार या निश (niche) चेक करने के लिए अल्ट्रासाउंड या हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy) ज़रूरी हो सकती है।
पुरुष पार्टनर का सीमेन एनालिसिस (semen analysis) भी दोबारा करवाना ज़रूरी होता है, भले ही पहली प्रेगनेंसी के समय सब ठीक था। क्योंकि स्पर्म क्वालिटी समय के साथ बदल सकती है।
सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का ट्रीटमेंट उसके कारण पर निर्भर करता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे primary infertility में होता है।
Secondary infertility में IVF खासतौर से कारगर होता है। अगर स्कार, ट्यूब ब्लॉकेज, या कम एग क्वालिटी हो तो IVF से एम्ब्रीओ (embryo) को यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है।
Frozen embryo transfer (FET) भी विकल्प है, जिसमें पहले से फ्रीज़ किये हुए एम्ब्रीओ को यूट्रस में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
Secondary infertility बहुत कॉमन है और इसमें दोष किसी का नहीं है। पहले बच्चे के बाद शरीर, उम्र, और हालात बदलते हैं जो दोबारा कंसीव करना मुश्किल बना सकते हैं।
सही जांच से कारण पता चलता है और दवाओं, सर्जरी, IUI, या IVF से ज़्यादातर महिलाओं में दोबारा प्रेगनेंसी संभव हो जाती है। कुछ ऐसे कारण होते हैं, जिन्हें आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके सही कर सकती हैं। सबसे ज़रूरी बात है कि इंतज़ार में समय बर्बाद न करें और समय पर डॉक्टर से मिलें।